Tuesday, April 10, 2018

शिक्षा के मंदिर में हादसों का भय, पानी के मानवाधिकार की जद्दोजहद में शिक्षा का अधिकार पड़ा बौना ( मामला सिरमौर तहसील अंतर्गत पनगड़ी एवं पताई पंचायत में शासकीय माध्यमिक शाला का, साल भर से बन्द पड़ा है नलकूप जबकि खुली हाई टेंशन लाइन दे रही मौत को आमंत्रण)

दिनांक 11 अप्रैल 2018, स्थान - भठवा/गढ़ रीवा मप्र

(कैथा, रीवा मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

    राइट टू एजुकेशन अर्थात शिक्षा का अधिकार अधिनियम तो प्रारम्भ हो गया लेकिन विद्यार्थी इस शिक्षा के अधिकार का कितना लाभ ले पा रहे हैं इसका पता किसी भी ग्रामीण स्तर पर संचालित स्कूल में जाकर देखा जा सकता है.

   ग्रामीण स्तर पर संचालित सरकारी स्कूलों में न कोई सुविधा होती है और न ही शिक्षा का कोई स्तर. ग्रामीण सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र बमुश्किल प्रमाण पत्र तो ले लेते हैं पर इसके अतिरिक्त कुछ सीख नही पाते. 100 में से कुछ दो चार विरले ही ऐसे छात्र होंगे जिन्हें उनके क्लास के स्तर का कुछ विशेष  ज्ञान हो. आज शिक्षा की दुर्दशा हो चुकी है. जिस प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों की शासकीय विद्यालयों की शिक्षा बद से बदतर होती जा रही है भविष्य में युवाओं का नाकाम होकर बेरोजगार घूमना लगभग तय है. 

   ग्रामीण क्षेत्र की शासकीय स्कूलों में ज्यादातर ऐसे विद्यार्थी होते हैं जो गरीब परिवार से आते हैं जैसे किसान अथवा मजदूर वर्ग. ऐसे छात्रों के लिए किसी अच्छी स्कूल में और खासकर प्राइवेट अंग्रेज़ी माध्यमों की स्कूलों में शिक्षा प्राप्त कर पाना एक सपना ही होता है. विरले ही गरीब छात्र होते हैं जो अच्छी शिक्षा दीक्षा प्राप्त कर पाते हैं.

कैसे पढ़ेंगे जब स्कूल के समय भरेंगे पानी  - पनगड़ी शासकीय स्कूल में साल भर से बन्द पड़ा है नलकूप

   शिक्षा की बात चल रही थी तो ग्रामीण स्तर पर इसको भी बता दिया जाए की मूलभूत फैसिलिटी की कमी के चलते भी शिक्षक और छात्र ज्यादातर उनकी पूर्ति करने में परेशान रहते हैं तो ऐसे में छात्र कब पढ़ पायेगा और शिक्षक कब पढ़ा पाएंगे.

    सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी सहित पत्रकार प्रमोद सिंह और पनगड़ी निवासी सोनू सुक्ला द्वारा विजिट के दौरान स्कूल में उपस्थित प्रधानाध्यापक और शिक्षकों और छात्रों से संपर्क किया गया तो जो जानकारी प्राप्त हुई वह किसी भी ग्रामीण स्तर में संचालित शासकीय शिक्षा केंद्रों की स्थिति को भलीभांति बया करती है. बताया गया की स्कूल परिसर में जो नलकूप पंचायत विभाग अथवा पी एक ई द्वारा लगाया गया था वह काम लायक नही बचा है, उसकी सभी पाइप काम लायक नही बची है. बताया गया की यहीं 500 मीटर की दूरी पर स्थित किसी ग्रामवासी के व्यक्तिगत बोरवेल से छात्र पानी भरकर लाते हैं. पूरा समय मात्र पानी भरने में ही व्यतीत हो जाया करता है. ऐसे में छात्र क्या पढ़ पाएँगे. प्रधानाध्यापक द्वारा आगे बताया गया की हमने इसकी शिकायत कई बार की है लेकिन न तो लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सुध ले रहा है और  न ही पंचायत विभाग लिहाज़ा हमारे स्कूल में मध्यान भोजन से लेकर बर्तन धोने तक सभी में तकलीफ होती है. कभी कभी इसी कारण मध्यान भोजन भी नही बन पाता है.

 पानी की समस्या तो है ही यहां बीच प्राँगण में लगा दिया ट्रांसफार्मर भी, किसी भी वक्त हो सकता है कोई भीषण हादसा 

  पानी की समस्या तो अपने स्थान पर है ही साथ ही स्कूल के बाहर बाउंड्री के बीचोंबीच एक ट्रांसफार्मर भी लगा हुआ है जो एकदम खुले में है. अमूमन यदि किसी कारण बस ट्रांसफार्मर लगाया हुआ है तो भी ट्रांसफार्मर को चारों तरफ से बन्द किया जा सकता है और एंगल गाड़कर तार की जाली लगायी जानी चाहिए जिससे प्राइमरी कक्षा के छोटे बच्चे खेलते समय सीधे ट्रांसफार्मर और खुले तारों के संपर्क में न आ पाएं लेकिन इसकी किसी को फिकर ही नही. न इस संबंध में स्कूल प्रबंधन ने ही कुछ किया और न ही पंचायत अथवा बिजली विभाग ने. आलम यह है की हर ग्राम की स्कूलों में इसी प्रकार या की बिजली के खुले तार झूल रहे हैं अथवा ट्रांसफार्मर लगा दिया गया है. सब की नीद तब खुलेगी जब कोई भीषण हदशा हो जाएगा और कोई बच्चा फसकर झुलस जाएगा.

  ज़िले की सभी सकूलों का सर्वे किया जाकर अभियान चलाकर खुले बिजली के तार खंभे और ट्रांसफार्मर स्कूल परिसर से तत्काल हटाये जाने चाहिए

    जब इस संदर्भ में ग्रामीण लोगों और बच्चों के अभिभावकों सहित शिक्षकों समाजसेवियों से चर्चा की गई तो सभी का एक स्वर में कहना था की मात्र पनगड़ी स्कूल ही नही बल्कि जिले की सभी स्कूलों में अभियान चलाकर स्कूल परिसर के अंदर से बिजली सप्लाई को हटाया जाना चाहिए. बिजली के खंभे और खुले बिजली के तार स्कूल परिसर के अंदर रखे जाने का कोई औचित्य ही नही है. स्कूल परिसर में बच्चे मध्याह्न छुट्टी होने पर खेलते कूदते रहते हैं तो स्वाभाविक तौर पर खुले तारों और ट्रांसफार्मर के संपर्क में आ सकते हैं ऐसे में किसी भी समय कोई भी दुखद हादसा हो सकता है.

