Saturday, August 4, 2018

बिना पानी ही लग रहे रोपा, 75 प्रतिशत खेत बोवनी बिना (मामला ज़िले में खरीफ वर्ष की बोवनी का जहां इस वर्ष अकाल सी स्थिति बनी हुई है, बारिश बहुत कम और खेत पानी से खाली, मात्र मोटर पंप का सहारा लेकर हो रही बोवनी)

दिनांक 04 अगस्त 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी) 

    रीवा संभाग में वर्ष 2018 की खरीफ बोवनी में अब तक असमंजस की स्थिति बनी हुई है और विशेषकर रीवा ज़िले में इस वर्ष औसत से बहुत कम बारिश होने से अब तक 25 प्रतिशत तक भी बोवनी नही हो पायी है.

    पूरे रीवा ज़िले में भ्रमण किया जाए तो सभी खेत बोवनी से खाली हैं. निचले बांधों को छोंड़कर किसी भी खेत में पानी देखने को नही मिल सकता. इसी से पता चल जाता है कहीं भी लेउ और रोपा योग्य पानी नही है. 

    जिन कास्तकारों के पास अपना स्वयं का मोटर पंप है वही थोड़ा बहुत बोवनी कर पा रहे हैं लेकिन यह स्पष्ट नही है की यदि पानी नही गिरा तो यह खेती पकेगी कैसे? क्योंकि ऊपर से बारिश न होने से निरंतर खिसकते जलस्तर से बोरवेल भी बन्द हो जाएंगे और पीने के पानी तक का संकट उत्पन्न हो जाएगा.

  कैथा और आसपास के किसानों ने मात्र बोई झुरिया खेती

      कैथा, मिसिरा, सेदहा, बड़ोखर, सोरहवा, डाढ़, जमुई, हिनौती, लोटनी, चियार, मदरी, बांस, अमवा आदि नजदीकी ग्रामों में किसानों ने मात्र अब तक झुरिया ही फसल बोई है. वह भी मात्र एक चौथाई. अभी भी 75 प्रतिशत के अधिक खेत खाली हैं. जिन किसानों ने बेहन डाली हुई है उनकी बेहन भी खराब हो चुकी है. लगभग डेढ़ माह से आधिक समय के डाली हुई बेहन अब रोपा लगाने योग्य नही बची है क्योंकि नियमानुसार मात्र 20 से 25 दिवश के अंदर ही रोपा लगा दिया जाना चाहिए नही तो फसल का उत्पादन सही तरीके से नही हों पाता है. 

  कई दिनों से हो रही थी फब्बारे वाली बारिश

    वैसे देखा जाय तो रीवा ज़िले के काफी हिस्सों में पिछले एक सप्ताह से निरंतर फब्बारे वाली बारिश हो रही है. जिस प्रकार से किसी पिकनिक स्पॉट में जाएं तो वहां पर कृत्रिम फब्बारा लगाया हुआ होता है और न तो पानी में उससे बढ़ोत्तरी होती है और न ही कमी आती है. ठीक इसी प्रकार की बारिश पिछले एक सप्ताह से रीवा के विभिन्न हिस्सों में देखने को मिली है जिसकी वजह से न तो किसान झुरिया ही बोवनी कर पाया और रोपा लेउ का तो प्रश्न ही नही उठता क्योंकि फब्बारे वाली बारिश जमीन तक पहुची ही नही.

 खरीफ 2018 घोषित हो सूखाग्रस्त 

     जिस प्रकार से प्रदेश के अधिकतर हिस्सों में अकाल जैसे संभावना बनी हुई है ऐसे में सरकार को चाहिए की गिरदावरी और सर्वे करवाकर तत्काल ऐसे सभी जिलों को सूखग्रस्त घोषित करे जिनमे 30 प्रतिशत के कम अब तक बोवनी हुई है. विशेषतौर पर रीवा संभाग में अब तक की स्थिति के स्पष्ट है की यह पूरी तरह से शूखे की जद में आ चुका है. अब यदि बारिश होती भी है तो जलस्तर बनाये रखने और इकोसिस्टम बरकरार रखने के अतिरिक्त बोवनी योग्य नही होगी क्योंकि अगस्त मध्य में कोई भी खरीफ धान की खेती प्रश्न के दायरे में ही रहने वाली है की उसमे कुछ उपज हो पाएगी की नही क्योंकि मध्य अगस्त में बोई जाने वाली धान की फसल को पर्याप्त पानी की चाहत के साथ साथ कीड़ों मकोड़ों से होने वाली बीमारी आदि के भी खतरा बना रहेगा. इस प्रकार बारिश की किसी अप्रत्याशित स्थिति में मध्य अगस्त तक बोवनी होती भी है तो आगे आने वाली रवी 2018-19 की खेती भी पिछड़ेगी जिससे किसान रवी की फसल में भी मार खा जाएंगे इससे बेहतर यही होगा की 15 अगस्त के बाद किसी भी प्रकार की खरीफ 2018 की बोवनी न ही की जाए तो ज्यादा बेहतर है.

