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Sunday, July 15, 2018

सिरमौर के सरई बीट जंगल में चल रही धांधली, वृक्षारोपण के नाम पर चल रही औपचारिकता, चेक डैम गायब (मामला ज़िले के सिरमौर वन परिक्षेत्र अन्तर्गत सरई बीट के जंगलों का जहां पर वृक्षारोपण कार्य में अनियमिता, अवैध तरीके से वनों की कटाई, और साथ ही चेक डैम निर्माण में हुई है धांधली)

दिनांक 15 जुलाई 2018, स्थान - सिरमौर वन परिक्षेत्र, रीवा मप्र 

(कैथा श्रीहनुमान मंदिर से, शिवानन्द द्विवेदी)

    कहां से बरसें बदरा, कैसे आये समय पर मानसून. जब जंगल पर्वत और पेंड़ पौधे ही नही रहे तो कैसे बनेगा प्राकृतिक संतुलन और कैसेl जीवित रहेगी हमारी धरती.

    आज जिस प्रकार से निरंतर वनों की अंधाधुंध कटाई हो रही है, जंगल पहाड़ को उत्खनन करके उजाड़ा जा रहा है स्वाभाविक है आने वाला समय हमारे लिए काफी मुश्किल होने वाला है.

सिरमौर सहित पूरे ज़िले के वनों में चल रहा वृक्षारोपण 

    जानकारी मिली की सिरमौर वन परिक्षेत्र सहित पूरे ज़िले के जंगलों में आजकल वृक्षारोपण का कार्य किया जा रहा है. इसी बाबत भौतिक धरातल पर स्थिति देखने लालगांव उप वनपरिक्षेत्र के सरई बीट एरिया में जाया गया तो वहां जो देखा गया वह काफी चौकाने वाला मिला. सरई बीट के जंगलों के बीच खाली पड़े लगभग 30 हेक्टेयर के भूभाग में आंवला और शीशम के पेंड़ लगाए जा रहे हैं. यद्यपि इसकी कोई गारंटी नही की इनमे से कोई भी पेंड़ सर्वाइव कर पाएंगे. क्योंकि अभी पिछले दो से तीन सप्ताह से प्रारम्भ हुआ वृक्षारोपण का कार्य चल रहा है गड्ढे खोदे जा रहे हैं बाड़ियाँ लगाई जा रही है लेकिन जो पेंड़ पिछले हफ्ते लगाए गए हैं वह अभी से उजड़ गए हैं, सूख गए हैं. पेड़ों को ठेकेदार द्वारा लगवाया जा रहा है. यह जानकारी नही मिल पायी है की कितने पेंड़ लगाए जा रहे हैं और इसकी लॉगत कितनी है. पेड़ों को लगाने के लिए खोदे गए गड्ढों में न तो कोई खाद डाली गई है और न ही कोई कीटनाशक. सीधे गड्ढों को खोदकर पेड़ों को रख दिया गया है जबकि सिंचाई का तो प्रश्न ही उठता। सवाल यह है कि बिना अच्छी मानसूनी बारिस के कैसे शूखे में वृक्षारोपण किया जा रहा है।

हरे पेंड़ काटकर बनाया बाड़ी

    बता दें की जो देखा गया उसमे किये जा रहे पौधरोपण को सुरक्षित करने की औपचारिकता में आसपास के हरे धवैया के जंगली पेंड़ काटकर लगभग 30 हेक्टेयर की बाड़ी लगाई गई है. जब बीट के मुंसी प्रवीण गौतम से इस विषय में विस्तृत जानकारी चाही गई तो उनके द्वारा बताया गया की इसकी हमे जानकारी नही की कितना बजट आया है लेकिन कार्य ठेकेदार द्वारा करवाया जा रहा है साथ ही जो बाड़ी लगाई जा रही है वह पेड़ों को छांटकर लगाई जा रही है न की काटकर. लेकिन सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा जो देखा गया वह सब अपने कैमरे में कैद कर लिया गया उसमे साफ दिख रहा था की मृत हो चुके और लगाए जा रहे इन पौधों के लिए पहले से ही मौजूद जंगल की हरियाली को किस तरह नष्ट किया जा रहा है. मुंसी प्रवीण गौतम द्वारा जिस प्रकार से बताया गया वैसा तो कुछ भी नही था बल्कि अंधाधुंध तरीके से उपस्थित पेड़ों की जमकर कटाई की गई है और उन्ही धवैया के काटे हुए पेड़ों की बाड़ी लगा दी गई है. इस बात की कोई गारंटी नही की लगाए गए एक भी पेंड़ जीवित रह पाएंगे लेकिन वृक्षारोपण के नाम पर पूरे सरई के जीवित पेड़ों की ऐसी की तैसी तो कर ही दी गई. 

