Thursday, August 22, 2019

ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा निर्माण एवं मरम्मत में 82 लाख के घोटाले की असंका - शिवानन्द द्विवेदी (मामला जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का जिनमे सिरमौर, गंगेव, लौआ,रंगोली स्वास्थ्य केंद्रों के लिए स्वीकृत राशि रुपये 82 लाख दस हज़ार की बंदरबाट की असंका, कहीं किसी अस्पताल में नही हुआ कोई विशेष कार्य, मानवाधिकार आयोग की शिकायत में हुआ खुलासा)

दिनांक 23 अगस्त 2019, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र
   (शिवानन्द द्विवेदी, रीवा मप्र)
  सामाजिक एवं मनावाधिकार एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी द्वारा गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को लेकर अध्यक्ष मप्र राज्य मानवाधिकार आयोग अरेरा हिल्स भोपाल को लिखे गए पत्र के जबाब में लगभग एक वर्ष बाद एक लेटर प्राप्त हुआ है जिंसमे गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के साथ साथ जिले के अन्य चार ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों सिरमौर, गंगेव, लौआ,रंगोली के विषय मे निर्माण कार्यों उन्नयन एवं मरम्मत विषय मे संचालनालय स्वास्थ्य सेवाओं द्वारा जानकारी भेजी गई है जिसमे बताया गया है कि कुल 82 लाख दस हज़ार रुपये विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए सैंक्शन हुए थे परंतु अब तक कार्य पूर्ण नही किया जा सका है।
  ह्यूमन राइट्स कमीशन भोपाल से आया पत्र
    मप्र राज्य मानवाधिकार आयोग भोपाल द्वारा एक्टिविस्ट द्विवेदी को दिनाँक 29 जून 2019 को भेजे गए पत्र क्रमांक 19290/7300/रीवा/18 में यद्यपि यह कहा गया है कि राशि आवंटन एवं निर्माण कार्य में कोई बाधा उत्पन्न होना सम्भव नही है और प्रकरण को नस्तीबद्ध कर दिया गया है लेकिन वास्तव में धरातल पर आज दिनांक तक गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कोई भी कार्य सम्पादित नही हुआ है।
  संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं भोपाल ने आयोग को दिया यह जबाब
    एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी की आयोग के समक्ष याचिका पर जब मानवाधिकार आयोग ने संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं मप्र भोपाल को प्रकरण क्रमांक/9870/7300/रीवा/2018 दिनांक 28 मार्च 2019 के माध्यम से लिखा तब संचालनालय ने अपने पत्र क्रमांक/5/भवन/सेल-1/2019-20/879/ दिनांक 3.5.2019 का हवाला देकर आयोग को बताया कि सियाराम साहू अवर सचिव लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग मप्र शासन भोपाल द्वारा आयुक्त स्वास्थ्य सेवाएं मप्र शासन को दिनांक 01.08.2013 को पत्र क्रमांक एफ 16 -1/2013/सत्रह/मेडि -3 भोपाल लिखकर सामान्य क्षेत्र के अंतर्गत ग्रामीण स्वास्थ्य संस्थाओं में विभिन्न निर्माण कार्यों हेतु प्रशासकीय स्वीकृति हेतु पत्र जारी किया गया था। जिसमे रीवा जिले के चार ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों जिसमे सिरमौर, गंगेव, लौआ,रंगोली एवं शाजापुर जिला में तिलावद मैना सम्मिलित है इनके लिए राशि क्रमसः 42 लाख 26 हज़ार रुपये,  24 लाख 89 हज़ार रुपये, तीन लाख 70 हज़ार रुपये, 6 लाख 83 हज़ार रुपये एवं 4 लाख 42 हज़ार रुपये की स्वीकृति हुई थी इस प्रकार कुल 82 लाख 10 हज़ार रुपये स्वीकृत होने के बाबजूद भी उक्त किसी भी स्वास्थ्य केंद्र में नियमानुसार कार्य का होना नही पाया गया है।
    गंगेव स्वास्थ्य केंद्र विषयक अपर संचालक वित्त मप्र शासन का चीफ इंजीनियर पीडब्ल्यूडी को पत्र
    एक्टिविस्ट द्विवेदी की शिकायत एवं ह्यूमन राइट्स कमीशन के पत्र को आधार बनाकर दिनांक 29 मार्च 2019 को अपर संचालक वित्त संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं मप्र शासन भोपाल द्वारा प्रमुख अभियंता लोक निर्माण विभाग अरेरा हिल्स भोपाल के नाम पत्र क्रमांक/5/भवन/2018-19/676 जारी किया गया जिसमें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गंगेव जिला रीवा के अधूरे/जर्जर भवन हेतु आवंटन उपलब्ध कराए जाने विषयक लेख लिखा गया जिसमें अवर सचिव मप्र शासन लोक निर्माण विभाग के पत्र क्रमांक/127/99/2018/19/यो भोपाल दिनांक 24 जनवरी 2019 एवं मॉनव अधिकार आयोग भोपाल के पत्र क्रमांक 1333/3154/होशंगाबाद/18 दिनाँक 11 जनवरी 2019 का हवाला दिया गया जिसमें लेख किया गया कि व्यय राशि की जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
  82 लाख से अधिक राशि व्यय लेकिन कार्य का पता नही
    बता दें कि उपरोक्त सभी कार्यों के लिए संचालनालय स्वास्थ्य सेवाओं मप्र शासन द्वारा पीडब्ल्यूडी सहित जो भी जानकारी एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी की शिकायत पर मॉनव अधिकार आयोग भोपाल को उपलब्ध कराई गई है उससे एक बात भलीभांति स्पष्ट हो चुका है कि यद्यपि राशि का आवंटन और आहरण तो कर लिया गया है लेकिन भौतिक धरातल पर कहीं भी नियमानुसार कार्य का होना नही पाया गया है।
  गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हेतु 24 लाख 89 हज़ार रुपये आवंटित
   उक्त आदेश में जहां 82 लाख 10 हज़ार के कार्य मे जिला रीवा के 4 अस्पताल सम्मिलित थे वहीं सबसे ज्यादा राशि का आवंटन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिरमौर के लिए 20 बिस्तरीय वार्ड के निर्मान के लिए 42 लाख 26 हज़ार आवंटित हुए थे वहीं गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जीर्णशीर्ण भवन के सुधार कार्य के लिए 24 लाख 89 हज़ार आवंटित हुए थे। लेकिन जहां आवंटित राशि के हिसाब से जहां सिरमौर अस्पताल में भी 20 वार्डों का उन्नयन ठीक से नही हो पाया वहीं गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की जीर्णशीर्ण स्थिति यथावत बनी हुई है जिसमे मालमवेसी बांधने और पशुओं को रखने जैसी स्थिति अभी भी बनी हुई है।
  गंगेव स्वास्थ्य केंद्र का पिछले वर्षों उठा मुद्दा
    वर्ष 2017 में गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के जीर्णशीर्ण होने का मुद्दा सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा उठाया गया जब गर्मियों में अकस्मात विजिट में पाया गया कि न तो पानी पीने के लिए कोई व्यवस्था थी और न ही दवा स्टोर रूम। इसी प्रकार जब बरसात आयी तो पता चला कि जो दवा रूम था उसमें छत से पानी टपक रहा था। जब तत्कालीन बीएमओ देवव्रत पांडेय से जानकारी चाही गयी तो उन्होंने बताया कि यह कार्य पीडब्ल्यूडी विभाग को सौंपा गया था जिसमे कोई हिनौती पंचायत का ठेकेदार सुरेश चतुर्वेदी कार्य कर रहा है। लेकिन बीच मे ही पैसा हजम करके भाग गया है। अंदर देखने पर पाया गया कि जहां वार्ड बना हुआ था वह भवन भी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त था जहाँ पर मरीजों को बैठने तक के लिए जगह नही थी।
   मीडिया में उठा था मामला
    गंगेव सामुदायिक स्वस्थ्य केंद्र में अव्यवस्था का मामला उस समय मीडिया में भी उठा था। जिसके बाद रीवा में हड़कंप मच गया था जिससे सीएमओ और बीएमओ एवं संवंधित ठेकेदार एवं पीडब्ल्यूडी विभाग को जबाब देने की स्थिति पैदा हुई थी। इसके बाद न्यूज़पेपर का हवाला देकर सामाजिक कार्यकर्ता द्विवेदी द्वारा मामला ट्विटर एवं ईमेल आदि के माध्यम से उच्चाधिकारियों एवं भोपाल नई दिल्ली तक रखा गया था। साथ ही मामले को मप्र राज्य मानवाधिकार आयोग भोपाल को भी लिखा गया था जिस पर उपरोक्त जबाबी कार्यवाही की गई है।
   जनहित के मामलों में आयोग की नही है गंभीरता - शिवानन्द द्विवेदी
    यद्यपि गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र वाले मामले को गौर से देखा जाय तो आयोग को लिखे जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग मप्र भोपाल एवं पीडब्ल्यूडी विभाग भोपाल के कानों में जूं तो रेंगी और कुछ कागज़ी कार्यवाही तो की गई है लेकिन यह अपर्याप्त है क्योंकि मात्र कागज़ी कार्यवाही हो जाने और पत्रों के आदान प्रदान हो जाने भर से कुछ नही होता। वास्तव में आयोग को यह भी देखना था कि आखिर जितनी राशि स्वास्थ्य विभाग द्वारा उक्त सभी स्वस्थ्य केंद्रों के उन्नयन और मरम्मत आदि के लिए जारी किए गए उनका उपयोग हुआ है कि नही। मात्र संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं भोपाल एवं पीडब्ल्यूडी भोपाल के पत्राचार के आधार पर पूरे प्रकरण को नस्तीबद्ध कर देना उचित नही है। इससे मानवाधिकार के संरक्षण के लिए कार्य करने वाले एक्टिविस्टों शिवानन्द द्विवेदी जैसे जुझारू लोगों के लिए भी कार्य के बोझ को बढ़ाना ही है। इसमे आयोग से और भी निगरानी की उम्मीद की जाती है।
संलग्न - कृपया मप्र राज्य मानवाधिकार आयोग भोपाल द्वारा भेजे गए वह समस्त कागज़ात, पत्राचार के दौरान संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं एवं पीडब्लूडी भोपाल,  लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के पत्र एवं जांच प्रतिवेदन आदि की फ़ोटो भी देखें।
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शिवानन्द द्विवेदी

सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता

जिला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587











आयुष अस्पताल जमुई को मिला डॉक्टर, मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान (मामला जिले के त्योंथर ब्लॉक अन्तर्गत जमुई ग्राम का जहां पर पिछले दसकों से नही था कोई डॉक्टर, एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी के प्रयासों से अनसुने अनजाने आयुष केंद्र को पार्ट टाइम मिला डॉक्टर,सप्ताह में दो दिन रहेगी ड्यूटी)

दिनांक 23 अगस्त 2019, स्थान - त्योंथर ब्लॉक रीवा मप्र


   (शिवानन्द द्विवेदी, रीवा मप्र) 


    जिले के आयुष अस्पतालों की स्थिति दयनीय बनी हुई है। जिले में स्थित आयुर्वेदिक अस्पतालों की सुध लेने वाला कोई नही है। जबकि देखा जाय तो आयुर्वेद भारत की सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धति है जिसको आज भी भारत के लोग प्राथमिकता के तौर पर देखते हैं। ग्रामीण परिवेशों में रहने वाले लोग हों कि शहरी क्षेत्र में सभी आयुर्वेद को सबसे पहले आजमाते हैं। आज विश्वभर में बाबा रामदेव की दिव्य फार्मेसी,  डाबर, वैद्यनाथ, श्री आयुर्वेद, हिमालय फार्मा आदि जानी मानी आयुर्वेदिक संस्थानों के उत्पाद बिना किसी डॉक्टर की सलाह के दुकानों पर उपलब्ध रहते हैं। च्यवनप्राश तो बहुत ही आम है। चूर्ण, गैस, हार्ट, डायबिटीज, बीपी, आदि के नुस्खे सभी प्रमुख आयुर्वेदिक दुकानों और सामान्य दुकानों में भी खरीदे जा सकते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है भारत मे आयुर्वेदिक परंपरा का रचा बसा होना।