संलग्न - रीवा ज़िले के मायूस किसान और साथ ही खरीफ वर्ष 2018 की कुछ रोपा लगी हुई खेती जिनमे पानी का नामोनिशान तक नही. साथ ही पोखर तालाबों का दृश्य जो पूरी तरह से खाली पड़े हुए हैं. आसपास दिख रहे हरे भरे खेत धान से नही लहलहा रहे बल्कि झरगा फसही और नया चारा घास है जो बोवनी न हो पाने की स्थिति में खेतों में उग आये हैं.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139

सिंगरौली समाचार - सामाजिक हितों की हुई रक्षा, बरसेड़ा का जला ट्रांसफार्मर बदला गया (मामला सिंगरौली बैढ़न के सरई विद्युत वितरण केंद्र अन्तर्गत आने वाले बरसेड़ा आदिवाशी गांव का जहां पर कई सप्ताह से जले हुए 25 केवीए के ट्रांसफार्मर को चीफ इंजीनियर एवं डी ई बैढ़न के हस्तक्षेप के बाद 3 अगस्त को रात बदला गया, सामाजिक कार्यकर्ता ने प्राप्त सूचना पर ट्विटर पर भेजा था संदेश)

दिनांक 04 अगस्त 2018, स्थान - बैढ़न सिंगरौली, मप्र

(शिवानन्द द्विवेदी)

   सामाजिक और मूलभूत मानवाधिकार के हितों की रक्षा की दिशा में एक और कदम. मामला है बैढ़न सिंगरौली जिले का जहां पर रीवा से कार्य कर रहे हरीश मिश्रा नामक युवक ने सरई विद्युत वितरण केंद्र अन्तर्गत आने आले बरसेड़ा आदिवाशी बस्ती के 25 केवीए के फैल ट्रांसफार्मर की सूचना सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी को मोबाइल एवं व्हाट्सएप्प के माध्यम से पिछले हफ्ते दी थी. जिस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए सामाजिक कार्यकर्ता ने संबंधित जे ई सरई एवं वहां सिंगरौली के कार्यपालन अभियंता ग्रामीण से उनके मोबाइल पर संपर्क कर बात की थी. इस पर उसी समय समस्या के समाधान का आश्वासन जे ई एवं ई ई द्वारा दिया गया था. चूंकि प्रदेश के सतना एवं सागर ट्रांसफार्मर स्टोर में उस समय अनुपलब्धता भी चल रही थी अतः इसका भी हवाला विभागीय अधिकारियों द्वारा दिया गया था.

ट्विटर के माध्यम से भी उच्चस्तर तक पहुचाया संदेश

    सिंगरौली ज़िले के सरई डीसी अन्तर्गत आने वाले बरसेड़ा ग्राम के आदिवाशी बस्ती के 25 केवीए के फैल ट्रांसफार्मर की जानकारी संबंधित चीफ इंजीनियर श्री के एल वर्मा को भी उनके ट्विटर हैंडल पर प्रेषित की गई थी जिस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए श्री वर्मा ने दिनाँक 2 अगस्त के भीतर ट्रांसफार्मर बदले जाने का संदेश ट्विटर रिप्लाई में सामाजिक कार्यकर्ता को भेजा था.

   इस प्रकार दिनांक 04 अगस्त को बिजली विभाग के डी ई बैढ़न द्वारा जानकारी दी गई की ट्रांसफार्मर 02 अगस्त को ही आ गया था और बरसेड़ा में व्यवस्थित रख दिया गया था लेकिन बारिश की वजह से दिनांक 03 अगस्त की रात को 11 बजे जाकर लग पाया. डी ई बैढ़न द्वारा बताया गया की वह स्वयं भी मौके पर गए थे और रात में बरसेड़ा आदिवाशी बस्ती का ट्रांसफार्मर बदलवा कर आये हैं. इस प्रकार यह स्प्ष्ट है की विभाग जनता के प्रति काफी संवेदनसील है और सरकार की योजनाओं के सही क्रियान्वयन और समय पर क्रियान्वयन हो इसके लिए मुस्तैद भी है.

