Sunday, August 2, 2026

Breaking:आरटीआई अधिनियम सुदृढ़ीकरण पर 319वीं बैठक: मुख्य बिंदु और सिफारिशें

*Breaking:आरटीआई अधिनियम सुदृढ़ीकरण पर 319वीं बैठक: मुख्य बिंदु और सिफारिशें*

हाल ही में दिनांक 02 जुलाई 2026 को प्रत्येक रविवार को आयोजित होने वाले सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम को मजबूत करने और भारत में पारदर्शिता ढांचे को बेहतर बनाने के लिए 319वीं बैठक का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने की। इस प्रस्तुति और चर्चा में देश में आरटीआई ढांचे के सामने आ रही प्रमुख चुनौतियों, कार्यान्वयन की कमियों और आवश्यक सुधारों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
*मुख्य चुनौतियाँ और वर्तमान स्थिति*

*दंड प्रावधानों का कमजोर कार्यान्वयन:* बैठक में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, केवल लगभग 0.5% आरटीआई आवेदनों में ही दोषी अधिकारियों पर जुर्माना लगाया जाता है, जबकि 99.5% मामलों में कोई कार्रवाई नहीं होती।

*लंबित मामले और स्टाफ की कमी:* सूचना आयोगों में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या, केंद्रीय और राज्य स्तर पर जन सूचना अधिकारियों (PIOs) का अपर्याप्त प्रशिक्षण और स्टाफ की कमी मुख्य चिंता का विषय बनी हुई है।

*छूट का अनुचित प्रयोग:* लोक प्राधिकारियों द्वारा आरटीआई अधिनियम की छूट धाराओं का व्यापक और असंगत उपयोग किया जा रहा है।

*डिजिटल और सुरक्षा बाधाएं:* दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता की कमी और आरटीआई कार्यकर्ताओं/उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा व संरक्षण के लिए मजबूत तंत्र का न होना।
*सुधार हेतु प्रमुख सिफारिशें*

*धारा 4 के तहत स्वतः प्रकटीकरण (Proactive Disclosure):* सरकारी निकायों द्वारा धारा 4 का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि नागरिकों को आरटीआई दायर किए बिना ही अधिकांश जानकारी मिल सके। इससे आवेदनों का बोझ कम होगा।

*एकीकृत डिजिटल पोर्टल:* सभी राज्य सूचना आयोगों को बहुभाषी सहायता वाले एक केंद्रीकृत और एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल से जोड़ा जाए।

*मानकीकृत प्रशिक्षण:* पीआईओ (PIOs) के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित पाठ्यक्रम और अनिवार्य मानकीकृत प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू किए जाएं।

*स्वतंत्रता और स्वायत्तता की बहाली:* सूचना आयुक्तों की निष्पक्षता और प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए उनकी नियुक्ति प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और वैधानिक कार्यकाल/सुरक्षा तंत्र को बहाल किया जाए।

*सुरक्षा ढांचा:* आरटीआई उपयोगकर्ताओं और व्हिसलब्लोअर्स के खिलाफ धमकियों और उत्पीड़न से निपटने के लिए एक समर्पित ढांचा तैयार किया जाए।

*चर्चा के अन्य पहलू*

बैठक के दौरान प्रतिभागियों ने धारा 2 के तहत प्रमाणित प्रतियों को प्राप्त करने की कानूनी प्रक्रिया, आवेदनों के हस्तांतरण (Transfer Procedures), द्वितीय अपील, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) की वित्तीय रिपोर्टिंग की अनुपालन आवश्यकताओं और गोपनीयता बनाम जनहित के संतुलन जैसे व्यावहारिक मुद्दों पर प्रश्न पूछे और कानूनी समाधानों पर मार्गदर्शन प्राप्त किया।
*अगले कदम (Next Steps)*

*बैठक की सामग्री साझा करना:* सभी प्रतिभागियों के साथ बैठक की प्रस्तुति स्लाइड (Presentation Slides) और रिकॉर्डिंग साझा की जाएगी।