जमुई आयुष अस्पताल को मिला डॉक्टर

   जहां पिछले वर्ष 2018 तक यह स्थिति थी कि जमुई आयुष अस्पताल को स्वीपर और क्लर्क संचालित कर रहे थे उसी मामले को जब सामाजिक कार्यकर्ता एवं ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी द्वारा मानवाधिकार आयोग मप्र भोपाल में लिखा गया तो आयोग ने पत्र क्रमांक/12/893/7886/रीवा/18 भोपाल दिनांक 01.06.2019 जिला आयुष अस्पताल रीवा को जारी किया साथ ही मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी रीवा पत्र क्रमांक /मा0 अ0 आ0/ 19/13046 दिनांक 08.05.2019 भी जारी किया जिसमें जमुई आयुष अस्पताल में रिक्त पद के विरुद्ध चिकित्सीय कार्यव्यवस्था की दृष्टि से स्थानीय कार्यालय के आदेश क्रमांक स्था0/2019/1754-1763 रीवा दिनांक 27.05.2019 डॉक्टर ध्यानेन्द्र प्रताप सिंह आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी शाशकीय आयुष औषधालय रामपुर की ड्यूटी सप्ताह में दो दिन लगाई जाकर चिकित्सक की पूर्ति कर दी गयी है। यह आदेश डॉक्टर नीरजा शुक्ला जिला आयुष अधिकारी द्वारा इस बाबत दिनाँक 27 मई 2019 को दिया गया है।

    इस प्रकार जनहित के ऐसे अछूते मुद्दे जिसे दसकों से कोई देखने वाला नही था उस पर एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी के पत्र पर मनवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया और कार्यवाही हुई। निश्चित तौर पर सप्ताह में दो दिन ही सही आयुष चिकित्सक की उपलब्धता के बाद स्थिति काफी हद तक सुधरेगी और पीड़ित लोगों को आयुर्वेदिक इलाज का लाभ मिल सकेगा।

संलग्न - कृपया संलग्न आयुष विभाग एवं मानवाधिकार आयोग भोपाल के समस्त पत्र देखें।

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शिवानन्द द्विवेदी
सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता
जिला रीवा मप्र मोबाइल 9589152587


1000 गोशालाओं के इंतज़ार में मप्र के बेसहारा गोवंश (मामला प्रदेश के बेसहारा गोवंशों का जिनका खरीफ सीजन आने से एकबार फिर जीवन संकट में दिख रहा है, रीवा में बननी हैं 33 गोशालाएं, 30 के टीएस जारी प्रत्येक की 27 लाख 62 हज़ार है लागत, पर धरातल पर नही बनी एक भी गोशाला)

दिनांक 23 अगस्त 2019, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र
   (शिवानन्द द्विवेदी, रीवा मप्र)
    प्रदेश में बनाई जाने वाली 1000 गोशालाओं की कहीं भी भौतिक धरातल में कोई रता पता नही है जिससे एकबार फिर प्रदेश के लाखों बेसहारा मवेशियों का जीवन संकट में दिख रहा है।

    वर्ष 2012 से एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी एवं अन्य गोवंश प्रेमियों के सामाजिक प्रयाशों एवं मुद्दे को सतत मीडिया और समाज के समक्ष उठाये जाते रहने से बेसहारा गोवंशों के अधिकारों को लेकर एवं असामाजिक तत्वों द्वारा गोवंशों की प्रताड़ना किये जाने, अवैध बाड़ों में बिना समुचित व्यवस्था के कैद किये जाने, इनकी ट्रैफिकिंग, चल-पशु तस्करी किये जाने, चचाई क्योटी बहुती भलघटी अष्टभुजी भैंसहटी आदि जलप्रपातों में धकेले जाने, बकिया वराज नहर सहित अन्य नहरों में धकेले जाने आदि मामले केंद्रीय मंत्रालय श्रीमती मेनका गांधी पीएफए अध्यक्षा सहित मप्र एवं भारत शासन प्रशासन के समक्ष निरंतर उठाये गए हैं जिसका नतीजा ही है सत्ताधारी और विपक्षी दलों, समाज के हर वर्ग, प्रदेश एवं देश के मीडिआ के एक बहुत बड़े हिस्से में यह बात सतत बनी रही।
   किसानों और पशुओं दोनो की समस्या को आखिर समझा गया और जो कार्य तथाकथित हिंदूवादी पार्टी बीजेपी नही कर पाई उसे विपक्ष में बैठी कॉंग्रेस पार्टी ने कर डाला। आख़िरकार अपने आपको सत्ता में लाने के उद्देश्य से ही सही लेकिन प्रदेश में 1000 गोशालाओं को खोले जाने हेतु घोषणा किया। घोषणा तो किया लेकिन आज वर्ष भर का समय व्यतीत होने वाला है पर इनका प्रशासनिक अमला गोशालाओं के निर्माण में हीलाहवाली कर रहा है।
   जिले में बनाई जानी थी 33 गोशालाएं
   मध्य प्रदेश में तो अभी तक 900 गोशालाएं बनाये जाने हेतु जगह चिन्हित हुआ है लेकिन रीवा में ही अकेले 33 गोशालाएं खोले जाने हेतु टीएस हुआ है। रीवा की उन सभी 33 ग्राम पंचायतों को भी चिन्हित कर लिया गया है जिनमे से 30 गोशालाएं सामान्य प्रकृति की रहेंगी जबकि शेष तीन गोशालाएं वृहद किश्म की रहेंगी।

