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Thursday, May 17, 2018

शौभाग्य योजना बन रही दुर्भाग्य योजना, हरिजन बस्ती कैथा में सालों से टूटे खम्भे और कटी केबल आज तक नही हुए दुरुस्त, बिजली आपूर्ति पूरी तरह से बाधित (मामला ज़िले के कटरा डीसी अंतर्गत आने वाले कैथा ग्राम की पुरानी हरिजन बस्ती का जहां घर घर बिजली पहुचाने के लिए किये गई शौभाग्य योजना के सर्वे बाद सब ठंडे बस्ते में)

दिनांक 17 मई 2018, स्थान - गढ़, गगेव रीवा मप्र,

(कैथा, शिवानन्द द्विवेदी, रीवा-मप्र)

        देश भर में शौभाग्य योजनान्तर्गत चल रहे काम में तेजी नही दिख रही है. हो क्या रहा है की मात्र शौभाग्य योजना के नाम पर एक घर में निवासरत चार भाईयों के नाम पर अवैध रूप से बिजली के कनेक्शन जरूर बनाये जा रहे हैं. यह कहां का नियम है की एक घर जिसमे बड़े मुश्किल से चार गरीब परिवार मात्र एक कटिया लगाकर बिजली जला रहे हों उनके नाम पर अलग अलग बिजली के कनेक्शन बना दिए जाएं और उसे शौभाग्य योजना का कनेक्शन बता दिया जाय. कैथा ग्राम में ही शौभाग्य योजना के सर्वे के दौरान यज्ञनारायण केवट के घर में पहले से ही उनके पिता रामेश्वर केवट और यज्ञनारायण केवट के नाम पर घर का कनेक्शन था. अब हुआ यह की जब शौभाग्य योजना के सर्वेयर आये तो यज्ञनारायण केवट के बड़े लड़के अमित केवट के नाम पर भी कनेक्शन कर दिया गया जबकि यह बताया गया की अमित यहाँ पर नही रहता है बाहर रहता है और अभी सभी एकसाथ एक ही घर में रह रहे हैं जिनका एक घर का बिजली कनेक्शन पहले से ही है.

   कैथा हरिजन बस्ती में भी नही किया बिजली सप्लाई

   यही हाल कैथा की हरिजन बस्ती का भी है जहां पिछले साल भर से दो बिजली के खम्भे टूटे हैं साथ ही केबल भी टूटी हुई है. इस बाबत कई बार कंप्लेन भी दर्ज करवायी जा चुकी है लेकिन अब तक कैथा की पुरानी हरिजन बस्ती में राजीव गांधी विद्युतीकरण मिशन योजना के अंतर्गत लगाए गए ट्रांसफार्मर से बिजली सप्लाई नही दी गई है.

   इस मामले को लेकर हरिजन बस्ती कैथा के बिहारीलाल साकेत, द्वारिका साकेत, उग्रसेन साकेत, छठिलाल साकेत, बुद्धसेन साकेत, रामखेलावन साकेत, इंद्रलाल साकेत, नंदलाल साकेत और सुखलाल साकेत आदि का कहना था की हमने कई मर्तबा सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायतें करवायी हैं लेकिन कुछ नही हुआ मात्र फ़र्ज़ी निराकरण दिया जा रहा है. सभी हरिजन परिवार 500 मीटर दूर सोरहवा ग्राम से कटिया लगाकर बिजली जलाने का कभी कभी प्रयास करते हैं लेकिन सोरहवा के कनेक्शन धारी लोग ऐसा नही करने देते क्योंकि सोरहवा के लाइन में इसकी वजह से कई बार फाल्ट लगता रहता है. 