*प्रशिक्षण संसाधन*: पीआईओ के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और आरटीआई प्रशिक्षण कार्यक्रमों से संबंधित संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।

*प्रश्नों का समाधान:* प्रतिभागियों द्वारा उठाए गए विशिष्ट आरटीआई मामलों और कानूनी प्रश्नों पर व्यक्तिगत मार्गदर्शन दिया जाएगा

कार्यक्रम का सफल संचालन सामाजिक एवं आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी देवेंद्र अग्रवाल द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। जबकि पवन दुबे का प्रचार प्रसार ए महत्वपूर्व योगदान रहा। प्रतिभागियों में जयपाल सिंह खींची, फतेह चंद्र गुलेरिया, राज तिवारी, नरेश सैनी सुरेश मौर्य आदि सम्मिलित हुए।

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Saturday, August 1, 2026

Breaking: रीवा में Tata परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगाने को लेकर कलेक्टर कार्यालय ने PMO को भेजा ज्ञापन// सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी सहित अन्य लोगों ने सौंपा था ज्ञापन// कमिश्नर के बाद कलेक्टर कार्यालय ने भी लिया संज्ञान//

*Breaking: रीवा में Tata परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगाने को लेकर कलेक्टर कार्यालय ने PMO को भेजा ज्ञापन// सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी सहित अन्य लोगों ने सौंपा था ज्ञापन// कमिश्नर के बाद कलेक्टर कार्यालय ने भी लिया संज्ञान//*
दिनांक 01 अगस्त 2026 रीवा मप्र

रीवा (मध्य प्रदेश)। रीवा जिले में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Nuclear Power Plant) को पर्यावरण सुरक्षा के दृष्टिकोण से अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग जोर पकड़ने लगी है। इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी एवं अन्य स्थानीय नागरिकों द्वारा प्रस्तुत किए गए ज्ञापन को रीवा कलेक्टर कार्यालय ने विचार-विमर्श एवं अग्रिम कार्यवाही हेतु सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), नई दिल्ली को प्रेषित कर दिया है।

*क्या है पूरा मामला?*

कलेक्टर कार्यालय रीवा द्वारा जारी पत्र (क्रमांक 614/व.लि.-1/2026, दिनांक 30/07/2026) के अनुसार, सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी (निवासी ग्राम कैठा, तहसील मनगवां, जिला रीवा) तथा अन्य नागरिकों ने एक ज्ञापन सौंपकर जिले में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र की स्थापना पर गंभीर आपत्ति जताई थी।

*ज्ञापन में मुख्य रूप से यह मांग की गई है कि:*
पर्यावरण एवं स्थानीय जनजीवन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रीवा जिले में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित न किया जाए।

इस परियोजना को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित (Shift) किया जाए।

*प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा गया मूल ज्ञापन*

रीवा के डिप्टी कलेक्टर सुधीर कुमार बेक द्वारा हस्ताक्षरित इस आधिकारिक पत्र में उल्लेख किया गया है कि प्राप्त ज्ञापन में उठाई गई मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के लिए इसे मूल रूप में प्रधानमंत्री कार्यालय (नई दिल्ली) को प्रेषित (सम्पेक्षित) किया जा रहा है। इसकी एक प्रतिलिपि संबंधित आवेदक शिवानन्द द्विवेदी को भी सूचनार्थ भेजी गई है।

पर्यावरण सुरक्षा पर गहराया मंथन
रीवा में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र को लेकर स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों में चिंता का माहौल है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का तर्क है कि परमाणु ऊर्जा संयंत्र से पर्यावरण, जल स्रोतों और आसपास की घनी आबादी पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। अब देखना यह होगा कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा इस ज्ञापन पर क्या रुख अपनाया जाता है।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Saturday, July 18, 2026