  लालगांव विद्युत वितरण केंद्र के अतरैला शासकीय स्कूल में भी खतरे के निशान के ऊपर है हाई टेंशन लाइन के खुले तार

   भठवा निवासी और पत्रकारिता के साथ जुड़े प्रमोद सिंह ने बताया की उन्होंने ग्रामीण जनों के सहयोग के साथ पिछले कई वर्षों से उनके क्षेत्र अतरैला में शासकीय स्कूल परिसर में हाई टेंशन लाइन के खुले झूलते तारों को हटाने के लिए जद्दोजहद की है लेकिन अब तक उसका कोई स्थायी समाधान नही निकल पाया है. जब इस संबंध में कटरा विद्युत केंद्र के कनिष्ठ यंत्री अभिषेक सोनी से बात की गई तो उनका यह कहना था की हमारे पास कोई विशेष प्रावधान नही होता जिससे इन तारों को पोल सहित शिफ्ट किया जा सके. उन्होंने आगे बताया की स्कूल शिक्षा विभाग और संबंधित स्कूल प्रसाशन से लिखित तौर पर विद्युत विभाग के नाम पत्र जारी कर हमारे पास पहुचाया जाना चाहिए. आगे की प्रक्रिया में विद्युत विभाग लाइन शिफ्टिंग के लिए जरूरी खर्च का एस्टीमेट बनाकर संबंधित स्कूल प्रसाशन को भेज देता है और आगे स्कूल प्रसाशन जब रमसा के माध्यम से वह राशि विजली विभाग के खाते में ट्रांसफर कर देगा तो हम अपने कर्मचारी भेज कर लाइन शिफ्टिंग करवा देते हैं. कटरा जे ई सोनी ने बताया की इसके पहले जब वह गोविंदगढ़ क्षेत्र में पदस्थ थे तब भी इस प्रकार के कई घटनाक्रम आये थे जिनमे स्कूल शिक्षा विभाग के फण्ड से स्कूलों के अंदर से लाइन शिफ्टिंग की गई थी. इसके अतिरिक्त कोई अन्य प्रक्रिया नही है जिससे इस लाइन को स्कूल परिसर के बाहर शिफ्ट किया जाय.

    उक्त प्रक्रिया को फॉलो भी किया गया और प्रमोद सिंह द्वारा अतरैला स्कूल के प्रधानाध्यापक से कहकर लाइन शिफ्टिंग के बाबत आवेदन लालगांव कनिष्ठ यंत्री को भेजा जा चुका है. अब देखना यह होगा इस पूरी प्रक्रिया में कितना समय लगता है. क्योंकि यदि सही समय पर कार्य नही हुआ तो किसी भी समय कोई भी हादसा हो सकता है. इस बीच अतरैला स्कूल के प्रधानाध्यापक द्वारा बताया गया की स्कूल परिसर स्थित झूलते हाई टेंशन लाइन के तारों की वजह से कई बार हादसे हो चुके हैं जिससे आग का लुकाड़ा जमीन पर स्पार्किंग की वजह के गिरा था लेकिन शौभाग्य से बच्चे लाइन के नीचे नही थे अतः कोई अप्रिय दुर्घटना नही हुई है. नवीन स्कूल भवन हाई टेंशन लाइन के बिल्कुल 2 फ़ीट ऊंचाई से गया है जिससे यदि कोई बच्चा कभी धोखे से छत पर चढ़ जाता है तो उसकी जान जा सकती है. इस पर प्रधानाध्यापक का कहना था की उन्होंने बच्चों को शख्त हिदायत दे रखी है की कोई भी छात्र भूलकर भी नवीन स्कूल भवन की छत पर न जाए.

संलग्न - सिरमौर तहसील एवं गंगेव जनपद अंतर्गत पनगड़ी पंचायत की पनगड़ी स्कूल एवं पताई पंचायत अंतर्गत अतरैला स्कूल परिसर में खतरनाक स्तर पर हाई टेंशन लाइन के तार और ट्रांसफॉमर, साथ ही पनगड़ी स्कूल में सालों से बन्द पड़ा नलकूप.

-------------

शिवानन्द द्विवेदी सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र.

मोबाइल - 07869992139, 09589152587

करहिया स्कूल के झूलते बिजली के तार दे रहे दर्दनाक हदशा को आमंत्रण (मामला ज़िले के कटरा विद्युत वितरण केंद्र अंतर्गत आने वाले करहिया शासकीय स्कूल का)

दिनांक 10 अप्रैल 2018, स्थान - कटरा रीवा मप्र 

(कैथा, रीवा मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

   बिजली विभाग की लापरवाही की वजह से पूरे ज़िले में बिजली के झूलते तारों और अनियंत्रित लाइन की वजह से रोज हो रहे आगजनी के हादसों में कोई कमी नही दिख रही है. अभी पिछले दिनों जब कटरा विद्युत वितरण केंद्र अंतर्गत आने वाले डाढ़ पंचायत के करहिया ग्राम में वहां के निवासी सुरेंद्र मिश्रा के ट्रेक्टर सहित पूरी फसल में इसी बिजली के अनियंत्रित और झूलते हुए तारों में स्पार्किंग की वजह के आग लगी थी तो वहां कटरा विद्युत वितरण केंद्र के कनिष्ठ यंत्री दूसरे दिन घटनास्थल पर जांच करने पहुचे थे. जांच के दौरान कनिष्ठ यंत्री अभिषेक सोनी को वह सभी कुछ दिखाया गया जिसकी वजह से किसी भी समय खतरनाक हादसा हो सकता है. इसी बीच जब करहिया स्कूल में देखा गया तो पाया गया की स्कूल की बाउंड्री वाल के भीतर खींची गई बिजली की लाइन में कोई केबलीकरण का कार्य नही किया गया है और बिजली के तार ग्राउंड लेवल सके मात्र 8 से 10 फ़ीट की ऊंचाई पर थे. साथ ही ट्रांसफार्मर के पास से जो लाइन सप्लाई स्कूल के लिए ली गई थी उसमे कोई अतिरिक्त खम्भा नही लगाया गया था, मात्र डीपी से ही तार खींचकर सीधे सप्लाई दे दी गई थी. यह लाइन सप्लाई पूरे चार फेज में थी जिसमे हवा की वजह के स्पार्किंग और फाल्ट आम बात है. इस समस्या के बारे में भी संबंधित कटरा जे ई अभिषेक सोनी को अवगत कराया गया और तत्काल लाइन को स्कूल परिषर के भीतर से हटाने की माग की गई. इस बीच उपस्थित ग्रामीणों में सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी, सुरेंद्र मिश्रा, मनबहादुर सिंह, राजा तिवारी, ज्ञानदत्त दुबे, कुछ बढई समूह के लोग, लाइनमैन सुधाकर मिश्रा सहित अन्य लोग मौजूद थे.

संलग्न - संलग्न फोटोग्राफ में शासकीय करहिया स्कूल परिसर के भीतर खतरनाक स्तर में झूलते बिजली के तार जिनके कारण कभी भी कोई भी हदशा हो सकता है. साथ ही कटरा विद्युत वितरण केंद्र के कनिष्ठ यंत्री अभिषेक सोनी और अन्य लोग.