  शौभाग्य योजना का ट्रांसफार्मर लगाने और खम्भा गाड़ने का काम पड़ा अधूरा 

   कैथा में हरिजन बस्ती और केवट बस्ती के बीच में गरीब हितग्राहियों के लिए बिजली पहुचाने के उद्देश्य से एक अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाने का भी कार्य किया जाना था. सर्वे के दौरान यह पाया गया था की इस इलाके में बिजली4 किमी दूर लगे ट्रांसफार्मर से होकर आती है जिससे लगभग हर दूसरे दिन फाल्ट की वजह के लाइन सप्लाई वाधित होती है साथ ही जहां से बिजली सप्लाई हो रही है वहां पर सौ मीटर से कटिया फसाकर बिजली आ रही है जिसके लिए एक अलग से ट्रांसफार्मर लगाने और आवश्यक खम्भे गाड़ने के लिए सर्वे किया गया था लेकिन यह काम आज तक प्रारम्भ नही हुआ है जिससे हरिजन, केवट और अन्य नजदीकी बस्ती के लोगों में काफी आक्रोश है की मात्र बिजली बिल तो मनमुताबिक दिए जा रहे हैं लेकिन घर घर लाइन कनेक्शन नही दिया जा रहा है. सभी ने कहा की ट्रांसफार्मर लगाया जाकर घरों के पास खम्भे गाड़े जाकर ही बिजली कनेक्शन दिया जाना चाहिए न की कटिया द्वारा. सभी का कहना था की उनके घरों में मीटर तक कभी नही लगाया गया जिससे उनके घरों में औसत बिजली बिलिंग की जा रही है. सभी का कहना था कि वह गरीब परिवार 500 से अधिक का बिजली बिल देने के लिए बाध्य हैं जबकि साल भर से कोई भी तरीके की बिजली नही जली है। सबका कहना था की हमने कई बार अपने अपने घरों में मीटर लगाकर ही बिजली बिल भरे जाने की बात कटरा जेई और त्योंथर डीई के समक्ष रखी है लेकिन कोई सुनवाई नही हो रही है.

संलग्न - हरिजन बस्ती कैथा, ब्लॉक गगेव, ज़िला रीवा मप्र में टूटे पड़े खम्भे और उनके पास खड़े हरिजन गरीब हितग्राही.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र, 

मोबाइल - 97869992139, 09589152587

Saturday, April 21, 2018

14 हज़ार लाओ, ट्रांसफार्मर लगवाओ (त्योंथर डी ई और कटरा डीसी में दलाली का दौर जारी, किसानों को 6 माह से किया जा रहा परेशान, जबकि गांव का बिल 75 प्रतिशत से अधिक पूर्ण, मामला कटरा डीसी का)

दिनाँक 21 अप्रैल 2018, स्थान - कटरा डीसी रीवा मप्र

(कैथा, रीवा मप्र - शिवानन्द द्विवेदी)

    ज़िले के विद्युत वितरण केंद्रों में जले हुए ट्रांसफार्मर को बदल कर नए ट्रासंफार्मर लगाए जाने के नाम पर दलाली का दौर जारी है. पुख्ता जानकारी के अनुसार कटरा विद्युत वितरण केंद्र में आज से 6 माह पूर्व अमिलिया ग्राम के दोनो ट्रांसफार्मर जल गए थे. कारण था - कभी भी लाइन मेंटेनेंस का काम का न होना. हाई टेंशन लाइन में फाल्ट और साथ ही एल टी लाइन में भी लगातार लगने वाले फाल्ट की वजह से आज आये दिन नए नए ट्रांसफार्मर जल जाया करते हैं और बिजली विभाग की नजरअंदाजी और उपेक्षा की वजह से करोड़ों की चपत सरकारी ख़ज़ाने में लग रही है.         आखिर रोज़ इतने ट्रांसफार्मर क्यों जल रहे हैं इसके पीछे क्या कारण हैं? ट्रांसफार्मर बदलने में फिर देरी क्यों हो रही है? क्यों आम जनता को अनायास ही परेशान किया जा रहा है जबकि देखा जाए तो औसत और मनमुताबिक बिलिंग का काम लगातार जारी है उसमे कोई सुधार नही हो रहा है. इन सब बातों को लेकर बिजली कंपनी पहले से ही कठघरे में खड़ी है.

राजीव गांधी योजना का ट्रासंफार्मर लगाने के बाद भी नही किया चालू

    वहीं अमिलिया तालाब के पूर्व एवं उत्तर के कोने में मंदिर के पास गरीबों और बीपीएल हितग्राहियों के लिए एक योजना विशेष के अंतर्गत लगाया गया राजीव गांधी विद्युतीकरण मिशन का ट्रांसफार्मर ठेकेदार ने चालू ही नही किया. बताया गया की ठेकेदार सामग्री और चिमनी का तेल आदि लेकर ही भाग गया. ग्रामीणों ने सीएम हेल्पलाइन और थाने में भी रिपोर्ट दर्ज कराई लेकिन कोई सुनवाई नही हुई.

