Wednesday, September 5, 2018

गंगेव जनपद है कलेक्टर रेट के बाबुओं के हवाले (मामला ज़िले के गंगेव जनपद कार्यालय का जिंसमे कलेक्टर रेट के बाबुओं ने पूरा जनपद कार्यालय हाईजैक किया हुआ है, हर कार्य के लिए रॉयल्टी और चढ़ोत्तरी देना अनिवार्य, नही दिया तो नही होता कोई काम, सरकारी बाबू राजेश सोनी बना भष्ट्राचार का केंद्रबिंदु)

दिनांक 05 सितंबर 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत जनपद कार्यालय में जमकर लुटाई चल रही है. जनपद कार्यालय में सीईओ की नही बल्कि बाबुओं की चलती है. इन सबका हेड राजेश सोनी नामक बाबू है जो पिछले कई वर्षों से जनपद कार्यालय गंगेव में टिका हुआ है. 

कलेक्टर रेट के बाबुओं ने गंगेव जनपद को किया हाईजैक

   यदि सही मायनों में देखा जाए तो समग्र परिवार आई डी सुधरवाने से लेकर कोई भी श्रमिक पंजीयन अथवा किसी भी प्रकार के कंप्यूटर फीडिंग के कार्य मात्र इन्ही कलेक्टर रेट के बाबुओं के हवाले है जिनका शेयर भी बंधा हुआ है इस शेयर में बड़े बाबुओं से लेकर उच्चाधिकारी तक सम्मिलित हैं.

   यदि कोई ग्रामीण हितग्राही अपने पंचायत का कोई भी छोटा से छोटा कार्य अथवा फीडिंग करवाने के लिए ब्लॉक जाता है तो उसे बिना चढ़ोत्तरी चढ़ाए कार्य करवा पाना असंभव है. हर कार्य के लिए 100 रुपये से लेकर आगे हज़ार तक फिक्स होते हैं. यह राशि कार्य की इंटेंसिटी के हिसाब से तय होती है. छोटे कार्य के लिए 100 से 200 रुपये और बड़े कार्यों के लिए हज़ारों तक देना पड़ता है. यदि हितग्राही आवेदक ने माल नही दिया तो उसके कार्य होने की कोई गारंटी नही है.

सरकारी बाबुओं का विभागीय समय 12 से 2 बजे तक

  सबसे बड़ी विडंबना तो यह है की जनपद कार्यालय में सरकारी बाबू अनुपस्थित रहते हैं. इनका समय दोपहर 12 बजे से प्रारम्भ होकर 2 बजे तक चलता है. इनका बहाना होता है की इन्हें दूर से कहीं रीवा अथवा दूसरे जगह से आना होता है इसलिए बस की वजह से लेट हो जाते हैं. इसके बाद मुश्किल से 2 घंटे काम करते हैं और 2 बजे के बाद इन्हें कार्यालय में ढूंढ पाना टेढ़ी खीर है. इस पर भी आधा समय गंगेव ब्लॉक जनपद कार्यालय के सामने बने हुए चाय और समोसे की दुकानों और होटल में ही इन्हें पाया जा सकता है. 

कार्यालय में पावती तक पाना है मुश्किल

   जनपद कार्यालय में सामान्य आवेदक को पावती तक ले पाना मुश्किल है, यदि कोई सामान्य आवेदक आवेदन लेकर जाता है और अपने आवेदन की पावती चाहता है तो उसे पावती तक नही मिलती. इन बाबुओं द्वारा कहा जाता है की पहले जाकर सीईओ से हस्ताक्षर करवाकर लाएं. सीईओ यदि अपनी कुर्सी में बैठा है तो ठीक है वरना फिर घर वापसी ही हो सकती है काम नही.

बाबू राजेश सोनी के इशारे पर चल रहा काला कारोबार

    गंगेव जनपद के फाइनेंसियल सेक्शन की ज्यादातर जबाबदेही सरकारी बाबू राजेश सोनी की है उसी के द्वारा काफी कुछ कार्य किये जाते हैं. इन सबमे कमीशन का जमकर खेल चल रहा है. राजेश सोनी द्वारा पंचायत के सरपंचों, सचिवों से माल ऐंठकर परसेंटेज फिक्स किया हुआ होता है. इसमे पंचायत इंस्पेक्टर, उपयंत्री, सीईओ और अन्य उच्चधिकारियों का शेयर बना हुआ है. 

मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में हुआ जमकर फर्जीवाड़ा 

     वर्ष 2018 में अभी हाल ही में मुख्यमंत्री कन्यादान योजनान्तर्गत सामूहिक विवाह सम्मेलन रखा गया था जिंसमे मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित थे और देखा गया की मंडप पर ऐसे महिला पुरुष दिखे जिनके विवाह पहले से तो हुए ही थे साथ ही उनके बच्चे भी पैदा हो चुके थे. कई महिलाएं अपने बच्चों को गोद में लिए हुए घूम रही थीं जिनकी की सामाजिक कार्यकर्ता ने फ़ोटो भी ली है. बाद में इनमे से कई महिलाएं मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में बनाये गए मंडप में बैठीं दिखी. इस बाबत सामाजिक कार्यकर्ता ने ज़िला पंचायत सीईओ मयंक अग्रवाल को भी सूचित किया गया था.