चेक या स्टॉप डैम के नाम पर हुआ भ्रष्ट्राचार

    मात्र बात वृक्षारोपण में अनियमितता तक ही सीमित नही है यहां और भी मामले हैं जिनके कारण वन विभाग हमेशा की तरह कठघरे में है. आखिर गर्मियों में चेक अथवा स्टॉप डैम के नाम पर किया जाने वाला हर वर्ष के कार्य का क्या होता है? कहाँ चले जाते हैं चेक डैम के पत्थर? क्या वास्तव में यह कार्य होता भी है की बस सब कागजों में ही चलता है. 

     सिरमौर के सरई बीट एरिया में मानसेवी सुरक्षा वन कर्मियों बाबूलाल यादव एवं दसरथ यादव के साथ भ्रमण के दौरान पाया गया की इन दोनो मानसेवियों के अतिरिक्त अन्य कोई भी जंगल विभाग का कर्मचारी मौजूद नही था. जानकारी मिली की काम तो यहां कुछ न कुछ हर वर्ष होता है लेकिन सुरक्षा कर्मियों के अभाव में आसपास के रसूखदार अपने ट्रेक्टर ट्राली में सब भर ले जाते हैं.

    जब यह पूंछा गया की आखिर आप लोग भी तो समितियों के माध्यम से तैनात किये गए वन सुरक्षा कर्मी ही तो हैं तो उनके द्वारा बताया गया की हम मात्र नाम के सुरक्षा कर्मी हैं यहां हमारी कुछ नही चलती. वन समिति के सचिवों मुंसियों के द्वारा हमारी डेढ़ दो साल से पेमेंट रोककर रखी गई है. मुंसी रेंजर कहते हैं की हमे पेमेंट ही नही मिलेगी तो हम क्या करें? क्या हम मुफ्त में काम करते रहें? फिर भी हम दिन में भ्रमण करते रहते हैं और प्रयाश कर रहे हैं की कोई जंगल को नुकसान न पहुचा पाए. लेकिन जब भी हम कार्यवाही करवाते हैं तो मुंसी और डिप्टी रेंजर पैसे लेकर छोंड़ देते हैं तो हम क्या करें.

मानसेवियों की 2 साल से नही मिली पेमेंट

   जंगल विभाग में ग्राम वन समितियों के माध्यम से कार्यरत मानसेवी वन सुरक्षा कर्मियों की 2 साल से पेमेंट नही मिली है. मानसेवी दसरथ यादव, बाबूलाल यादव, कौशल यादव आदि द्वारा बताया गया की उनकी 2 वर्षों से रुकी हुई 3 हज़ार प्रतिमाह की पेमेंट नही दी जा रही है जबकि सभी ने नियमित रूप से कार्य किया हुआ है. पनगड़ी ग्राम वन समिति के राघुवेन्द्र पांडेय एवं रामसिया साकेत द्वारा भी बताया गया की उनकी भी 2 वर्षों के कोई पेमेंट नही मिली है जबकि सभी वनकर्मी नियमित कार्य कर रहे हैं. 

    बता दें की रीवा ज़िले के सिरमौर वन परिक्षेत्र के विभिन्न बीटों की ग्राम वन समितियों में कार्य कर रहे दर्जनों मानसेवी चौकीदारों की पेमेंट को वर्षों से नही दिया गया है जिसकी वजह से उनके परिवार के लिए भी भीषण समस्या की स्थिति निर्मित हो चुकी है. उनके अनुसार उनका परिवार दानों दानों के लिए मोहताज़ हो रहे हैं. इस बाबत सभी मानसेवियों ने व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से भी शिकायतें और आवेदन भी संबंधित वन विभाग के अधिकारियों के समक्ष रखा है लेकिन अब तक कोई सुनवाई नही हो रही है. जब इसके विषय में रेंजर, एसडीओ एवं डीएफओ से बात की गई तो उनके द्वारा बताया गया की यह कार्य समितियों का है की किसे रखें और किसे न रखें साथ ही चौकीदारों की पेमेंट भी समितियों के माध्यम से होता है. जिन जिन समितियों का गठन हर पांच वर्ष में नही हो रहा है उनके चौकीदारों को कार्य करने के वावजूद भी पेमेंट संबंधी समस्या का सामना करना पड़ रहा है. इस बाबत सभी मानसेवी चौकीदारों ने एक स्वर में कार्यवाही की आवाज़ उठाई है.