Breaking: हिनौती सरकारी स्कूल में भवन क्षतिग्रस्त, 700 बच्चों का भविष्य खतरे में// प्राचार्य प्रमोद कुमार पांडेय ने दी जानकारी, कहा जल्द करवाया जाय मरम्मत कार्य// पंचायत विभाग का 25 लाख का टीएस अधर में अटका// कलेक्टर कमिश्नर से लगाया मरम्मत का गुहार// पंचायत विभाग ने बताया फंड नहीं मिलने से नहीं कराया काम // गौरतलब है, जिला खनिज मद से किया जाना था निर्माण कार्य// बाबूगिरी के चक्कर एवं संजय सिंह की लापरवाही के चलते मामला कहां अटका किसी को नहीं पता//

*Breaking: हिनौती सरकारी स्कूल में भवन क्षतिग्रस्त, 700 बच्चों का भविष्य खतरे में// प्राचार्य प्रमोद कुमार पांडेय ने दी जानकारी, कहा जल्द करवाया जाय मरम्मत कार्य// पंचायत विभाग का 25 लाख का टीएस अधर में अटका// कलेक्टर कमिश्नर से लगाया मरम्मत का गुहार// पंचायत विभाग ने बताया फंड नहीं मिलने से नहीं कराया काम // गौरतलब है, जिला खनिज मद से किया जाना था निर्माण कार्य// बाबूगिरी के चक्कर एवं संजय सिंह की लापरवाही के चलते मामला कहां अटका किसी को नहीं पता//*
दिनांक 18 जुलाई 2026 रीवा मप्र।

    रीवा मप्र के गंगेव जनपद की हिनौती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय एक बार पुनः चर्चा के केंद्र में है। वजह यहाँ के क्षतिग्रस्त भवन हैं जहां 700 से अधिक कक्षा 01 से 12 तक के बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं। ताजा अपडेट सामाजिक एवं आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी के स्कूल परिसर में प्राचार्य के साथ वार्तालाप में सामने आया जहां पालक शिक्षक संघ एवं गणमान्य नागरिकों के साथ बैठक में बातें रखीं गईं। मौके पर चर्चा के दौरान हालिया रीवा संभागीय आयुक्त शीलेन्द्र सिंह एवं रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के निर्देशों की भी चर्चा हुई जहां ऐसे जर्जर भवनों में कक्षा संचालित न करने की सख्त मनाही की गई है। 
   
   *क्षतिग्रस्त भवनों की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक प्रेषित - प्राचार्य प्रमोद कुमार पांडेय*
 
    चर्चा के दौरान हिनौती सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल के प्राचार्य प्रमोद कुमार पांडेय ने बताया कि पिछले वर्ष से ही क्षतिग्रत भवनों के नवनिर्माण एवं मरम्मत कार्यों की कवायद की जा रही है और समय समय पर शासन स्तर से गूगल शीट आदि गूगल मीट आदि के माध्यम से चाही गई जानकारियां प्रेषित की जाती रहती हैं। यदि प्राचार्य की मानें तो क्षतिग्रस्त भवनों की समस्त जानकारी अधोसंरचना निर्माण की जानकारी में प्रतिवर्ष प्रेषित की जाती रहती है। 
    लिखित तौर पर भी प्रस्ताव एवं अन्य पत्राचार पंचायत विभाग एवं सरपंच को दिए गए हैं।
  *25 लाख रुपए की कार्यपालन यंत्री द्वारा अनुमोदित तकनीकी स्वीकृति वर्षों से अधर में - सरपंच पूनम सिंह*

