Tuesday, September 11, 2018

तीजा के दिन श्रीहनुमान मन्दिर कैथा में भरेगा मेला और झूला (100 वर्ष से अधिक पुरानी परंपरा के अन्तर्गत कैथा श्रीहनुमान मन्दिर प्राँगण में होता आया है तीजे के दिन मेले का आयोजन, दूर दूर से दुकानदार आते हैं और 18 मौजा क्षेत्र के लोग लेते हैं मेले का आनंद)

दिनाँक 11 सितंबर 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा श्रीहनुमान मंदिर से, शिवानन्द द्विवेदी)

  यज्ञों की पावन पुनीत स्थली कैथा के अति प्राचीन श्रीहनुमान मंदिर प्राँगण में पिछले 100 से अधिक वर्षों से परंपरागत और हरितालिका तीज अर्थात बघेली में तीजा के दिन आयोजित होने वाले मेला भरेगा. इस बीच कैथा और उसके आसपास के दर्जनों ग्रामों के लोग जिनमे बहुतायत में माताएं, बहने और युवक युवतियां सम्मिलित रहते हैं मेले और झूले का लुफ्त उठाने के लिए श्रीहनुमान मन्दिर कैथा पधारते हैं. गढ़, हिनौती, लालगांव, कटरा, भठवा, और अन्य स्थानों से दूर दूर के दुकानदार अपनी विभिन्न प्रकार की सामग्रियों को बेचने के लिए दुकान लेकर आते हैं.

   बुजुर्गों ने बताया सैकड़ों वर्ष पुराना मेला

   गांव के 80 वर्ष की उम्र छूने वाले कई बुजुर्गों से जब कैथा श्रीहनुमान मंदिर में भरने वाले मेले के विषय में चर्चा हुई तो बताया गया की यह मेला बहुत पुराना है. सभी ने बताया की वह सभी लोग अपने भी पूर्वजों से इस मेले के विषय में सुनते आ रहे हैं.

   कैथा ग्राम के रामसुंदर केवट जो की इस समय 90 के ऊपर पहुचने वाले हैं उनका कहना था की उनके बचपन से यह मेला भर रहा है. कैथा के ही जगदीश पटेल उर्फ जिमीदार ने बताया की उनके बाबा दादा इस मेले के विषय में बताते थे और हम तो बचपन से देख रहे हैं इसी प्रकार कैथा के ही दिवंगत लोकनाथ द्विवेदी द्वारा बताया गया था की उनकी जानकारी से यह मेला लग रहा है. उनके पूर्वजों ने भी इस मेले के बारे में बताया था. इस प्रकार सहज ही समझा जा सकता है की सैकड़ों वर्ष प्राचीन यह मेला निरंतर अपनी परंपराओं के अनुरूप भरता आया है. 

श्रीहनुमान जी की हज़ारों वर्ष प्राचीन प्रतिमा 

   ज्ञातव्य है की कैथा श्रीहनुमान मन्दिर में उपस्थित अति प्राचीन श्री हनुमान जी की प्रतिमा विराजमान है जिसके विषय में भी इसी प्रकार की किंबदंतियाँ है जिनके अनुसार यह प्रतिमा इसी विस्तारित हिनौता तालाब से हज़ारों वर्ष पहले प्रकट हुई थी. कुछ लोगों का मानना है की श्रीहनुमान जी विशाल प्रतिमा आसपास के लोगों की पीड़ा व्यथा और दुख कष्ट को दूर करने के लिए प्रकट हुई थी.

   चाहे जो भी हो लेकिन एक बात तो तय है की ईश्वर के उद्भव को कोई जान नही सकता क्योंकि वह सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापी होते हुए सभी के लिए उनके कर्मो के अनुसार फल देने वाला होता है. वह अपनी इक्षा मात्र से प्रकट होता है और मूर्ति रूप में पूजे जाने का तात्पर्य है की हम ईश्वर को जी भाव में जाने और माने उसे साकार समझ कर उसकी आराधना उपासना करें. 

   कैथा और उसके आसपास के लोगों ने बताया की पहले दशकों पूर्व यहां मंदिर प्राँगण हिनौता तालाब में तीजे के मेले के दिन कुश्ती, कबड्डी और बादी का आयोजन होता था. कबड्डी कुश्ती को तो सभी जानते हैं लेकिन बादी भी एक खेल है जिंसमे 6 लोग एक गोलाई में में होते थे जिंसमे एक खिलाड़ी मात्र एक को गोलाई में घूमकर छूता था जिंसमे खेल में हुडी हुडी कहकर खेल खेला जाता था. पुराने बुजुर्गों ने बताया की उनके समय में बादी का खेल खूब खेला जाता था लेकिन अब वर्तमान में यह खेल पूरी तरह से विलुप्त हो चुका है.

हरितालिका तीज का महत्व

    जिस हरितालिका तीज के मेले की चर्चा हो रही है वह बघेली में तीजा के नाम से जाना जाता है. तीजा का काफी महत्व है. यह त्योहार मुख्य रूप से हिन्दू महिलाओं का निर्जला व्रत के लिए जाना जाता है. पौराणिक कथा प्रसंगों में बताया जाता है माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्ति के लिए हज़ारों वर्षों तक बिना अन्न जल ग्रहण किये हुए कठिनतम व्रत रखा था जिसके फलस्वरूप उनका शरीर काफी कमजोर हो गया था और अंत में मात्र पेड़ के पत्ते खाकर जीवित रहीं थी जिसके बाद उनका नाम अपर्णा पड़ा था जिसके फलस्वरूप भगवान शिव प्रसन्न हुए और माता शती को वरदान दिया और उन्हें पति रूप में मिले.

   आज कलयुग में सभी महिलाएं उसी परंपरा के अनुरूप अपने पति देव की लंबी उम्र और शुख शांति के लिए मात्र 24 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं. उसके बाद तीज की रात के बाद आने वाली शुबह में स्नान करती हैं और मात्र अगले दिन ही भोजन करती हैं. बताया गया की बघेली में तीजे के व्रत में खीरे का काफी महत्व है. पूजन के दौरान खीरे का उपयोग किया जाता है और इष्टदेव को चढ़ाया जाता है.

   दिनाँक 12 सितंबर को हरितालिका तीज के दिन भरने वाले इस मेले एवं झूले का आनंद लेने के लिए आसपास के लोग काफी उत्साहित हैं.