संलग्न - संलग्न तस्वीरों में देखें -

  1) रीवा सिरमौर के जंगलों में सरई बीट वन क्षेत्र में औपचारिकता के तौर पर हो रहा वृक्षारोपण का कार्य.

   2) सरई बीट के जंगलों की कटाई की फ़ोटो.

    3) बनाये गए चेक और स्टॉप डैम की फ्लॉप स्थिति को बयान करते टूटे आउर उखड़े चेक डैम.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोब 7869992139, 9589152587

Wednesday, June 27, 2018

सिरमौर एसडीएम अग्निहोत्री बने तानाशाह, इनके साथ मोबाइल पर सूचना देना और बात करना हुआ अपराध (मामला ज़िले के सिरमौर तहसील के माननीय महामहिम एसडीएम महोदय अग्निहोत्री का जिनसे मोबाइल पर बात करना है अपराध, आम जनता को बोलते हैं हमे माननीय और महामहिम श्रीमान कहिए और कभी भी मोबाइल पर कॉल मत करो और अपने लेवल में रहो)

दिनांक 27 जून 2018, स्थान - सिरमौर रीवा मप्र

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

        ज़िले के सिरमौर तहसील के माननीय महामहिम श्रीमान अनुविभागीय एवं दण्डाधिकारी श्री अग्निहोत्री जी से मोबाइल पर बात करना आम नागरिक और इस देश की जनता को बहुत भारी पड़ सकता है. इसका खुलासा महामहिम एसडीएम महोदय श्री अग्निहोत्री जी ने सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी से मोबाइल पर वार्तालाप के दौरान कही और धमकी भरे अंदाज़ में बताया कि यदि मोबाइल फ़ोन किया तो खैर नही।

   सप्ताह भर से लटके आवश्यक हस्ताक्षर

     भठवा-मदरी निवासी अम्बिका पटेल द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता को फ़ोन करके अपनी व्यथा रखी गई. अम्बिका पटेल ने मोबाइल फ़ोन पर जानकारी दी की उनकी बेटी का किसी फार्मेसी में एडमिशन करवाने के लिए अंतिम तिथि निकल रही है और दिनाँक 21 जून 2018 को उन्होंने आवेदन महामहिम एसडीएम महोदय के समक्ष प्रस्तुत किया था लेकिन आज सप्ताह भर से वह अनुविभागीय आधिकारी सिरमौर के कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन उनके कागज़ में एक सामान्य सा हस्ताक्षर नही हो सका है जिससे पम्बिका पटेल को डर है की कहीं उनकी बेटी का फार्मेसी में एडमिशन न रुक जाए और वह बहुत परेशान हैं. अब अमूमन कार्यालय में किसी भी अधिकारी का मोबाइल फ़ोन आज नोटिस बोर्ड में लिखा रहता है लेकिन सिरमौर में ऐसा नही है. और न ही किसी कर्मचारी ने जानकारी दी.

   अम्बिका पटेल की जानकारी के आधार पर श्रीमान महामहिम एसडीएम महोदय श्री अग्निहोत्री जी को सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा कॉल किया गया और अपना परिचय के साथ ही बताया गया की आपके सिरमौर क्षेत्र के कुछ हितग्राही आपका इंतज़ार कर रहे हैं और उनको कुछ विशेष दस्तावेजों में हस्ताक्षर करवाने हैं जिससे वह परेशान हैं. कार्य आवश्यक है अतः आप बताने का कष्ट करें की कहां हैं तो काम करवा लिया जाए. बस इतनी बात हुई नही की महामहिम एसडीएम महोदय सिरमौर टूट पड़े. बोले तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई हमे कॉल करने की. तुम मुझे कॉल नही कर सकते और तुम मुझे जानते नही जाकर हमारे बारे में पता कर लेना, जो भी है लिखित रूप से आफिस में देकर आओ. सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा जो भी जानकारी थी उसके आधार पर बताया गया की आवेदन आपके कार्यालय में पहले से ही दिया गया है और हितग्राही परेशान हैं आपका पिछले कई दिनों से कार्यालय में इंतज़ार कर रहे हैं और उनके आवश्यक कार्य रुके हुए हैं तो आखिर एक एसडीएम का कार्यालय में भी कुछ घंटे बैठना आवश्यक होता है जिससे आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी हो सके. इस प्रकार महामहिम एसडीएम महोदय ने कहा की हमे नियम कायदा मत बताओ.