    जिन तीन ग्राम पंचायतों में वृहद गोशालाएं बनाई जानी थीं उनमे रीवा ब्लॉक की टीकर में 26 एकड़, गंगेव ब्लॉक की पनगड़ी कला पंचायत में 59 एकड़, एवं जवा ब्लॉक की कोनी कला पंचायत में 39 एकड़ भूमि का आवंटन किया गया है।
  टीएस जारी, प्रत्येक गोशाला 27 लाख 62 हज़ार में बनेगी
   प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले की वर्तमान समय मे बनाई जा रही 30 गोशालाओं के लिए टीएस जारी हो चुका है जिंसमे इन सभी 30 गोशालाओं की लागत राशि 27 लाख 62 हज़ार रुपये बतायी गयी है।
     टीएस जारी होने के साथ ही उन चिन्हित 30 ग्राम पंचायतों में जगह का ले आउट भी कर लिया गया है जिसमे आर ई एस के सहायक यंत्री, ब्लॉक के सीईओ और राजस्व एवं वेटेरिनरी अमले के साथ स्थानों को चिन्हित कर नींव डालने की प्रक्रिया शुरू हुई है।
  कई पंचायतों में मात्र खोदे गए गड्ढे
   हिनौती पंचायत के गदही ग्राम में बनाई जा रही लगभग 20 एकड़ भूभाग में गोशाला की स्थिति यह है यहां मात्र गड्ढे खोदे जाने तक ही कार्य सीमित होकर रह गया है। गैर पंचायती मजदूरों द्वारा कार्य कराए जाने की प्रक्रिया चल रही है। यहाँ स्थिति यह है कि नौ दिन चले अढ़ाई कोश।

    यही स्थिति पास ही स्थित बांस पंचायत की भी है। यहाँ गोशाला बनाये जाने के पहले ही गोशाला कार्य रोक दिया गया है। यह समाज कल तक पशुओं को आवारा छोड़ दिया करता था फिर उनका रोना रोता था। अब जब सरकार इनके लिए गोशालाओं की व्यवस्था कर रही है तो यह समाज ही इसमे रोड़ा बन रहा है। बताया तो यह भी जा रहा है कि गोशाला तालाब में बनाई जा रही थी जिसका कुछ ग्रामीणों द्वारा विरोध किया गया लेकिन राजस्व विभाग से प्राप्त जानकारी में बताया गया कि ग्रामीणों द्वारा शासकीय भूमि पर बेजा कब्जा किया गया था जो अतिक्रमण हटाकर अब गोशाला बनाई जा रही है तो कुछ ग्रामीन उसका विरोध कर रहे हैं जबकि गोशालाओं के निर्माण में बाधा उत्पन्न करना सर्वथा गलत है।
  यदि गोशालाएं नही बनी तो होगी फजीहत
   सवाल यह है कि सिर्फ घोषणाएं भर कर देने से कुछ नही होने वाला। घोषणाएं करके उनमे कार्य परिणीति तक अमल करना ज्यादा आवश्यक है। आज जिस प्रकार पंचायती और मनरेगा के क्रियाकलाप चल रहे हैं उसके तौर पर देखा जाय तो यदि पंचायतों पर नकेल नही कसी गयी तो आवंटित 27 लाख 62 हज़ार रुपये हवा में उड़ जाएंगे और सीईओ सरपंच सचिव सब हजम कर लेंगे और किसी को भनक तक नही लगेगी। इसलिए कार्य और उसकी गुणवत्ता पर निगरानी अत्यंत आवश्यक है। यह कार्य जितना आवश्यक प्रशासनिक दृष्टि से है उससे कहीं अधिक सामाजिक दृष्टि से भी है।

    अब अगला सवाल यह है कि घोषणाओं के बाद आखिर यह गोशालाएं बनकर कब पूरी होंगी? क्या इस खरीफ वर्ष 2019 के लिए यह गोशालाएं बनकर पूरी हो जाएंगी? अथवा फिर वही हालात निर्मित होंगे जब इन्हें लाठी डंडे, टांगे कुल्हाड़ी से ही स्वागत होने वाला है क्योंकि इस क्रूर समाज से जहाँकी गोवंश समाज से पूरी तरह से वहिष्कृत हो चुके हैं कोई मानवता की अपेक्षा करना बेमतलब है।
संलग्न - कृपया संलग्न देखें जिले में बनने वाली 30 वर्तमान गोशालाओं का जारी हुआ टीएस। साथ मे गोशालाओं और आसरे का इंतज़ार करते हुए आवारा गोवंश।
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शिवानन्द द्विवेदी

सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता

जिला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587



Tuesday, February 12, 2019

रीवा ब्रेकिंग- मजदूरी के स्थान पर मिली जेल, मजदूरों के मानवाधिकार का हुआ घोर हनन (मामला जिले के त्योंथर ब्लॉक अन्तर्गत डाढ़ पंचायत का जहाँ सैकड़ों मजदूर मजदूरी न मिलने को लेकर कर रहे थे अनसन, गढ़ पुलिश आयी और उठाकर ले गयी, अनसन में महिलाएं बुजुर्ग भी थे सम्मिलित)