    अमिलिया के उपभोक्ताओं में वैद्यनाथ पटेल ने बताया की मिशन अंतर्गत लगाया  गया ट्रासंफार्मर यदि चालू हो जाता तो गांव के बिजली का काफी हद तक लोड भी नियंत्रित हो जाता जिससे रोज रोज़ ट्रांसफार्मर जलने का टंटा भी टूट जाता. कौसल पटेल द्वारा बताया गया की यद्यपि राजीव गांधी विद्युतीकरण मिशन योजना का ट्रांसफार्मर आज से कई माह पूर्व लगाया गया है और आज तक लाइन सप्लाई नही दी गई है फिर भी मनमुताबिक और औसत बिलिंग भेजी जा रही है. गरीबों को 5 सौ से ऊपर के बिजली बिल भेजे जा रहे हैं जबकि न तो कोई मीटर रीडिंग लेने आता और न ही यह पता करने की कहाँ बिजली चालू है और कहां बन्द. शैलेन्द्र पटेल द्वारा बताया गया की बिजली कंपनी पूरी तरह दलाली और शोषण पर आमादा है. सभी ने के स्वर में बताया की मुख्यमंत्री गरीबों और किसानों के लिए बड़ी बड़ी योजनाओं की बातें कर रहे हैं पर जमीनी हकीकत कुछ और ही है. सभी ने राजीव गांधी विद्युतीकरण मिशन अंतर्गत लगाए गए ट्रांसफार्मर को चालू किये जाने की भी बात कही है और बताया है की यदि उनकी बिजली समस्याओं का समाधान समय पर नही हुआ तो सभी ग्रामीण आंदोलन करेंगे जिसकी जिम्मेदार यह शासन प्रशासन होगा.

  6 माह पहले जला ट्रांसफार्मर, नया लगाने के लिए दिया गया 14 हज़ार रुपये का घूस

    त्योंथर डी ई एवं कटरा विद्युत वितरण केंद्र अंतर्गत आने वाले अमिलिया ग्राम के दोनो ट्रांसफार्मर आज से 6 माह पहले जल गए थे. किसानों ने जब गुहार लगाई तो बताया गया की आपके गांव के ट्रांसफार्मर इसलिए नही लगाए जा रहे क्योंकि आपके बिजली बिल बकाया हैं. परंतु गांव वालों ने जल्दी ही बकाया का 40 प्रतिशत से अधिक की बिजली बिल जमा कर दिया और त्योंथर डी ई और कटरा जे ई को नया ट्रांसफार्मर लगाने की गुहार लगाई. तब फिर गांव वालों को बताया गया की 14 हज़ार लाइये तो नया ट्रांसफार्मर लगेगा, इस प्रकार सभी उपभोक्ताओं ने चंदा करके 14 हज़ार इकठ्ठा किया और जब इंजीनियर को दिया तब जाकर एक ट्रांसफार्मर लगा. 

   दूसरे ट्रांसफार्मर के लिए अभी भी माग रहे अतिरिक्त 5 हज़ार रुपये

    ग्राम अमिलिया के ही नियमित बिजली उपभोक्ता और कृषि कार्य हेतु मोटर पंप का कनेक्शन लिए हुए  हितग्राहियों में वैद्यनाथ पटेल पिता राम स्वयंबर पटेल अमिलिया 