 संलग्न  - संलग्न फ़ोटो में देखें उपस्थित भक्त श्रद्धालुगण.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139 

Sunday, September 9, 2018

गंगेव अस्पताल भवन की हालात जर्जर, कभी भी हो सकता है धराशायी, मरीजों के जीवन को उत्पन्न हुआ संकट (मामला रीवा ज़िले के गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का जिंसमे 5 साल पूर्व आई 35 लाख के लगभग राशि मरम्मत में नही हो पायी उपयोग, ठेकेदार का पता नही, पीडब्ल्यूडी ने छोड़ा बीच मझधार में)

दिनांक 09 सितंबर 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

  ज़िले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति निरंतर दयनीय बनी हुई है. गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की मरम्मत के लिए आई 35 लाख रुपये के आसपास की राशि आज तक उपयोग नही हो पायी है. गंगेव अस्पताल की संलग्न तस्वीर से स्पष्ट है की यहां मॉनव का नही बल्कि कुत्ते बिल्लियों का राज है और संभवतः पशुओं के लिए ही यह अस्पताल है. गंगेव अस्पताल की अंदरूनी स्थिति देखकर विश्वास ही नही होता की यह मानवों के लिए बनाया गया अस्पताल है की जानवरों के लिए. शायद आज वेटेरिनरी औषधालय की गई गुजरी बिल्डिंग भी इतनी जर्जर और घटिया स्थिति में नही होगी जितनी की गंगेव का मानवों के लिए बनाया गया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है.

बीएमओ ने बताया राशि सैंक्शन के वावजूद भी निर्माण नही हुआ

  गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक लंबे अरसे के पदस्थ खंड चिकित्सा अधिकारी श्री देवव्रत पांडेय ने बताया की पिछले पांच वर्ष पूर्व ही 35 लाख के आसपास की भारी भरकम राशि मात्र गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के रखरखाव और मेंटेनेंस के लिए स्वास्थ्य विभाग भोपाल द्वारा दी गई थी जिस पर टेंडर प्रक्रिया के तहत पीडब्ल्यूडी एवं ठेकेदार द्वारा कुछ कार्य भी 2 वर्ष पहले प्रारम्भ हुआ लेकिन फिर उस कार्य का जो हाल है वह सामने है. ठेकेदार ने कुछ समय बाद काम छोड़ दिया और अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदार ठहराया वहीं दूसरी तरफ जब बीएमओ एवं अस्पताल प्रबंधन से बात हुई तो उनके द्वारा बताया गया की यह सब पीडब्ल्यूडी और ठेकेदार की कारगुजारी है जिसके कारण पूरा गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कबाड़खाना बन चुका है.

जगह जगह उखड़े फर्स, टूटी छतें दे रही मौत को आमंत्रण

  अस्पताल के अंदर घुसने पर डर सा महसूस होता है क्योंकि पूरा अस्पताल की बिल्डिंग बुरी तरह से क्षतिग्रस्त समझ आती है. फर्स और टाइल्स बुरी तरह से उखड़ी हुई है. जगह जगह कुत्ते बिल्ली यहां वहां बैठे नजर आते हैं जिन्हें देखकर ऐसा प्रतीक होता है मानो यही कुत्ते ही अब इस गंगेव अस्पताल की जिम्मेदारी लिए हुए हैं.

   मुख्य वृहद कक्ष के स्थान पर नर्स आफिस की गैलरी में कुछ दो चार बिस्तर लगाए गए हैं जिनमे कुछ मरीज देखे जा सकते हैं. उस गैलरी की फर्स और उसकी टाइल्स भी बुरी तरह से उखड़ी हुई है.

अस्पताल भवन के बाहर नही हुई कभी पुताई

   भवन की बाहर की दीवाल भी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थी जिसे मरम्मत कार्य करवाया गया है लेकिन वह भी उसमे कोई पेंट पोलिश नही कराया गया. कुलमिलाकर सम्पूर्ण अस्पताल भवन देखकर इसका कतई अंदाजा नही लगाया जा सकता की यह अस्पताल ही है. ऐसा प्रतीत होता है जैसे 19 वीं सताब्दी के भुतहे किसी खंडहर में घुस चुके हैं जिंसमे से फिल्मी स्टाइल में मृत आत्माओं की आवाज़ जैसे महसूस होता है. 

   बहुत बड़ा दुर्भाग्य है की 35 लाख रुपये आने के बाद भी आज अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग गंगेव अस्पताल को ठीक नही करवा पाया इससे बड़े दुख की बात और क्या हो सकती है जहां पर मरीजों का इलाज करके उन्हें स्वास्थ्य लाभ देकर वापस घर भेजा जाता है आज वही गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्वयं ही बीमार पड़ा है जो अपने स्वयं के लिए किसी उचित शासन प्रशासन रूपी डॉक्टर की तलास में है की कहीं से कोई तो ध्यान दे दे जिसमे यह गंगेव का बीमार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुरुस्त हो जाए.

बीएमओ पांडेय ने बताया ठेकेदार उठा ले गया पुरानी टाइल्स और बिल्डिंग मटेरियल

  गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर कार्यरत ब्लॉक मेडिकल अफसर श्री देवव्रत पांडेय ने आगे जानकारी दी की पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा जिस हिनौती पंचायत के ठेकेदार को मरम्मत का कार्य दिया गया था उसने हद ही कर दी. स्वास्थ्य केंद्र में पुराने लगाए हुए टाइल्स और बिल्डिंग मटेरियल को भी ठेकेदार ट्रेक्टर में भरकर लेजाकर बेंच लिया. एक बार की इसी प्रकार की घटना स्वयं बीएमओ श्री पांडेय के आंख के सामने घटित हुई जिस पर श्री पांडेय ने बताया की उन्होंने ठेकेदार को सख्त हिदायत दी की यदि एक भी पत्थर यहां से उठाया तो सीधे एफआईआर दर्ज करवा दूंगा. यहां तक की बीएमओ ने लिखित रूप से शिकायत भी ठेकेदार के खिलाफ कर दिया था लेकिन बाद में जब ठेकेदार कुछ सामग्री वापस कर दिया तो मामला जाकर शांत हुआ और फिर ठेकेदार काम छोड़कर चला गया.

