Sunday, March 19, 2017

(Rewa, MP) गंगेव बीएमओ चिकित्सालय की हालत खस्ता, भवन मेंटेनेंस का पैसा भ्रष्ट्राचार की भेंट चढ़ा, हैंडपंप और पानी फ्रीजर बंद पड़ा




 दिनांक – 19/03/2017,  स्थान –  (रीवा, मप्र)


गंगेव बीएमओ चिकित्सालय की हालत खस्ता, भवन मेंटेनेंस का पैसा भ्रष्ट्राचार की भेंट चढ़ा, हैंडपंप और पानी फ्रीजर बंद पड़ा  

(गढ़/गंगेव/कांकर, रीवा मप्र – शिवानन्द द्विवेदी) गंगेव खंड चिकित्सा अधिकारी कार्यालय एवं गंगेव चिकित्सालय में मात्र इलाज़ में ही लापरवाही नहीं होती और न ही योजनायों बस में में लीपापोती, बल्कि यहाँ तो सम्पूर्ण भवन के रख रखाव के लिए आने वाली राशि की ही हीलाहवाली कर दी जाती है.
अभी हाल ही में बीएमओ कार्यालय गंगेव जाया गया तो सम्पूर्ण व्यवस्था को ध्यान से देखा गया. पाया गया की वास्तव में बीएमओ कार्यालय एवं गंगेव शासकीय चिकित्सालय की स्थिति दिन प्रतिदिन दयनीय होती जा रही है. दीवाल और फ़र्स से टाइल्स उखड चुकी हैं. फ़र्स बुरी तरह से टूट चुकी हैं. कचरे का ढेर महिला प्रसाधन कक्ष के पास गड्ड लगा है. न तो कोई साफ़ सफाई की उचित व्यवस्था और न ही सही रख रखाव. क्या उखड़ी हुई फ़र्स और गंगेव शासकीय चिकित्सालय के रख रखाव के लिए शासन-प्रशासन द्वारा समुचित राशि की व्यवस्था नहीं की जाती? निश्चित रूप से की जाती है पर पूरी की पूरी मेंटेनेंस की राशि गंगेव बीएमओ कार्यालय के उच्चासीन पदों पर बैठे अधिकारी खा-पीकर बराबर कर देते हैं. क्योंकि यदि ऐसा नहीं होता तो जो स्थिति बीएमओ चिकित्सालय एवं कार्यालय की संलग्न तस्वीरों में देखी गयीं इस कदर नहीं होती. इसके लिए जिम्मेदारों के ऊपर सख्त से सख्त कार्यवाही कर जनता के टैक्स के एक-एक पैसे की वसूली ही इस प्रकार समस्या का उचित समाधान है और भ्रस्ट्राचार में लिप्त पाए जाने पर इनके ऊपर भ्रष्ट्राचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही सुनिश्चित होनी चाहिए.
 आगे चलकर वहीँ बीएमओ कार्यालय के सामने लगा हैंडपंप एवं बगल में लगा ठंडा पानी का फ्रीजर भी देखा गया तो पाया गया की वह भी ठंडा एवं बंद पड़ा है जिसे वर्षों से ठीक नहीं किया गया है और मात्र शोपीस के तौर पर लगा पड़ा है.

संलग्न – देखें तस्वीरों में बी एम ओ कार्यालय गंगेव एवं गंगेव चिकित्सालय के क्षतिग्रस्त भवन फ़र्स आदि की तस्वीरें. 

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Thursday, March 9, 2017

(Rewa, MP) मध्यांचल ग्रामीण बैंक शाखा गढ़ में जारी है भर्रेसाही – मात्र मंगलवार को बांटी जाती है गरीब वृद्धों की सामाजिक सुरक्षा पेंशन, महीने भर होता है भटकना


दिनांक - 10/03/2017, स्थान - गढ़/गंगेव/कांकर/तेंदुआ - रीवा मप्र

मध्यांचल ग्रामीण बैंक शाखा गढ़ में जारी है भर्रेसाही – मात्र मंगलवार को बांटी जाती है गरीब वृद्धों की सामाजिक सुरक्षा पेंशन, महीने भर होता है भटकना