-------------

शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र, 

मोबाइल - 7869992139, 9589152587

Sunday, April 8, 2018

बिजली कंपनी की आग ने खाक कर दिया किसान की खड़ी फसल (मामला गंगेव ब्लॉक रीवा के पनगड़ी खुर्द पंचायत अंतर्गत कमलेश्वर प्रसाद त्रिपाठी की डेढ़ एकड़ की फसल और कृषि उपकरणों का)

दिनाँक 09 अप्रैल 2018, स्थान - लालगांव, रीवा मप्र

(कैथा, रीवा मप्र, शिवानन्द द्विवेदी) 

   बिजली कंपनी की लापरवाही और गैर जिम्मेदाराना रवैय्या एक बार फिर उजागर हुआ है. मामला है ज़िले के गंगेव ब्लॉक अंतर्गत पनगड़ी खुर्द पंचायत का जहां पर कमलेश्वर प्रसाद त्रिपाठी की डेढ़ एकड़ फसल में बिजली के झूलते हुए तारों में स्पार्किंग की वजह के आग लग गई और देखते ही देखते डेढ़ एकड़ की फसल सहित लाखों का घरेलू समान और कृषि उपकरण जिसमे 700 फ़ीट पाइप भी समिल्लित है खाक हो गई. गनीमत यह थी की हो-हल्ला के बाद पूरा हुजूम इकट्ठा हुआ और गांव वालों ने मिलकर मोटर पंप चालू करके पानी की बौछार किये जिससे कुछ हद तक आग में नियंत्रण हो पाया. बताया गया की पूरे गांव में हाई टेंशन लाइन और साथ ही घरेलू लाइन खतरे के निशान के ऊपर हैं और कभी भी मेंटेनेंस का काम नही होने से तार झूल गए हैं और आपस में टच होकर स्पार्क करते रहते हैं जिससे आये दिन इस प्रकार की आगजनी की वारदाते देखी गई हैं. चूंकि गर्मी के मौसम में गर्मी की वजह से आग का ज्यादा प्रकोप बढ़ जाता है इसलिए नुकसानी के तौर पर देखा जाय तो सबसे अधिक समस्या मात्र गर्मियों में ही होती है. ऐसा नही की दूसरे समय आग नही लगती, बल्कि आग लगती रहती है परंतु फसल की वजह से नुकसानी गर्मियों में ज्यादा होती है. 

बिजली विभाग में मेंटेनेंस न हो पाने से झूलते और टूटे तारों की वजह से होती है आगजनी की बारदतें, जिम्मेदारी बिजली कंपनी की अतः भरपाई भी वही करें

 अभी हाल ही में पिछले दिनों कटरा विद्युत वितरण केंद्र अंतर्गत डाढ़ पंचायत निवासी सुरेंद्र मिश्रा के फसल से लदे हुए ट्रेक्टर एवं गढ़ फीडर अंतर्गत अकलसी तालाब के नीचे हाई टेंशन लाइन में स्पार्किंग की वजह से आज लग गई थी जिसमे दोनो ही जगहों में गरीब किसानों का भारी नुकसान हुआ है. अब यह पनगड़ी खुर्द का एक और नया मामला आ गया जिसमे किसान कमलेश्वर प्रसाद त्रिपाठी की डेढ़ एकड़ के आसपास फसल सहित लाखों का कृषि उपकरण जलकर खाक हो गया. 

    पनगड़ी पंचायत के उप सरपंच शिवेंद्रमणि शुक्ला द्वारा जानकारी दी गई की पीड़ित किसान ने लालगांव विद्युत वितरण केंद्र एवं थाने में जानकारी दे दी है और साथ ही बिजली विभाग को भी पार्टी बनाकर क्लेम की माग की है. अभी जांच चल रही है और आगे की मुआबजा संबंधी प्रक्रिया प्रगति पर है.

पुलिश और फायर ब्रिगेड पहुचा घटना के बाद , समस्या की गंभीरता को देखते हुए गर्मी के चार महीनों में हर पंचायत स्तर पर होने चाहिए अग्निशमन वाहन

   जैसा की ज्यादातर मामलों में होता आया है की भीषण आगजनी की घटनाओं में ग्रामीण स्तर में अग्निशमन विभाग समय पर नही पहुच पाता है इसका कारण पहले भी बताया गया है की मात्र आसपास बैकुंठपुर, मऊगंज, एवं मनगवां में काफ़ी दूर अग्निशमन की गाड़ियां होने से कम से कम 1 से 3 अथवा अधिक तक का समय लग जाता है और इतने समय में सब कुछ साफ हो जाता है. इसलिए आज यह अति आवश्यक है की सभी थानों और चौकियों में अग्निशमन यंत्रों से सुसज्जित अग्निशमन वाहन अनिवार्य होना चाहिए जिससे इस प्रकार की आपदा में और विशेष तौर पर गर्मियों में आपदा प्रबंधन के काम में तेजी आ सके. कहना यहां तक पड़ेगा की प्रत्येक पंचायत में गर्मियों के विशेष सीजन में आग से बचने के विशेष उपाय किये जाने चाहिए जिसके लिए शासन स्तर से बजट का प्रावधान होना चाहिए. मार्च से जून महीने तक चार महीने पकी हुई फसल का सीजन होता है और इसी मौसम में सबसे ज्यादा आगजनी की वारदातें रिपोर्ट की जाती हैं अतः सरकार को चाहिए की गर्मियों में हर पंचायत स्तर पर आगजनी से निपटने के विशेष प्रावधान किये जाएं. अग्निशमन संबंधी वाहनों को किराए से लेकर हर चार से पांच पंचायत के मध्य गर्मियों के चार महीनों के लिए स्थापित किये जाने चाहिए और इस प्रकार की विशेष परिस्थितयों में तत्काल सहायता उपलब्ध करवाई जानी चाहिए.

   पुलिस के विषय में बताया गया की डायल 100 में कॉल किया गया था और पुलिश भी घटनास्थल पर काफी दर से पहुची थी. इतने में उपस्थित ग्रामीणों ने मोटर पंप आदि के माध्यम से आग पर नियंत्रण पाने और फैलने से रोकने में सफलता पाई थी. फिर भी आनन फानन में हवा की वजह से आग लगभग डेढ़ एकड़ के खेत में फैल गई और सब कुछ देखते ही  देखते साफ हो गया.

संलग्न - पनगड़ी किसान कमलेश्वर प्रसाद त्रिपाठी की आग से ध्वस्त फसल का फ़ोटो.

----------

शिवानन्द द्विवेदी सामाजिक मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र,

मोबाइल - 7869992139, 9589152587

हिनौती पशु औषधालय निर्माण में देरी, 5.6 लाख रुपये आये थे बजट (मामला गंगेव ब्लॉक अंतर्गत हिनौती ग्राम पंचायत के चियार ग्राम का)


दिनांक 09 अप्रैल 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र 

(कैथा, रीवा मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

    फसल कटाई के साथ ही एक बार फिर पशुओं की पीड़ा को भुला दिया जाएगा. अभी भी ज़िले में बनाये गए कई अवैध बाड़ों में गोवंश अपने जीवन की गुहार लगा रहे हैं. परंतु सरकार एवं प्रशासन के लिए यह कोई विशेष बात नही है और रोज की आई गई बात हो गई है.