कलेक्टर रेट के इन बाबुओं की चल रही धांधली

 कंप्यूटर में कार्य करने वाले जिन कलेक्टर रेट के बाबुओं की इस समय जमकर धांधली चल रही है उनमे से पुष्पेंद्र सिंह, ऋषिकेश वर्मा, सूरज सोनी मुख्य हैं. इनमे से कोई भी ऐसा नही जिनमे मानवता शेष बची हुई हो. सबसे बड़ा दलाल इस समय सूरज सोनी है जो राजेश सोनी नामक सरकारी बाबू का चहेता है. इन दोनो सोनी ने गंगेव ब्लॉक जनपद पंचायत कार्यालय को सुनार की दुकान बना डाली है जहां सोने के भाव पर सामान्य डेटा फीडिंग, रजिस्ट्रेशन और वेरिफिकेशन के कार्य हो रहे हैं. इस समय गंगेव जनपद में इन बाबुओं की दलाली और हीलाहवाली अपने चरम पर है.

कलेक्टर रीवा द्वारा इन्हें तत्काल हटाए जाए 

  अब ऐसे में इन डेटा ऑपरेटरों को कलेक्टर रीवा तकाल प्रभाव के साथ हटाएं. इनकी जांच किया जाए और घूस लेने के लिए इनके ऊपर कंनूनी कार्यवाही किया जाए. सबसे पहले राजेश सोनी को गंगेव जनपद से हटाया जाय क्योंकि राजेश सोनी ने गंगेव जनपद में सबसे ज्यादा गंदगी फैला करके रखी है. बिना किसी मेहनत के किसी भी व्यक्ति को जब अनुकंपा नियुक्ति से कोई पद दे दिया जाता है उसका परिणाम यही होता है जो राजेश सोनी के केस में दिख रहा है. राजेश सोनी ने गंगेव जनपद की सभी पंचायतों में इस कदर भष्ट्राचार फैलाया हुआ है की पूरा जनपद भष्ट्रचार की गंध से प्रदूषित हो चुका है. आश्चर्य की बात तो यह है यह जानकारी जनपद से लेकर ज़िला लेवल तक होते हुए भी इस पर कोई कार्यवाही नही हो रही है. आखिर क्या कारण है की इतनी शिकायतों इतनी कमियों के वावजूद भी न तो कोई प्रशासनिक कार्यवाही हो रही है और न ही इसे यहां से हटाया जा रहा है. 

ईओडब्लू करे जांच, सामने आएगी वित्तीय आनियमितता

   वास्तव में देखा जाए तो जनपद पंचायत गंगेव सहित समस्त पंचायतों में पिछले पांच वर्षों में हुए व्यापक भष्ट्राचार की ईओडब्लू की जांच होनी चाहिए साथ ही सभी कार्यों की कैग रिपोर्ट तैयार की जानी चाहिए. यदि कंपट्रोलर एवं ऑडिटर जनरल से ऑडिट रिपोर्ट तैयार करवाई जाए तो सभी कुछ स्पष्ट हो जाएगा की जनपद के विकाश कार्य कागजों में तो कुछ और हैं लेकिन वास्तविक धरातल पर पंच परमेश्वर, मनरेगा से लेकर विधायक एवं संसद निधि के कार्यों में भी जमकर भ्रष्ट्राचार हुआ है. सरकार यदि वास्तव में समाज एवं देश को भष्ट्राचार मुक्त करना चाह रही है तो शासन स्तर से कैग और अन्य माध्यमो से एजेंसी तैयार कर सही तरीके की जांच कराए जाकर कार्यवाही सुनिश्चित होनी चाहिए.

संलग्न - ज़िले के गंगेव जनपद में कार्यरत कलेक्टर रेट के बाबुओं की फ़ोटो, जनपद कार्यालय की फ़ोटो, कुछ सरकारी बाबुओं की फ़ोटो और साथ ही सीईओ जनपद प्रमोद ओझा की फ़ोटो.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 7869992139, 9589152587

गंगेव कृषि विभाग के सामने फेंकी मरी गाय, महामारी की संभावना (मामला ज़िले के गंगेव ब्लॉक का जहां पर कृषि विभाग एवं न्यायालय तहसीलदार के सामने एवं सीईओ कार्यालय के बाजू में मरी गाय फेंक दी जिससे महामारी फैलने की बनी संभावना)

दिनांक 05 सितंबर 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा, मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

  ऐरा छोंडे गए मवेशियों की आये दिन सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु हो रही है. राष्ट्रीय राजमार्ग 27 के आसपास ऐसे दर्जज़ों सड़ांध और दुर्गंध देते मवेशी मिलेंगे. अभी हाल ही में पिछले दिनों एक मृत गाय को गंगेव बाजार के पास किसान कल्याण एवं कृषि विभाग के सामने फेंक दिया गया था. बता दें की वहीं कृषि विभाग के बाजू में ही न्यायालय नायब तहसीलदार एवं सीईओ जनपद पंचायत कार्यालय के बगल में ही पड़ी यह गाय दिनाँक 04 सितंबर की शाम तक वहां पर उपस्थित ग्रामीणजनों और आसपास के राहवाशियों सहित सरकारी कर्मचारियों का जीना दूभर किये हुए थी.