   इस प्रकार बीएमओ के खुलासे से एक बात तो समझ आती है की निश्चित रूप से कहीं न कहीं स्वास्थ्य विभाग, ठेकेदार और पीडब्ल्यूडी विभाग में तालमेल न बैठ पाने की वजह से गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की भारी दुर्दशा हो चुकी है जिस पर तत्काल एक्शन लिया जाना अनिवार्य है अन्यथा ब्लॉक में एकलौते गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीमार बने रहने से यहां के लोगों को रीवा इलाहाबाद भागने के अतिरिक्त और प्राइवेट झोलाछाप डॉक्टरों को अच्छी मोटी रकम खिलाने के अलावा कोई दूसरा तरीका शेष नही बचेगा क्योंकि बदलते पर्यावरण और बढ़ते प्रदूषण के चलते विभिन्न प्रकार की साध्य अथवा असाध्य बीमारियों को फैलने से कोई रोंक न पायेगा और ऐसे में बीमार व्यक्ति डॉक्टरों की तरफ ही दौड़ेगा चाहे वह झोलाछाप हों अथवा सरकारी डिग्री धारक.

संलग्न -  कृपया संलग्न तस्वीर में देखने का कष्ट करें किस तरह से गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है जिंसमे मॉनव नही कुत्ते बिल्लियां रहते हैं. उखड़ी टाइल्स, टूटी छतें, उखड़ी फर्स गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली की दुर्दशा की बखान कर रही हैं.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा, मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139

Friday, September 7, 2018

ब्रेकिंग न्यूज़ - बड़ी खबर- सुप्रीम कोर्ट का आया निर्णय, एमपीईबी में सम्मिलियित ग्रामीण विद्युत सहकारी समितियों के कर्मचारियों को मिलेगा 5 वें एवं 6 वें वेतन आयोग का भी लाभ, सातवें का पहले ही मिल रहा, सम्मिलियित कर्मचारियों को नियमानुसार सभी सुविधाओं का मिलेगा लाभ

दिनांक 08 सितंबर 2018, स्थान- रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

   मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड द्वारा हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए ग्रामीण विद्युत सहकारी समितियों के कर्मचारियों के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में याचिका क्रमांक 5285-5287/2016, एवं 9146-9148/2018 दायर की गई थी जिंसमे आरईसी सोसाइटी रीवा ज़िले में कर्मचारियों को पांचवें एवं छठे वेतन आयोग का लाभ से वंचित करने की बात कंपनी द्वारा रखी गई थी. साथ ही कुछ अन्य मुद्दे थे जिनमे उस समय तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार द्वारा घाटे में देखकर मप्र में संचालित 17 में से 14 ग्रामीण विद्युत सहकारी समितियों को मूलतः मप्र विद्युत मंडल में सम्मिलियन कर लिया गया था. लेकिन सम्मिलियन के वावजूद भी मप्र सरकार के बिजली विभाग द्वारा सम्मिलियित कर्मचारियों को मूल संस्था एमपीईबी द्वारा प्रदत्त लाभ नही दिया जा रहा था.

आरईसी सोसाइटी कर्मचारियों ने मामला रखा हाई कोर्ट में

   इस बात को लेकर समय समय पर ग्रामीण सहकारी समितियों के कर्मचारियों ने शिकायत शिकवे तक किये. यहां तक की मामला कुछ व्यक्तिगत तौर पर कर्मचारियों द्वारा उच्च न्यायालय में भी  रखा गया था. ऐसी जानकारी प्राप्त हुई की कुछ कर्मचारियों को पदोन्नति संबंधी लाभ भी प्राप्त हुआ था जिनमे से कुछ ऐसे कर्मचारी आज डीई तक के पद पर हैं जिसको आधार बनाकर रीवा मप्र में कार्यरत वर्तमान कनिष्ठ यंत्री उमाशंकर द्विवेदी जो इस समय लालगांव में जेई के पद पर कार्यरत हैं उन्होंने ने भी मामला उच्च न्यायालय में दायर किया था जिंसमे समस्त अन्य मुद्दों के साथ मूलतः यह माग रखी थी की क्योंकि ग्रामीण विद्युत सहकारी समितियों को सरकार द्वारा एमपीईबी में सम्मिलियन कर लिया गया है अतः सहकारी समितियों के कर्मचारियों के साथ भेदभाव कर उन्हें ईपीएफ का लाभ न देना, वेतन आयोग का लाभ न देना, अथवा पदोन्नति रोंका जाना अनुचित और सम्मिलियित कर्मचारियों के मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन भी है क्योंकि संविधान स्पष्ट कहता है की एक विभाग के अंदर कार्यरत कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन और समान पदोन्नति के अवसर मिलने चाहिए. इस बाबत दायर किये गए हाई कोर्ट के प्रकरण में कनिष्ठ यंत्री उमाशंकर द्विवेदी को राहत मिली और हाई कोर्ट ने उनके पक्ष में निर्णय दिया. इस प्रकार चूंकि हाई कोर्ट का निर्णय किसी एक व्यक्ति विशेष के लिए नही होता बल्कि उस प्रदेश के उस संस्थान में कार्यरत सभी कर्मचारियों के लिए लागू होता है, ऐसा देख मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने झट से मामला खींच कर सुप्रीम कोर्ट में अपील कर डाली. चूंकि कंपनी को लगा की यदि उन्होंने हाई कोर्ट जबलपुर की बात मान ली और एक कर्मचारी को लाभ दे दिया तो आदेश के तहत सभी कर्मचारियों पर लागू करना पड़ेगा अतः अच्छा खासा पैसा बर्वाद करते हुए उच्च कोटि के वकील और एटॉर्नी टाइप के महगे वकील करके सुप्रीम कोर्ट में उमाशंकर या यूं कहें की पूरे ग्रामीण विद्युत सहकारी समितियों के विरुद्ध ही कंपनी ने मामला की अपील कर डाली.

सुप्रीम कोर्ट में वर्ष 2016 में अपील हुई 

  इस प्रकार अपील क्रमांक याचिका क्रमांक 5285-5287/2016, एवं 9146-9148/2018 के माध्यम से दर्ज अपील में भी भी मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को हार का ही सामना करना पड़ा क्योंकि मामला मानवाधिकार के घोर उल्लंघन का था साथ ही संविधान के नियमों के समान काम समान वेतन के भी विरुद्ध था. इस प्रकार एक लंबी प्रक्रिया के बाद दिनाँक 05 सितंबर 2018 को ग्रामीण विद्युत सहकारी समिति रीवा के जेई उमाशंकर द्विवेदी के पक्ष में निर्णय करते हुए सुप्रीम कोर्ट के युगल खंडपीठ जजों श्रीमान कुरियन जोसफ एवं श्री किशन कौल ने निर्णय दिया की इस बात पर कोई दुविधा अथवा विवाद नही है की सम्मिलियित कर्मचारियों को सम्मिलियन के नियमों के विरुद्ध रखा जाए अथवा उन्हें सम्मिलियित नियमों में प्रावधानों का लाभ न दिया जाए.