    पिछले दिनों हिनौती पंचायत जनपद पंचायत गंगेव के पास स्थित चियार ग्राम से गुजरा गया तो पाया गया की वहां पर निर्माणाधीन पशु चिकित्सालय में काम बंद पड़ा हुआ है. जब पास जाकर देखा गया तो पता चला की नवीन निर्माणाधीन पशु औषधालय के पीछे एक पुराना खंडहरनुमा ढांचा भी है जो संभवतः पुराना पशु औषधालय भवन था. 

    साथ में गोंदरी 27 निवासी सामाजिक कार्यकर्ता अनिल उपकारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी ने जाकर नवीन निर्माणाधीन औषधालय की बाहरी स्थिति का जायज़ा लिया और उसकी कुछ तस्वीरें अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर ली. 

हिनौती पशु औषधालय निर्माण का बजट है 5.6 लाख रुपये

   हिनौती पशु औषधालय के बजट के विषय में और साथ ही इस शासकीय भवन के निर्माण के विषय में कोई जानकारी वहां नोटिस बोर्ड में उपलब्ध नही मिली. जबकि अमूमन चाहिए यह की किसी भी प्रकार के शासकीय भवन के निर्माण संबंधी बजट, भवन सिविल इंजीनियरिंग और प्रकार आदि की जानकारी सामने एक नोटिस बोर्ड में चस्पा कर दी जानी चाहिए. यह वास्तव में देखा जाए तो आम जान मानस को सूचना के अधिकार के अंतर्गत बिना आवेदन लगाए ही मुफ्त में और जरूरी सूचनाओं की श्रेणी में आता है. 

   जब हिनौती पशु औषधालय के विषय में जानकारी चाही गई तो जिम्मेदारों का यह कहना था 

  1) "पशु औषधालय का निर्माण कार्य किया जा रहा है. यह पूरी तरह से ठेका पद्धति में होता है. यह सीधे ठेकेदार और वेटरनरी अधिकारी गंगेव के बीच में रहता है साथ ही लोक यांत्रिकी विभाग से संबंध है. आपको इस विषय में ज्यादा जानकारी गंगेव के पशु चिकित्सा अधिकारी से ही मिल पाएगी." - विवेक मिश्रा, सहायक पशु चिकित्सा सर्जन, गढ़ पशु चिकित्सा कार्यालय. मोब - 9425569495

----------------------------------

 2) "हिनौती में बनने वाले पशु औषधालय में कुल 5 लाख 60 हजार का बजट ठेकेदार द्वारा बताया गया है जिसका की काम चल रहा है और समय समय पर हमने हिनौती में कार्यरत साहू को बोला है की काम देखते रहें. अभी ठेकेदार ने बात की थी तो हमने कहा है की जल्दी काम समाप्त करके हमारे विभाग को सौंप दें. कुछ पैसा बचा हुआ है जिसमे हमने कहा है की एक शौचालय आउर एक भवन की बाउंड्री वाल बना दें. काम जल्दी सम्पन्न होगा और हमारे विभाग के साहू ही काम देखेंगे. वैसे वहां पर वेटेरिनरी सर्जन बैठना चाहिए लेकिन यह हमारे बस की बात नही मात्र शासन स्तर से ही संभव है. और शासन का यह हाल है की हम कुछ भी नही कह सकते. हमारे गंगेव ब्लॉक में 30 असिस्टेन्ट वेटेरिनरी फील्ड ऑफिसर होना चाहिए परंतु यहां मात्र तीन ए वी एफ ओ हैं जिनमे मनगवां, लाल गांव, और एक अन्य स्थान पर पदस्थ हैं. हम किसी प्रकार से काम चला रहे हैं." - एस के पांडेय, वेटेरिनरी ऑफिसर, गंगेव ब्लॉक रीवा, मप्र. 

---------------------------------

3) "देखिए हम भी यहां से गुजरते रहते हैं और हमने पिछले कुछ एक वर्ष से यहां पर इस निर्माणाधीन भवन को देखा है और हमे भी जानकारी नही थी की यह किस विभाग का भवन है पर आपने बताया तो जानकारी प्राप्त हुई है. हमारी जनता की तरफ से शासन प्रसाशन से यही माग है की जिज़ प्रकार गोवंशों के साथ आज अत्याचार हो रहा है उसको बन्द किया जाए, गांव गांव में गोशाला स्थापित कर पंचायतों को सहयोग करना चाहिए. जो यह पशु औषधालय बन रहा है इसका भरपूर उपयोग होना चाहिए, पशुओं के प्रति आम जनमानस में जन जागरूकता बढ़ाई जानी चाहिए. 5 लाख 60 हज़ार का बजट काफी होता है अतः भवन निर्माण में ठेकेदार मनमानी न कर पाए विभाग को देखना चाहिए" - अनिल उपकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, निवासी गोंदरी पंचायत गंगेव ब्लॉक रीवा मप्र. मोब 9009213370

-------------------------------------

संलग्न - गंगेव ब्लॉक अंतर्गत हिनौती पंचायत के चियार ग्राम में निर्माणाधीन पशु औषधालय की फ़ोटो.

-----------------

शिवानन्द द्विवेदी सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र, मोब 07869992139, 9589152587.

रीवा विद्युत विभाग की धांधली - न कोई मेंटेनेंस न कोई केबलीकरण, हर स्थान पर बिजली के तार खतरे के निशान में, अगडाल/गढ़ फीडर अंतर्गत अकलसी में भी हाई टेंशन लाइन के झूलते हुए तारों से किसान की फसल में लगी आग, सब जलकर खाक


दिनाँक 08 अप्रैल 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र 

(कैथा, शिवानंद द्विवेदी)

    ज़िले में बिजली विभाग की लापरवाही और भष्ट्रचार के चलते बिजली के तारों से आगजनी की वारदाते रुकने का नाम नही ले रही हैं. अभी पिछले दिनों अकलसी ग्राम में अकलसी तालाब के पश्चिम दिशा में भूतपूर्व सरपंच मिथिला प्रसाद पटेल के घर की तरफ जाने वाले रास्ते के पास स्थित खेत में स्पार्किंग और झूलते हुए तारों की वजह सेके आग लग गई थी जिसमे पूरे खेत भर में लगी फसल आग के हवाले हो गई. किसी प्रकार ग्रामीणों ने बड़े मुश्किल से आग पर काबू पाया नही तो आसपास के खेत भी साफ हो जाते. यह आग पास ही खेत के बीचों बीच स्थित हाई टेंशन लाइन के मात्र 10 फ़ीट से भी काम ऊंचाई पर झूलते हुए तारों से स्पार्किंग और गुल्ल गिरने की वजह सेके लगी थी. इसमे किसी भी किसान का कोई दोष नही था और मात्र बिजली विभाग की लापरवाही और भष्ट्रचार की वजह सेके ऐसे हादसे आये दिन रिपोर्ट किये जा रहे हैं. 