(गढ़/तेंदुआ/गंगेव/कांकर, रीवा मप्र – शिवानन्द द्विवेदी) गढ़ थाने के ठीक सामने स्थित मध्यांचल ग्रामीण बैंक में भर्रेसाही बराबर जारी है. अंग्रेजी काल का भारतीय स्टेट बैंक अभी कुछ वर्ष पूर्व उस समय के रीवा-सीधी ग्रामीण बैंक को अपने अंतर्गत/सम्बद्ध लेकर इसका नाम परिवर्तित कर इसे मध्यांचल ग्रामीण बैंक नाम दिया. मगर नए नाम का तमगा मिलने के वावजूद भी और एसबीआई से सम्बद्ध होने के वावजूद भी लगता है मध्यांचल ग्रामीण बैंकों की कार्य प्रणाली में कोई विशेष वदलाव नहीं दिख रहा है.
बैंकिंग सेक्टर में कोई भी ऐसे नियम कानून नहीं होते जो मनमुताबिक बना लिया जाए और मनमुताबिक लगा दिया जाय. और कम से कम ऐसे नियम तो बिलकुल नहीं जो ग्राहकों के लिए असुविधा का कारण बनें. मध्यांचल ग्रामीण बैंक शाखा गढ़ में तो ऐसा लगता है की यहाँ के बैंक मेनेजर और कर्मचारियों की ही बस मनमानी चलती है. अब इसी बात को देखें की किस प्रकार सामाजिक सुरक्षा पेंशन पाने वाले बुजुर्ग वृद्ध, विधवा, विकलांग लोगों को मात्र मंगलवार के दिन पेंशन देने के लिए बुलाया जाता है. और यदि दुर्भाग्यबस यदि इन बेचारों को इनकी पेंशन मंगलवार को भीड़ होने के कारण नहीं मिल पाई तो फिर इन्हें पूरे सप्ताह भर इंतज़ार करना पड़ता है क्योंकि अन्य दिनों चाहे यह बेचारे कितना भी प्रयास कर डालें इन्हें बैंक मेनेजर द्वारा पेंशन नहीं दी जाएगी. ऐसे में यदि कोई वृद्ध, असहाय, विकलांग की आवश्यकता है अथवा कोई मेडिकल कंडीशन निर्मित हो जाये तो उसे मरना तय है क्योंकि उसके पास कोई दूसरा सहारा नहीं है. आखिर वह बुड्ढा पैसा लायेगा तो लायेगा कहाँ से?

मध्यांचल ग्रामीण बैंक शाखा गढ़ का मात्र मंगलवार को पेंशन देने के तुगलकी फरमान में बदलाव होना अति आवश्यक

ऐसे में प्रश्न यहं उठता है की यदि मध्यांचल ग्रामीण बैंक अथवा कोई भी बैंक यदि सभी दिनों अपने बैंकों में आम जनता का पैसा जमा करवा सकता है, और अन्य कोई भी सख्स पैसे निकाल रहा है तो आखिर सामाजिक सुरक्षा पेंशन की कुछ रुपये पाने वाले हितग्राहियों के साथ ऐसा अन्याय क्यों किया जा रहा है की उन्हें भर मात्र मंगलवार को पैसा मिलता है अन्य दिनों नहीं. इस सन्दर्भ में एक दिन सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा मध्यांचल ग्रामीण बैंक शाखा गढ़ के प्रांगण में जाकर वहां पर उपस्थित वृद्ध विकलांग हितग्राहियों से संपर्क कर उनसे इनकी व्यथा पूँछी गयी इनका इंटरव्यू लिया गया तो सभी उपस्थित हितग्राहियों ने अपनी पूरी दुःख दर्द से भरी कहानी सुनायी और सभी एक स्वर में चाहते थे की मात्र मंगलवार को पेंशन देनें का बैंक का तुगलकी फरमान बिलकुल उचित नहीं है और इसे बदलना चाहिए.

संलग्न – कृपया संलग्न फोटोग्राफ एवं यूट्यूब विडियो देखने का कष्ट करें जिसमे मध्यांचल ग्रामीण बैंक शाखा गढ़ के सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त करने वाले हितग्राहियों के फोटो संलग्न हैं.

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(Rewa, MP) त्योंथर ब्लाक में कांकर, कलवारी सहित दर्ज़नों पंचायतों में मनरेगा में मजदूरों के नाम पर करोड़ों का फर्जीवाडा