    इस जानकारी की पुष्टि बैढ़न सिंगरौली में कार्य कर रहे रीवा निवासी हरीश मिश्रा ने की है और संलग्न मोबाइल व्हाट्सएप्प संदेश के माध्यम से बताया है की दिनाँक 03 अगस्त की रात को स्वयं डी ई बैढ़न आकर आदिवशियों के लिए जला हुआ ट्रांसफार्मर बदलवाकर गए हैं.

संलग्न-  कृपया संलग्न अटैच्ड फ़ोटो देखने का कष्ट करें जिंसमे बदला हुआ ट्रांसफार्मर की फ़ोटो के साथ साथ ट्विटर और व्हाट्सअप के संदेश की स्क्रीनशॉट भी संलग्न है.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, 

ज़िला रीवा मप्र. 9589152587, 7869992139

Friday, August 3, 2018

पत्रकार की छवि धूमिल करने वाले अधिवक्ता शिव कुमार पांडे के खिलाफ पत्रकार करेगा  मानहानि का केस


दिनाँक 03 जुलाई 2018, रीवा मप्र

*👉पत्रकार की छवि धूमिल करने वाले अधिवक्ता शिव कुमार पांडे के खिलाफ पत्रकार करेगा  मानहानि का केस ।।                                                 

◆दैनिक जागरण कार्यालय में भेजा था संपादक और पत्रकार वीएन पटेल के नाम  नोटिस l।           

◆ अंततः केस हारा अधिवक्ता शिव कुमार पांडे , सच्चाई की हुई जीत ।।

*👉गंगेव ब्यूरो* -: कहते ही सच्चाई की कभी हार नहीं होती है और झूठ कभी जीतता नहीं है जी हां हम बात कर रहे हैं मनगवां तहसील की हल्का सर ग्राम पंचायत पुरवा 310 में अपनी ही जमीन पर घर का निर्माण कर रहे विष्णु पटेल पिता अयोध्या प्रसाद पटेल के नाम पर जो जमीन थी  और उस पर मकान बन चुका था लेकिन नक्शा गलत होने के कारण अधिवक्ता शिव कुमार पांडे द्वारा जमीन पर फर्जी स्थगन आदेश लाकर मकान बनने से रुकवा दिया था जिसका एक साल केस चलने के बाद विष्णु पटेल पिता अयोध्या प्रसाद पटेल की रीवा मजिस्ट्रेट से जीत हुई विष्णु पटेल की पैरवी करने वाले अधिवक्ता बृजेंद्र चतुर्वेदी ने किया बता देगी सच्चाई की कभी हार नहीं होती हार होती है तो झूठ की ही होती है l. 

 *👉 संपादक के नाम भेजा था नोटिस-:* 

बता दें कि इस मामले को लेकर विष्णु पटेल पिता अयोध्या  प्रसाद पटेल निवासी पुरवा 310 ने खबर प्रकाशित की थी जिस दैनिक जागरण के पेज में' मकान हड़पने का आरोप' अधिवक्ता शिवकुमार पांडे निवासी गंगेव के ऊपर लगाया था जिसमें शिव कुमार पांडे ने वकील होने का फायदा उठाते हुए दैनिक जागरण के संपादक के नाम एवं पत्रकार बी एन पटेल के नाम नोटिस भेजा था जिसमें पत्रकार बी एन पटेल की छवि धूमिल करने वाले अधिवक्ता शिव कुमार पांडे के खिलाफ रीवा में मानहानि का दावा प्रस्तुत किया जाएगा और मकान पर रोक लगाने पर क्षतिपूर्ति का केस भी किया जाएगा l.                                   