दिनांक 12 फरवरी 2019, स्थान - गढ़/कटरा, रीवा मप्र
  (शिवानन्द द्विवेदी, रीवा मप्र)
    लोकतंन्त्र की हत्या कर पुलिसिया राज कैसे स्थापित हो रहा है इसका एक जीता जागता उदाहरण दिखा रीवा जिले के त्योंथर ब्लॉक अन्तर्गत आने वाली घाट के ऊपर स्थित डाढ़ पंचायत में।
   मजदूरी न मिलने पर सौंपा था ज्ञापन
    विंध्य किसान परिषद के सक्रिय कार्यकर्ता पुष्पराज तिवारी, डाढ़ निवासी गीता साकेत एवं ममता साकेत द्वारा बताया गया कि वह सभी अपने गांव के सैकड़ों मजदूरों के साथ 42 मजदूरों के मनरेगा में मेढ़ बंधान में मिट्टीकरण के किये गए कार्य के पैसे की माग कर रहे थे जिसके लिए पिछले सप्ताह मजदूरों ने त्योंथर सीईओ, एसडीएम, एवं जिला कलेक्टर को विधिवत लिखित ज्ञापन सौंपा था जिसके लिए माग की थी कि यदि 10 फरवरी 2019 तक यदि डाढ़ पंचायत के पंच परमेश्वर एवं मनरेगा के कार्यों की विधिवत जांच होकर 42 मजदूरों को उनकी मजदूरी नही दी जाती तो सभी मजदूर 11 फरवरी से अनसन प्रदर्शन करेंगे। 
      मनरेगा मजदूरी न मिलने पर कर रहे थे अनसन, पुलिश आयी और भर ले गयी थाने
    इस बीच कोई प्रशासनिक सुनवाई न होने पर सभी मजदूर पूर्व सूचना के आधार पर डाढ़ पंचायत भवन के सामने उपस्थित होकर प्रदर्शन कर रहे थे। दिनाँक 12 फरवरी को अनसन का दूसरा दिन था तभी सुबह 11 बजे के लगभग गढ़ पुलिश टी आई सीके तिवारी, एवं मनगवां एसडीओपी के निर्देश पर एसआई शैलेन्द्र सिंह अपने बल के साथ आये और शिवकुमार साकेत सहित अन्य मजदूरों को गाड़ी में भरकर गढ़ थाने ले गए।
    क्या लोकतंन्त्र में अनसन करना है अपराध?
    जिस प्रकार से लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण ढंग से अपने पंचायत भवन के सामने प्रदर्शन कर रहे मनरेगा के मजदूरों को गढ़ पुलिश उठाकर थाना ले गयी उससे साफ जाहिर है कि लोकतंन्त्र की हत्या कर मजदूरों और आम नागरिकों के मानवाधिकार का अच्छा खासा उल्लंघन किया जा रहा है।
   पुलिश ने क्यों नही की मामले की जांच?
   सवाल यह भी है कि आखिर गढ़ पुलिश टी आई सीके तिवारी द्वारा वास्तविकता जानने का प्रयाश क्यों नही किया गया? क्या यह पुलिश विभाग को नही पता था कि आखिर मजदूर इकठ्ठा होकर किस बात के लिए प्रदर्शन कर रहे थे? क्या सबसे पहले अपराध ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव एवं सीईओ त्योंथर के खिलाफ नही बनता? आखिर मजदूरों ने जब मनरेगा में कार्य किया है तो उनकी मजदूरी किस आधार पर नही दी जा रही क्या सीईओ अथवा पंचायत विभाग ने लिखित तौर पर मजदूरों को अवगत कराया था?
   हिटलरवादी तंत्र में कमजोर का जीना दूभर
   इन सब प्रश्नों के जबाब यह हिटलरवादी तंत्र नही दे सकता क्योंकि यह तो अंग्रेजों के समय की पुलिश है जो अपनी अकल कम लगाती है और नेताओं रसूखदारों की ज्यादा सुनती है। आज गढ़ पुलिश के यह हाल हैं कि यहाँ अपराध का ग्राफ बढ़ता जा रहा है और अपराधियों पर लगाम नही लग पा रहा है जबकि अपनी नाकामी छुपाने के लिए गढ़ पुलिश निर्दोषों कमजोरों और मजदूरों को निशाना बनाकर उन्हें जबरन कठघरे में खड़े कर रही है।
   वास्तव में देखा जाय तो गढ़ पुलिश इस मामले को पंचायत विभाग पर दबाब डालकर मजदूरों की मजदूरी दिलवाने में एवं पंचायती भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्यवाही कर सकती थी लेकिन उल्टे अपने नाकामी छुपाने के लिए पुलिश ने एक कमजोर बेरोजगार मजदूर के मानवाधिकार को खत्म करते हुए मजदूर को ही सलाखों के पीछे पहुचा दिया। 
    अब देखना यह होगा कि मजदूरों की इस शिकायत पर गढ़ पुलिश एवं पंचायत सरपंच सचिव के विरुद्ध क्या कार्यवाही होती है?
संलग्न - कृपया संलग्न तस्वीरों में देखें अनसन प्रदर्शन करते डाढ़ पंचायत के मजदूर एवं दिए गए ज्ञापन की फ़ोटो।
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शिवानन्द द्विवेदी
सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता
जिला रीवा, मप्र, मोब 9589152587, 7869992139

Monday, February 11, 2019

ग्राम पंचायत भवन डाढ़ में मजदूरों ने किया तालाबंदी,अधिकारियों ने नही ली सुध, जारी रहेगा धरना प्रदर्शन

