*रीवा में न्यूक्लियर प्लांट के खिलाफ बांस ग्राम पंचायत के ग्रामीणों का भी अब फूटा गुस्सा, ग्रामीणों ने खोला मोर्चा//*
*"विनाश नहीं विकास चाहिए": रोझौही प्लांट के विरोध में उतरा बांस और भदौंहा टोला//*
*परमाणु विकिरण के खतरे से सहमे बांस और भदौंहा टोला ग्रामीण, रीवा में उग्र हुआ न्यूक्लियर प्लांट का विरोध//*
*रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में बढ़ता जनसैलाब, बांस और भदौंहा टोला के ग्रामीण भी जुड़े आंदोलन से, सरकार से प्रोजेक्ट रद्द करने की मांग//*
*रीवा में गरमाया रोझौही प्लांट का मुद्दा, बांस और भदौंहा टोला की महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन//*
रीवा, मध्य प्रदेश | 26 अक्टूबर 2026
जिले के रोझौही गांव में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश लगातार उग्र रूप लेता जा रहा है। परियोजना के विरोध का दायरा अब आसपास के टोलों और गांवों तक फैल गया है। इसी कड़ी में रविवार को ग्राम पंचायत बांस और भदौंहा टोला के सैकड़ों ग्रामीणों ने सीएफटी भवन के पास एकजुट होकर जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार की जनविरोधी नीति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने "विनाश 5नहीं विकास चाहिए, न्यूक्लियर प्लांट नहीं चाहिए" और "परमाणु हटाओ जीवन बचाओ" के गगनभेदी नारे लगाकर पूरे क्षेत्र को गुंजायमान कर दिया।
*भारी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल*
विरोध प्रदर्शन में भारी संख्या में ग्रामीणजन सम्मिलित हुए, जिसमें महिलाओं और बच्चों की भी खासी मौजूदगी रही। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे बांस ग्राम पंचायत के सरपंच कमलेश पटेल के साथ-साथ देवेंद्र तिवारी, रविकांत अग्निहोत्री, रामकिशोर मिश्रा, ददन प्रसाद साकेत और सियानंद गौतम समेत कई गणमान्य ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में मांग की कि इस विनाशकारी परियोजना को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए।
*विकिरण और रेडिएशन के खतरे से सहमें हैं ग्रामीण*
रोझौही में प्रस्तावित इस न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर क्षेत्र में पिछले लंबे समय से गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। केवल रोझौही और सरई कला ही नहीं, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों के लोग इस बात को लेकर बेहद आक्रोशित हैं।
ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों का तर्क है कि प्लांट के संचालन के बाद उससे निकलने वाले परमाणु विकिरण (रेडिएशन) से स्वास्थ्य, पर्यावरण, वायु, शुद्ध जल, जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों पर बेहद घातक दुष्प्रभाव पड़ेगा। लोगों में इस बात का डर है कि इससे क्षेत्र में कैंसर जैसी असाध्य बीमारियां और नवजात शिशुओं में जन्मजात विकलांगता जैसी समस्याएं पनप सकती हैं। इसी गंभीर आशंका के चलते ग्रामीण शासन-प्रशासन से इस प्लांट को अन्यत्र स्थानांतरित करने या पूरी तरह रद्द करने की मांग कर रहे हैं। प्लांट के विरोध में क्षेत्र में पहले से ही जल सत्याग्रह और आमरण अनशन जैसे गांधीवादी आंदोलन भी सुलग रहे हैं।
*राजनीतिक सरगर्मी और नेता प्रतिपक्ष का दौरा*
इस संवेदनशील मामले पर राजनीतिक हलचल भी तेज है। दिनांक 26 अक्टूबर को मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने रोझौही गांव का दौरा किया। दौरे के दौरान उन्होंने मृतिका विमला कोल के परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की थी और एक लाख रुपये की सांत्वना राशि देने की घोषणा की थी। साथ ही, उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया था कि इस क्षेत्र में न्यूक्लियर पावर प्लांट नहीं लगने दिया जाएगा। यदि जरूरत पड़ी तो मामला विधानसभा में भी उठाया जाएगा।
*दिन-प्रतिदिन व्यापक हो रहा विरोध का कारवां*
रोझौही और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में यह विरोध प्रदर्शन अब एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। प्रतिदिन आसपास के अन्य गांवों के प्रभावित लोग भी इस मुहिम से जुड़ रहे हैं और अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। ग्रामीणों की दो टूक चेतावनी है कि जब तक सरकार इस जनविरोधी और खतरनाक प्रोजेक्ट को रद्द करने का आधिकारिक फैसला नहीं लेती, तब तक उनका यह संघर्ष और विरोध इसी तरह जारी रहेगा।
*(विशेष ब्यूरो रिपोर्ट, रीवा, मध्य प्रदेश)*
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