    मेंटेनेंस और केबलीकरण न होने के कारण बनी है समस्याएं 

   यदि गहराई से देखा जाए तो पता चलेगा की यहाँ कटरा विद्युत वितरण केंद्र अंतर्गत आने वआले ज्यादातर ग्रामों में ऑन रिकॉर्ड मेंटेनेंस और केबलीकरण के काम हो चुके हैं परंतु वास्तविक धरातल पर कहीं कोई काम पिछले दशकों से नही हुआ जिसकी वजह के मेंटेनेंस के अभाव में होम लाइन और साथ ही हाई टेंशन लाइन के ज्यादातर खंभे टेढ़े हो गए हैं कहीं जरूरत से ज्यादा झुक गए हैं और इसी प्रकार विद्युत तार भी कमज़ोर होकर खतरे के निशान के बहुत बाहर हो चुकले हैं जिसकी वजह से तार आपस में लड़ते रहते हैं और स्पार्किंग की वजह से आग लगने के चान्सेस बढ़ जाते हैं. दूसरे मौसम में भी आग लगती रहती है परंतु नुकसानी सबसे ज्यादा फसली सीजन में ही होती है जिसमे किसानों की पकी फसल देखते देखते स्वाहा हो जाती है. 

    अभी दिनाँक 06 अप्रैल की शाम 7 बजे के आसपास इसी प्रकार की एक घटना में त्योंथर ब्लॉक एवं डाढ़ पंचायत के सरपंच पुत्र सुरेंद्र मिश्रा की ट्रेक्टर से लदी हुई गेंहूँ की फसल में आग लगने से पूरी फसल सहित ट्रेक्टर भी जल गया था.

    मेंटेनेंस एवं केबलीकरण का मुद्दा इसके पहले भी कई मर्तबा उठाया जा चुका है लेकिन कटरा विद्युत वितरण केंद्र सहित पूरे रीवा के बिजली विभाग के कानों में जूं तक नही रेंग रही है जिसका खामियाजा आम नागरिक और किसान उठा रहे हैं और बिजली की आग से अपनी खड़ी फसल खाक होतई देख रहे हैं. 

  यदि यही सिलसिला चलता रहा तो आने वाले कुछ सप्ताह में ऐसे कई बारदतें और भी सामने आ सकती हैं. बिजली विभाग को मेंटेनेंस की राशि का सही और समुचित उपयोग कर हर ग्राम क्षेत्र में बिजली के तारों और खंभों को दुरुस्त किया जाना चाहिए और साथ ही केबलीकरण के नाम पर जो धांधली विद्युत वितरण कंपनी और साथ ही ठेकेदारों द्वारा की गई है उसकी सही जांच कर पूरी रिकवरी होनी चाहिए.

संलग्न - कटरा विद्युत वितरण केंद्र अंतर्गत अगडाल/गढ़ फीडर में आने वाले अकलसी ग्राम के किसान के खेत में हाई टेंशन लाइन की वजह से लगी आग का दृश्य.

----------

शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र.

मोब 07869992139

Saturday, April 7, 2018

डाढ़ सरपंच पुत्र सुरेंद्र मिश्रा की फसल से लदे ट्रेक्टर में लगी आग, सब जलकर हुआ खाक

दिनांक 07 अप्रैल 2018, स्थान - डाढ़ पंचायत, त्योंथर ब्लॉक रीवा मप्र 

(कैथा, शिवानंद द्विवेदी)

    गर्मी बढ़ने के साथ ही जिले में आगजनी की बारदातें भी बढ़ने लगी है. ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली आगजनी की वारदातों में सबसे ज्यादा नुकसान किसान वर्ग को हो रहा है. इस भीषण अकाल में जैसे तैसे मर मर कर किसानों ने अपने खून से सींचकर फसलें तैयार की हुई हैं अब उसमे भी कटाई के वक्त और उनकी खलिहान में पड़ी फसलों को अग्नि देवता समाप्त कर रहे हैं. आगजनी की वारदातें मात्र फसल तक ही सीमित नही रही हैं अभी तो पिछले कई दिनों से जंगली क्षेत्र में भी आग ने काफी तबाही मचाई हुई है जिसमे पूरे रीवा संभाग के सिरमौर, सेमरिया, डभौरा, मोहनिया घाटी एवं छुहिया घाटी के जंगली क्षेत्रों को बहुत अधिक नुकसान हुआ है. वन्यजीवों के जीवन को संकट उत्पन्न हुआ और साथ ही अति दुर्लभ जड़ी बूटियां सब नष्ट हो गईं.

डाढ़ सरपंच पुत्र सुरेंद्र मिश्रा का ट्रेक्टर फसल सहित हुआ आग के हवाले 

   अभी दिनाँक 06 अप्रैल की शाम को करीब 7 बजे के आसपास डाढ़ पंचायत निवासी सरपंच पुत्र सुरेंद्र मिश्रा के फसल से लदे ट्रेक्टर में बिजली विभाग के झूलते हुए तारों की वजह से आग लग गई जिसमे फसल सहित पूरा ट्रेक्टर जलकर राख हो गया.

     वाकया शाम करीब 6 से 7 बजे के आसपास का है जब सुरेंद्र मिश्रा का ड्राइवर ज्ञानदत्त के घर के पास करहिया ग्राम की पीसीसी सड़क से होते हुए काटी हुई गेंहूँ की फसल लादकर ले जा रहा था तभी अनियंत्रित और खतरे के निसान में झूलते बिजली के तारों की वजह से स्पार्क हुआ और ट्राली के ऊपरी हिस्से में आग पकड़ लिया और देखते ही देखते मात्र 2 से 4 मिनट में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया. गनीमत यह थी की ड्राइवर की समझदारी यहां पर काम आ गई और ड्राइवर ने तत्काल ट्रेक्टर को भगाते हुए रिहायसी क्षेत्र से 200 मीटर दूर करहिया शासकीय माध्यमिक शाला के शामने पड़े खाली स्थान पर जलते हुए ट्रेक्टर और फसल को लाकर खड़ा कर दिया और जान बचाकर भाग खड़ा हुआ. 

    वहीं पर पुष्पराज तिवारी निवासी डाढ़ की किराने की भी दुकान भी और पूर्व  दिशा में करहिया ग्राम का लगा हुआ ट्रांसफार्मर भी था. इन सबके वावजूद भी काफी हद तक आग पर नियंत्रण पाने का प्रयाश किया गया. 

सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा गढ़ थाना, डायल 100, 108, 101 सहित रीवा कंट्रोल रूम को जानकारी प्रेषित की गई 

  इस बीच जैसे ही आग की लपटें अपने खतरनाक स्तर से ऊपर उठना प्रारम्भ हुईं तो करहिया निवासी मनबहादुर सिंह, कैथा निवासी प्रभुनाथ केवट एवं सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी सहित घटनास्थल पर पहुचा गया और लोगों से अपील की गई की वह जलते हुए ट्रेक्टर के ज्यादा पास ना जाएं और साथ ही दूर से बाल्टी डिब्बे में पानी लेकर उसमे डाला जाय जिससे आग पर नियंत्रण हो सके. 

      इस बीच पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी बनाकर यूट्यूब चैनल पर डाल दिया गया है जिसे देखा जा सकता है. इसी बीच गढ़ थाना टी आई को भी संपर्क करने का प्रयाश हुआ साथ ही गढ़ थाना के सहायक उपनिरीक्षक सत्यभान सिंह को भी घटना की जानकारी देते हुए पुलिश और साथ ही फायर ब्रिगेड की सहायता चाही गई. डायल 100 सहित 108 और 101 नंबर में भी कॉल करके सभी को वारदात के विषय में सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा सूचित किया गया और तत्काल पुलिश और फायर ब्रिगेड की माग की गई.