दिनांक - 09/03/2017, स्थान - त्योंथर/कांकर/गढ़/तेंदुआ/गंगेव, रीवा मप्र

   ( त्योंथर/कांकर/गढ़/तेंदुआ/गंगेव, रीवा मप्र - शिवानन्द द्विवेदी/संजय पाण्डेय) मनरेगा के कार्यों में सरकारी खजाने को चूना लगाने का कार्य सतत जारी है. यह मामला है त्योंथर ब्लाक का जहाँ दर्ज़नों पंचायतों में मनरेगा के अंतर्गत हो रहे कार्यों में फर्जी मजदूरों के नाम से पैसे की निकासी जारी है और पूरा कार्य सरपंचों एवं सचिवों द्वारा जेसीबी एवं मशीनों द्वारा करवाया जा रहा है. 
         अभी हाल ही में जब कांकर-बरहट पंचायती क्षेत्र में अवैध उत्खनन का प्रकरण मीडिया सहित सबन्धित खनिज, पुलिश एवं राजस्व विभाग में भेजा गया तो पता लगाया गया की आखिर इतनी अधिक मात्रा में उत्खनन कर खनिज सम्पदा जैसे मोरम आदि कहाँ पर ले जाया जा रहा है. जानकारी एकत्रित करने पर पता चला की पंचायत सड़क निर्माण एवं मनरेगा के कार्यों के नाम पर अच्छा खासा गोरख धंधा चलाया जा रहा है जहाँ पर जगह-जगह सरकारी एवं जंगली भूभाग को खोदकर वहां से खनन माफियाओं द्वारा अवैध तरीके से बिना लीज लिए हुए मोरम एवं खनिज सम्पदा कांकर, कलवारी, डाढ़, कटरा, गंतीरा, बरहट आदि पंचायतों में मनरेगा के नाम पर चल रहे सड़क निर्माण के कार्यों में पहुचाया जा रहा है. जब सम्बंधित सभी उक्त पंचायतों के कार्यों का अवलोकन मनरेगा की वेबसाइट से किया गया तो पाया गया सभी कार्य मात्र कागजों पर हो रहे हैं. जिन जिन मजदूरों के नाम सभी उक्त पंचायतों के मस्टर रोल में दर्ज थे उन मजदूरों का वास्तविक धरातल पर कहीं नामोंनिशान नहीं था. और जं मजदूरों को वास्तव में कार्य की तलाश थी उन मजदूरों के नाम तक मस्टर रोल में दर्ज नहीं हैं.
                          मनरेगा की वेबसाइट से भी फर्जीवाड़े का हुआ खुलासा
             इस प्रकार नरेगा की वेबसाइट में जाकर पता लगाया गया तो पाया गया की अभी तक तो सभी ग्राम सड़क . खेत सड़क, सुदूर ग्राम सड़क आदि सम्बन्धी कार्यों का मुस्किल से दस प्रतिशत भी राशि नहीं निकली है परन्तु कार्य लगभग पूर्ण हो चुके हैं. यह कैसे संभव हुआ मात्र दस प्रतिशत राशि निकाशी में पचहत्तर प्रतिशत से अधिक मनरेगा के कार्य हो चुके हैं जबकि मजदूर कहीं दूर दूर तक कार्यस्थल में उपलब्ध नहीं हैं. 
                पंचायती भ्रष्ट्राचार में मजदूर सचिव सरपंच सहित सीईओ तक का हाँथ 
            पंचायतों, सचिवों, सीईओ, सहित माफियाओं का ऐसा मकद जाल बुना गया है की इसे समझ पाना काफी मुस्किल हो रहा है. उधर पंचायती कार्यों का ठेका सरपंच सचिवों द्वारा जनपद सीईओ एवं अन्य अधिकारियों की सहमति से खनन माफियाओं को दे दिया जाता है और खनन माफिया मात्र कुछ ही दिनों में जेसीबी मशीनों को लगाकर कई किमी रोड बनाकर दे देता है. बाद में कुछ अपने पक्ष के तथाकथित मजदूर जिनका की काम से कोई सरोकार नहीं होता उन्ही के नाम पर सम्बंधित सरपंच सचिव मस्टर रोल जारी कर मजे से घर बैठे पैसे की अंधाधुंध निकासी करते रहते हैं. इस गोरख धंधे में सरपंच सचिव काफी फूंक फूंक कर कदम रखते हैं. सम्बंधित सरपंच सचिव कभी भी ऐसे मजदूर का नाम मस्टर रोल में नहीं जोड़ते जो उनके पक्ष का न हो. क्योंकि यदि ऐसे ही कभी शिकायतें हों गयीं तो वह तथाकथित मजदूर सीधे सीधे झूंठ बोल दे की नहीं मई कार्य कर रहा था और मेरे ही अकाउंट में मनरेगा के पैसे आ रहे थे. ऐसे में यदि मजदूर कहीं विपक्ष का हुआ और उसने सही सही बोल दिया की नहीं मैंने काम वाम नहीं किया है सरपंच सचिव ने हमसे शेयर बांधा हुआ था की जो पैसा आएगा इसमें अपना  अपना भाग तय कर लेंगे तो सरपंच सचिव मुस्किल में पद जाएगा. और बिलकुल ऐसा ही हर एक पंचायत में निरंतर होता आ रहा है. इसीलिए मनरेगा के फर्जीवाड़े पर लगाम भी नहीं लग पा रही है. क्योंकि पंचायत अथवा राजस्व विभाग तो कार्यवाही करने से रहा क्योंकि इनका भी अपना शेयर बंधा होता है तो भला यह क्यों अपने घर आने वाली लक्ष्मी के लिए दरवाज़ा बंद करेंगे. अब मात्र मीडिया, जनता, अथवा हमारे जैसे कुछ सरफिरे समाज सेवी ही हो सकते हैं जो इनके काले कारनामों की धज्जियाँ उड़ाते फिरें.