कृषि कर्मचारियों ने जाहिर की अक्षमता

   जब इस मृत और कृषि विभाग के सामने फेंकी गई गाय के विषय में गंगेव कृषि कर्मचारियों से बात की गई तो बसंत गौतम और प्रिंस द्विवेदी द्वारा बताया गया की इस मरी हुई गाय को पिछले चार दिन पहले से फेंक दिया गया है. इसे यहां पर रात में फेंका गया होगा क्योंकि दिन में फेंका जाता तो देख पाते. पहले लोगों ने आपस में शिकवा शिकायतें की लेकिन किसी ने जिम्मेदार स्थानीय निकाय को सूचना नही दी. जबकि देखा जाय तो कई दुकानदार और बैंक भी वहीं पर स्थित हैं.

सामाजिक कार्यकर्ता ने डायल 100 को दी जानकारी

  दिनाँक 04 अगस्त 2018 की दोपहर कृषि विभाग संबंधी कार्य और जानकारी लेने के उद्देश्य से जब वहां पर पहुचा गया तो सड़े हुए मृत पड़े मवेशी की दुर्गंध से जीना दूभर हो गया. सांस लेना मुश्किल पड़ रहा था जिस पर सामाजिक कार्यकर्ता ने कृषि विभाग के कर्मचारियों से जानकारी प्राप्त की तो उक्त सभी बातों की जानकारी मिली. इस पर आनन फानन में कुछ समझ न आने मृत मवेशी की दूर से फ़ोटो लेकर ट्विटर के माध्यम से मप्र पुलिश की डायल 100 सेवा पर सूचना प्रेषित कर दी गई जिस पर गंगेव एफ आर वी से फ़ोन आया जानकारी चाही गई. एफ आर वी में तैनात कर्मचारी ने कहा की जब मवेशी फेंका गया था तब सूचना देनी थी अब इतने दिन बाद क्यों दे रहे हैं. इस बात पर पुलिशकर्मी को बताया गया की यह कार्य कृषि विभाग के कर्मचारियों, नायब तहसीलदार कार्यालय कर्मियों तथा सीईओ जनपद का कार्य था अथवा गंगेव बाजार के आसपास रहने वाले दुकानदारों का कार्य था की पुलिश को पहले सूचना देते. सामाजिक कार्यकर्ता गंगेव कार्यालय कभी कभी आता है अतः यह संभव नही था की जब मवेशी फेंका गया उस समय सामाजिक कार्यकर्ता वहां पर बैठा रहे.

मढ़ी-खुर्द सचिव सरपंच को सूचना पर भी देर रात तक नही हटाया मृत गाय

    बताया गया की यह मामला गंगेव जनपद की मढ़ी खुर्द पंचायत का था. जिंसमे स्थानीय निकाय और पंचायत विभाग की जिम्मेदारी थी की इस मृत मवेशी को वहां से हटाया जाए. इस पर जब मढ़ी-खुर्द के सचिव को बुलाया गया तो उसके द्वारा बताया गया की पंचायत की जिम्मेदारी नही है क्योंकि पंचायत के किसी क्लॉज़ में यह नही लिखा है की मृत मवेशी को फेंका जाय. वहरहाल जानकारों से पता चला की किसी भी जगह यदि मवेशी मृत पाया जाय, कूड़े गंदगी का ढेर हो अथवा साफ सफाई की स्थिति हो उसमे स्थानीय निकाय की ही जिम्मेदारी तय होती है अतः सचिव सरपंच का अपनी जिम्मेदारी से मुकरना गलत है. इसमे पंचायत की ही जिम्मेदारी है क्योंकि आकस्मिक व्यय के लिए पंचायत में मद भी आता है.

देर रात तक नही हटाया गया मृत मवेशी

  सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा देर रात गंगेव एफ आर वी के डायल 100 स्टाफ से जानकारी चाही गई तो बताया गया की डायल 100 ने मढ़ी खुर्द के सरपंच सचिव को जानकारी दे दी थी लेकिन इसकी पुख्ता जानकारी नही है की मवेशी हटाया गया की नही. जेसीबी लगवाकर मवेशी हटाने की बात सरपंच सचिव ने कही थी.