पांचवें, छठे एवं सातवें वेतनमान का भी मिले लाभ

  साथ ही जस्टिस कुरियन जोसफ और श्री किशन कौल ने यह भी बड़े स्पष्ट सब्दों में कहा की रीवा ज़िले की ग्रामीण विद्युत सहकारी समितियों में कार्यरत सभी कमर्चारियों सहित अन्य सोसाइटी कर्मचारियों को शासकीय स्तर से लागू समस्त वेतनमान चाहे वह पांचवां हो अथवा छठा सातवां सभी का लाभ दिया जाना चाहिए. इस प्रकार सुप्रीम कोर्ट की युगल खंडपीठ ने रेस्पोंडेंट उमाशंकर द्विवेदी के माध्यम से काफी हद तक आरईसी सोसाइटी के कर्मचारियों को राहत दी है. 

   अब देखना यह होगा की मानवाधिकारों के हनन संबंधी इस मसले पर मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी कितना जल्दी एक्शन लेती है और जिस प्रकार से तीन माह के भीतर पांचवें छठे एवं सातवें वेतनमान का लाभ देने का आदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया है उसे कितने समय में पूरा करती है.

चीफ इंजीनियर ने जारी किये आदेश, जल्द जमा होंगे ईपीएफ खातों में पैसे

   अभी हाल ही में पिछले कुछ माह पूर्व इन्ही ग्रामीण विद्युत सहकारी समितियों के कर्मचारियों के मानवाधिकारों के हनन संबंधी एक अन्य समस्या भी सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा प्रकाश में आई थी जिंसमे रीवा संभाग के कई सहकारी बिजली कमर्चारियों द्वारा पीड़ा व्यक्त की गई थी की उन्हें पिछले छः वर्षों से उनके ईपीएफ एकाउंट में पेमेंट से काट लिए जाने के वावजूद भी पैसा ईपीएफ खाते में जमा नही किया जा रहा है. इस बाबत कुछ कर्मचारियों जैसे भूपेंद्र सिंह बघेल, भूपेंद्र सिंह सेंगर, उमाशंकर द्विवेदी सहित लगभग 7 कमर्चारियों ने पीड़ा व्यक्त की थी और यह भी कहा था की यदि इस दरम्यान उन्हें कुछ हो जाता है अथवा दुर्घटना बस मृत्यु ही हो जाती है तो ऐसे कर्मचारियों के परिवार का भरण पोषण कौन करेगा. यह पूरा मामला रीवा और मप्र से प्रकाशित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के समाचार पत्रों में भी रखे गए थे, ट्विटर के मॉध्यम से उर्जामंत्री एवं मुख़्यमंत्री तक रखे गए थे इसके बाद बिजली विभाग कुछ हरकत में आया जिसके बाद मामला पिछले 19 जुलाई 2018 को मप्र राज्य मानवाधिकार आयोग के समक्ष भी प्रस्तुत किया गया था जिस पर तत्काल ही श्रीमान आध्यक्ष महोदय मप्र राज्य मानवाधिकार आयोग भोपाल ने मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड को नोटिस जारी कर तत्काल जबाब भी मागा था जिसके मार्फत सूचना पत्र भी आयोग द्वारा सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी को दिया गया था. 

मप्र पूर्व क्षेत्र बिजली कंपनी से आयोग ने मांगा जबाब 

    अब तक प्राप्त जानकारी अनुसार बिजली विभाग द्वारा बताया गया है की आयोग का नोटिस जबलपुर जोनल बिजली विभाग के महाप्रबंधक को में प्राप्त होने के बाद रीवा संभागीय बिजली अधिकारी चीफ इंजीनियर कार्यालय से कार्य प्रारम्भ भी किया जा चुका है और चीफ इंजीनियर द्वारा इस मार्फत आरईसी सोसाइटी के पीड़ित कर्मचारियों के ईपीएफ खातों में काटी जाने वाली राशि जमा करने के आदेश भी जारी किये जा चुके हैं. 

 संलग्न - कृपया संलग्न देखें दिनांक 05 सितंबर 2018 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के युगल खंडपीठ के जजों कुरियन जोसफ एवं श्री किशन कौल द्वारा ग्रामीण विद्युत सहकारी समितियों के पक्ष में दिया गया निर्णय की प्रति. साथ ही रेस्पोंडेंट जेई उमाशंकर द्विवेदी की फ़ोटो जिनके पक्ष में निर्णय भी आया है।

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शिवानन्द द्विवेदी, समाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा, मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139

गंगेव जनपद में कूड़े में डाल दिया मनरेगा प्रचार सामग्री, जमकर हो रहा मजदूरों के मानवाधिकारों का हनन (मामला रीवा ज़िले के गंगेव जनपद अन्तर्गत का जहां पर मनरेगा और अन्य सरकारी योजनाओं की प्रचार प्रसार सामग्री को कूड़े के ढेर में डाल दिया, गैलरी में लात धूल खाती पड़ी है मजदूरों और मेटों के अधिकार के पोस्टर बैनर और पैम्फलेट)

दिनांक 07 सितंबर 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

   मजदूरों के अधिकारों की बात करने वाली सरकारें क्या कभी यह जान पाती हैं की आखिर मजदूरों के नाम पर इतने अधिक बनाई गई योजनाओं के बाबजूद भी क्यों मजदूरों के हित में कुछ भी अच्छा सरकारें भौतिक धरातल पर नही कर पा रही हैं. क्या बजह है की मनरेगा जैसी योजनाओं के बाबजूद भी उसका लगभग किसी भी स्तर पर सही क्रियान्वयन नही दिख रहा है. कागजों पर तो कुछ और ही लिखा होता है लेकिन वास्तविक धरातल पर मजदूरों का तो शोषण ही किया जा रहा है. मजदूरों के नाम पर निकाली जा रही मनरेगा की मजदूरी मजदूरों को नही मिल पा रही है. 