 सीईओ जनपद त्योंथर को विन्ध्य किसान परिषद् की तरफ से सौंपा ज्ञापन    
           मनरेगा के उक्त भ्रष्ट्राचार को लेकर अभी हाल ही में दिनांक 06 मार्च 2017 को सीईओ जनपद पंचायत त्योंथर को विन्ध्य किसान परिषद् के जिलाध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्त्ता शिवानन्द द्विवेदी एवं परिषद्  के युवा कार्यकर्त्ता पुष्पराज तिवारी द्वारा एक ज्ञापन सौपा गया है जिसमे सात दिवस के अन्दर उक्त सभी अनियमितता एवं मनरेगा एवं पंचायती भ्रष्ट्राचार में जांच कर कार्यवाही करने की माग की गयी है. ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया है की यदि नियत समय में जाँच कर कार्यवाही नही की गयी तो सीईओ जनपद पंचायत त्योंथर के समक्ष धरना प्रदर्शन एवं अनसन किया जायेगा.
           मांग में यह भी सम्मिल्लित है की जिन गरीब मजदूरों को कार्य नही दिया गया है उन्हें काम उपलब्ध करवाया जाए जबकि फर्जी रूप से मजदूरों के नाम पर निकासी करने वाले ऐसे लोग जो न टन मजदूर हैं और न ही किसान बल्कि इनके नाम पर मात्र मनरेगा का पैसा हज़म कर रहे हैं उनसे पैसे की वसूली की जाए. जो मजदूर अपना जॉब कार्ड बनवाए हुए हैं एवं नियमित मजदूरी करने में रूचि रखते है उन्हें पूरे सौ दिन की रोजगार गारंटी उपलब्ध करवाई जाए, मजदूर सुरक्षा कार्ड के अंतर्गत प्राप्त होने वाले सभी लाभों को दिया जाए.
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Sunday, March 5, 2017

(Rewa, MP) त्योंथर कांकर अवैध उत्खनन क्षेत्र - पुलिश और मीडिया हमारा क्या बिगाड़ लिया, यह कहना है भौखरी पंचायत के अवैध उत्खननकर्ता का


दिनांक - 05/03/2017, स्थान - थाना गढ़, कांकर पंचायत त्योंथर ब्लाक रीवा मप्र,

   (कांकर/गढ़/गंगेव, रीवा मप्र - शिवानन्द द्विवेदी) भारत में कोई शासन प्रशासन चलता भी है की सब कुछ तमाशा ही है? कहना यह होगा की इतने शिकायतें/कोम्प्लैंट्स, संदेशों, एसएमएस, ईमेल एवं लिखित देने के वावजूद भी मजाल क्या है की पुलिश और माइनिंग विभाग अवैध उत्खनन पर रोक लगा पाए. इधर एक्टिविस्ट लोग माफियों से दुश्मनी लेकर शासन प्रशासन को जगाने में लगे हैं उधर माइनिंग माफिया का यह कहना है की चाहे जो कर लो पुलिश और माइनिंग विभाग हमारा क्या बिगाड़ लेंगे. चाहे रोज़ न्यूज़ पेपर में छापते रहो इससे कुछ फर्क नहीं पड़ने वाला. यहाँ सभी को हमारा शेयर जाता है. और माइनिंग माफियाओं का कहना भी बिलकुल सही है. आखिर यदि ऐसा न होता तो भला पिछले ही दिन पुलिश विभाग की थाना गढ़ की टीम अवैध माइनिंग स्थल पर पहुचने के वावजूद कैसे खाली हाँथ चली आती जबकि पुलिश की आँखों के समक्ष ही उत्खनन चल रहा था जिसमे बिना नंबर प्लेट के चैन वाली जेसीबी सहित तीन छः चक्के वाले डम्पर बराबर सेवा में लगे थे. यद्यपि पुलिश और माइनिंग विभाग की इस नाकामी की तथाकथित सीएम हेल्पलाइन 181 में भी शिकायतें औपचारिकता के रूप में दर्ज करवा दी गयी हैं, अब देखना यह होगा इन सबसे होने क्या वाला है?
    बड़े मजे की बात तो यह थी आज जब इस अवैध रूप से संचालित माइनिंग वाले प्रकरण के विषय में रीवा आई जी आशुतोष रॉय, माइनिंग ऑफिसर संजीव मोहन पाण्डेय एवं डीजीपी मप्र शासन ऋषि कुमार शुक्ला से पुनः बात की गयी तो बड़ा ही मजाकिया जबाब मिला जो की यहाँ पर ऑडियो फाइल में टेप किया हुआ संलग्न है. कभी कभी तो आश्चर्य होता है की क्या यही पुलिश और माइनिंग विभाग मिलकर अवैध कार्यों पर कभी लगाम लगा सकता है? उल्टा अब तो यह लगता है की सभी अवैध कार्य पुलिश, माइनिंग विभाग और शासन प्रशासन की सह से ही हो रहे हैं वर्ना भला इन माफियाओं में इतना दम कहाँ की इतने बड़े पैमाने पर अवैध कार्य कर पायें और वह भी बेधड़क. अब तो ऐसा लगने लगा है की समाज सेवा का कार्य सायद अपराध है और अवैध कार्य करना ज्यादा बेहतर का काम है? 
          बेहतर तो यही होगा की इन सभी विभागों की पेमेंट तत्काल प्रभाव के साथ जनता को बंद करने आन्दोलन करना चाहिए क्योंकि यह विभाग किसी काम के हैं ही नहीं तो जनता के टैक्स का पैसा क्यों बर्वाद कर रहे हैं?  इनसे मोबाइल, एस एम एस, ईमेल आदि के माध्यम से बात कर के और अवैध कार्यों सम्बन्धी सूचना देने से क्या लाभ बल्कि उल्टा नुकसान अलग से हो रहा है. पैसे और समय की वर्वादी के अतिरिक्त कहीं कुछ नहीं. यह सब इस देश और समाज का दुर्भाग्य है. अब सवाल यह उठता है की इसी भौखरी पंचायत-गंगेव जनपद के उत्खननकर्ता के स्थान पर कोई छोटा मोटा किसान अपनी जमीन का समतलीकरण करवा रहा होता अथवा दो चार गठ्ठे अपनी स्वयं की लकड़ी ट्रेक्टर में लादकर कहीं रखने जा रहा होता इस पर पुलिश, वन, राजस्व सभी विभाग एक साथ कार्यवाही कर देते उससे रमन्ना पूछते, गाडी की जानकारी लेते, चिटपास पूछते, परमिशन की जानकारी पूछते, परन्तु आज इन बड़े पहुचे हुए खनन माफियाओं को छूने तक की शक्ति न तो यहाँ के पुलिश विभाग में है और न ही माइनिंग विभाग में जबकि सूचना के तौर पर जैसा की बताया गया की थाने से लेकर, एसपी, कलेक्टर, आई जी, डीजीपी भोपाल, और माइनिंग ऑफिसर तक कई मर्तबा पहुचाई जा चुकी है. और तो और अभी पिछले दिनों से निरंतर पेपर में खबरें छप रहीं हैं. क्या यही इस देश प्रदेश की पुलिश और प्रशासनिक व्यवस्था है? क्या यही सुशासन है? यह निरंकुश शासन है सुशासन नहीं. अब तो वास्तव में कहना पड़ेगा की इस देश और समाज का कुछ नहीं होने वाला. जाने दें इसको भगवान् भरोसे,