इसके पूर्व भी मढ़ी खुर्द में ट्रक से मरे थे आधा दर्जन मवेशी

   बता दें की गंगेव निवासी ब्रिज किशोर तिवारी के माध्यम से कुछ दिन पहले जानकारी मिली थी की ट्रक और वाहन की चपेट में आकर लगभग आधा दर्ज़न मवेशी मारे गए थे जिन्हें बायपास के पीछे फेंक दिया गया था जिनको वहां से न उठाये जाने के कारण महामारी जैसी स्थिति निर्मित हो गई थी जिसके विषय में सामाजिक कार्यकर्ता को सूचना मिलने पर पशु चिकित्सा विभाग के वेटेरिनरी सर्जन एस के पांडेय को सूचित किया गया था. तब जाकर उन मृत मवेशियों को हटवाया गया था.

संलग्न - कृपया देखें गंगेव कृषि विभाग के सामने मृत पड़ी गाय की सड़ांध लिए हुए दुर्गध देती मृत गाय की फ़ोटो जिंसमे बायोलॉजिकल रिएक्शन के कारण कीड़े भी पड़े हुए हैं.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा, मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139

एनआरसी गंगेव में मात्र 2 भर्ती, क्षमता 15 कुपोषितों की (मामला ज़िले के गंगेव ब्लॉक में बनाये गए पोषण और पुनर्वास केंद्र का जिंसमे सैकड़ों आंगनवाड़ी केंद्रों से मात्र मिले दो बच्चे, क्षमता 15 बच्चों के भर्ती की)

दिनांक 05 सितंबर 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

      ज़िले के गंगेव ब्लॉक में स्थित पोषण एवं पुनर्वास केंद्र में 15 कुपोषित बच्चों को एकसाथ रखे जाने की सुविधा होते हुए भी दिनांक 04 सितंबर 2018 की शाम मात्र 2 कुपोषित बच्चे भर्ती मिले.

      गंगेव जनपद कार्यालय के सामने स्थित पोषण एवं पुनर्वास केंद्र में प्रवेश पर वहां कुछ महिला कर्मचारी मिलीं साथ ही दो अन्य महिलाएं भी अपने भर्ती किये हुए कुपोषित बच्चों के साथ दिखीं जिनसे जब जानकारी चाही गई तो बड़ा ही आश्चर्यचकित करने वाला वाकया सामने आया. उपस्थित महिला कर्मचारियों द्वारा सामाजिक एवं मानवाधिकार एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी को बताया गया की एनआरसी केंद्र में कुल 10 कुपोषित बच्चों को एकसाथ रखे जाने का बिस्तर एवं सुविधाएं उपलब्ध है जबकि यदि संख्या ज्यादा हो जाए तो 15 तक भी रखे जा सकते हैं.

04 सितंबर को भर्ती मिले मात्र 2 कुपोषित बच्चे

  सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा जब पूछा गया तो जानकारी मिली की दिनांक 04 सितंबर को दो कुपोषित बच्चे भर्ती हैं बांकी अन्य सभी बिस्तर खाली पड़े हैं. ग्राम बुसौल-बेला से रीतू पाठक नामक महिला ने बताया की उनका 22 माह का बच्चा है जिसे 29 अगस्त 2018 को एनआरसी केंद्र गंगेव में भर्ती कराया गया था जिसकी भर्ती के समय बजन मात्र 8 किलोग्राम था और अब 04 सितंबर की डेट में बजन बढ़कर 8 किलो 785 ग्राम हो गया था. इसी प्रकार ग्राम नीवी निवासी विमला देवी कोल द्वारा बताया गया की उन्होंने 04 सितंबर को ही अपना लगभग डेढ़ साल का बच्चा एनआरसी केंद्र गंगेव में भर्ती कराया है. उनका बच्चा भी कुपोषित था जिसका पोषण चल रहा है।

15 दिन तक भर्ती का है प्रावधान

   एनआरसी केंद्र गंगेव में कार्यरत महिला कर्मियों द्वारा जानकारी दी गई की केंद्र में प्रथम बार 2 सप्ताह तक की भर्ती का प्रावधान है जिंसमे बच्चे का बजन और पोषण संबंधी जानकारी लेकर 15 दिनों तक डॉक्टर निरंतर कस्टडी में रखते हैं और इस बीच यदि आवश्यक बजन बढ़कर बच्चा पोषित हो गया तो परिजनों को छुट्टी दे दी जाती है अन्यथा भर्ती आगे भी बढ़ाई जा सकती है.