 ग्रामीणों द्वारा आग पर नियंत्रण पाने का किया गया प्रयास, पुलिश और फायर ब्रिगेड पहुची घटना के बाद 

    जैसा की ज्यादातर आगजनी के मामलों में देखा गया है की ग्रामीण क्षेत्रों में फायर ब्रिगेड कभी भी समय पर उपस्थित नही हो पाती है उसका कारण यह भी है की फायर ब्रिगेड के दमकल गाड़ियां आसपास कहीं हैं ही नही. बैकण्ठपुर, मऊगंज, और मनगवां के पहले कहीं भी दमकल की गाड़ियां नही हैं इसलिए आपातकालीन स्थिति में कोई संभावना शेष नही बचती. साथ ही पुलिश भी ऐसे मामलों में आकर कुछ विशेष नही कर सकती. क्योंकि दमकल के बिना कोई मतलब नही रहता. फिर भी ग्राम करहिया के रहवाशियों ने काफी तत्परता से प्रयाश किये और सभी अपने अपने घरों से डिब्बे बाल्टी लेकर आये और जिससे जितना बन पड़ा सभी ने दो चार दस बाल्टी पानी अवश्य डाला. इस प्रकार जाकर तेज हवाओं के वावजूद भी आग ज्यादा नही फैल पाई और आग को शांत करने में कामयाब रहे. 

  ट्रेक्टर पूरी तरह से जलकर हुआ खाक - 

    लदी हुई फसल के साथ ट्रेक्टर भी जल गया. चूंकि आग की लपटें काफी तेज थीं अतः ड्राइवर को हिम्मत नही हुई की वह ट्रेक्टर के इंजन वाले भाग को ट्राली से अलग थलग कर पाता. देखते ही देखते आग ने फसल, ट्राली और आगे के इंजन वाले भाग को जलाकर नष्ट कर दिया. मात्र लोहा बच पाया. सबसे पहले आग की लपटों ने फसल जलाया फिर आग फैलकर ट्राली के पिछले चक्कों को जलाया और इसी बीच आग की लपटें इंजन वाले भाग में बढ़ते हुए बड़े वाले टायर को भी जला दिया जिससे ब्लास्टिंग की काफी तेज़ ध्वनि हुई. ब्लास्टिंग की आवाज इतनी तेज़ थी की आसपास के ग्रामों डाढ़, करहिया, लोनियान टोला, बड़ोखर, सोरहवा, और कैथा तक आवाज सुनी गई.

  पूरी घटना में किसी के जान को कोई क्षति नही हुई मात्र माल और संपत्ति की ही क्षति हुई बताई गई है.

 पूरी घटना के लिए  रीवा का बिजली विभाग जिम्मेदार 

  यदि वास्तविक तौर पर विश्लेषण किया जाय तो पाया जाएगा की इस घटना के लिए कोई और नही बल्कि रीवा ज़िले का बिजली विभाग ही मात्र जिम्मेदार है. रीवा के बिजली विभाग में दशकों से जो खुले तार लगाए गए थे वह आज भी उसी तरह या यूं कहें की उससे भी ज्यादा बदतर स्थिति में हैं. बिजली विभाग रीवा के लिए करोड़ों रुपये का आने वाला मेंटेनेंस का बजट भष्ट्रचार की बलि चढ़ जाता है जिसे बिजली अधिकारी और ठेकेदार मिल बांट कर खा पी जाते हैं. अभी पिछले कई वर्षों से निरंतर बिजली विभाग रीवा के इन कारनामों को लेकर शिकायतें दर्ज करवाई जाती रहीं हैं और साथ ही ज़िले और प्रदेश स्तर की मीडिया में भी प्रकरण प्रकाशित होते रहे हैं लेकिन बिजली विभाग रीवा का मनमाना रवैय्या आज तक नही बदला है. यह मात्र करहिया ही नही बल्कि आज किसी भी ग्राम में जाकर देखा जाए तो पाया जाएगा की लगभग सभी खंभे कमजोर होकर झुक गए हैं, तार पुराने होकर टूट गए हैं, तारों में झुकाव आ गया है, खुले तार आपस में लड़ते रहते हैं जिससे आये दिन रोज कोई न कोई घटना होती रहती है. बिजली विभाग की इसी गलती की वजह से अभी पिछले दो साल पहले करहिया लोनियान टोला निवासी राजेश्वर लोनिया की पत्नी के ऊपर कटा हुआ तार टूटकर गिर जाने से घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई थी जिसकी की शिकायत वरिष्ठ स्तर तक करने के बाद भी कोई निराकरण नही हुआ. 

बिजली विभाग ने केबलीकरण की भी राशि कर ली हजम

   रीवा के बिजली विभाग में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कागजों पर आज लगभग 95 फीसदी जगहों पर केबलिकरण हो चुका है जिससे झूलते हुए तारों की कोई समस्या ही न रह जाए परंतु जैसा की बताया गया की यह मात्र सब कागजों तक ही सीमित है वास्तविक धरातल पर कहीं कुछ भी नही हुआ है. डाढ़ पंचायत, हिनौती पंचायत, कैथा, अगडाल, पांडुआ सहित दर्जनों मात्र कटरा विद्युत वितरण केंद्र की पंचायतों में ही केबलीकरण की राशि हज़म कर ली गई है. इसी प्रकार जैसा की बताया गया की लाइन मेंटेनेंस का भी पैसा खा पीकर फुरसत कर दिया है. 

    अभी पिछले दिनों गढ़-अगडाल फीडर अंतर्गत आने वाले अकलसी ग्राम में भी अकलसी तालाब के पीछे से भी एक शिकायत मिली थी जिसमे अकलसी के पटेल रहवाशियों द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी को मिलकर जानकारी दी गई थी और बताया गया था की इसी प्रकार की आगजनी की एक वारदात हाई टेंशन लाइन की वजह से हुई थी जिसमे 10 फ़ीट ऊंचाई में झूलते हुए तारों की स्पार्क की वजह से आग का लुकाडा गिरने से नीचे लगी फसल में आग लगने से काफी फसल नष्ट हो गई थी तब जाकर गांव वालों ने येन केन प्रकारेण उस आग पर भी नियंत्रण पाया था।

   संलग्न - कृपया जलते हुए ट्रेक्टर और साथ में बनाये गए यूट्यूब वीडियो को भी देखने का कष्ट करें जो यहां पर संलग्न हैं.