  *👉ब्यूरो रिपोर्ट वीएन पटेल गंगेव*

जमुई और बांस का जला ट्रंसफॉर्मेर बदला गया (मामला ज़िले के कटरा विद्युत वितरण केंद्र अन्तर्गत आने वाले जमुई के 100 केवीए एवं बांस टिकुरी गांव का 25 केवीए के जले हुए ट्रांसफॉमर का जहां पर कई दिनों से जले हुए ट्रांसफार्मर को दिनांक 03 जुलाई को बदल दिया गया)

दिनांक 03 जुलाई 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

  ज़िले के कटरा विद्युत वितरण केंद्र अन्तर्गत आने वाले जमुई, करहिया, एवं लालगांव डीसी के बांस टिकुरी आदि ग्रामों का ट्रांसफार्मर पिछले कई सप्ताह से जला हुआ बताया गया था लेकिन विभाग में नए ट्रांसफार्मर उपलब्ध न हो पाने की वजह से लगाने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था.

   जमुई एवं बांस टिकुरी का ट्रांसफार्मर बदल दिया गया

   त्योंथर कार्यपालन अभियंता से प्राप्त जानकारी के अनुसार दिनांक 03 जुलाई को जमुई ग्राम का 100 केवीए का पिछले कई महीनों से जला हुआ ट्रांसफार्मर बदल दिया गया है इसी प्रकार लालगांव डीसी अन्तर्गत बांस-टिकुरी नामक ग्राम का भी 25 केवीए का ट्रांसफार्मर जल गया था जिसे वहीं के निवासी देवेंद्र तिवारी द्वारा ट्विटर के माध्यम से भी चीफ इंजीनियर श्री के एल वर्मा को सूचित किया गया था जिसे दिनांक 03 जुलाई को ही सतना स्टोर में उपलब्ध होने पर बदल दिया गया है.

    त्योंथर विद्युत संभाग के कार्यपालन अभियंता श्री आर सी पटेल द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी को जानकारी दी गई है की दिनांक 03 जुलाई को सतना स्टोर से 100 केवीए का ट्रांसफार्मर प्राप्त हुआ है इसी प्रकार कुछ 25 केवीए के भी ट्रांसफार्मर मिले हैं जिन्हें प्राथमिकता के आधार पर संबंधित जगहों में बदल दिया गया है.

   कार्यपालन अभियंता श्री पटेल द्वारा बताया गया की पूरे त्योंथर विद्युत संभाग में चार 100 केवीए, चार 63 केवीए एवं आठ 25 केवीए के ट्रांसफार्मर के जले और फैल थे जिनकी जानकारी उच्चस्तर पर सतना आफिस और सीई आफिस को भेजा गया था लेकिन ऊपर से बताया गया था की प्रपोजल स्वीकृत होने के बाद भी सतना स्टोर में ट्रांसफार्मर की उपलब्धता न हो पाने के कारण नही बदले जा सके थे. 

सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा ट्विटर पर सतत उठाया मुद्दा

   ज़िले एवं रीवा संभाग में जले हुए ट्रांसफार्मर न बदले जाने के मामले को ट्विटर के माध्यम से निरंतर उच्चस्तरीय बिजली विभाग एवं मप्र ऊर्जामंत्री श्री पारस जैन के समक्ष रखा जाता रहा है जिस पर समय समय पर संज्ञान भी लिया जाता रहा है. इस विषय में त्योंथर संभाग के कार्यपालन अभियंता श्री आर सी पटेल की जानकारी के आधार पर मामला सामाजिक तौर पर भी ऊर्जामंत्री एवं चीफ इंजीनियर श्री वर्मा तक रखा गया था जिस पर चीफ इंजीनियर ने ट्विटर पर जल्द ही ट्रांसफार्मर की उपलब्धता होने पर बदले जाने का आश्वासन दिया था. 

 जले ट्रांसफार्मर बदले जाने से किसानों के चेहरे में लौटी आशा की किरण

    अब चूंकि इस वर्ष मानसूनी बारिश भी नही हो रही है ऐसे में रीवा संभाग के किसानों का एकमात्र सहारा मोटर पंप से सिंचाई ही बचा हुआ है. ऐसे में जिन जिन क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर जले हुए हैं ऐसे किसानों को चिंतित और परेशान होना स्वाभाविक है. पर अब जब सामाजिक प्रयाशों एवं साथ ही सरकार की चुनावी योजनाओं से जले हुए ट्रांसफार्मर बदले जा रहे हैं ऐसे में मायूस किसानों के चेहरे पर आशा की किरण लौट रही है.

संलग्न -  ट्रांसफार्मर तस्वीर.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा, मप्र. मोब 7869992139, 9589152587.