15 बिस्तर की क्षमता और भर्ती मात्र 2

  सबसे बड़े आश्चर्य की बात तो यह है की गंगेव एनआरसी केंद्र की कुल क्षमता 10 से लेकर अधिकतम 15 बिस्तर तक बतायी गई है लेकिन जिस प्रकार से दिनाँक 04 सितंबर की शाम को मात्र 2 बच्चे भर्ती मिले इससे साफ जाहिर है की गांव गांव जाकर एएनएम और आशा कार्यकर्ता कोई भी कार्य नही कर रही हैं. आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा भी ग्रामीण महिलाओं की मदद नही की जा रही अन्यथा मात्र 10 से 15 बिस्तर की क्षमता वाला एनआरसी केंद्र कैसे खाली रहता. सबसे बड़ी बात यह है की यदि सही तरीके से सर्वे किया जाए तो किसी एक ग्राम में ही 10 से 15 तक कुपोषित बच्चे मिल सकते हैं. सबसे बड़ा प्रश्न यह है की एक तरफ तो सरकारें गांव गांव विकाश, कुपोषण मुक्त समाज और बच्चों-माताओं के लिए कागजों पर इतनी अधिक स्कीमें चला रही हैं दूसरी तरफ वास्तविक धरातल पर सब शून्य जैसा प्रतीत हो रहा है. जो एनआरसी केंद्र पूरी तरह से भरे रहने चाहिए वहां पर मात्र 2 कुपोषित बच्चे पाये जाने का क्या तात्पर्य है. क्या इतने बड़े गंगेव ब्लॉक में मात्र एक समय में 2 ही कुपोषित बच्चे हैं? एएनएम, आशा कार्यकर्ता और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता क्या कर रही हैं? क्या इनके क्षेत्र में कोई कुपोषित बच्चे नही बचे? क्या मात्र गंगेव ब्लॉक में 2 ही कुपोषित बच्चे हैं? सरकार प्रशासन को मात्र कागजों पर योजनाएं लागू नही करना चाहिए बल्कि यह भी देखना चाहिए की इन योजनाओं का वास्तविक भौतिक धरातल पर सही तरीके से क्रियान्वयन हो पा रहा है की नही.

संलग्न - संलग्न तस्वीर में देखें पोषण एवं पुनर्वास केंद्र गंगेव में भर्ती दो कुपोषित बच्चों की फ़ोटो साथ ही फ़ोटो में दिख रही महिला कर्मी. बाहर से लिया गया पोषण एवं पुनर्वास केंद्र की फ़ोटो.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139

Thursday, August 30, 2018

16 लाख की लॉगत और मात्र एक माह में हुआ खस्ताहाल (मामला ज़िले के गंगेव जनपद अन्तर्गत आने वाले देवास पशु औषधालय का जिंसमे सरकार के 16 लाख पानी में बहा दिए गए, ठेकेदारों की मनमानी के चलते हुआ घटिया निर्माण, पशु औषधालय एक माह में हुआ क्षतिग्रस्त)

दिनाँक 31 अगस्त 2018, स्थान - गंगेव/देवास, रीवा मप्र 

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

  निर्माण एजेंसियों एवं सिविल कंस्ट्रक्शन के कार्यों में व्याप्त व्यापक भष्ट्राचार का एक और जीता जागता उदाहरण सामने आया है. ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत आने वाले देवास पंचायत में इसी 5 जून 2018 को 16 लाख की लॉगत से बनाया गया पशु औसाधालय पशु चिकित्सा विभाग को ठेकेदारों द्वारा हैंडओवर किया गया था. पशु औसधालय में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा बताया गया की बनने के एक माह के भीतर ही इस पशु औषधालय की फर्स और दीवालों में लगाई गई टाइल्स और दूसरे सामग्री टूट गए. बिल्डिंग में दरार आ गईं. टाइल्स उखड़ गई, टूट गईं. साथ ही राखड़ और डस्ट उपयोग किये जाने एवं सही अनुपात न रखे जाने के कारण पूरा का पूरा औषधालय भवन ही क्षतिग्रस्त होने की कगार पर आ गया है. बेबाकशक्ति न्यूज़ ग्रुप में देवास संवाददाता द्वारा जब पशु औषधालय में कार्यरत कर्मचारियों से जानकारी चाही गई तो उनके द्वारा बताया गया की किसी शम्भू मिश्रा नामक ठेकेदार द्वारा कार्य ठेके पर लिया जाकर किसी गुड्डू यादव नामक पेटी कॉन्ट्रेक्टर द्वारा कार्य करवाया गया था जिंसमे गुणवत्ता की भारी अनदेखी की गई है जिससे भवन निर्माण के मात्र एक माह के भीतर ही भवन बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है. कार्यरत कर्मचारियों द्वारा बताया गया की अब उन्हें इस भवन परिसर में कार्य करने में खतरा महसूस होता है की कहीं यह भवन टूटकर उनके ऊपर न गिर जाए. इस बाबत सभी कर्मचारियों सहित देवास ग्राम पंचायत के ग्रामवासियों ने ठेकेदार और निर्माण एजेंसी के ऊपर दंडात्मक कार्यवाही की माग की है.

संलग्न - कृपया संलग्न तस्वीरों में देखें देवास पंचायत अन्तर्गत बनाये गए पशु औसाधालय की दरार पड़ी बिल्डिंग और उखड़े हुए टाइल्स आदि की फ़ोटो.