दिनाँक 11 फरवरी 2019, स्थान - कटरा, रीवा मप्र
  जिले के जनपद पंचायत त्योंथर अन्तर्गत ग्राम पंचायत डाढ़ में मजदूरों ने पंचायत विभाग और जिला प्रशासन को लिखित सूचना के उपरांत पंचायत भवन में तालाबंदी कर दिया।
  लिखित ज्ञापन के बाद भी दिनाँक 11 फरवरी को पूरे दिन पंचायत भवन में कोई अधिकारी सुध लेने नही पहुचा। आलम यह था कि पंचायत भवन में पूरे दिन पंचायत भवन में पंचायत कर्मचारियों द्वारा लगाया गया ताला लटकता रहा इस पर जब कोई अधिकारी नही पहुचा तो मजदूरों ने दूसरा ताला भी लगा दिया और अगले 14 फरवरी तक आंदोलन करते रहने की चेतावनी दी है।
 इन मुद्दों को लेकर किया तालाबंदी
  डाढ़ पंचायत के मजदूर एवं विंध्य किसान परिषद के सक्रिय सदस्य पुष्पराज तिवारी, शिवकुमार साकेत, इंद्रलाल साकेत, लालबहादुर साकेत, दीनदयाल, मुन्नी, संगीता, पुरुषोत्तम आदि सैकड़ों मजदूरों ने बताया कि ग्राम पंचायत डाढ़ में पिछले कई वर्षों से मनरेगा के कार्यों में व्यापक भ्रष्टाचार किया जा रहा है जिसको लेकर मजदूरों ने दर्जनों मर्तबा पंचायत विभाग एवं प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है लेकिन न तो कोई जांच हुई और न ही कोई सुनवाई जिसके चलते मजदूरों ने कई बार तहसील एवं सीईओ कार्यालय त्योंथर में धरना प्रदर्शन किया हुआ है।
  इस बार 4 दिवशीय तालाबंदी एवं धरना प्रदर्शन पंचायत कार्यालय डाढ़ में करने का निश्चय किया गया है।
 माग नही पूरी हुई तो लंबा चलेगा आंदोलन
   विंध्य किसान परिषद के सक्रिय कार्यकर्ता पुष्पराज तिवारी ने बताया कि यदि मजदूरों को मजदुरी और उनके मागों को नही माना गया तो यह आंदोलन चलता रहेगा।
कलवारी मोड़ राष्ट्रीय राजमार्ग में होगा चक्का जाम
  पुष्पराज तिवारी ने बताया कि यदि मजदूरों की मांगें नही मानी गयी तो दिनांक 14 फरवरी 2019 को कलवारी मोड़ राष्ट्रीय राजमार्ग 27 में चक्का जाम किया जाएगा। इस बीच बताया गया कि मजदूरों के मुद्दों के साथ साथ कलवारी से क्योटी मार्ग पर ओवरलोडेड वाहनों की फर्राटा दौड़ और इससे आमजन को होने वाली असुविधा को लेकर एवं कटरा बाजार की बदहाल सड़क की स्थिति को लेकर भी चक्का जाम किया जाएगा।
संलग्न - दिनांक 11 फरवरी को मजदूरों द्वारा किये गए धरना प्रदर्शन एवं आन्दोलन की फ़ोटो एवं ज्ञापन की फ़ोटो संलग्न हैं।
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शिवानन्द द्विवेदी
सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता
जिला रीवा मप्र मोब 9589152587, 7869992139








Tuesday, January 15, 2019

पावर प्लांट चचाई में जंगल बीच करंट लगाकर चीतल एवं भैंसों का हुआ शिकार, वन विभाग पल्ला झाड़ रहा, पुलिश को कुछ फर्क नही पड़ता (मामला जिले में बढ़े वन अपराधों का जहाँ एमपीईबी पावर प्लांट चचाई के पास जंगल के बीचोंबीच करंट लगाकर अखंड प्रताप सिंह की 5 भैंसों को मार डाला गया, लंबे अरसे से करंट लगाकर चीतल का किया जा रहा था शिकार, बदकिस्मती से लाखों की फंस गयीं भैंसें)

दिनाँक 15 जनवरी 2019, स्थान - चचाई पावर प्लांट, सिरमौर, रीवा मप्र

  (शिवानन्द द्विवेदी, रीवा मप्र)

    प्रदेश एवं जिले में निरंतर बढ़ रहे बेलगाम वन अपराधों की श्रेणी में एक और अध्याय जुड़ चुका है. अभी तक तो नहरों, घाटियों, जलप्रपातों के बीच में मवेशियों को जीवित धकेले जाने की वारदातें सामने आईं थीं लेकिन अब तो ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जिससे पूरे जंगल विभाग के अस्तित्व पर ही प्रश्न चिन्ह लगने वाला है. जी हाँ यहां कोई पहेलियां नही बुझाई जा रही बल्कि सच्चाई के समाज को अवगत कराया जा रहा है.

    जंगल के बीचोंबीच करंट लगाकर किया जाता रहा शिकार

    यह मामला है चचाई जलप्रपात से होकर जाने वाले जंगल का जहां से होते हुए लगभग 7 से 8 किमी दूर जंगल के रास्ते बकिया-बीहर नहर पावर प्लांट चचाई से अतरैला वन परिक्षेत्र के जंगल तक जाती है. अभी पिछले दिनों ही इसी नहर में इंटेक प्लांट के पास दर्ज़नों गोवंशों के उतराते हुए शव मिले थे जो मीडिया में और समाज में हलचल पैदा कर दिए थे. अभी एक और मामला सामने आया है जो महीनों पुराना बताया गया है जिंसमे पीड़ित अखंड प्रताप सिंह निवासी मरैला ने लिखित तौर पर पुलिश एवं वन विभाग को शिकायत भी की लेकिन कार्यवाही नही हुई है.

    मामला है 5 भैंसों और एक चीतल का जंगल के बीच करंट से फंसकर मौत का

   सबसे बड़े आश्चर्य की बात तो यह है की जंगल के बीचोंबीच आखिर करंट आया कहां से लेकिन चकित मत होइये बता दें की चचाई पावर प्लांट बस नजदीक ही स्थित है जो 315 मेगावाट की बिजली उत्पन्न करता है. यह पावर प्लांट सरकार के ऐसे नियमों के अन्तर्गत बनाया गया है जो जंगल भूमि का भी उपयोग कर रहा है यद्यपि इस पावर प्लांट का कर्ताधर्ता एमपीईबी विभाग है.

   दिसंबर दूसरे सप्ताह की है वारदात  

    दिनाँक 12-13 दिसंबर के आसपास मरैला निवासी अखंड प्रताप सिंह उम्र लगभग 65 वर्ष की चार भैंसें एवं एक भैसा भैंसहटी नामक चचाई घाट  के नीचे चरने के लिए उतारे गए थे. बताया गया की यहीं एमपीईबी पावर प्लांट से उत्पन्न होने वाली बिजली का दुरुपयोग करके अर्जुन केवट नामक जवा निवासी उम्र लगभग 40 से 45 वर्ष जंगली जानवरों का शिकार करने के लिए करंट लगाया था जिसमे अखंड प्रताप सिंह की 4 नग जीवित पजाने योग्य भैंसें एवं एक नग भैंसा सब मिलाकर लगभग 4 से 5 लाख कीमत की फंसकर मारे गए।

   अतरैला थाने एवं वन विभाग में लिखित दी सूचना

    अखंड प्रताप सिंह ने बताया की जानकारी मिलने पर घटना की सूचना  तत्काल अतरैला थाना एवं वन परिक्षेत्र अतरैला में दी गई लेकिन न तो वन विभाग द्वारा और न ही पुलिश विभाग द्वारा कोई प्राथमिकी दर्ज की गई. जबकि देखा जाए तो दोनों ही दृष्टि से करंट लगाकर जंगल के अंदर शिकार और मवेशियों का उसमे फंसकर मारना एक संगीन अपराध की श्रेणी में आता है जिंसमे वन विभाग को पीओआर और पुलिश विभाग को बकायदे एफआईआर दर्ज करना चाहिए.