-------

शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र.
  7869992139, 9589152587

Sunday, April 1, 2018

वन अपराध की आग ने खाक कर दिया सिरमौर (पनगड़ी ) का जंगल

दिनांक 01 अप्रैल 2018,

स्थान – तेंदून/नौपथा जंगली क्षेत्र से, सिरमौर वन परिक्षेत्र रीवा मप्र,

(कैथा, शिवानंद द्विवेदी)

      गर्मी आते ही ज़िले के वन परिक्षेत्र मे जंगली आग का सिलसिला एक बार फिर चल पड़ा है। अभी हाल ही मे डभौरा वन परिक्षेत्र मे आग लगाए जाने की खबर कुछ ही दिनों पूर्व रीवा से प्रकाशित होने वाले प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय अखबारों मे आई थी।

गौहत्या के लिए कुख्यात पनगड़ी बीट के जंगलों मे फिर लगाई गई आग

      अभी पिछले एक सप्ताह से सिरमौर वन परिक्षेत्र अंतर्गत आने वाले कुख्यात पनगड़ी बीट के जंगलों मे भी एक बार फिर दावानल ने भीषण रूप ले लिया है। खबर थी की त्योंथर और जनकहाई क्षेत्र से घाट के ऊपर पश्चिम क्षेत्र से पिछले सप्ताह आग ऊपर की ओर आ रही है जिस पर वन विभाग काबू पाने मे असफल रहा जो आगे बढ़कर पनगड़ी के जंगलों मे आ गई जिससे तेदून, नौपथा, मछेहुआ के जंगलों तक बढ़ते हुये नादघाट और रवार एरिया तक पहुच गई। जब आग रवार क्षेत्र के पास पहुची और रहवाशी एरिया मे आने लगी तब जाकर लोगों ने हल्ला गुल्ला मचाया और तब जाकर लालगाँव उप-वनपरिक्षेत्र के डेप्युटी रेंजर तिवारी और इनके कुछ मुंसी चौकीदारों और अन्य कर्मचारियों ने आग पर काबू करने के नाकाफी प्रयास किए।

केचुआ पंचायत निवासी कल्लू आदिवाशी को थी आग लगने की जानकारी

      त्योंथर वन परिक्षेत्र अंतर्गत आने वाले केचुआ पंचायत के निवासी कल्लू आदिवाशी का कहना है की यह आग आज से महीनों पहले से लगी हुई है जिसकी जानकारी लालबिहारी सिंह डेप्युटी रेंजर त्योंथर को थी। कल्लू आदिवाशी और उसका परिवार तेदून के जंगलों के बीच निवास करता है साथ ही पैरा ग्राम का पुस्तईनी निवासी भी है। कल्लू आदिवाशी ने बताया की जंगल के बीचोबीच उसकी पट्टे की जमीन है। यह जमीन उसके पट्टे मे कैसे आई यह बिलकुल स्पष्ट नहीं है। 

डेप्युटी रेंजर त्योंथर लालबिहारी सिंह को बिंझन मे लगी आग की थी जानकारी

      केचुआ निवासी कल्लू आदिवाशी द्वारा बताया गया की आज से 15 दिन पूर्व जब पनगड़ी के जंगल अंतर्गत आने वाले बिंझन महादेव मंदिर के पास आग लगी थी और जंगल धू धू करके जल रहा था तब उसी समय डेप्युटी रेंजर त्योंथर लालबिहारी सिंह ने एक ट्रैक्टर से भरी गिट्टी पत्थर जंगली क्षेत्र से पकड़ी हुई थी और जिस जगह आग लगी थी वहीं से ट्रैक्टर लेकर निकले थे तब कैसे संभव है की लालबिहारी सिंह ने इस आग को विभाग को सूचित नहीं किया। जब आग बिंझन के जंगलों से बढ़ती हुई घाट के ऊपर तेदून, नौपथा से होते हुये नादघाट तक पहुच गई तब जाकर वन विभाग सिरमौर के पदस्थ रेंजर,डेप्युटी रेंजर और अन्य कर्मचारियों की आँख खुली।

जंगल मे आग के पीछे महुआ बीनने वालों पर लगाया गया आरोप

      इस आग लगने के पीछे जिम्मेदारों मे जंगली क्षेत्रों मे घुस कर रात दिन बराबर महुआ बीनने वालों को दोषी बताया जाता है। बताया गया की महुआ बीनने आने वाले लोग खर-पतवार और पत्तों मे आग लगा देते हैं जिससे महुआ के पेंड के नीचे के पत्ते और कचड़ा जल जाता है इस प्रकार फिर आराम पूर्वक महुआ बीनने के काम करते हैं।

अनुविभागीय अधिकारी एस पी एस गहरवार ने यूपी पुलिश को डभौरा आग के लिए जिम्मेदार ठहराया था

      अभी हाल ही पिछले दिनों प्रकाश मे आए इसी प्रकार के एक अन्य घटना क्रम मे ज़िले मे पदस्थ अनुविभागीय अधिकारी वनविभाग एस पी एस गहरवार ने यूपी पुलिश के मत्थे ठीकड़ा मढ़ दिया था और बताया था की चोर डकैत तलाशने के लिए यूपी पुलिश ने आग लगाई होगी।

      ऐसे यदि बयानवाजी की गई तो किसी को भी आग लगाने के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है परंतु जब हर वर्ष के यही हाल हैं की गर्मी आते आते रीवा के जंगलों का सत्यानाश होने लगता है तो विभाग सो क्यों रहा होता है? आखिर इस वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी किस बात के लिए पेमेंट पाते हैं। आज कोई भी जाये तो यह ज़्यादातर अधिकारी अपने वातानुकूलित कारों और कमरों मे पड़े ज़िंदगी के आनंद ले रहे होंगे,इनके लिए वन और पर्यावरण जाये भाड़ मे। क्योंकि यदि यही किस्सा नहीं होता तो जब हर वर्ष आग लगती है तो ये अपने कर्मचारियों को पहले से मुस्तैद क्यों नहीं करते? मानते हैं की महुआ बीनने वाले और दूसरे अपराधी लोग ऐसे घटनाक्रम को अंजाम देते होंगे पर सालों साल यही चल रहा है तो पूरे जंगलों की बाउंडरी को सील क्यों नहीं कर दिया जाता? महुआ जंगल की संपत्ति है किसी की बपौती तो नहीं। अब यदि महुआ की शराब भी पीएंगे और जंगल का सत्यानाश भी करेंगे तो ऐसे लोगों को जंगली एरिया मे घुसने क्यों दिया जाय?

रीवा वन विभाग की सह से ही होते हैं ज़्यादातर वन अपराध

      सही मायनों मे देखा जाये तो जो भी वन अपराध आज हो रहे हैं सब वन विभाग की जानकारी मे रहते हैं। वन विभाग के अधिकारी मात्र अंजान बनने का नाटक भर करते हैं। और तो और कितने तो ऐसे वन अपराध हैं जो सीधे इनके सज्ञान मे लाया जाता है परंतु फिर भी ले दे कर यह मामले को रफा दफा कर देते हैं और कोई दंडात्मक कार्यवाही की पहल नहीं करते। अभी जब भलघटी और पनगड़ी मे सैकड़ों गोवंशों को घाट के नीचे मौत का घाट उतारा गया था तो क्या वन विभाग के कर्मचारियों अधिकारियों को यह जानकारी नहीं रही होगी? जब यह गोहत्या की वारदात पिछले कई महीने से निरंतर की जा रही थी तो वन विभाग ने इस पर कार्यवाही क्यों नहीं किया? इसी प्रकार इसी घटना क्रम के दौरान अवैध तरीके से कार्य कर रहे क्रशर के पास पनगड़ी मे भी एक जंगली सूअर को मार कर उसे पकाया जाकर भूनकर खाया गया था जिसके पूरे ढांचे सहित कंकाल पाया गया था और सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी द्वारा यह सभी घटनाक्रम वन मंडलाधिकारी, मुख्य वनसंरक्षक से लेकर अनुविभागीय अधिकारी और रेंजर डेप्युटी रेंजर सभी को बताया गया था। पूरी विडियोग्राफी की गई थी सभी की फोटो मीडिया और अन्य माध्यमों से भेजी गई थी परंतु वनविभाग अब तक सचेत नहीं हुआ। ऐसी घटना इनके रोज के कार्यप्रणाली मे सम्मिलित है जिस पर शिकायतों के बाद मात्र खानापूर्ति होती है।

पनगड़ी जंगल अग्निकांड का कौन है जिम्मेदार?