संलग्न- देखें इस email के साथ संलग्न माइनिंग ऑफिसर संजीव मोहन पाण्डेय रीवा सहित आई जी रीवा आशुतोष रॉय, एवं डीजीपी मप्र शासन भोपाल से मोबाइल बातचीत के अंश.  

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(Rewa, MP) थाना गढ़ में नाबालिग के साथ मारपीट एवं लूट की घटना की शिकायत डीजीपी एसपी तक, सीएम हेल्पलाइन में भी दर्ज हुआ प्रकरण क्र. 3443648


दिनांक 05/03/2017 स्थान - गढ़/गगेव, थाना गढ़ रीवा मप्र,

   (गढ़/गंगेव, रीवा मप्र - शिवानन्द द्विवेदी) जिला रीवा की पुलिस व्यवस्था पर सवालिया निसान लगाने के कई कारण हैं. किसी भी प्रकार की अपराधिक गतिविधि पर रोक लगा पाना तो मुश्किल उलटे अपराधों में निरंतर बढ़ोत्तरी हो रही है. 
      अभी हाल ही में थाना गढ़ अंतर्गत दिनांक 23/02/2017 को नाबालिग अरुणेन्द्र पटेल निवासी सोरहवा  एवं संतोष केवट निवासी कैथा के साथ मारपीट कर लूट वाली वारदात में आरोपी वर्तमान कैथा सरपंच संत कुमार पटेल एवं उसके दो अपराधिक साथी शेषमणि पटेल एवं अशोक पटेल के ऊपर भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 154 के अंतर्गत मारपीट, गाली गलौज एवं लूट का प्रकरण पंजीबद्ध नहीं किया गया है जबकि पूरे दो सप्ताह व्यतीत हो चुके हैं.
    इस बात की शिकायत अब तक थाना गढ़ के साथ साथ जिला रीवा एसपी, पुलिश महानिदेशक भोपाल सहित रीवा कलेक्टर एवं कमिश्नर रीवा संभाग को ईमेल द्वारा भेजी जा चुकी है.
  इसके अतिरिक्त सीएम हेल्पलाइन 181 में भी शिकायत क्रमांक 3443648 दर्ज करवाई गयी थी. घटना की जानकारी दो मर्तबा मोबाइल कम्युनिकेशन के माध्यम से मऊगंज ए एस पी शिवकुमार सिंह को भी दी जा चुकी है. प्रश्न यह उठता है की दोनों पीड़ितों के बयान पुलिश दर्ज कर चुकी है फिर भी एफ आई आर दर्ज करने में विलम्ब क्यों किया जा रहा है.