एसडीएम ने कहा बार बार फ़ोन करके चमकाते हो

   यह तो कुछ ज्यादा ही हो गया की एक आम नागरिक यदि इन महामहिम महोदय से आम जन मानस की समस्या रखे तो इनका कहना है की इन्हें बार बार फ़ोन करके चमकाया जाता है. इसके पूर्व इस सिरमौर एसडीएम से मात्र एक बार सामाजिक कार्यकर्ता की बात हुई थी जब कुछ भावन्तर योजना के राई और मसूर वाले हितग्राही बैकुंठपुर अंतर्गत आने आली मझगवां खरीदी केंद्र में किसानों को समस्या हो रही थी तब बड़ोखर ग्राम के एक किसान देवेंद्र सिंह परिहार के मोबाइल पर जानकारी के आधार पर इस एसडीएम अग्निहोत्री से मात्र ये आग्रह किया गया था की पिछले तीन दिन से जो किसान मझगवां खरीदी केंद्र में लाइन लगाए खड़े हुए हैं उनकी फसल को बेचने के लिए समिति प्रबंधक द्वारा कूपन नही दिया जा रहा है अतः उन्हें कूपन दिलवाया जाए जिससे 50 किमी से अधिक दूर से आये हुए किसान परेशान न हो और उनकी फसल की खरीदी हो जाए.


   परंतु इस सिरमौर एसडीएम अग्निहोत्री ने कहा की जाकर आवेदन दें. जो समस्या होगी उसका आवेदन और लिखित शिकायत के आधार पर निराकरण किया जाएगा. तब सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा कहा गया की खरीदी का अंतिम दिन कल है और आपको आज यदि आवेदन दिया जाएगा तो कब तक उसका समाधान किया जाएगा, आपकी टेबल पर आवेदन कब तक पहुचेगा और जब डेट चली जायेगी तो निराकरण क्या होगा। इसलिए समस्या की गंभीरता को देखते हुए किसानों की समस्या का ऑन स्पॉट समाधान करने की आवश्यकता है न की यहॉं लिखा पढ़ी की. यदि आवश्यक होगा तो किसान लिखा पढ़ी भी करेंगे लेकिन 3 दिन से कतार में खड़े हुए किसान अभी लिखा पढ़ी नही कर सकते. इस पर इस सिरमौर एसडीएम ने कहा की हमे नियम कानून मत बताओ और हमे आदेश मत दो. अब इस बात पर स्वयं ही समझा जा सकता है की इसमे आदेश की क्या बात थी. यह तो सामान्य बात है कि आज हर नागरिक किसी भी अधिकारी हो या प्रधानमंत्री हो उसके समक्ष रख सकता है. लेकिन इस सिरमौर एसडीएम को यह बात नागवार नही लगी.

सिरमौर एसडीएम हिटलरशाही पर उतारू

    जिस प्रकार से सामाजिक कार्यकर्ता से सामान्य जन के सामाजिक मुद्दों पर चर्चा के दौरान मोबाइल पर सिरमौर एसडीएम ने बात कही है उससे एक लोकसेवक नही बल्कि तानाशाह होने की बू आ रही है. इस प्रकार की बात एक लोकसेवक द्वारा करके आम व्यक्ति को शासन प्रशासन से दूर किया जा रहा है. उसे डराने और धमकाने का प्रयाश किया जा रहा है. लेकिन इससे बात बनने वाली नही है. शिवानन्द द्विवेदी जैसे हर एक आम गांव के व्यक्ति में हिम्मत भी नही की इस तरह बेहूदी किश्म की बात करने वाले एसडीएम से बात कर पाएंगे। स्वाभाविक है यह एसडीएम आम आदमी के साथ कैसा दुर्व्यवहार करता होगा इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है। वैसे सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा नियम से हटकर किसी भी अधिकारी कर्मचारी से कुछ भी गलत करवाने का प्रयास नही किया गया।