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शिवानन्द द्विवेदी, समाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, ज़िला रीवा मप्र

मोबाइल 7869992139, 9589152587

Wednesday, August 29, 2018

बाधित पीएम सड़क बनवाने कलेक्टर को दिया ज्ञापन (मामला ज़िले के सिरमौर तहसील अन्तर्गत आने वाले पनगड़ी पंचायत का जहां पर निर्माणाधीन पीएम सड़क भठवा से पनगड़ी को बनाये जाने में कुछ असमाजिक तत्व वाधा उत्पन्न कर रहे, वाधा दूर करने कलेक्टर और कमिश्नर को ग्रामीणों ने दिया ज्ञापन)

दिनांक 29 अगस्त 2018, स्थान - भठवा/गढ़, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

   ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत आने वाले भठवा से पनगड़ी ग्राम पंचायत की निर्माणाधीन पीएम सड़क को कुछ असमाजिक तत्वों द्वारा अवैध और जबरन तरीके से कब्जाया जा रहा है जिंसमे इन सरहंगों ने सड़क के बीचोंबीच निर्माण करके अवैध कब्जा जमा लिया है और अब सड़क बनाये जाने का विरोध कर रहे हैं. पनगड़ी कला पंचायत के उपसरपंच शिवेंद्रमणि शुक्ला एवं अन्य शिकायतकर्ताओं द्वारा बताया गया की अरुण यादव, शारदा यादव, रामस्वरूप यादव, गोविंद यादव, रामजी यादव, बिहारी यादव के दवारा शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न कर पीएम सड़क बनाने में अवरोध उत्पन्न किया जा रहा है जिससे भठवा, पनगड़ी, पताई, वनपताई, मदरी, बांस, महादेवन आदि क्षेत्रों के नागरिकों को आवागमन में असुविधा का सामना करना पड़ रहा है. 

   इस बाबत शिकायतकर्ताओं राहुल तिवारी, अरुण तिवारी, हरीश कुशवाहा, विकास तिवारी, दसरथ कोरी, सुरेश शुक्ला, रामाधार कोरी अनिल तिवारी, जगमोहन, विनोद सोंधिया, कृष्णकुमार, मुकेश, संदीप, तीरथ, रामनरेश, रोहिणी, श्यामलाल, सौरभ, रामकुमार, दिनेश त्रिपाठी, शिवेंद्रमणि शुक्ला ने बताया की दिनांक 29 अगस्त को दर्जनों ग्रामीणों ने कॉलेक्टर एवं कमिश्नर कार्यालय जाकर ज्ञापन सौंपा है और आरोपियों असामाजिक तत्वों के विरुद्ध कार्यवाही की माग की है. 

    बताया गया की कार्यवाही न होने पर 7 दिवश बाद भठवा सड़क पर जाम लगाकर आंदोलन किया जाएगा जिसकी जबावदेही मात्र शासन प्रशासन की होगी.

संलग्न - दिनाँक 29 अगस्त को रीवा कलेक्टर एवं कमिश्नर कार्यालय में पहुचे ग्रामीणों की फ़ोटो एवं साथ ही कलेक्टर कमिश्नर को दिए ज्ञापन/शिकायत की छयाप्रति.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, 

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139.

Tuesday, August 28, 2018

गंगेव बाजार सड़क की ठेकेदार ने कर दी तेरही, चल रही बरसी की तैयारी, तिथि के बाद सड़क पहुच जाएगी "गया" ( मामला ज़िले से गुजरने वाली मनगवां चाकघाट वाया गंगेव गढ़ हाईवे सड़क का जिसको एमएस कंस्ट्रक्शन नामक कंपनी ने बरसात के मौसम में खोद डाला, अब हो रही रोज दुर्घटनाएं, शासन प्रशासन विकाश रथ में व्यस्त)

दिनाँक 28 अगस्त 2018, स्थान गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

   ज़िले की मनगवां से चाकघाट से गुजरने वाली गंगेव गढ़ होते हुए हाईवे सड़क की स्थिति दयनीय बन चुकी है. गंगेव बाजार में ठेकेदार और निर्माण एजेंसी एमएस कंस्ट्रक्शन द्वारा सड़क को एक तरफ से खोद दिया गया है जिससे आये दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं. निरंतर इस बात को मीडिया के समक्ष रखे जाने के बाद भी शासन प्रशासन अपनी चिरनिद्रा से नही जाग पा रहा है.

  बंसल ग्रुप कंपनी ने बरसात आते ही खोद डाली हाईवे

   मनगवां से चाकघाट वाली हाईवे सड़क के निर्माण का कार्य दिलीप बिल्डकॉम के बाद कुछ भाग को एमएस कंस्ट्रक्शन को दिया गया है लेकिन कार्य को सही तरीके से सुपरवाइज़ न कर पाने की वजह से बरसात के मौसम में ही गंगेव की सड़क को एक तरफ से खोद दिया गया. अब जब बरसात आ गई तो काम को बन्द कर दिया गया जिससे सड़क के पश्चिम दिशा में एक तरफ सड़क गहरी खायीं में बदल चुकी है. जब कोई वहां सड़क पर चलता है तो मानो एक तरफ ऊंचा टीला रहता है तो दूसरी तरफ खायीं बनी रहती है ऐसे में मात्र एक तरफ से ही वहां निकल सकते हैं. यदि कोई वाहन अथवा बाइकर्स दूसरी तरफ से आ रहा है तो उसे खायीं की तरफ जबरन और मजबूरन घुसना पड़ता है जिससे फिसलन और ऊबड़ खाबड़ होने की वजह से दुर्घटनाएं हो रही हैं. अभी कुछ दिन पहले दुर्घटना के कारण कई पशु भी अपनी जान दे चुके हैं. आम बाइकर्स और वाहनों का फिसलन और एक्सीडेंट तो आम बात है.

