*रोझौही एवं क्षेत्रीय लोगों ने इस अंतर्राष्ट्रीय शोध का हवाला देकर एक बार फिर किया प्रदर्शन//*
*रोझौही के लोगों ने कहा अधिकारियों और कंपनी के लोगों के झांसे में नहीं आएंगे//*
वैश्विक शोध का दावा: न्यूक्लियर प्लांट के 30 किमी दायरे में रहने वालों को कैंसर और ल्यूकेमिया का बढ़ा खतरा //*
*अंतरराष्ट्रीय अध्ययन: परमाणु संयंत्रों के पास रहने वाले बच्चों में कैंसर का जोखिम सबसे ज्यादा//*
*'सुरक्षित' रेडिएशन सीमा के बावजूद न्यूक्लियर प्लांट के कर्मचारियों और आसपास के नागरिकों के स्वास्थ्य पर कैंसर का मंडरा रहा खतरा//*
दिनांक 15 अक्टूबर 2026
विशेष संवाददाता रीवा मप्र।
विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक शोध पत्रिका 'करंट एनवायरनमेंटल हेल्थ रिपोर्ट्स' में प्रकाशित एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में न्यूक्लियर पावर प्लांट (परमाणु ऊर्जा संयंत्रों) के आसपास रहने वाले नागरिकों और वहां काम करने वाले कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों को लेकर चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। इस बात को लेकर रोझौही और आसपास के दर्जनों ग्राम के लोगों ने एकबार फिर न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में प्रदर्शन किया है।
17 देशों के 175 परमाणु संयंत्रों, 4.8 लाख कर्मचारियों और 75 लाख से अधिक नागरिकों के डेटा विश्लेषण पर आधारित इस अध्ययन के अनुसार, मानक सुरक्षा सीमाओं (Regulatory Dose Limits) के भीतर रेडिएशन एक्सपोजर के बावजूद गंभीर स्वास्थ्य जोखिम देखे गए हैं।
*अध्ययन मात्र 30 किलोमीटर दायरे में रहने वालों के ऊपर किए गए, लेकिन खतरा इससे आगे भी:*
*बच्चों में कैंसर का सबसे अधिक जोखिम:* इस अध्ययन के मुताबिक न्यूक्लियर पावर प्लांट के 30 किमी के दायरे में रहने वाले 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में कुल कैंसर (All-cancer) का जोखिम सबसे अधिक पाया गया है।
*थायरॉयड कैंसर और ल्यूकेमिया:* प्लांट के पास रहने वाले आम नागरिकों में दूर रहने वाली आबादी की तुलना में थायरॉयड कैंसर का खतरा 17% और ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) का खतरा 9% अधिक दर्ज किया गया।
*कुल कैंसर दर में वृद्धि:* संयंत्र के 30 किमी के भीतर रहने वाले लोगों में कुल कैंसर का जोखिम 5% से लेकर 10% तक अधिक पाया गया। और यह सब उन सामान्य परिस्थितियों में पाया गया जबकि रेगुलेटरी ऑथोरिटी कहती हैं कि रेडिएशन अपने मानक स्टैंडर्ड के अनुसार था।
*परमाणु संयंत्र कर्मचारियों पर प्रभाव:*
मेसोथेलियोमा (Mesothelioma):* परमाणु संयंत्रों में कार्यरत कर्मचारियों में सामान्य आबादी की तुलना में मेसोथेलियोमा (फेफड़े/पेट की झिल्ली का कैंसर) का खतरा 5.53 गुना अधिक दर्ज किया गया।
*हृदय एवं रक्त वाहिका संबंधी रोग (Circulatory Disease):* शोध में रेडिएशन की संचयी खुराक (Cumulative dose) और कर्मचारियों में रक्त परिसंचरण संबंधी बीमारियों के बीच सीधा संबंध (Dose-response relationship) पाया गया।
*मौजूदा सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल*
अंतरराष्ट्रीय संस्था आईसीआरपी (ICRP) द्वारा तय वर्तमान मानक सीमा (आम जनता के लिए 1 mSv/वर्ष) एवं सामान्य परिस्थितियों के बावजूद बीमारियों में यह वृद्धि पाई गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि परमाणु संयंत्रों से निकलने वाले रेडियोधर्मी कण हवा और वायुमंडलीय दिशा के अनुसार 20 से 30 किमी के दायरे में धीरे-धीरे जमा होते हैं, जिससे आसपास की आबादी प्रभावित होती है।
शोधकर्ताओं ने कहा है कि परमाणु संयंत्रों के आसपास रहने वाली संवेदनशील आबादी (विशेषकर बच्चों) के स्वास्थ्य जोखिमों का नया आकलन किया जाना चाहिए और रेडिएशन निगरानी को और सख्त बनाने की आवश्यकता है।
*सामान्य और संयमित विकिरण वाली स्थितियों में यह हाल है तब भीषण हादसों पर क्या होगा?*
न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में निरंतर जन जागरूकता फैलाने वाले और उसके दुष्परिणामों को लोगों तक पहुंचने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने बताया की अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के द्वारा जो रिसर्च किया गया है वह सामान्य और संयमित विकिरण वाली स्थितियों में किया गया है और इसमें सरकारे और कंपनियां कहती है कि विकिरण की मात्रा तय मापदंड के अनुसार है अथवा इससे कम है और इसमें मात्र आसपास के 30 किलोमीटर के दायरे में ही यह शोध किया गया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यदि कहीं किसी हादसे की वजह से अथवा मानवीय भूल या की मैकेनिकल भूल की वजह से विकिरण बढ़ गया अथवा कोई दुर्घटना हो गई ऐसे में न केवल 30 या 50 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों के लिए यह घातक होगा बल्कि आसपास के पूरे विंध्य क्षेत्र और पूरे प्रदेश या देश को प्रभावित कर सकता है। इसलिए उन्होंने माग की है की रोझौही में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को तत्काल निरस्त किया जाए और यहां की जनता की भावनाओं की कदर की जाए क्योंकि जनता भी नहीं चाहती कि किसी प्रकार से रीवा एवं मऊगंज या विंध्य क्षेत्र में यह रेडियोएक्टिव और जहरीला न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाया जाए।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*
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