दिनांक 16 अक्टूबर 2026 रीवा (मध्य प्रदेश):
रीवा जिले के सिरमौर क्षेत्र (रौझोही-क्योटी) में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र (तथा टाटा पावर से जुड़े प्रोजेक्ट) का कई अन्य स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। पर्यावरण, जन-सुरक्षा और विंध्य क्षेत्र के संरक्षण को लेकर नागरिकों एवं सामाजिक संगठनों ने संभागायुक्त रीवा के माध्यम से भारत के माननीय प्रधानमंत्री जी के नाम एक ज्ञापन पत्र प्रेषित किया है।
*मुख्य आपत्तियां एवं चिंताएं:*
कमिश्नर को सौंपे ज्ञापन में परमाणु संयंत्र के संभावित खतरों और दुष्परिणामों को रेखांकित करते हुए निम्नलिखित प्रमुख बिंदु उठाए गए हैं:
*सघन रहवासी क्षेत्र एवं सुरक्षा का जोखिम:* प्रस्तावित स्थल के निकट घनी आबादी वाली बस्ती है। चेरनोबिल (1986), फुकुशिमा (2011) और थ्री माइल आइलैंड जैसी वैश्विक आपदाओं का हवाला देते हुए कहा गया है कि घनी आबादी वाले क्षेत्र में परमाणु संयंत्र की स्थापना जनजीवन के लिए अत्यंत संवेदनशील और जोखिमपूर्ण है।
*जल संकट व कृषि पर असर:* रीवा संभाग पहले से ही जल संकट से जूझ रहा है। संयंत्र के रिएक्टर्स को ठंडा रखने के लिए अरबों लीटर पानी की खपत से स्थानीय कृषि, पेयजल आपूर्ति और पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह प्रभावित हो सकता है।
*पर्यटन व पर्यावरण क्षति:* प्रसिद्ध क्योटी जलप्रपात और पर्यटन क्षेत्र इससे प्रभावित होंगे। संयंत्र से निकलने वाले 'थर्मल डिस्चार्ज' (गर्म पानी) और विकिरण से जैव-विविधता व आजीविका को भारी नुकसान पहुंचेगा।
*अंतरराष्ट्रीय अनुभवों का हवाला:* ज्ञापन में जर्मनी, इटली, ताइवान, स्पेन और बेल्जियम जैसे देशों का उदाहरण देते हुए न्यूक्लियर फेज-आउट नीति अपनाने और सौर/पवन ऊर्जा को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
*स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव:* विश्व के 175 न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के अध्ययनों का हवाला देते हुए बताया गया है कि मानक रेडिएशन और सामान्य परिस्थितियों में भी 30 किमी के दायरे में रहने वाले लोगों में कैंसर (5%-10%), ल्यूकेमिया (9%) और थायराइड कैंसर (17%) के मामलों में वृद्धि पाई गई है।
*प्रमुख मांगें:*
*परियोजना का निरस्तीकरण या स्थल परिवर्तन:* सुरक्षा के दृष्टिकोण से इस परियोजना को रीवा/मऊगंज के रहवासी क्षेत्र से तत्काल निरस्त या स्थानांतरित कर सौर व पवन ऊर्जा परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाए।
*पारदर्शी जनसुनवाई:* प्रभावित गांवों के नागरिकों के बीच वैधानिक नियमों के तहत जनसुनवाई आयोजित कर निष्पक्ष जनमत संग्रह कराया जाए।
*पारदर्शी प्रभाव आकलन (EIA):* निष्पक्ष सामाजिक एवं पर्यावरणीय संस्थाओं (जैसे सुश्री मेधा पाटकर व अन्य विशेषज्ञों) को शामिल कर पारदर्शी पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
कमिश्नर को यह ज्ञापन सौंपते समय अनिल सिंह उपकारी (अध्यक्ष - समाधान जनकल्याण संस्थान, जिला रीवा) तथा विंध्य क्षेत्र के समस्त नागरिकों एवं संगठनों के साथ अधिवक्ता सुरेंद्र पांडेय, अधिवक्ता दिनेश कुमार रजक एवं पत्रकार अतीत गौतम सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*
No comments:
Post a Comment