जल्दी बनाई जाए गंगेव बाजार की सड़क

   जब इस संदर्भ में आसपास के रहवाशियों से संपर्क किया गया तो विष्णु पटेल द्वारा बताया गया की उनके द्वारा इस मुद्दे को निरंतर उठाया जा रहा है लेकिन इसकी सुनवाई नही हो रही है. गंगेव में दुकान चला रहे बसौली के बबलू सिंह ने बताया की गंगेव से बसौली जाते समय ऐसा लगता है की कब कोई दुर्घटना हो जाए और कब जान पर बन आये. इसी तरह गंगेव जनपद और कृषि विभाग में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा बताया गया कि उन्हें रोज ही बैतरणी पार करना पड़ रहा है। सरकारी कर्मचारियों को छोड़कर सभी ने एक स्वर में बताया की इस सड़क को जल्दी दुरुस्त किया जाय वरना हम सब मिलकर गंगेव बाजार के बीचोंबीच चक्का जाम करेंगे जिसकी जबाबदेही मात्र शासन प्रशासन की होगी. 

    इस बीच खुलासा न्यूज़ लाइव के ज़िला ब्यूरो चीफ आनंद द्विवेदी ने बताया की हम लगभग सप्ताह में दो दिन गंगेव आते हैं और पाते हैं की जिस दिन बारिश हुई होती है उस दिन इस लगभग दो किमी बंसल ग्रुप द्वारा उखाड़ी गई सड़क पर चलना काफी मुश्किल होता है. किसी प्रकार से इससे पार जाने पर ईश्वर को शुक्रिया अदा करते हैं की आज तो जान बचा लिया.

संलग्न -  कृपया संलग्न तस्वीर में देखें गंगेव से होते हुए गढ़ मार्ग की मनगवां के चाकघाट हाईवे सड़क को किस प्रकार से वर्तमान निर्माण एजेंसी ने खोदकर नष्ट कर दिया है.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, ज़िला रीवा मप्र,

मोबाइल 7869992139, 9589152587

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स्वयं के बनाये कीचड़ में फंसा शिवराज का विकाश रथ (मामला ज़िले के विभिन्न ब्लॉकों में मप्र सरकार द्वारा भेजे गए ठेके के विकाश रथ की दुर्दशा का जो की गांव में घुसने के पहले ही कीचड़ से सराबोर सड़कों में फंस रहा, लोगों की गालियां खाकर कार्यकर्ता हो रहे वापस)

दिनाँक 28 अगस्त 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

   सरकारी पैसे में वर्तमान मप्र सरकार द्वारा ठेके में दिया गया विकाश रथ अपने ही द्वारा समाज में फैलाये गए कीचड़ में फंसता जा रहा है. बात करें मप्र की शिवराज सिंह चौहान की सरकार द्वारा गांव गांव भेजे गए विकाश रथ की तो दिनांक 27 अगस्त को यह ठेके का विकाश रथ मनगवां विधानसभा एवं गंगेव जनपद की लोटनी, हिनौती, बांस एवं कैथा, पडुआ पंचायत में भेजा जाना था लेकिन हिनौती पंचायत से होते हुए जैसे ही करहिया वाया बड़ोखर ग्राम में घुसा तो बड़ोखर ग्राम की शिक्षा गारंटी की स्कूल के आगे सुरसरी सिंह परिहार के घर से बृजराज सिंह के घर के आगे तक लगभग ढाई सौ मीटर की पंचायती सड़क में कीचड़ के बीच बुरी तरह से फंस गया. इस बीच विकाश रथ में उपस्थित कटनी एवं सीहोर के दो कार्यकर्ता जिनको पेमेंट देकर सरकार ने ठेके में हायर किया हुआ था वह पैदल चलते हुए आदमी ढूंढते हुए कैथा श्रीहनुमान मंदिर तक पहुचे जहां पर उपस्थित मीडिया ग्रुप खुलासा लाइव न्यूज़ के आनंद द्विवेदी एवं सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी मौके पर पहुच कर कीचड़ में फंसी हुई विकास रूपी सरकार की गाड़ी को निकालने में मदद किये. यह अपने आप में अजीबोगरीब वाकया ही कहा जाएगा की सरकार के विकाश की कीचड़ में फंसी गाड़ी को आम जनता निकाल रही है. अब सरकार को अपने विकाश रथ को स्वयं निकाल पाने की कूबत नही बची. पर जिस प्रकार की स्थिति अब बनी हुई है इससे साफ जाहिर है अब शायद आम जनता के बलबूते नही बचा की सरकार की फंसी हुई गाड़ी को निकाल पाए.