लोकसेवक लोकतांत्रिक परंपरा में जनता का नौकर 

   एक लोकसेवक लोकतांत्रिक परंपरा में जनता के टैक्स पर पलने वाला जनता का नौकर होता है जनता का मालिक नही. यदि सिरमौर एसडीएम अग्निहोत्री को यह लगता है की वह जनता के मालिक हैं तो यह उनकी बहुत बड़ी भूल है। जनता अपने नौकरों से अपने टैक्स के एक एक पैसे की दिए जाने वाले पेमेंट की जानकारी तो लेगी ही और वह उसका पूरा अधिकार बनता है। जब लोकतंत्र हट जाएगा और तानाशाही आ जाएगी तब जनता भी उस तानाशाही का जबाब देगी। फिलहाल तो लोकतंत्र है और लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि है।

एसडीएम अग्निहोत्री कई दिनों से थे अनुपस्थित 

       बता दें कि अम्बिका पटेल निवासी मदरी द्वारा जानकारी दी गयी कि सिरमौर एसडीएम अग्निहोत्री कई दिनों से अनुपस्थित थे। जब दिनाँक 26 जून को हितग्राही सिरमौर कार्यालय पहुचे तो उन्हें पता चला कि एसडीएम कई दिनों से कार्यालय में नही आये थे इसलिए फ़ाइल का अंबार लगा था। 

फ़ोन करने के बाद ही सिरमौर एसडीएम अपने कार्यालय में उपस्थित हुए

    जब सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा एसडीएम को फ़ोन किया गया तभी वह कार्यालय पहुचे और आवेदक अम्बिका पटेल को बुलाया और उनके बेटी के कागज़ में हस्ताक्षर किया। अम्बिका पटेल ने बताया कि उन्हें भी एसडीएम ने कहा कि फ़ोन करवाकर चमकवाते हो।

     अब तो ऐसे एसडीएम से बात करने में भी लोगों को डर लगेगा कि बात करने के जुर्म में कहीं जेल न करवा दें!

   सिरमौर एसडीएम अग्निहोत्री की शिकायत हुई सीएम और पीएम को

      जिस प्रकार से सिरमौर एसडीएम अग्निहोत्री ने सामाजिक कार्यकर्ता के साथ बदसलूकी से बात की और अपना हिटलरशाही वाला रुतबा दिखाया इसकी शिकायत सीधे ईमेल और पीजी पोर्टल पीएमओ पोर्टल के द्वारा ऑनलाइन कर दी गई है और ऐसे एसडीएम के ऊपर कार्यवाही करते हुए एक्शन लेने की अपील की गई है क्योंकि सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा एसडीएम अग्निहोत्री से ऐसी कोई भी बात मोबाइल फ़ोन में नही की गई है जो संवैधानिक मर्यादा के विरुद्ध हो. मात्र संवैधानिक मर्यादा का उल्लंघन सिरमौर एसडीएम अग्निहोत्री द्वारा किया गया है.

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संलग्न - 1) संलग्न ऑडियो फ़ाइल में देखें महामहिम एसडीएम महोदय श्री अग्निहोत्री जी का मोबाइल पर सामाजिक कार्यकर्ता को धमकाना।

2) पीएमओ पीजी पोर्टल में दर्ज शिकायत और साथ ही सीएम मध्यप्रदेश को ईमेल के माध्यम के भेजी गई शिकायत की प्रतियां भी संलग्न है. इसका स्क्रीनशॉट लिया जाकर यहां पर भेजा जा रहा है. शिकायत अंग्रेज़ी में लिखी गई है लेकिन स्पष्ट है.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोब - 7869992139, 9589152587


Saturday, June 23, 2018

उमरी कैप में मौसम की मार खा रहा खुले में रखा हज़ारों टन गेहूं (मामला ज़िले के सिरमौर तहसील अंतर्गत आने वाले उमरी कैप का जहां पर डंपिंग पॉइंट मे खुले में हज़ारों टन पड़ा गेहूं मौसम की मार खा रहा, बाहर से बाउंड्री वाल न होने और प्रॉपर फेंसिंग की व्यवस्था न बन पाने से मवेशियों का भोज बन रहा किसान का गेहूं)