फ़र्ज़ी मस्टर रोल और एटीएम कार्ड से निकाली जा रही मजदूरों की मजदूरी

    फ़र्ज़ी मस्टर रोल जारी करना और मजदूरों के नाम पर फ़र्ज़ी तरीके से मजदूरी किसी और के खाते में डालकर निकाल लेना, अथवा मजदूरों को दो चार सौ रुपये पकड़ाकर बांकी का पैसा सरपंच सचिवों और उनके चमचों दलालों द्वारा अपनी जेब में रख लेना आज आम बात है. सरकार मनरेगा की मजदूरी दिए जाने के नाम पर तो बड़े बड़े दावे करती है लेकिन पंचायतों में कोई भी कार्य मजदूरों द्वारा नही करवाया जाता बल्कि सभी कार्य मसीनों और जेसीबी द्वारा कराए जाकर फ़र्ज़ी मस्टर रोल जारी कर कुछ ऐसे मजदूरों के नाम पर मजदूरी का भुगतान किया जाता है जो सरपंच सचिवों के खास होते हैं. उन खास लोगों द्वारा निरंतर मजदूरी का भुगतान होता है और वह खास लोग ऐसे होते हैं जो अपना मुँह भी नही खोलते. क्योंकि उन खास दलालों को दो चार सौ रुपए दिए जाकर उनका मुँह बन्द करवा दिया जाता है.

   साथ ही कई केसों में तो आज बैंकिंग सेक्टर भी पंचायत विभाग और सरपंच सचिवों के साथ मिलकर घोटाला करवा रहा है. रीवा ज़िले के ऐसे कई बैंक सामिल हैं जो रुपये कार्ड अथवा अन्य एटीएम कार्ड चुपके से जारी करके सरपंच सचिवों को दे देते हैं जिसका की मजदूरों को पता तक नही चलता और इसी एटीएम कार्ड से पूरे मजदूरी के पैसे की निकासी सरपंच सचिव अथवा उनके दलाल करते रहते हैं.

जनपद गंगेव की गैलरी में फेंक दिया मनरेगा की सामग्री

   जनपदों और ज़िले से लेकर राज्यस्तर तक बैठे इन सरकारी अधिकारियों की कारगुजारी का पता इसी से लगाया जा सकता है की मजदूरों और उनके अधिकारों के प्रति यह सरकारी नुमाइंदे कितने अधिक सचेत हैं और किस गंभीरता से मामले को लेते हैं. इनकी गंभीरता का अंदाज़ा गंगेव जनपद की गैलरी में लात और पैर के जूते चप्पल से कुचले जा रहे रास्ते में पड़े हुए लाखों रुपये के मनरेगा के प्रचार प्रसार की सामग्री से लगाया जा सकता है. जो मनरेगा के प्रचार प्रसार की सामग्री गांव गांव मजदूरों और मेटों और साथ ही आम जनता को बांटने के लिए उन्हें जागरूक करने के लिए हर वर्ष आती है उसे किस तरह से गंगेव जनपद भवन की गैलरी में नीचे पैरों के तले खुले में फेंक दिया गया है जिसे वहां से निकलने वाला हर सख्स अपने पैरों तले कुचल रहा है.

  इतेफाक से वहीं उसी गैलरी से निकलते समय इस पर सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी का ध्यान अकृश्ट हो गया जिसे बाकायदा निकालकर देखा गया और पढ़ा गया साथ ही उसकी कुछ फ़ोटो भी ली गई. उन पैम्फलेट और प्रचार प्रसार की सामग्री में बहुत ही सुंदर तरीके से मनरेगा के मजदूरों के अधिकारों की बातें लिखी थीं साथ ही कुछ अन्य पैम्फलेट में मनरेगा के मेटों के भी अधिकारों की बातें लिखीं हुई थीं. यह सब देख जान कर बड़ा ही आश्चर्य हुआ की इतनी अधिक जानकारी की सामग्री जिसे की हर पंचायत द्वारा गांव गांव में मजदूरों और पंचायत निवासियों को वितरित किया जाना चाहिए और उनके अधिकारों के प्रति उन्हें जानकारी देकर सचेत किया जाना चाहिए वह किस प्रकार से लात जूते खाते हुए जनपद की गैलरी में उपेक्षित डस्ट बिन की तरह फेंक दी गई है. 

   ऐसे में यह साफ पता चलता है की क्यूंकि मनरेगा और शासकीय योजनाओं के प्रति सरकारी अफसरों का नजरिया ही दोषपूर्ण हैं, भस्ट्राचार फैलाने वाला है अतः उन्हें इस बात से कोई फर्क नही पड़ता की मजदूर को उसका अधिकार मिले की न मिले और साथ ही लोग मनरेगा के बारे में जाने अथवा न जाने. इन्ही बातों से सरल ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है की क्यों मनरेगा जैसे अधिनियम में इतना भस्ट्राचार क्यूं हो रहा है. 

संलग्न - कृपया संलग्न तस्वीर में देखने का कष्ट करें किस तरह से जनपद पंचायत कार्यालय गंगेव की गैलरी में मनरेगा योजना की प्रचार प्रसार की सामग्री लात और डस्ट धूल खाती हुई पड़ी है।

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा, मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139

Wednesday, September 5, 2018

गंगेव जनपद है कलेक्टर रेट के बाबुओं के हवाले (मामला ज़िले के गंगेव जनपद कार्यालय का जिंसमे कलेक्टर रेट के बाबुओं ने पूरा जनपद कार्यालय हाईजैक किया हुआ है, हर कार्य के लिए रॉयल्टी और चढ़ोत्तरी देना अनिवार्य, नही दिया तो नही होता कोई काम, सरकारी बाबू राजेश सोनी बना भष्ट्राचार का केंद्रबिंदु)

दिनांक 05 सितंबर 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत जनपद कार्यालय में जमकर लुटाई चल रही है. जनपद कार्यालय में सीईओ की नही बल्कि बाबुओं की चलती है. इन सबका हेड राजेश सोनी नामक बाबू है जो पिछले कई वर्षों से जनपद कार्यालय गंगेव में टिका हुआ है. 

कलेक्टर रेट के बाबुओं ने गंगेव जनपद को किया हाईजैक

   यदि सही मायनों में देखा जाए तो समग्र परिवार आई डी सुधरवाने से लेकर कोई भी श्रमिक पंजीयन अथवा किसी भी प्रकार के कंप्यूटर फीडिंग के कार्य मात्र इन्ही कलेक्टर रेट के बाबुओं के हवाले है जिनका शेयर भी बंधा हुआ है इस शेयर में बड़े बाबुओं से लेकर उच्चाधिकारी तक सम्मिलित हैं.

   यदि कोई ग्रामीण हितग्राही अपने पंचायत का कोई भी छोटा से छोटा कार्य अथवा फीडिंग करवाने के लिए ब्लॉक जाता है तो उसे बिना चढ़ोत्तरी चढ़ाए कार्य करवा पाना असंभव है. हर कार्य के लिए 100 रुपये से लेकर आगे हज़ार तक फिक्स होते हैं. यह राशि कार्य की इंटेंसिटी के हिसाब से तय होती है. छोटे कार्य के लिए 100 से 200 रुपये और बड़े कार्यों के लिए हज़ारों तक देना पड़ता है. यदि हितग्राही आवेदक ने माल नही दिया तो उसके कार्य होने की कोई गारंटी नही है.