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---------- Forwarded message ----------
From: Shivanand Dwivedi <shivanand.dwivedi@gmail.com>
Date: 2017-03-04 8:02 GMT+05:30
Subject: थाना गढ़ (रीवा, मप्र) में नाबालिग सत्रह वर्षीय अरुणेन्द्र पटेल एवं संतोष केवट के साथ मारपीट एवं लूट की वारदात में अब तक एफ आई आर न लिखे जाना सम्बन्धी
To: dgpmp@mppolice.gov.in
Cc: sp_rewa@mppolice.gov.in, dmrewa <dmrewa@nic.in>, commrewa <commrewa@nic.in>


प्रति, 
श्रीमान पुलिश महानिदेशक महोदय
मध्य प्रदेश पुलिश, भोपाल, पिन ४६२००१,

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ईमेल प्रतिलिपि 
1) श्रीमान पुलिश अधीक्षक महोदय, जिला रीवा मप्र, पिन ४८६००१, 
2 ) श्रीमान कलेक्टर महोदय, जिला रीवा मप्र, पिन ४८६००१, 
3) श्रीमान आयुक्त महोदय, संभाग रीवा, मप्र, ४८६००१,
4) श्रीमान चीफ सेक्रेटरी, मप्र, शासन, भोपाल, पिन ४६२००१, 
5) श्रीमान एडिशनल चीफ सेक्रेटरी, पंचायत एवं ग्रामीण विकाश विभाग, मप्र शासन भोपाल, पिन ४६२००१,
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 महोदय, 

           दिनांक 23 फरवरी 2017 के दिन लगभग डेढ़ बजे के आसपास नाबालिग सत्रह वर्षीय अरुणेन्द्र पटेल पिता हरिबंस पटेल निवासी सोरहवा संतोष केवट पिता रामखेलावन केवट निवासी कैथा के साथ कैथा पंचायत सरपंच आरोपी संत कुमार पटेल और उसके दो अन्य साथियों शेषमणि पटेल एवं अशोक पटेल द्वारा मारपीट गाली गलौज कर लगभग दस हज़ार रुपये जिसमे पांच सौ , सौ, पचास एवं दस रुपये के नोट थे जो की गो-भागवत कथा श्री हनुमान मंदिर कैथा के लिए चंदे से प्राप्त हुए थे लाये जा रहे थे रास्ते में दिन दहाड़े लूट लिए गए. आज इतने दिन व्यतीत होने के बाद भी गढ़ थाने द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता 154 के अंतर्गत मारपीट और लूट का एफ आई आर दर्ज क्यों नहीं की गयी जबकि दोनों पीड़ितों अरुणेन्द्र पटेल एवं संतोष केवट के बयान हो चुके हैं? कृपया तत्काल सम्बंधित दोषियों के ऊपर अपराधिक प्रकरण दर्ज कर पीड़ितों को न्याय दिलाया जाए. कृपया तत्काल समस्या का समाधान किया जाए.
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संलग्न - 
1) कृपया थाना गढ़ सहित सीएम हेल्पलाइन मप्र शासन में दर्ज प्रकरण क्रमांक ३४४३६४८ भी देखने का कष्ट करें. 
2) थाना गढ़ में लिखित दिए गए प्रकरण की प्रतिलिपि भी संलग्न है कृपया अवलोकन करने का कष्ट करें.
3) पीड़ित अरुणेन्द्र पटेल पिता हरिबंस पटेल निवासी सोरहवा एवं संतोष केवट पिता रामखेलावन केवट निवासी कैथा की संलग्न फोटो ग्राफ.

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Thursday, March 2, 2017

(Rewa, MP) करहिया-डाढ़ प्रधानमंत्री सड़क कार्य की गुणवत्ता निम्न, रोड में मिटटी डालकर छोंड दिया गया, पुल बनी है निम्न दर्जे की


Date: 03/03/2017, Place: Rewa (MP)

करहिया-डाढ़ प्रधानमंत्री सड़क कार्य की गुणवत्ता निम्न, रोड में मिटटी डालकर छोंड दिया गया, पुल बनी है निम्न दर्जे की

(गढ़/गंगेव, रीवा मप्र – शिवानन्द द्विवेदी) अभी पिछले दिनों जब करहिया से डाढ़ ग्राम तक की प्रधानमंत्री सड़क का कार्य प्रारंभ हुआ तो यह अटकलें लगाई जा रही थीं की कहीं यह प्रधानमंत्री सड़क भी अन्य सडकों की भांति तो नहीं जो अगली बरसात आते आते ही पानी के प्रेशर से उखड़ जाए. जब रोड एवं पुल का निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ तो उस समय मिटटी डाली जा रही थी. इस पर पूंछा गया की मिटटी को पानी डालकर बेलन अथवा हाई प्रेशर रोलर चलाकर बैठाया क्यों नहीं जा रहा है तो ठेकेदार का कहना था हमारे ठेके में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसमे पानी डालकर मिटटी बैठाई जाए हम बस जीसीबी द्वारा मिटटी बैठा देंगे. अब भला जो रोड बेलन चलाकर बैठाया नहीं जायेगा वह तो बिलकुल दिलीप बिल्डकॉन की ही रोडों की तरह होगा.
जब पिछले दिनों लगभग सभी समाचार पत्रों में इसी करहिया-डाढ़ प्रधानमंत्री सड़क के किस्से जिसमे इसके घटिया निर्माण सामग्री उपयोग और निम्न गुणवत्ता की बातें आयीं तो ठेकेदार बीच में ही कार्य छोंड़कर चला गया और अब तक नहीं लौटा. जब यह बात प्रधानमंत्री सड़क रीवा के जीएम श्री दवे से कही गयी तो उन्होंने मात्र जांच करवाने का आश्वासन दिया पर अब तक न तो कोई जाँच दल आया और न ही पुलों को देखा गया की उसमे जो सीमेंट, बालू और गिट्टी का मिश्रण डाला गया है वह किस अनुपात में है और किस गुणवत्ता का डाला गया है. प्राप्त जानकारी और लिए गए फोटो ग्राफ से स्पष्ट हुआ की ज्यादातर उपयोग किया जाने वाला बालू क्रेशर का राखड है और गिट्टी भी काली वाली न होकर दिलीप बिल्डकॉन की ही तरह पनगड़ी के क्रेशर प्लांट से उठाई जाने वाली सफ़ेद बलुआ पत्थर की गिट्टी है जो थोडा भी दबाब सहने में असमर्थ है. भला यह बसों ट्रकों का बजन क्या सहेगी. रोलर चलाकर प्रेशर तकनीक से रोड न बैठाने के कारण रोड नियत समय के पहले उखड़ जाएगी ऐसा अंदेशा क्षेत्रीय ग्रामीणों द्वारा लगाया जा रहा है.  