दिनांक 24 जून 2018,  स्थान - उमरी कैप, सिरमौर रीवा मप्र 

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

   सरकार ने गेहूं की खरीदी तो कर ली है पर उसकी व्यवस्था कैसे करनी है शायद शासन में बैठे नुमाइईंदों को यह पता नही है. मप्र सरकार कहती है की हमारे पास पर्याप्त वेयर हाउसेस हैं जहाँ पर गेहूं और चावल को स्टोर किया जा सकता है परंतु सरकार के दावे तब खोंखले दिखते हैं जब सिरमौर के पास उमरी कैप और रीवा के हृदय में स्थित करहिया मंडी की तरफ ध्यान जाता है. तब समझ आता है की मात्र कह देने भर से कुछ नही होता. शुक्र है की मीडिया की तीसरी आंख पूरे खरीदी से लेकर उठाव और भंडारण करने तक के पूरे घटनाक्रम में नजर बैठाए हुए रहती है वरना यदि सब कुछ सरकार की मान ली जाए तो कल्याण ही हो जाए, 

उमरी कैप में खुले में पड़ा सड़ रहा है अन्नदाता की गाढ़ी कमाई 

   अभी हाल ही में दिनांक 22 जून को सिरमौर होते हुए बैकुंठपुर वाले रास्ते से उमरी पहुचा गया. पूंछने पर पता चला की उमरी चौराहे से दांए स्थित है उमरी कैप जहां पर धान और गेहूं की खरीदी के बाद डंप किया जाता है और फिर वहीं से या की सीधे राइस मिल में धान को भेज दिया जाता है या फिर कैप में सड़ने के लिए रख दिया जाता है. जहां तक गेहूं का सवाल है तो वहां कार्यरत सुरक्षा चौकीदारों  जन्मेजय कुमार तिवारी,  विजय कुमार यादव,  राजभान लोद, सत्यभान लोद, कृष्णकांत मिश्रा, लंकेश मिश्रा से जानकारी मिली की इस वर्ष अभी भी स्टोर हाउसेस खाली न मिल पाने की वजह से गेहूं की वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर वहीं पर खुले में डंप किया गया है जिसे वेयर हाउस खाली होने के साथ ही उठाव कर लिया जाएगा.

     परंतु वर्तमान में जो स्थिति दिखी वह संतोषजनक तो बिल्कुल नही कही जा सकती है. यद्यपि बारिश के मौसम में भी पन्नी और प्लास्टिक आदि की पर्याप्त व्यवस्था की हुई दिखी जिसमे गेहूं को ढका हुआ था फिर भी यदि मूसलाधार बारिस होने लगे तो ऐसे में पानी को संभालना और साथ ही आर्दता से गेहूं को बचा पाना काफी मुश्किल पड़ जाएगा. यदि किसी तरह से पन्नी वगैरह लगाकर गेहूं को ढक भी लिया गया तो कई दिनों तक चलने वाली बारिश की वजह से आने वाली आर्दता से गेहूं को बचा पाना मुश्किल ही नही असंभव कार्य है. आर्दता की वजह से गेहूं में कीड़े लग जाते और देखते ही देखते पूरा गेहूं सड़ जाता है.

   कहां गए सरकार के वेयर हाउस

     सरकार कहती है की हमारे पास खरीदे गए अनाज के भंडारण की पर्याप्त और समुचित व्यवस्था है लेकिन प्रश्न यह है की यदि पर्याप्त और समुचित व्यवस्था होती तो आखिर गेहूं धान को इस प्रकार उमरी कैप अथवा करहिया मंडी में खुले में क्यों रखा जाता. सरकार की महत्वाकांशी और किसान को राहत देने वाली योजनाएं जिनमे धान-गेहूं की खरीदी की जाकर सरकार उसकी व्यवस्था देखे उचित और सराहनीय है, परंतु सरकार को इस खरीदे हुए अनाज के समुचित भंडारण में विशेष ध्यान देने की जरूरत है. यदि सरकार के पास स्वयं के वेयर हाउस न भी हों तो प्राइवेट वेयर हाउस को को किराये में लेकर अनाज का समुचित भंडारण करना चाहिए. किसान के खून पसीने से पैदा हुआ एक-एक दाना बहुत ही महत्वपूर्ण है जिसे नष्ट होने से बचाया जाना चाहिए. 