      अब सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है की इस प्रकार के आपराधिक घटनाक्रम का कौन जिम्मेदार है? किसने पनगड़ी और बिंझन के जंगलों मे आग लगाई है? चूंकि हर वर्ष का यही किस्सा है और महुआ बीनने के समय ही होता है अतः महुआ बीनने वालों को प्रतिबंधित क्यों नहीं किया जाता? क्या वन पर्यावरण की सुरक्षा से ज्यादा महुआ और महुआ की शराब महत्वपूर्ण है?

तेंदुपत्ता तोड़ाई के समय भी जंगलों को पहुचाया जाता है भारी नुकसान

      एक तरफ तो सरकारें नासामुक्ति की बातें करेंगी और दूसरी तरफ बीड़ी पीने के लिए तेंदू पत्ता तोड़वाने लिए सरकारी ठीके देंगी, इसमे कौन सा लॉजिक है? क्या राजस्व इकठ्ठा करने का इन सरकारों के पास और कोई दूसरा तरीका नहीं? तेंदू के पेड़ों मे शाखकर्तन का कार्य किया जाता है जिसमे शाखकर्तन के नाम पर भी जंगलों का सफाया किया जाता है। यद्यपि नियमावली मे भी शाखकर्तन मे तेंदू की ऐसी शाखाओं को काटा जाता है जो काफी पतली होती हैं परंतु शाखकर्तन मे मोटी-मोटी डालियों को काट दिया जाता है जिससे तेंदू के पेड़ों की वृद्धि अवरुद्ध हो जाती है। तेंदूपत्ता के नाम पर इसी गर्मी के समय जमकर पेड़ों की अवैध कटाई भी की जाती है और बहाना तेंदूपतों का बताया जाता है। आज जबसे सरकारी तौर पर तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य होने लगा तब से जंगली पेड़ों की ऐसी की तैसी हो गई है। यदि तेंदूपत्ता संग्रहकर्ताओं को देखा जाये तो उसी समय तेंदू और दूसरे सेधा छिवला वगैरह की हरी लकड़ी की जमकर कटाई भी होती है। यह सब स्वयं सिद्ध है क्योंकि पहले भी इस बात को कई बार सीएम हेल्पलाइन और अन्य माध्यमों से उठाया जाता रहा है।

रीवा के जंगलों की सुरक्षा की पूरी ज़िम्मेदारी मात्र 2500 रुपये प्रतिमाह पाने वाले वन समितियों के मानसेवियों के ऊपर

      वन विभाग जंगल की सुरक्षा संबंधी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेता। जब भी कोई वन अपराध की जानकारी संबंधितों को प्रेषित की जाती है तो उसे गलत निराकरण देकर रफा दफा किया जाता है। वन विभाग के ज़्यादातर कर्मचारी अधिकारी अपने घर और कार्यालय मे ही आराम फरमाना पसंद करते हैं। ऐसा बहुत ही कम होता है की कोई भी नियमित वन कर्मचारी अधिकारी कभी भी जंगली क्षेत्र मे भ्रमण करने आया हो। जब बहुत बार शिकायतें की जाती हैं तब कहीं जाकर आते हैं। आम तौर पर यह देखा गया है की वन की सुरक्षा की ज़्यादातर ज़िम्मेदारी साल भर मे मात्र एक बार बमुस्किल तंख्वाह पाने वाले ग्राम वनसमितियों के मानसेवी चौकीदारों के हवाले होती हैं। इन मानसेवी चौकीदारों को कांट्रैक्ट बेसिस पर रखा जाता है जिन्हे मात्र 2500 के आसपास की प्रतिमाह की पेमेंट दी जाती है। कई मर्तबा इस पेमेंट देने मे भी देरी होती है। कई बार नहीं बल्कि यदि देखा जाये तो हमेशा ही 2500 रुपये मात्र दी जाने वाली यह पेमेंट इन वनकर्मियों को साल मे अथवा छह माह मे एक बार दी जाती है। इन मानसेवियों ने यहाँ तक कहा की शासकीय नौकरी करने वाले नियमित अधिकारी कर्मचारी इनका शोषण करते हैं और आवश्यकता से ज्यादा काम लेते हैं। इनकी पेमेंट मे भी कटौती कर ली जाती है। समय पर तो कभी भी पेमेंट नहीं दी जाती।

      अतः चूंकि मानसेवी कर्मचारी पूरी तरह से शोषित हो चुके हैं उनका भी मनोबल गिरा हुआ रहता है और वन की सुरक्षा जैसे जुमलों से थक चुके होते हैं। लोगों का कहना होता है की नियमित मुंशी, चौकीदार, डेप्युटी रेंजर और रेंजर कभी भी जंगली क्षेत्र का दौरा नहीं करते। जब इन्हे दबाब देकर किसी वन अपराध की जानकारी दी जाती है तब जाकर इनके कानों मे जू रेंगती है। और यदि सही मायनों मे देखा जाये तो आज जंगल की जो दुर्दशा हो रही है मात्र उसके पीछे वनविभाग के नियमित और सरकारी कर्मचारियों अधिकारियों की अकर्मण्यता और भष्ट्राचार ही जिम्मेदार है। अब इससे ज्यादा क्या सबूत दिये जा सकते हैं की आँख के आगे होते हुये वन अपराधों को दिखाने पर और पकड़वाने पर भी और पूरे विडियो फोटो के साथ उपलब्ध करवाने पर भी इन वन अधिकारियों ने कोई कार्यवाही नहीं की।           

      क्या ऐसे निकम्मे वन अधिकारियों कर्मचारियों को मुफ्त का खाया जाने वाला जनता के टैक्स और सरकार का पैसा इन्हे कभी भी पच पाएगा?

      संलग्न – रीवा ज़िले के सिरमौर वन परिक्षेत्र अंतर्गत आने वाले पनगड़ी बीट के तेदून, नौपथा,मछेहुआ, नादघाट एवं रवार एरिया मे आपराधिक तत्वों द्वारा लगाई गई आग से तहस नहस हुये जंगली परिक्षेत्र का दृश्य।

------------------

शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक, पर्यावरण,एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र।

मोबाइल – 7869992139, 9589152587