आई वी आर एस नंबर -5347051658220,  कौसल पटेल पिता राजधर पटेल अमिलिया,  रामराज पटेल पिता राम पियारे पटेल अमिलिया,  शैलेंद्र पटेल पिता राजेश पटेल अमिलिया,  बृजनंदन पटेल पिता अम्बिका पटेल अमिलिया,  लल्लू पटेल पिता रामसखा पटेल अमिलिया आदि उपभोक्ताओं ने बताया की उन्होंने 6 माह पहले जले ट्रांसफार्मर को बदलने के लिए काफी प्रयाश किये लेकिन बताया गया की अलग से पैसे लगेंगे तभी ट्रांसफार्मर लग पायेगा. अभी बताया गया की जे ई और डी ई ने जमुई सरपंच राहुल पटेल की उपस्थिति में 5 हज़ार अतिरिक्त की माग की है तभी ट्रांसफार्मर लगेगा. इस बाबत सभी ग्रामवशियों ने इकठ्ठा होकर सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के समक्ष अपनी पीड़ा व्यथा बताई और अमिलिया हायर सेकेंडरी स्कूल परिषर में ट्रांसफार्मर के पास अपना वक्तव्य और साक्षात्कार भी दिया है. जिसमे सभी ने 14 हज़ार और 5 हज़ार दलाली के तौर पर लिए जाने वाले राशि को एकमत से स्वीकारा है और साथ ही अपने ट्रांसफार्मर को लगाए जाने की माग की है. लोगों ने बताया कि उनके घूस में लिए गए पैसे की वापसी होनी चाहिए साथ ही बिजली न उपयोग किये जाने के कारण 6 माह से लगातार दिया जा रहा अवैधानिक बिल भी काटा जाना चाहिए।

   आज इस सूखा अकाल में किसान पहले से ही मारा गया है और ऐसे में यदि सरकारी विभागों द्वारा इस प्रकार उन्हें टार्चर और शोषण किया जाएगा तो किसान का त्रस्त होकर और अधिक मरना और अतमहत्या करना तय है और तब सरकारें इस बात को गंभीरता से नही देखेंगी आखिर क्या वजहें थीं की किसान आत्महत्या कर रहे हैं. अब प्रश्न यह उठता है की ग्रामीण इलाकों में सरकारी नियमानुसार पूरे गांव के बकाया का 20 प्रतिशत और उपोभोक्ताओं की संख्या का 50 प्रतिशत में से दोनो में से कोई भी कंडीशन की पूर्ति होने पर आज तत्काल 24 घंटे में नया ट्रांसफार्मर लगाए जाने का प्रावधान है तो जब सभी कंडीशन पूर्ण हो रही हैं तो आखिर यह बिजली कंपनी क्यों मनमानी करने में तुला है ? आखिर बिजली कंपनी को सरकार के फरमान के अनुरूप काम करने में क्या आपत्ति है? आखिर किसान और परेशान जनता बिजली कंपनी के अधिकारियों को क्यों अलग के घोंस दें? जो बिजली अधिकारी यह घूंस की मांग कर रहे हैं और पूरा गांव इस बात को एक स्वर में बोल रहा है तो इनके ऊपर लोकायुक्त और ई ओ डब्लू द्वारा प्रकरण दर्ज कर कार्यवाही क्यों न की जाए?

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   जब इस विषय मे जिम्मेदारों से बात की गयी तो उनका यह कहना था

 1) "कटरा डीसी में कुछ ट्रांसफॉर्मर जले थे जिनमें एक को बदल दिया गया है। हमारी त्योंथर डी ई से बात हुई है। ट्रांसफार्मर एक दो दिन में आ जाएंगे तो जल्दी ही बदल दिए जाएंगे। 14 हज़ार लेकर ट्रांसफॉर्मर बदले जाने की जानकारी हमे नही है। राजीव गांधी विद्युतीकरण मिशन योजना अन्तर्गत ट्रांसफार्मर के विषय मे जानकारी हमे नही थी। पर आपने बताया है तो हम बजाज कंपनी का काम देखने वाले एरिया इंजीनियर अनिल द्विवेदी से कहकर जल्द ही सुधार कार्य करवा देंगे।" - अभिषेक सोनी, कनिष्ठ यंत्री पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण केंद्र कटरा, रीवा मप्र।

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2) "अभी तक यह बात हमारे संज्ञान में नही थी कि अमिलिया ग्राम का ट्रांसफॉर्मर जला हुआ है। लेकिन आपने बताया है तो हम जे ई कटरा से जायज़ा लेकर जल्द ही बदलवाने का प्रयास करेंगे। हम इसको जल्द ही दिखवाते हैं।" - त्योंथर डी ई श्री पटेल