   यदि ग्राम पंचायत सेदहा सरपंच श्रीमती पूनम सिंह की मानें तो स्कूल के क्षतिग्रस्त पड़े कमरों एवं भवनों की पूरी जानकारी ग्राम सभा के प्रस्ताव सहित पहले ही पंचायत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और इंजीनियर को भेजी जा चुकी है। सरपंच प्रतिनिधि पुष्पराज सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायत द्वारा विधिवत ग्राम सभा का प्रस्ताव पारित किया जाकर कार्यपालन यंत्री, उपयंत्री एवं सहायक यंत्री द्वारा हिनौती स्कूल भवन में क्षतिग्रस्त भवनों के मरम्मत एवं पेवर ब्लॉक के कार्य के लिए पत्र क्रमांक 1252 दिनांक 17/11/2025 के माध्यम से तकनीकी स्वीकृति आदेश जारी किया गया था जो कि 25 लाख की सीमा के अंतर्गत है। लेकिन यह जिला खनिज मद से जारी किया जाना था जो कि आज दिनांक तक कार्ययोजना में ही शामिल नहीं कराया गया है जिसकी वजह से अभी प्रशासकीय स्वीकृति आदेश जारी न होने और फंड के अभाव की वजह से काम रुका है।
  *तो क्या इस बाबूगिरी और लालफीताशाही के चक्कर में फंसा रहेगा 700 छात्रों का भविष्य संकट में?*

    यदि प्राचार्य और सरपंच की मानें तो यहां स्थानीय निकाय स्तर एवं स्कूल ने अपना दायित्व पूरा कर दिया है। अब बड़ा सवाल यह है जब स्कूल के 700 से अधिक छात्रों एवं दर्जनों शिक्षकों का जीवन संकट में बना हुआ है ऐसे में आखिर लगभग 8 माह पूर्व वर्ष 2025 में जारी की गई तकनीकी स्वीकृति अभी तक कैसे जिला माईनिंग कार्यालय के प्रमुख संजय सिंह की टेबल में धूल फांक रही है। गौरतलब है कि जिला माईनिंग फंड कार्यालय पहले भी काफी बदनाम रहा है जहां काम वही होते हैं जब कुछ चढ़ावा चढ़ जाता है बाकी यह कोई देखने वाला नहीं है कि कार्य की अर्जेंसी और प्राथमिकता का स्तर क्या है। इसके पहले भी कई ऐसी ग्रेवल सड़कें हैं जिनके लिए गांववालों ने वर्षों पूर्व से आंदोलन किया था लेकिन वह सभी कार्य आज भी चढ़ावा के अभाव में लटके पड़े हैं जबकि अन्य बाद के कार्यों के लिए राशि जारी की जा चुकी हैं। 
  *क्या जिला कलेक्टर और संभाग आयुक्त जिला माईनिंग फंड के ओआईसी संजय सिंह पर करेंगे कार्यवाही?*

  सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने डीएमएफ विभाग को संजय सिंह से हटाकर किसी अन्य अधिकारी को आवंटित किए जाने के लिए पहले भी कमिश्नर को ज्ञापन दिया था लेकिन उस पर कार्यवाही मात्र पत्राचार तक ही सीमित रह गई है। उनका मानना है जब तक जिला माईनिंग फंड का ओआईसी नहीं बदला जाता तब तक कार्यों की प्राथमिकता और सही जानकारी कभी भी जिला कलेक्टर के समक्ष पेश नहीं की जा सकेगी। हालांकि उन्होंने वर्तमान जिला कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी पर भरोसा जताया है और जल्दी कार्यवाही किया जाकर जल्द से जल्द हिनौती स्कूल के क्षतिग्रस्त भवन परिसर के मरम्मत और निर्माण की आशा व्यक्त की है।

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Sunday, July 12, 2026

Breaking: आरटीआई (सूचना का अधिकार) बैठक: प्रणालीगत चुनौतियाँ, संशोधन और नागरिक सहभागिता// पूर्व सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने प्रतिभागियों के सवालों का दिया जवाब// उत्तराखंड से आरटीआई रिसोर्स पर्सन वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने दिया स्लाइड प्रस्तुति// गुजरात माहिति अधिकार पहल से पंक्ति जोग भी कार्यक्रम में हुई शामिल//