सरकारी बाबुओं का विभागीय समय 12 से 2 बजे तक

  सबसे बड़ी विडंबना तो यह है की जनपद कार्यालय में सरकारी बाबू अनुपस्थित रहते हैं. इनका समय दोपहर 12 बजे से प्रारम्भ होकर 2 बजे तक चलता है. इनका बहाना होता है की इन्हें दूर से कहीं रीवा अथवा दूसरे जगह से आना होता है इसलिए बस की वजह से लेट हो जाते हैं. इसके बाद मुश्किल से 2 घंटे काम करते हैं और 2 बजे के बाद इन्हें कार्यालय में ढूंढ पाना टेढ़ी खीर है. इस पर भी आधा समय गंगेव ब्लॉक जनपद कार्यालय के सामने बने हुए चाय और समोसे की दुकानों और होटल में ही इन्हें पाया जा सकता है. 

कार्यालय में पावती तक पाना है मुश्किल

   जनपद कार्यालय में सामान्य आवेदक को पावती तक ले पाना मुश्किल है, यदि कोई सामान्य आवेदक आवेदन लेकर जाता है और अपने आवेदन की पावती चाहता है तो उसे पावती तक नही मिलती. इन बाबुओं द्वारा कहा जाता है की पहले जाकर सीईओ से हस्ताक्षर करवाकर लाएं. सीईओ यदि अपनी कुर्सी में बैठा है तो ठीक है वरना फिर घर वापसी ही हो सकती है काम नही.

बाबू राजेश सोनी के इशारे पर चल रहा काला कारोबार

    गंगेव जनपद के फाइनेंसियल सेक्शन की ज्यादातर जबाबदेही सरकारी बाबू राजेश सोनी की है उसी के द्वारा काफी कुछ कार्य किये जाते हैं. इन सबमे कमीशन का जमकर खेल चल रहा है. राजेश सोनी द्वारा पंचायत के सरपंचों, सचिवों से माल ऐंठकर परसेंटेज फिक्स किया हुआ होता है. इसमे पंचायत इंस्पेक्टर, उपयंत्री, सीईओ और अन्य उच्चधिकारियों का शेयर बना हुआ है. 

मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में हुआ जमकर फर्जीवाड़ा 

     वर्ष 2018 में अभी हाल ही में मुख्यमंत्री कन्यादान योजनान्तर्गत सामूहिक विवाह सम्मेलन रखा गया था जिंसमे मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित थे और देखा गया की मंडप पर ऐसे महिला पुरुष दिखे जिनके विवाह पहले से तो हुए ही थे साथ ही उनके बच्चे भी पैदा हो चुके थे. कई महिलाएं अपने बच्चों को गोद में लिए हुए घूम रही थीं जिनकी की सामाजिक कार्यकर्ता ने फ़ोटो भी ली है. बाद में इनमे से कई महिलाएं मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में बनाये गए मंडप में बैठीं दिखी. इस बाबत सामाजिक कार्यकर्ता ने ज़िला पंचायत सीईओ मयंक अग्रवाल को भी सूचित किया गया था.

कलेक्टर रेट के इन बाबुओं की चल रही धांधली

 कंप्यूटर में कार्य करने वाले जिन कलेक्टर रेट के बाबुओं की इस समय जमकर धांधली चल रही है उनमे से पुष्पेंद्र सिंह, ऋषिकेश वर्मा, सूरज सोनी मुख्य हैं. इनमे से कोई भी ऐसा नही जिनमे मानवता शेष बची हुई हो. सबसे बड़ा दलाल इस समय सूरज सोनी है जो राजेश सोनी नामक सरकारी बाबू का चहेता है. इन दोनो सोनी ने गंगेव ब्लॉक जनपद पंचायत कार्यालय को सुनार की दुकान बना डाली है जहां सोने के भाव पर सामान्य डेटा फीडिंग, रजिस्ट्रेशन और वेरिफिकेशन के कार्य हो रहे हैं. इस समय गंगेव जनपद में इन बाबुओं की दलाली और हीलाहवाली अपने चरम पर है.

कलेक्टर रीवा द्वारा इन्हें तत्काल हटाए जाए 

  अब ऐसे में इन डेटा ऑपरेटरों को कलेक्टर रीवा तकाल प्रभाव के साथ हटाएं. इनकी जांच किया जाए और घूस लेने के लिए इनके ऊपर कंनूनी कार्यवाही किया जाए. सबसे पहले राजेश सोनी को गंगेव जनपद से हटाया जाय क्योंकि राजेश सोनी ने गंगेव जनपद में सबसे ज्यादा गंदगी फैला करके रखी है. बिना किसी मेहनत के किसी भी व्यक्ति को जब अनुकंपा नियुक्ति से कोई पद दे दिया जाता है उसका परिणाम यही होता है जो राजेश सोनी के केस में दिख रहा है. राजेश सोनी ने गंगेव जनपद की सभी पंचायतों में इस कदर भष्ट्राचार फैलाया हुआ है की पूरा जनपद भष्ट्रचार की गंध से प्रदूषित हो चुका है. आश्चर्य की बात तो यह है यह जानकारी जनपद से लेकर ज़िला लेवल तक होते हुए भी इस पर कोई कार्यवाही नही हो रही है. आखिर क्या कारण है की इतनी शिकायतों इतनी कमियों के वावजूद भी न तो कोई प्रशासनिक कार्यवाही हो रही है और न ही इसे यहां से हटाया जा रहा है. 

ईओडब्लू करे जांच, सामने आएगी वित्तीय आनियमितता

   वास्तव में देखा जाए तो जनपद पंचायत गंगेव सहित समस्त पंचायतों में पिछले पांच वर्षों में हुए व्यापक भष्ट्राचार की ईओडब्लू की जांच होनी चाहिए साथ ही सभी कार्यों की कैग रिपोर्ट तैयार की जानी चाहिए. यदि कंपट्रोलर एवं ऑडिटर जनरल से ऑडिट रिपोर्ट तैयार करवाई जाए तो सभी कुछ स्पष्ट हो जाएगा की जनपद के विकाश कार्य कागजों में तो कुछ और हैं लेकिन वास्तविक धरातल पर पंच परमेश्वर, मनरेगा से लेकर विधायक एवं संसद निधि के कार्यों में भी जमकर भ्रष्ट्राचार हुआ है. सरकार यदि वास्तव में समाज एवं देश को भष्ट्राचार मुक्त करना चाह रही है तो शासन स्तर से कैग और अन्य माध्यमो से एजेंसी तैयार कर सही तरीके की जांच कराए जाकर कार्यवाही सुनिश्चित होनी चाहिए.