संलग्न – मिटटी धूल उडाती हुई करहिया-डाढ़ सड़क मार्ग की फोटो तथा घटिया निर्माण सामग्री से बना पुल.


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(Rewa, MP) फॉलो अप थाना गढ़ - कैथा सरपंच और उसके साथियों द्वारा मारपीट और लूट के वारदात पर अब तक नहीं दर्ज हुई एफ आई आर



दिनांक 02/03/2017, स्थान - थाना गढ़, रीवा मप्र  

  (थाना गढ़, रीवा मप्र - शिवानन्द द्विवेदी) क्या जनता को यह बात ज्ञात है की भारतीय लोकतंत्र में प्रत्येक भारतीय नागरिक यदि किसी अप्रिय घटना की प्रथम सूचना लेकर किसी भी थाने में जाता है तो उस सम्बंधित थाना प्रभारी को सी आर पी सी की धारा 154 के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट अथवा एफ आई आर तत्काल दर्ज कर आगे की जांच और इन्वेस्टीगेशन किया जाना चाहिए. लेकिन दुर्भाग्य है की भारत में सब कुछ उल्टा होता है. पहले यहाँ की पुलिश दोनों पक्षों का इंतज़ार करती है की कौन सा पक्ष भारी है. किसकी तरफ से ऊपर और ऊंचे लोगों नेतायों सांसदों और विधायकों के कॉल आने वाले हैं. और कौन सी पार्टी ज्यादा मोटा माल रखती है. इतने में ज्यादातर मामले ठंडे पड़ जाते हैं. जो भारी पक्ष होता है वह दबाब बनाकर पैसे की लेन देन कर अथवा और अधिक डरा धमकाकर दूसरे पीड़ित और कमज़ोर पक्ष को शांत कर देता है. ज्यादातर मामलों में यही देखा जा सकता है. पुलिश विभाग अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए दुनिया भर की बातें करेगा और बता देगा की फला फला जगह से दबाब बनाया जा रहा हैअथवा जांच चल रही है और जांच में समय लग रहा है. 
             आज सबसे बड़ा प्रश्न यह है की क्या पुलिश जैसी संवैधानिक संस्था गरीबों, पीडतों, और कमजोरों को न्याय दिलवा पाने में किसी भी तरह से सक्षम है? कहना यह होगा की आज रीवा जिला और पूरे प्रदेश की पुलिश व्यवस्था निष्क्रिय, अप्रतिस्पर्धी और अक्षम होकर अपराधिक प्रवित्ति के तत्वों से मिल चुकी है. अन्यथा यदि कोई पीड़ित व्यक्ति सबूतों और गवाहों के साथ किसी भी सम्बंधित थाने में जाए तो भला पुलिश विभाग को एफ आई आर दर्ज कर कार्यवाही करने में क्या हर्जा है? पुलिश न्यायालय नहीं है मात्र एक जांच एजेंसी है अतः कौन दोषी है और कौन निर्दोष यह काम पुलिश विभाग को न्यायलय के ऊपर छोंड देना चाहिए.
           कैथा सरपंच संत कुमार पटेल और उसके अपराधिक प्रवृत्ति के साथियों द्वारा नाबालिग अरुणेन्द्र पटेल और संतोष केवट के साथ मारपीट एवं लूट की वारदात में पुलिश ने अब तक क्यों दर्ज नहीं किया कोई एफ आई आर ?
           वैसे रीवा पुलिश सहित पूरे थाना गढ़ की पुलिश प्रक्रिया पर संदेह व्यक्त करने के सैकड़ों सबूत हैं जो इनके निष्क्रियता और इनके अप्रतिस्पर्धी होने का बयान करते हैं परन्तु अभी अभी जो घटना एक सार्वजनिक स्थल के सन्दर्भ में ग्राम इटहा में घटित हुई उससे सर्मिंदगी की बात और कुछ नहीं हो सकती. आज यह समाज और यह शासन प्रशासन इस बात का जबाब दे की आखिर संवैधानिक प्रक्रिया द्वारा चुना गया एक सरपंच कैसे एक नाबालिग के साथ अपनी गुंडों बदमाशों की गैंग के साथ मारपीट, गाली-गलौज और लूट जैसा घृणित कार्य कर सकता है. कैथा सरपंच संत कुमार पटेल और उसके दो अन्य अपराधिक साथी शेषमणि पटेल एवं अशोक पटेल ने एक सत्रह