*Breaking: आरटीआई (सूचना का अधिकार) बैठक: प्रणालीगत चुनौतियाँ, संशोधन और नागरिक सहभागिता// पूर्व सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने प्रतिभागियों के सवालों का दिया जवाब// उत्तराखंड से आरटीआई रिसोर्स पर्सन वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने दिया स्लाइड प्रस्तुति// गुजरात माहिति अधिकार पहल से पंक्ति जोग भी कार्यक्रम में हुई शामिल//*
दिनांक 12 जुलाई रविवार को राष्ट्रीय स्तर पर 316 वें आरटीआई वेबिनार का आयोजन किया गया। हाल ही में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में देश में सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम की वर्तमान स्थिति, इसके क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं और व्यवस्था में सुधार के उपायों पर गहन चर्चा की गई। बैठक में आरटीआई कार्यकर्ताओं, कानूनी विशेषज्ञों और आम नागरिकों से जुड़े विभिन्न पहलुओं को रेखांकित किया गया।

*आरटीआई संशोधन अधिनियम 2019 और स्वायत्तता पर संकट*

बैठक के मुख्य सत्र में आरटीआई संशोधन अधिनियम 2019 और सूचना आयोगों की स्वतंत्रता पर इसके प्रभाव को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई।

*शक्तियों का हस्तांतरण:* चर्चा में यह बात सामने आई कि इस संशोधन के माध्यम से नियम बनाने की शक्तियां संसद के बजाय केंद्र सरकार के पास चली गई हैं, जिससे सूचना आयुक्तों के कार्यकाल और वेतन संरचना में बदलाव आया है।

*स्वायत्तता से समझौता:* विशेषज्ञों ने चिंता जताई कि इस कदम से आयोगों की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है, जबकि मूल रूप से इनकी संरचना को चुनाव आयोग के समान स्वायत्त रखने की परिकल्पना की गई थी।

*लंबित याचिकाएं:* इस दौरान जयराम रमेश बनाम भारत संघ जैसे सर्वोच्च न्यायालय के मामलों का भी उल्लेख किया गया, जिसमें इन संशोधनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है और जो फिलहाल अदालत में लंबित हैं।

*क्रियान्वयन की चुनौतियाँ और व्यवस्था का भय*

प्रतिभागियों ने जमीन स्तर पर आरटीआई कानून को लागू करने में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को साझा किया:

*प्रतिशोध का डर:* आरटीआई का उपयोग करने वाले लोगों में सुरक्षा को लेकर भय का माहौल है। यहाँ तक कि उच्च न्यायालय के वकीलों को भी आरटीआई मामलों को आगे बढ़ाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

*प्रशासनिक भ्रष्टाचार:* भोपाल से लेकर दिल्ली तक, सरपंच से लेकर उच्च अधिकारियों तक विभिन्न स्तरों पर कमीशनखोरी और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के मामलों पर चर्चा हुई। एक उदाहरण भी सामने आया जहाँ निरीक्षण के दौरान बंदूक ले जाने पर एक सरकारी इंजीनियर को निलंबित कर दिया गया था।

*प्रणालीगत सुधार और तकनीकी मुद्दे
पंक्ति जोग, सुदीप साहू और राज तिवारी जैसे प्रतिभागियों ने आरटीआई प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया:

*प्रशासनिक सुधार*: पंक्ति जोग ने प्रशासन के लिए "तेरापका" (Terapka) नामक प्रणाली लागू करने का सुझाव दिया, ताकि जवाबदेही बढ़ाई जा सके।

*कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण:* राजनीतिक नियुक्तियों और भ्रष्टाचार से निपटने के लिए आरटीआई कार्यकर्ताओं को उचित प्रशिक्षण और सहायता देने की मांग उठाई गई।

*तकनीकी बाधाएं:* ऑनलाइन शिक्षण और सरकारी प्रणालियों के बीच कनेक्टिविटी की समस्याओं पर भी बात की गई, जो सूचना के प्रवाह को बाधित करती हैं।
*कानूनी प्रक्रियाएं, गैर-अनुपालन और अपील रणनीति*

जब सूचना आयोग के आदेशों का पालन नहीं होता है, तो नागरिकों के पास क्या विकल्प हैं, इस पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया.