   वेटेरिनरी अधिकारी ने शव न मिलने का बनाया बहाना

     बता दें की इस घटना के विषय में जब जवा वेटेरिनरी अधिकारी आर पी गौतम मिश्रा से बात की गई तो उन्होंने पूरा दोष वन विभाग और पुलिश विभाग पर मढ़ दिया और बताया की हमे मृत भैंसों का कोई भी अंग नही मिला. जबकि पीड़ित अखंड प्रताप दवारा बताया गया को मृत भैंसों के कुछ पैर वगैरह अंग अभी भी वहीं जंगल में पड़े हुए हैं जिनको आरोपी अर्जुन केवट ने काटकर फेंक दिया था जिससे यह पता न चले की घटना करंट लगाकर कारित हुई है. जबकि फॉरेंसिक रिपोर्ट में यह बात स्पष्ट हो ही जाती है की जीव केई मृत्यु के क्या कारण थे.

 क्या कहा अतरैला थाना प्रभारी प्रदीप सिंह ने

    जब प्राथमिकी दर्ज न किये जाने के विषय में अतरैला थाना प्रभारी प्रदीप सिंह से बात की गई तो उनका कहना था की वह मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं जबकि मेडिकल रिपोर्ट इसलिए नही बनी की वेटेरिनरी अधिकारी को मवेशियों के शव ही नही मिले.

    चश्मदीख गवाह भी है पुख्ता प्रमाण 

    यद्यपि इस पूरे मामले में एक चश्मदीख गवाह भी मौजूद है. चश्मदीख प्रदीप कुमार कोल उर्फ विधायक पिता चंद्रशेखर कोल उर्फ बेसहना निवासी मरैला उम्र लगभग 20 वर्ष के द्वारा पूरी घटना की जानकारी बतायी जा चुकी है लेकिन थाना प्रभारी अतरैला प्रदीप सिंह का अब यह कहना है की जब तक आरोपी अर्जुन केवट को पुलिश पकड़ कर पूंछताछ नही करेगी तब तक प्राथमिकी दर्ज नही होगी. वहरहाल अभी तक पुलिश ने आरोपी को ढूंढने तक का प्रयाश नही किया है जबकि घटना कारित हुए एक माह से ऊपर बीत चुके हैं. 

   रेंज अफसर अतरैला का वीडियो वायरल

    बता दें की रेंज अफसर अतरैला का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमे रेंज अफसर स्वयं भी घटना कारित होने की स्वीकारोक्ति कर चुके हैं और बता रहे हैं की करंट से न केवल भैसों की मौत हुई हैं बल्कि चीतल की भी मौत हुई है. पर अब सवाल यह उठता है की आखिर जंगली संरक्षित क्षेत्र में एमपीईबी पावर प्लांट के करंट द्वारा असामाजिक एवं आपराधिक तत्वों द्वारा जंगली जानवरों का शिकार जैसे संगीन अपराध के लिए अब तक रेंज के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को बर्खास्त क्यों नही किया गया? आखिर पूरे मामले में एमपीईबी की भी तो जबाबदेही तय है की आखिर उनके द्वारा पावर प्लांट में उत्पन्न की जाने वाली बिजली का दुरुपयोग आपराधिक किस्म के लोग कैसे कर रहे हैं?

 संलग्न - संलग्न तस्वीरों में देखें पीड़ित अखंड प्रताप सिंह दवारा लिखित दिया गया आवेदन एवं साथ में करंट में मृत हुई भैंसों के कंकाल आदि जिन्हें बताया गया की आरोपी अर्जुन केवट ने काटकर वहीं नदी में फेंक दिया था.

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शिवानन्द द्विवेदी

सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता 

ज़िला रीवा मप्र, मोब 9589152587, 7869992139

Friday, January 4, 2019

चल-पशु तस्करी मामले में टी आई के विरुद्ध आई जी को की गयी शिकायत, पत्रकारों ने कार्यवाही की किया माग (बैकुंठपुर थाना क्षेत्र का है मामला जिसमे चल-पशु तस्करी पर पर्दा डालने पुलिश ने पत्रकारों पर फ़र्ज़ी मुकदमे में फंसाने की दी थी धमकी साथ ही पत्रकारों को टी आई मंगल सिंह ने बताया था फ़र्ज़ी)

दिनांक 04/01/2019, स्थान - रीवा मप्र

 (शिवानन्द द्विवेदी, रीवा मप्र)

    चल-पशु तस्करी के काले धंधे और पुलिश-माफिया के सम्बंध का पर्दाफाश होने के बाद अब पुलिश ने सामाजिक संगठनों और पत्रकारों को टारगेट करना प्रारंभ कर दिया है। अब सवाल यह है कि पुलिश वाले ही अपनी नाकामी और मिली भगत छुपाने प्रेस कॉन्फ्रेंस और प्रेस विज्ञप्ति जारी कर रहे हैं।