बड़ोखर ग्राम की सड़क को खा गया सरपंच सचिव

   बड़ोखर ग्राम की सड़क को हिनौती पंचायत के सरपंच और सचिव ने मिलकर समाप्त कर दिया. आज से पांच वर्ष पहले भूतपूर्व सरपंच श्रीधर द्विवेदी द्वारा बनाई गई इस पंचायती सड़क को वर्तमान सरपंच ने कुछ नही किया. आम जनता की माने तो मुनेंद्र सिंह परिहार, सुरसरी सिंह परिहार, शिवेंद्र सिंह, देवेंद्र सिंह, दंगल सिंह, संते सिंह, बृजराज सिंह राजमणि पटेल, छोटेलाल पटेल, बृजबासी पटेल आदि के अनुसार वर्तमान सरपंच ने एक मुट्ठी मोरम तक इस सड़क में नही डाला.

हिनौती पंचायत में जमकर हुआ भष्ट्राचार 

  यदि वास्तव में देखा जाए तो शान्तिधाम से लेकर अन्य ग्रेवल सड़क निर्माण, मनरेगा एवं पंच परमेश्वर के कई कार्यों में वर्तमान सरपंच और सचिव द्वारा खूब जमकर खाया पिया गया है. यहां तक की कैथा पंचायत के मजदूरों संतोष केवट, तेजेस्वरी केवट, रामखेलावन केवट आदि द्वारा हिनौती पंचायत में कार्य तो करवाया गया लेकिन इनका पेमेंट आज तक नही दिया गया. जबकि देखा जाए तो दूसरी पंचायत के श्रमिक मजदूरों द्वारा किसी अन्य पंचायत में कार्य करवाने का प्रावधान तब तक नही है जब तक उस पंचायत में मजदूर उपलब्ध हों. हिनौती पंचायत में ऐसे कई मजदूर हैं जिनकी मजदूरी आज तक नही मिली है.

  मप्र की सड़कें अमेरिका से हैं बेहतर

    बड़ोखर जैसे कई ग्रामों की बातें सामने आईं तो याद आया की एक बार मप्र के वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने अमेरिका दौरे में कहा था की मप्र की सड़कें अमेरिका से बेहतर हैं. शायद यह कथन मानवीय इतिहास का अब तक सबसे बड़ा जोक बन चुका है. पर यह सरकारें तो इतनी बेशर्म हो चुकी हैं जिन्हें हंसी का पात्र बनने पर भी कोई शर्म नही.

   ग्रामों की सड़कें तो खैर है नमूना हैं हीं, यहां तो हाईवे सड़कों की हालात देख लें तो शर्म आती है की क्या यही मानवाधिकार है, क्या यही 70 वर्ष का भारतीय लोकतंन्त्र है. क्या यही 70 वर्ष की स्वतंत्रता बाद कि उपलब्धि है. सवाल यह उठता है किस मुँह से यह राजनेता जनता के समक्ष वोट मांगने आते हैं. 


    इस विकाश यात्रा में सम्मिलित ठेके के कार्यकर्ताओं ने बताया की उनकी सबसे अधिक दुर्दशा हो रही है क्योंकि ग्रामों में कहीं भी सड़क अच्छी नही है और जिस ग्राम में वह जाते हैं वहीं उनके जान पर बन आती है.

सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा रिकॉर्ड फेसबुक लाइव वीडियो को एक दिन में 10 हज़ार से अधिक लोगों ने देखा

   जब मप्र सरकार के कीचड़ में फंसे हुए विकाश रथ को निकालने के लिए आम जनता के साथ सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी एवं खुलासा मीडिया न्यूज़ डिस्ट्रिक्ट ब्यूरो आनंद द्विवेदी पंहुचे तो बड़ोखर ग्राम की शिक्षा गारंटी की स्कूल के पास फेसबुक में लाइव वीडियो भी शेयर किया गया था जिसे मात्र 24 घंटे के भीतर ही 10 हज़ार से अधिक लोगों ने देखा है और विभिन्न प्रकार के मजेदार कमेंट किये जा रहे हैं जिसकी लिंक भी यहां पर नीचे दी जा रही है. इस वीडियो में वह सभी बातें सामने आई हैं जो वर्तमान सरकार के हवा हवाई वादों की पोल को स्पष्ट बयां कर रही है.

फेसबुक वीडियो लाइव लिंक- https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2122566207985583&id=100006966720612

संलग्न - कृपया गंगेव जनपद के हिनौती ग्राम पंचायत के बड़ोखर ग्राम में कीचड़ से वापस लौटती विकाश रथ की फ़ोटो साथ ही बड़ोखर ग्राम की खस्ताहाल कीचड़ से सनी हुई सड़क. 

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139