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   संलग्न - ज़िले के कटरा डीसी और त्योंथर डी ई अंतर्गत आने वाले अमिलिया ग्राम के त्रस्त और परेशान किसान और उनके परिवार जो की 6 माह से जले पड़े ट्रांसफार्मर के पास खड़े हुए हैं और साथ ही पास स्थित एक वृहद तालाब और उसके पास अमिलिया हायर सेकेंडरी स्कूल.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र

  मोबाइल  - 7869992139, 9589152587

Wednesday, September 21, 2016

(Rewa, MP) जिला रीवा के कटरा डी.सी में बदहाल बिजली व्यवस्था, लाइन मेंटेनेंस और केबलीकरण की पूरी राशि भ्रष्ट्राचार की बलि चढ़ी.





स्थान – कैथा, गढ़ (रीवा, म.प्र.), दिनांक: 20.09.2016, दिन मंगलवार,

त्योंथर डी.ई. अंतर्गत कटरा विद्युत् वितरण केंद्र में गढ़ फीडर की बदहाल स्थिति. लाइनमैन राजकुमार मिश्रा और प्रभाकर सिंह मात्र तनख्वाह उठाते हैं. कनिष्ठ यंत्री सोनी अपनी रीवा की सुनार वाली दुकान में बैठते हैं. बिजली 24 घंटे में बमुश्किल से 6 घंटे. 

 (कैथा-गढ़, रीवा) कटरा विद्युत् वितरण केंद्र अंतर्गत आने वाले गढ़ फीडर में बिजली सप्लाई की स्थिति दयनीय बनी हुई है. यहाँ लगभग 150 किमी दूरी में एकमात्र फ़ीडर होने से कहीं भी फाल्ट की स्थिति में 24 घंटे में दर्जनों बार लाइन सप्लाई अवरुद्ध करनी पड़ती है और कई बार तो मनमाना भी लाइन कटौती मेंटेनेंस के नाम पर कर लेते हैं. यहाँ पर सीएम हेल्पलाइन और सामान्य शिकायतों का कोई प्रभाव नहीं होता.

दर्जनों सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों का गलत और भ्रामक निराकरण –
गढ़ फीडर से दी जाने वाली अगडाल-कैथा लाइन के विषय में कई बार सीएम हेल्पलाइन में भी प्रकरण रखा गया परन्तु कोई सही निराकरण नहीं दिया जाता. मोबाइल फ़ोन आदि से दिए जाने वाले संदेशों का कोई प्रभाव नहीं होता. लाइनमैन का सीधा जबाब रहता है की मैं कुछ नहीं करूँगा जे.ई. से बात कर लो. और जे.ई. सोनी को तो कभी फ़ोन ही नहीं लगता. यही हाल ए.ई. और डी.ई. का भी है. अब जनता बिजली की समस्या की शिकायत आखिर किससे करे? कई बार तो समस्या से अधीक्षण यंत्री वर्मा को भी अवगत कराया गया परन्तु वहां से भी कोई विशेष समाधान नहीं निकला.

कटरा वितरण केंद्र में मेंटेनेंस और केबलीकरण की पूरी राशि अधिकारियों और ठेकेदारों द्वारा हज़म –
कम से कम कटरा विद्युत् वितरण केंद्र की स्थिति यह है की यहाँ पर पिछले 20 वर्ष से ऊपर से आज तक कभी भी मेंटेनेंस का काम नहीं हुआ. गढ़ फीडर सहित सम्पूर्ण कटरा वितरण केंद्र में ग्रामीण इलाकों में केबलीकरण का कार्य किया जाता था पर वह भी भ्रष्ट्राचार की बलि चढ़ गया. कागजों में तो केबलीकरण हुआ है परन्तु वास्तविक धरातल पर कहीं कुछ नहीं हुआ.