   बैकुंठपुर टी आई मंगल सिंह ने पशु तस्करों को बताया था गरीब

   बता दें कि घटना में टर्न तब आया जब बैकुंठपुर टी आई मंगल सिंह ने दबोचे गए चल-पशु तस्करों को क्लीन चिट देते हुए उन्हें गरीब और किसान बताया। सवाल यह था कि पुलिश आरोपी की घटना में संलिप्तता की जांच किये वगैर स्वयं ही पशु तस्करों को गरीबी रेखा का प्रमाण पत्र दे रही है यह कहाँ तक जायज है? किसी अपराध में आरोपी की संलिप्तता है कि नही और कारित घटना से सम्बंधित साक्ष्यों के आधार पर विधिवत जांच के बाद क्लीन चिट देना तो फिर भी वाजिब हो सकता है, लेकिन बिना जांच किये बिना बयान लिए और बिना कोई कायमी किये वाकायदा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पशु तस्करों को गरीब किसान का सर्टिफिकेट देना तो एक तरह से तस्करी को बढ़ावा देना और सभी साक्ष्यों और सबूतों को दरकिनार करना है।

चल-पशु तस्करी सम्बंधित कई प्रश्न अनुत्तरित ही रहे

   सवाल यह था कि जब पिछले कई सप्ताह से पिपरहा, क्योटी, तराई, छुहिया घाटी, मोहनिया घाटी, देवलोंद, व्योहारी, जयसिंह नगर, कोतमा से छतीसगढ़ तक की चल-पशु तस्करी की वारदातें पुलिश और मीडिया के समक्ष रखी गई और रीवा जिले के सगरा, गढ़/लालगांव, और बैकुंठपुर थाने में विधिवत शिकायतें की गईं तो पुलिश ने विधिवत कार्यवाही क्यों नही की? क्या उक्त सभी घटनाओं में संलिप्त लोग गरीब और किसान थे? क्या कार और मोटर साईकल में माफिया की तरह पशुओं का पीछा करने वाले लोग गरीब और किसान थे? यदि प्रतिदिन छुहिया या मोहनिया घाटी से हज़ारों की संख्या में कोतमा के रास्ते छत्तीसगढ़ गोवंश भेजे जाते हैं तो क्या यह सभी गोवंश प्रतिदिन कृषि कार्य के लिए उपयोग हो रहे हैं? यदि कृषि कार्य के लिए उपयोग हो रहे तो इसका क्या प्रमाण है? प्रतिदिन इतनी बड़ी संख्या में भेजे जाने वाले गोवंश कहां से खरीदे जाते हैं और किन किन किसानों को बेंचे जाते हैं? ऐसे कौन कौन से किसान हैं जो अभी भी इतने बड़े पैमाने पर बैलों से खेती करते हैं? जो लोग अपने आप को तथाकथित पशु व्यापारी बता रहे हैं और इतनी बड़ी संख्या में पशु व्यापार कर रहे हैं क्या इनके पास जिला प्रशासन और पशु चिकित्सा विभाग से पंजीयन है? 

    इसी प्रकार पता नही कितने अनुत्तरित प्रश्न हैं जिनका जबाब पुलिश ने नही दिया और बिना किसी आधार के ही चल-पशु तस्करों को तथाकथित पशु व्यापारी और गरीब किसान बताकर फुरसत कर दिया। यदि पुलिश लोगों को गरीबी रेखा का प्रमाणपत्र वितरित करेगी तो फिर किसी को कलेक्टर और तहसीलदार के पास जाने की जरूरत नही पड़ेगी।

    पत्रकारों ने आई जी और एसपी को किया लिखित शिकायत

    चल-पशु तस्करी के मामले को उठाने वाले रीवा के पत्रकारों ने दिनांक 03 जनवरी 2019 को पुलिश अधीक्षक और पुलिश महानिरीक्षक रीवा को लिखित शिकायत भी की है जिसमे बैकुंठपुर टी आई मंगल सिंह द्वारा उन्हें फ़र्ज़ी कहने, धमकाने, और फ़र्ज़ी मामलों में फंसाने की बात कही है। 

    बताया गया कि बेबाक शक्ति न्यूज़ के रीवा ब्यूरो चीफ प्रदीप पटेल एवं खुलासा न्यूज़ लाइव के रीवा ब्यूरो चीफ आनंद द्विवेदी ने दिनांक 03 जनवरी 2019 की एक लिखित शिकायत में बैकुंठपुर टी आई मंगल सिंह द्वारा धमकाने, दुर्व्यवहार करने और मामलों में फंसाने की शिकायत की है और टी आई के विरुद्ध कार्यवाही की माग के साथ ही पत्रकारों की सुरक्षा की माग की है।

   बता दें कि दिनाँक 31 दिसंबर 2018 को दोपहर के आसपास पत्रकार प्रदीप पटेल ने बैकुंठपुर थाना अंतर्गत हर्दी मोड़ से डिहिया-धुन्धकी ग्राम की तरफ जाने वाली सड़क पर बड़ी संख्या में पशुओं को ले जाते आधा दर्जन लोगों को देखा था जिसकी जानकारी पशु अधिकारों के लिए लड़ने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी को दी थी। इसके बाद सम्बंधित थाना बैकुंठपुर टी आई मंगल सिंह और रीवा आई जी आदि को सूचित किया गया था। जानकारी ध्यान फाउंडेशन के पदाधिकारियों को भी भेजी गई थी।  

     सूचना काफी उच्चस्तर तक भेजने के बाद जब बैकुंठपुर टी आई पर चल-पशु तस्करों पर कार्यवाही का दबाब बना तो टी आई मंगल सिंह ने बिना विधिवत जांच किये स्वयं ही पशु तस्करों को गरीब और किसान होने का प्रमाणपत्र दे डाला और पत्रकारों को फ़र्ज़ी बताया साथ ही मुकदमों में फंसाने की धमकी दे डाली।

     पुलिश की बर्बरता पर सकते में आये पत्रकारों ने मामले को अगले दिनों एसपी और आई जी रीवा के समक्ष लिखित देकर मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की माग की है।

संलग्न - पत्रकारों द्वारा एसपी और आईजी कार्यालय में लिखित दिए गए आवेदन की प्रतियां साथ ही उपस्थित पत्रकार प्रदीप पटेल और आनंद द्विवेदी।

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शिवानन्द द्विवेदी

 सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता

ज़िला रीवा मप्र, मोब 9589152587, 7869992139