दिव्यांग पीड़ित भटक रहा मुआबजे और उपकरण को (मामला ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत आने वाले मदरी ग्राम पंचायत का जहां पीड़ित दिव्यांग मुनिमहेश पटेल को साल भर से नही मिला घर में आग लगने का मुआबजा साथ ही निःशक्त कल्याण विभाग नही दे रहा स्वचालित मशीन)


दिनांक 03 अगस्त 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत मदरी पंचायत निवासी मुनिमहेश पटेल उम्र लगभग 30 वर्ष को उसके घर में बिजली की वजह से आग लगने का मामला प्रकाश में आया है साथ ही पीड़ित दिव्यांग को सामाजिक निःशक्त कल्याण विभाग द्वारा दिए जाने वाले अन्य लाभों का न मिलने का भी मामला प्रकाश में आया है. 

   मिली जानकारी अनुसार मदरी निवासी मुनिमहेश पटेल द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी को बताया गया की पीड़ित के घर में अप्रैल 2018 के दूसरे सप्ताह में बिजली के तार की वजह से आग लग जाने के कारण पूरा घर आग के हवाले हो गया था जिसकी की शिकायत पीड़ित ने तहसीलदार सिरमौर और साथ ही पुलिश विभाग में की थी जिस पर जांच के लिए हल्का पटवारी मदरी माझी आया हुआ था और उसने बताया था की अपना प्रतिवेदन सिरमौर तहसीलदार को दिया था. लेकिन आज 5 से 6 माह होने को हैं पर पीड़ित को कोई जानकारी नही दी गई की इस विषय में क्या कार्यवाही की गई है.

   इसी प्रकार पीड़ित मुनिमहेश पटेल द्वारा जानकारी दी गई की किसी दुर्घटना में उसका एक पैर घुटने से बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था और अब वह बिना पैर का है. उसने झिरिया रीवा में विकलांगता प्रमाणपत्र भी प्राप्त किया है जिसके आधार पर उसे 3 सौ रुपये प्रतिमाह की निःशक्त कल्याण विभाग से दी जाने वाली पेंशन दी जा रही है. साथ ही एक शिविर में पीड़ित को कटे हुए पैर का भाग भी प्राप्त हो चुका है. लेकिन पीड़ित द्वारा जानकारी दी गई की उन्हें स्वचालित मोटर ट्राई साईकल चाहिए जिसे विभाग नही दी रहा है अतः पीड़ित तीन पहिया मोटर चलित स्वचालित गाड़ी की माग की है.

ट्विटर पर मदद की अपील

  एक ट्विटर संदेश के माध्यम से मदरी निवासी सामाजिक कार्यकर्ता स्वतंत्र शुक्ला ने मप्र के मुख्यमंत्री सहित अन्य को टैग करते हुए पीड़ित मुनिमहेश पटेल के लिए मदद की गुहार लगाई है जिसका अब तक कोई उन्हें जबाब प्राप्त नही हुआ है. 

संलग्न - कृपया संलग्न तस्वीर में देखें पीड़ित मुनिमहेश पटेल निवासी मदरी की अपने कृत्रिम पैर के साथ फ़ोटो.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र. मोबाइल 7869992139, 9589152587

Thursday, August 2, 2018

कैथा प्राथमिक शाला शौचालय एवं पानी विहीन, सरपंच संत कुमार पटेल ने शौचालय जेसीबी से गिरवाया (मामला ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत कैथा पंचायत का जहां पर शासकीय प्राथमिक पाठशाला का पुराना शौचालय भी वर्तमान कैथा सरपंच संत कुमार पटेल ने जेसीबी लगवाकर गिरा दिया, अब स्कूल में न तो शौचालय है और न ही पानी की व्यवस्था, छोटे स्कूली बच्चे भटक रहे दर दर , क्या यही हैं अच्छे दिन?)


दिनांक 02 अगस्त 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

     ज़िले के गंगेव जनपद अन्तर्गत ग्राम पंचायतों में भष्ट्राचार का सिलसिला रुकने का नाम नही ले रहा है. शिकायतों के बाबजूद भी विभागीय मिलीभगत के चलते लीपापोती की जा रही है. ऐसे में स्पष्ट हो चुका है की पीड़ितों और जनहित में कार्य करने वालों के लिए न्यायालय से ही रिलीफ मिल सकती है जहां पर पीआईएल डालकर कोर्ट से हस्तक्षेप की अपील की जाए. आज वर्तमान भारतीय प्रशासनिक परिदृश्य में कार्यपालिका पूरी तरह से फैल नज़र आ रही है और इस पर भरोषा किये बैठे व्यक्ति को अंत में मयूषी ही हाथ लगने वाली है.