  सूचना के अधिकार की जानकारी को छुपाने और न देने का प्रयास –
इसके पूर्व जब कटरा डी.सी. में कनिष्ठ यंत्री एस.के. गुप्ता और रीवा संभाग में अधीक्षण यंत्री जैन थे तब सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा सूचना के अधिकार के माध्यम से कटरा डी.सी. में मेंटेनेंस और ठेकेदारों द्वारा कार्य, केबलीकरण, और पिछले 25 वर्ष में जले और बदले गए ट्रांसफार्मर की जानकारी सहित अन्य महत्वपूर्ण और जनहित सम्बन्धी जानकारी चाही गयी थी परन्तु इन उक्त अधिकारियों द्वारा भ्रष्ट्राचार में संलिप्त होने के कारण और राशि का गबन करने के कारण उक्त जानकारी छुपाने का प्रयास किया गया था. तब आवेदक कतिपय कारणों से अपीलिंग प्रक्रिया में नहीं जा पाया था. उक्त जानकारी न देने और छुपाने का तात्पर्य ही था की चूंकि कभी भी मेंटेनेंस और केबलीकरण का कार्य कटरा डी.सी. में नहीं हुआ था और पूरी राशि का गबन ठेकेदारों की मिली भगत से कर लिया गया था तो यह जानकारी कैसे साझा की जा सकती थी? 

गरीब जनता से मनमाने बिलिंग – यहाँ की गरीब जनता और यहाँ तक की जो बीपीएल और अति गरीबी में शामिल हैं उनके हजारों के बिल आते हैं. सोरहवा ग्राम के राम नरेश पटेल, कशी पटेल, ब्रिजवासी पटेल, हरिबंस पटेल, सुरेश पटेल, राज बहोर पटेल, कैथा से भद्रिका प्रसाद द्विवेदी, भैयालाल द्विवेदी, बनस्पति द्विवेदी, भैयालाल पाण्डेय, रावेन्द्र केवट, सतानंद केवट, सोमधर मिश्रा, अम्बिका प्रसाद मिश्रा, और इसी प्रकार पडुआ, मिसिरा, इटहा, अमिलिया, बडोखर, हिनौती आदि कई ग्रामों में उपभोक्ताओं से बिना मीटर रीडिंग के मनमाने तरीके से बिलिंग ली जाती है. उक्त सभी उपभोक्ताओं की मीटर रीडिंग 150 और उससे ऊपर बताई जाती है है जबकि सभी बमुश्किल दो या तीन LED अथवा CFL बल्ब जला पाते हैं. साथ ही कभी भी गढ़ फीडर और अगडाल-कैथा की लाइन कुल छः घंटे से अधिक नहीं दी जाती है. कई बार गरीब लोग अपने बिजली के बिल लेकर सामाजिक कार्यकताओं के पास आते हैं परन्तु इतनी शिकायतों और न्यायालयीन प्रकरणों के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती. बिजली विभाग का कहना होता है की चोरी के कारण पेनाल्टी और उच्च बिलिंग होती है. परन्तु कई गरीब परिवार मात्र एक या  दो एलईडी अथवा सीएफएल बल्ब जलाते हैं. यही हाल सामान्य उपभोक्ताओं का भी है. उनकी भी मनमाने और औसत बिलिंग की जाती है जिसकी कहीं कोई सुनवाई नहीं है. बिजली विभाग का स्वयं का न्यायलय होने से वहां भी बिजली विभाग के कर्मचारी अधिकारी जो लिख कर देते हैं जज भी उसी को मानता है. त्योंथर के बिजली न्यायलय में कई ऐसे प्रकरण हुए हैं जिनमे उपभोक्ता से मनमाने पैसे और पेनाल्टी ले ली गयी और उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई ऐसे में सामान्य उपभोक्ताओं को चोरी करने पर मजबूर होना पड़ता है और इस न्यायालयीन प्रक्रिया से विश्वास भी उठ जाता है. कई उपभोक्ता लाइनमैन को कुछ ले दे कर औसत बिलिंग को ठीक करवा लेते हैं. उनको लगता है की ऊपर चिल्लाने और हल्लागुल्ला से तो बेहतर है की लाइनमैन को ही ले दे कर मामला सलटा लो जिससे लाइनमैन ज्यादा रीडिंग ही न भेजे. जनता चोरी नहीं करती बल्कि उसे चोरी करने के लिए इन कर्मचारियों द्वारा मजबूर होना पड़ता है.

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शिवानन्द द्विवेदी
(सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता)
ग्राम कैथा, पोस्ट अमिलिया, थाना गढ़,
जिला रीवा  (म.प्र.) पिन ४८६११७

मोबाइल नंबर – 07869992139