संलग्न - ज़िले के गंगेव जनपद में कार्यरत कलेक्टर रेट के बाबुओं की फ़ोटो, जनपद कार्यालय की फ़ोटो, कुछ सरकारी बाबुओं की फ़ोटो और साथ ही सीईओ जनपद प्रमोद ओझा की फ़ोटो.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 7869992139, 9589152587

गंगेव कृषि विभाग के सामने फेंकी मरी गाय, महामारी की संभावना (मामला ज़िले के गंगेव ब्लॉक का जहां पर कृषि विभाग एवं न्यायालय तहसीलदार के सामने एवं सीईओ कार्यालय के बाजू में मरी गाय फेंक दी जिससे महामारी फैलने की बनी संभावना)

दिनांक 05 सितंबर 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा, मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

  ऐरा छोंडे गए मवेशियों की आये दिन सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु हो रही है. राष्ट्रीय राजमार्ग 27 के आसपास ऐसे दर्जज़ों सड़ांध और दुर्गंध देते मवेशी मिलेंगे. अभी हाल ही में पिछले दिनों एक मृत गाय को गंगेव बाजार के पास किसान कल्याण एवं कृषि विभाग के सामने फेंक दिया गया था. बता दें की वहीं कृषि विभाग के बाजू में ही न्यायालय नायब तहसीलदार एवं सीईओ जनपद पंचायत कार्यालय के बगल में ही पड़ी यह गाय दिनाँक 04 सितंबर की शाम तक वहां पर उपस्थित ग्रामीणजनों और आसपास के राहवाशियों सहित सरकारी कर्मचारियों का जीना दूभर किये हुए थी.

कृषि कर्मचारियों ने जाहिर की अक्षमता

   जब इस मृत और कृषि विभाग के सामने फेंकी गई गाय के विषय में गंगेव कृषि कर्मचारियों से बात की गई तो बसंत गौतम और प्रिंस द्विवेदी द्वारा बताया गया की इस मरी हुई गाय को पिछले चार दिन पहले से फेंक दिया गया है. इसे यहां पर रात में फेंका गया होगा क्योंकि दिन में फेंका जाता तो देख पाते. पहले लोगों ने आपस में शिकवा शिकायतें की लेकिन किसी ने जिम्मेदार स्थानीय निकाय को सूचना नही दी. जबकि देखा जाय तो कई दुकानदार और बैंक भी वहीं पर स्थित हैं.

सामाजिक कार्यकर्ता ने डायल 100 को दी जानकारी

  दिनाँक 04 अगस्त 2018 की दोपहर कृषि विभाग संबंधी कार्य और जानकारी लेने के उद्देश्य से जब वहां पर पहुचा गया तो सड़े हुए मृत पड़े मवेशी की दुर्गंध से जीना दूभर हो गया. सांस लेना मुश्किल पड़ रहा था जिस पर सामाजिक कार्यकर्ता ने कृषि विभाग के कर्मचारियों से जानकारी प्राप्त की तो उक्त सभी बातों की जानकारी मिली. इस पर आनन फानन में कुछ समझ न आने मृत मवेशी की दूर से फ़ोटो लेकर ट्विटर के माध्यम से मप्र पुलिश की डायल 100 सेवा पर सूचना प्रेषित कर दी गई जिस पर गंगेव एफ आर वी से फ़ोन आया जानकारी चाही गई. एफ आर वी में तैनात कर्मचारी ने कहा की जब मवेशी फेंका गया था तब सूचना देनी थी अब इतने दिन बाद क्यों दे रहे हैं. इस बात पर पुलिशकर्मी को बताया गया की यह कार्य कृषि विभाग के कर्मचारियों, नायब तहसीलदार कार्यालय कर्मियों तथा सीईओ जनपद का कार्य था अथवा गंगेव बाजार के आसपास रहने वाले दुकानदारों का कार्य था की पुलिश को पहले सूचना देते. सामाजिक कार्यकर्ता गंगेव कार्यालय कभी कभी आता है अतः यह संभव नही था की जब मवेशी फेंका गया उस समय सामाजिक कार्यकर्ता वहां पर बैठा रहे.

मढ़ी-खुर्द सचिव सरपंच को सूचना पर भी देर रात तक नही हटाया मृत गाय

    बताया गया की यह मामला गंगेव जनपद की मढ़ी खुर्द पंचायत का था. जिंसमे स्थानीय निकाय और पंचायत विभाग की जिम्मेदारी थी की इस मृत मवेशी को वहां से हटाया जाए. इस पर जब मढ़ी-खुर्द के सचिव को बुलाया गया तो उसके द्वारा बताया गया की पंचायत की जिम्मेदारी नही है क्योंकि पंचायत के किसी क्लॉज़ में यह नही लिखा है की मृत मवेशी को फेंका जाय. वहरहाल जानकारों से पता चला की किसी भी जगह यदि मवेशी मृत पाया जाय, कूड़े गंदगी का ढेर हो अथवा साफ सफाई की स्थिति हो उसमे स्थानीय निकाय की ही जिम्मेदारी तय होती है अतः सचिव सरपंच का अपनी जिम्मेदारी से मुकरना गलत है. इसमे पंचायत की ही जिम्मेदारी है क्योंकि आकस्मिक व्यय के लिए पंचायत में मद भी आता है.

देर रात तक नही हटाया गया मृत मवेशी

  सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा देर रात गंगेव एफ आर वी के डायल 100 स्टाफ से जानकारी चाही गई तो बताया गया की डायल 100 ने मढ़ी खुर्द के सरपंच सचिव को जानकारी दे दी थी लेकिन इसकी पुख्ता जानकारी नही है की मवेशी हटाया गया की नही. जेसीबी लगवाकर मवेशी हटाने की बात सरपंच सचिव ने कही थी.

इसके पूर्व भी मढ़ी खुर्द में ट्रक से मरे थे आधा दर्जन मवेशी

   बता दें की गंगेव निवासी ब्रिज किशोर तिवारी के माध्यम से कुछ दिन पहले जानकारी मिली थी की ट्रक और वाहन की चपेट में आकर लगभग आधा दर्ज़न मवेशी मारे गए थे जिन्हें बायपास के पीछे फेंक दिया गया था जिनको वहां से न उठाये जाने के कारण महामारी जैसी स्थिति निर्मित हो गई थी जिसके विषय में सामाजिक कार्यकर्ता को सूचना मिलने पर पशु चिकित्सा विभाग के वेटेरिनरी सर्जन एस के पांडेय को सूचित किया गया था. तब जाकर उन मृत मवेशियों को हटवाया गया था.