  सरपंच ने कैथा प्राथमिक शाला का शौचालय जेसीबी लगाकर गिराया 

   पिछले कई वर्षों से कैथा पंचायत के पंचायत भवन को विभाग द्वारा छतिग्रस्त बताया जा रहा था. वास्तव में पंचायत भवन इतना क्षतिग्रस्त तो नही था परंतु रखरखाव के अभाव में कमज़ोर अवश्य हो गया था जिससे इसका बहाना बनाकर पंचायत भवन कैथा पंचायत को ग्राम इटहा के पुराने स्कूल परिसर में लगाया जाता रहा है. वैसे साल भर में मात्र एक या दो बार ही बमुश्किल पंचायत भवन खोला गया होगा क्योंकि यहां ग्रामसभा मात्र कागजों पर ही चली हैं.  

   वहरहाल इस पंचायत भवन के पुनर्निर्माण को लेकर पंचायतराज संचालनालय से लगभग 15 लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं जिसको तोड़कर बनाया जाना है.

   इसी पंचायत भवन से सटा हुआ कैथा प्राथमिक स्कूल का पुराना शौचालय बना हुआ था जिसे सरपंच संत कुमार पटेल ने जेसीबी लगवाकर तुड़वा दिया है और आज 3 महीने होने को हैं स्कूल के बच्चे शौचालय विहीन हो चुके हैं और कास्तकारों के खेतों में जाते हैं जिससे वहां से इनाम के रूप में उन्हें गाली मिल रही है.

   ऐसे में जब स्कूल प्रशासन से जानने का प्रयास किया गया तो वहां उपस्थित शिक्षक कन्हैयालाल केवट, मुमताज़ मोहम्मद एवं अन्य द्वारा जानकारी दी गई की हमने टॉयलेट तोड़ने के लिए मना किया था लेकिन सरपंच के जबरन शौचालय तोड़वा दिया और बोला की यहां पर शौचालय बनवा दिया जाएगा. लेकिन आज 3 माह से अधिक का समय व्यतीत हो चुका है और न तो शौचालय ही बनाया गया है और न ही इसके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था ही की गई है.

    कैथा गांव के उग्रभान पटेल पिता स्व. रामानंद पटेल एवं मुनेंद्र पटेल उर्फ कल्लू पटेल दवारा बताया गया की हमने इसका विरोध किया है क्योंकि हमारे बच्चे स्कूल पढ़ने जाते हैं परंतु न तो स्कूल प्रशासन ने ही कोई कार्यवाही की है और न ही पंचायत विभाग ने. कल्लू पटेल ने तो यहां तक बताया की उसने शौचालय के मुद्दे को लेकर सीएम हेल्पलाइन में कंप्लेंट भी दर्ज की थी जिसकी जांच करने के लिए हिनौती उच्चतर माध्यमिक पाठशाला के सीएसी आये थे जिस पर लिखा पढ़ी करके ले गए हैं और मेरी इक्षा के विरुद्ध मुझसे भी सहमति पत्र लिखवा लिए हैं. सीएसी ने बताया है की यद्यपि प्रपोजल बनाकर आगे भेज दिया जा रहा है, अब आगे विभाग का काम है की शौचालय निर्माण होता है की नही.

   इस प्रकार देखा जा सकता है कैथा स्कूल शौचालय विहीन है और जो भी शेष बचा हुआ था उसको वर्तमान सरपंच संत कुमार पटेल ने जेसीबी से गिरवा दिया है.

कैथा प्राथमिक शाला में पीने के स्वच्छ पानी का भी है भीषण संकट 

     बता दें शौचालय का न होना तो एक बात है ही, कैथा की शासकीय प्राथमिक पाठशाला में पीने के स्वच्छ पानी का भी भीषण संकट है. कई वर्षों पहले एक नलकूप करवाया गया था लेकिन इसका पानी पीने योग्य नही होने से बच्चे पहले भी इस पानी को नही पीते थे. अभी पिछले वर्ष तक इस पानी का प्रयोग स्वसहायता समूह के कार्यकर्ता मध्यान्ह भोजन बनाते समय साफ सफाई एवं बर्तन माजने में किया करते थे लेकिन स्कूल शिक्षकों और स्वसहायता समूह के कार्यकर्ताओं द्वारा जानकारी दी गई की पिछले वर्ष से यह नलकूप भी कार्य करना बन्द कर दिया है. और अब बर्तन धोने के लिए भी पानी नही मिल पा रहा है पीने की तो बात ही दूर की है. 