वर्षीय नाबालिग के साथ मारपीट और लूट कर नपुंसकता का परिचय दिया और साथ ही सरपंच के पद की मर्यादा को एक बार फिर तार तार कर दिया है. यह कोई नया वाकया नहीं की यह कैथा पंचायत का सरपंच अपनी सीमा से आगे जाकर ऐसा कृत्य किया है. जैसा की सर्वविदिति है की इसके पहले  भी करीब तीन वर्ष पहले से ही इटहा आंगनवाडी कार्यकर्ता श्रीमती राजकुमारी पटेल पति सुग्रीव पटेल निवासी इटहा के साथ यह वर्तमान कैथा सरपंच संत कुमार पटेल और इसके दो अन्य साथी रुक्मणी पटेल एवं सुग्रीव पटेल (यह दूसरा सुग्रीव पटेल है जो इटहा आंगनवाडी कार्यकर्ता का पति नहीं है) निवासी क्रमशः इटहा एवं अकलसी ने महिला एवं बाल विकास विभाग में कार्यरत एक महिला की अस्मिता को तार तार करने का प्रयाश किया था जिसके सन्दर्भ में वर्षों तक यह पीड़ित महिला थाना गढ़ से लेकर रीवा पुलिश एवं देश प्रदेश के उच्चतम कार्यालयों तक चक्कर लगाती रही. पुलिश प्रशासन की निष्क्रियता और अपराधिक प्रवित्ति के लोगों से सांठ -गाँठ के कारण जब एफ आई आर तक दर्ज नहीं हुई तब  अंततः आंगनवाडी कार्यकर्ता व्यथित होकर माननीय उच्च न्यायलय जबलपुर पंहुची थीं और केस क्र. 2308/2016 दर्ज करवाया तब जाकर गढ़ और रीवा पुलिश के कानों में जूं रेंगी और जाकर गढ़ पुलिश ने प्रकरण क्रमांक 96/16 दर्ज किया जिसमे की आई पी सी की धारा 354क , 294, 506बी , 34 तीनों अभियुक्तों सरपंच संत कुमार पटेल, रुक्मणी पटेल और सुग्रीव पटेल पर लगाया.
          इतना ही नहीं अभी अभी दिनांक 23 फरवरी को नाबालिग अरुणेन्द्र पटेल एवं संतोष पटेल के साथ मारपीट करने वाले दोनों अभियुक्त शेषमणि पटेल और अशोक पटेल के ऊपर इटहा हरिजन बस्ती निवासी लुटई साकेत और उसकी पत्नी पार्वती पटेल के के साथ लुटई साकेत की छः माह की नातिन को पैरों तले कुचलकर कुचलकर मार डालने का केस  सिरमौर कौर्ट में चल रहा थाजिसके एक गवाह स्वयं बी एम ओ गंगेव देवव्रत पाण्डेय हैं जिन्होंने यह बात कोर्ट परिश्र में स्वीकारी थी की मेडिकल रिपोर्ट में आया की बच्ची की मौत कुचलकर कर हुई थी. परन्तु बीच में ही पार्वती साकेत की दिमागी हालत ठीक न होने और लुटई साकेत की पतोहू घर से पलायन कर जाने के कारण ठंडा पड़ गया था. इस प्रकार यदि वर्तमान कैथा सरपंच संत कुमार पटेल और इसके अपराधों में संलिप्त साथियों का अपराधिक रिकॉर्ड थाने गढ़ और जिला रीवा से उठाया जाए तो इनके ऊपर आधा दर्जन से ऊपर प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष प्रकरण दर्ज हैं फिर भी ऐसे अपराधियों को पुलिश मुक्त कर आराम कर रही है.   

 घटना की जानकारी निम्नलिखित मोबाइल नंबर और थाना गढ़ के सम्बंधित टी आई से ली जा सकती है - 
  
डायल 100 का मोबाइल नंबर 07587600513
एस बी सिंह बीट प्रभारी ए एस आई का मोबाइल - 7049122816
रामकृष्ण तिवारी हेड-कांस्टेबल मुन्सी, थाना गढ़  - 9993528394
गढ़ थाना प्रभारी बी आर सिंह मोबाइल - 98263157687049122845
एस डी ओ पी इन-चार्ज - 09424703367

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Sincerely Yours,
Shivanand Dwivedi
(Social, Environmental, RTI and Human Rights Activists)
Village - Kaitha, Post - Amiliya, Police Station - Garh,
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