संलग्न - कृपया देखें गंगेव कृषि विभाग के सामने मृत पड़ी गाय की सड़ांध लिए हुए दुर्गध देती मृत गाय की फ़ोटो जिंसमे बायोलॉजिकल रिएक्शन के कारण कीड़े भी पड़े हुए हैं.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा, मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139

एनआरसी गंगेव में मात्र 2 भर्ती, क्षमता 15 कुपोषितों की (मामला ज़िले के गंगेव ब्लॉक में बनाये गए पोषण और पुनर्वास केंद्र का जिंसमे सैकड़ों आंगनवाड़ी केंद्रों से मात्र मिले दो बच्चे, क्षमता 15 बच्चों के भर्ती की)

दिनांक 05 सितंबर 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

      ज़िले के गंगेव ब्लॉक में स्थित पोषण एवं पुनर्वास केंद्र में 15 कुपोषित बच्चों को एकसाथ रखे जाने की सुविधा होते हुए भी दिनांक 04 सितंबर 2018 की शाम मात्र 2 कुपोषित बच्चे भर्ती मिले.

      गंगेव जनपद कार्यालय के सामने स्थित पोषण एवं पुनर्वास केंद्र में प्रवेश पर वहां कुछ महिला कर्मचारी मिलीं साथ ही दो अन्य महिलाएं भी अपने भर्ती किये हुए कुपोषित बच्चों के साथ दिखीं जिनसे जब जानकारी चाही गई तो बड़ा ही आश्चर्यचकित करने वाला वाकया सामने आया. उपस्थित महिला कर्मचारियों द्वारा सामाजिक एवं मानवाधिकार एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी को बताया गया की एनआरसी केंद्र में कुल 10 कुपोषित बच्चों को एकसाथ रखे जाने का बिस्तर एवं सुविधाएं उपलब्ध है जबकि यदि संख्या ज्यादा हो जाए तो 15 तक भी रखे जा सकते हैं.

04 सितंबर को भर्ती मिले मात्र 2 कुपोषित बच्चे

  सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा जब पूछा गया तो जानकारी मिली की दिनांक 04 सितंबर को दो कुपोषित बच्चे भर्ती हैं बांकी अन्य सभी बिस्तर खाली पड़े हैं. ग्राम बुसौल-बेला से रीतू पाठक नामक महिला ने बताया की उनका 22 माह का बच्चा है जिसे 29 अगस्त 2018 को एनआरसी केंद्र गंगेव में भर्ती कराया गया था जिसकी भर्ती के समय बजन मात्र 8 किलोग्राम था और अब 04 सितंबर की डेट में बजन बढ़कर 8 किलो 785 ग्राम हो गया था. इसी प्रकार ग्राम नीवी निवासी विमला देवी कोल द्वारा बताया गया की उन्होंने 04 सितंबर को ही अपना लगभग डेढ़ साल का बच्चा एनआरसी केंद्र गंगेव में भर्ती कराया है. उनका बच्चा भी कुपोषित था जिसका पोषण चल रहा है।

15 दिन तक भर्ती का है प्रावधान

   एनआरसी केंद्र गंगेव में कार्यरत महिला कर्मियों द्वारा जानकारी दी गई की केंद्र में प्रथम बार 2 सप्ताह तक की भर्ती का प्रावधान है जिंसमे बच्चे का बजन और पोषण संबंधी जानकारी लेकर 15 दिनों तक डॉक्टर निरंतर कस्टडी में रखते हैं और इस बीच यदि आवश्यक बजन बढ़कर बच्चा पोषित हो गया तो परिजनों को छुट्टी दे दी जाती है अन्यथा भर्ती आगे भी बढ़ाई जा सकती है.

15 बिस्तर की क्षमता और भर्ती मात्र 2

  सबसे बड़े आश्चर्य की बात तो यह है की गंगेव एनआरसी केंद्र की कुल क्षमता 10 से लेकर अधिकतम 15 बिस्तर तक बतायी गई है लेकिन जिस प्रकार से दिनाँक 04 सितंबर की शाम को मात्र 2 बच्चे भर्ती मिले इससे साफ जाहिर है की गांव गांव जाकर एएनएम और आशा कार्यकर्ता कोई भी कार्य नही कर रही हैं. आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा भी ग्रामीण महिलाओं की मदद नही की जा रही अन्यथा मात्र 10 से 15 बिस्तर की क्षमता वाला एनआरसी केंद्र कैसे खाली रहता. सबसे बड़ी बात यह है की यदि सही तरीके से सर्वे किया जाए तो किसी एक ग्राम में ही 10 से 15 तक कुपोषित बच्चे मिल सकते हैं. सबसे बड़ा प्रश्न यह है की एक तरफ तो सरकारें गांव गांव विकाश, कुपोषण मुक्त समाज और बच्चों-माताओं के लिए कागजों पर इतनी अधिक स्कीमें चला रही हैं दूसरी तरफ वास्तविक धरातल पर सब शून्य जैसा प्रतीत हो रहा है. जो एनआरसी केंद्र पूरी तरह से भरे रहने चाहिए वहां पर मात्र 2 कुपोषित बच्चे पाये जाने का क्या तात्पर्य है. क्या इतने बड़े गंगेव ब्लॉक में मात्र एक समय में 2 ही कुपोषित बच्चे हैं? एएनएम, आशा कार्यकर्ता और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता क्या कर रही हैं? क्या इनके क्षेत्र में कोई कुपोषित बच्चे नही बचे? क्या मात्र गंगेव ब्लॉक में 2 ही कुपोषित बच्चे हैं? सरकार प्रशासन को मात्र कागजों पर योजनाएं लागू नही करना चाहिए बल्कि यह भी देखना चाहिए की इन योजनाओं का वास्तविक भौतिक धरातल पर सही तरीके से क्रियान्वयन हो पा रहा है की नही.

संलग्न - संलग्न तस्वीर में देखें पोषण एवं पुनर्वास केंद्र गंगेव में भर्ती दो कुपोषित बच्चों की फ़ोटो साथ ही फ़ोटो में दिख रही महिला कर्मी. बाहर से लिया गया पोषण एवं पुनर्वास केंद्र की फ़ोटो.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139