   वहरहाल स्कूल परिसर से लगभग 500 मीटर की दूरी पर स्थित एक नलकूप लोहार बस्ती के पास लगाया हुआ है जहां से मध्यान्ह भोजन बनाने और पीने का काम चल रहा है.

    स्कूल प्रशासन ने जानकारी दी है की इस बाबत कई बार संबंधित पीएचई एवं स्कूल शिक्षा विभाग सहित पंचायत विभाग को भी अवगत कराया जा चुका है. मुमताज़ मोहम्मद कैथा स्कूल हेड मास्टर द्वारा जानकारी दी गई है की हमने लिखित भी जनसंवाद शिविर सहित अन्य माध्यमो से आवेदन और जानकारी भेजी है लेकिन आज तक इस विषय में न तो पंचायत विभाग ने कोई एक्शन लिया है और न ही स्कूल शिक्षा विभाग अथवा पीएचई विभाग ने.

संलग्न - कृपया संलग्न तस्वीरों में देखें - 

  1) बिना शौचालय और पानी का स्कूल परिसर,

  2) स्कूल परिसर में उपस्थित पांचवीं तक के छोटे बच्चे.

  3) खराब पड़ा एकमात्र नलकूप जिसका पानी ही पीने योग्य नही है.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 7869992139, 9589152587

सरई पंचायत की 1.5 किमी सड़क गड्ढों कीचड़ में तब्दील (मामला ज़िला रीवा अन्तर्गत गंगेव ब्लॉक एवं सरई ग्राम पंचायत का जहां आज पैसा सैंक्शन होने के बाद भी सड़क पर नही किया गया काम, आम जनता गद्दों और कीचड़ में मरने को मजबूर)


दिनांक 02 अगस्त 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

   ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत ग्राम पंचायत सरई कला के रामराज सिंह के घर से तालाब के पास बजरंगबली मन्दिर तक की सड़क जिसकी लंबाई 1.5 किलोमीटर है उसके निर्माण में हीलाहवाली एवं भष्ट्राचार का मामला प्रकाश में आया है.

   ग्राम पंचायत सरई कला के आनंद द्विवेदी द्वारा सूचना दी गई है की ग्राम पंचायत सरई कला के रामराज सिंह के घर से तालाब के पास बजरँगबली तक की रोड का ठेका हो चूका है फिर भी आज तक ठेकेदार या विभाग द्वारा किसी प्रकार की देखभाल नही की गई एक बार विभाग के चपरासी टाइम कीपर द्वारा नाप किया जा चूका है 1200 ग्रामीण वासियों को आये दिन मौत का सामना करना पड़ता है रास्ते में 3 फिट के गड्ढे हैं कोई भी विभागीय कर्मचारी नही आए.

  इस प्रकार देखा जा सकता है विभागीय उदाशीनता एवं पंचायती भष्ट्राचार के चलते हर एक गांव का आम नागरिक कीचड़ और गड्ढों से सनी हुई सड़क पर चलने को मजबूर हो चुका है. 

   सरकारें तो बड़े बड़े दावे कर रही हैं गांव गांव को मुख्य सड़क मार्ग से जोड़े जाने की बातें कर रही हैं लेकिन वास्तविकता में कहीं कुछ होता हुआ नही दिख रहा है. इसका जीता जागता प्रत्यक्ष उदाहरण है सरई ग्राम पंचायत की सड़क जहां आम जनता मरने पर मजबूर है, बरसात के इन दिनों में कोई न तो मेडिकल फैसिलिटी प्राप्त की जा सकती है और न ही कोई एम्बुलेंस अथवा जननी एक्सप्रेस ही आ सकती है ऐसे में स्पष्ट है की यदि किसी गर्भवती महिला को कोई समस्या पैदा हो जाए अथवा कोई बीमार पड़ जाए तो ऐसे मौसम और इस प्रकार की सड़क में उसका मरना तय है.

संलग्न - संलग्न तस्वीरों में देखें किस तरह से 1.5 किमी की सरई ग्राम पंचायत की सड़क गड्ढों और कीचड़ में तब्दील हो चुकी है जिसे देखने वाला कोई नही.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 7869992139, 9589152587