उमरी कैप के कर्ताधर्ता मात्र कुछ चौकीदार 

    ज़िले के सिरमौर स्थित उमरी कैप में पहुच कर जानकारी प्राप्त करने पर पता चला की कैप प्रबंधक मौजूद नही थे और मात्र पूरे सुरक्षा की जिम्मेदारी चंद लोगों के हवाले थी जिंसमे जन्मेजय कुमार तिवारी, विजय कुमार यादव, राजभान लोद, सत्यभान लोद, कृष्णकांत मिश्रा, लंकेश मिश्रा थे जिन्हें बारी बारी से सुरक्षा का जिमा दिया गया था साथ ही सावित्री साकेत, साधना साकेत नामक दोनो महिला झाड़ू और साफ सफाई कर्मचारी के रूप में थीं. वहीं पर वृष्णुदत्त महाराज नामक पुजेरी भी मिले जिन्होंने बताया की वह सिद्ध दानव मामा गंगा बहरी में पूजा अर्चना का कार्य करते हैं.

शुक्ला वेयर हाउस के पास ट्रकों में लदा अनाज खा रहा पानी

    सबसे बड़े ताज्जुब की बात तो यह है की उमरी कैप के नजदीक ही स्थित शुक्ला वेयरहाउस है जिसके पास दर्जनों लोडेड ट्रक खड़े मिले. जानकारी प्राप्त हुई की यह ज्यादातर ट्रक उमरी गेहूं कैप से ही लोड हुए हैं जो हफ्तों से अनलोड होने का इंतज़ार कर रहे हैं और साथ ही मौसम की बारिश खाते हुए खड़े हैं जिंसमे गेहूं बुरी तरह भींग रहा है. मात्र प्रबंधन की अनदेखी और लापरवाही की वजह से किसान के खून पसीने की गाढ़ी कमाई की ऐसी तैसी की जा रही है.

 चारों तरफ से खुला है उमरी कैप, कोई पुख्ता सुरक्षा नही 

      देखने पर पता चला की उमरी कैप जहां पर इतनी अधिक मात्रा में गेहूं और अनाज को खरीदी के बाद डंप किया हुआ है उसकी बाउंड्री वाल नही है. सुरक्षा गार्ड जन्मेजय तिवारी द्वारा उमरी कैप के प्राँगण में अंदर घुसे हुए पशुओं और सुअर की तरफ इशारा करते हुए बताया गया की चारों तरफ से सही फेंसिंग व्यवस्था न हो पाने की वजह के यह जानवर कैप के अंदर घुसे रहते हैं जिससे खुले में रखा हुआ अनाज खाते और नुकसान पहुचाते रहते हैं. 

      बाउंड्री के तौर पर देखा जाए तो मात्र कटीले तार लगे हुए थे जो की खंभों में बांधकर लगाए गए थे. चेक पॉइंट अथवा चुंगी के पास तो खम्भे भी धराशायी हो गए थे जिससे कटीले तार भी जमीदोंज हो गए थे जहां से मवेशियों का आना जाना ज्यादा सुलभ था. जन्मेजय तिवारी और उनके अन्य सुरक्षा गार्ड साथियों द्वारा माग की गई की उमरी कैप के चारों तरफ बाउंड्री वाल बनाई जानी चाहिए जिससे खरीदी के समय खुले में रखे हुए अनाज की सुरक्षा की जा सके.

संलग्न - संलग्न तस्वीरों में देखें उमरी कैप के अंदर का दृश्य जहां पर खुले आसमान के नीचे हज़ारों टन गेहूं पड़ा सुरक्षा की गुहार लगा रहा है साथ ही हमारे किसानों के खून पसीने की कमाई नष्ट हो रही है. एक अन्य तस्वीर में देखें शुक्ला वेयरहाउस के पास खड़े दर्जनों ट्रक जिन्हें अनलोड नही किया गया. साथ ही सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी लिए हुए चौकीदार और टूटी पड़ी बाउंड्री.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल - 7869992139, 9589152587