*धारा 18 के तहत अपील:* पूर्व5मप्र सूचना आयुक्तराहुल सिंह और परवीन ने चिकित्सा रिकॉर्ड से जुड़े मामलों का उदाहरण देते हुए कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notices) को संभालने और सूचना आयोग में धारा 18 के तहत शिकायत करने की प्रक्रिया समझाई।

*आदेशों की नाफरमानी:* कोर्ट और आयोग के आदेशों का पालन न होने पर पंक्ति जोग ने सुझाव दिया कि विभागीय सेवा नियमों के तहत संबंधित विभाग के प्रमुख से संपर्क किया जाना चाहिए, भले ही यह प्रक्रिया समय लेने वाली हो।

*दबाव समूहों का गठन:* आयोगों द्वारा गलत या अधूरे आदेश जारी करने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए एक 'दबाव समूह' (Pressure Group) बनाने का प्रस्ताव रखा गया, जो स्वतः संज्ञान (Proactive Disclosures) और पारदर्शिता के लिए पैरवी कर सके।

*नागरिक सहभागिता और गिरता ग्राफ*

सड़क निर्माण जैसे सकारात्मक बदलावों में आरटीआई की सफलता को स्वीकार करते हुए, प्रतिभागियों ने देश में गिरते सामाजिक सक्रियता के स्तर पर चिंता जताई.

*मीडिया की स्वतंत्रता पर नियंत्रण:* सोशल मीडिया और मुख्यधारा की मीडिया पर बढ़ते नियंत्रण के कारण नागरिक सहभागिता कमजोर हो रही है, जिससे राष्ट्रीय मामलों में बाहरी ताकतों का प्रभाव बढ़ने का खतरा है।

*ब्लॉक स्तर पर प्रेरणा की कमी:* रोहित त्रिपाठी और नरेंद्र जैन ने जमीनी स्तर (ब्लॉक स्तर) पर लोगों को आरटीआई दाखिल करने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता पर बल दिया। नरेंद्र ने एक मेडिकल कॉलेज में भुगतान संबंधी विसंगतियों के खिलाफ आरटीआई और अदालती कार्यवाही का अपना अनुभव भी साझा किया।

*निष्कर्ष व मुख्य सुझाव:*

बैठक के अंत में सभी प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि नौकरशाही की प्रतिगामी (पीछे ले जाने वाली) मानसिकता को बदलने की जरूरत है। साथ ही, आरटीआई अधिनियम की धारा 4 के अनुपालन और सरकारी विभागों द्वारा स्वतः जानकारी साझा करने (Proactive Disclosure) को अनिवार्य बनाकर ही इस कानून की मूल भावना को जीवित रखा जा सकता है।
कार्यक्रम का संचालन हमेशा की भांति सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी द्वारा किया गया जबकि अन्य लोगों में देवेंद्र अग्रवाल, आरटीआई रिसोर्स पर्सन वीरेंद्र कुमार ठक्कर, सुनील खंडेलवाल, राज तिवारी आदि सैकड़ों प्रतिभागी सम्मिलित हुए।

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Sunday, July 5, 2026

Breaking: 315वां आरटीआई और कानूनी वेबिनार: लोकतांत्रिक जवाबदेही और पारदर्शिता को मजबूत करने पर विशेष चर्चा

*Breaking: 315वां आरटीआई और कानूनी वेबिनार: लोकतांत्रिक जवाबदेही और पारदर्शिता को मजबूत करने पर विशेष चर्चा*
रीवा मप्र: हाल ही में 'आरटीआई और लोकतांत्रिक जवाबदेही' (RTI & Democratic Accountability) विषय पर 315वें आरटीआई एवं कानूनी वेबिनार का आयोजन किया गया। इस बैठक में मुख्य वक्ता आरटीआई रिसोर्स पर्सन वीरेंद्रकुमार ठक्कर, मध्य प्रदेश के पूर्व राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह एवं आत्मदीप सहित कई कानूनी विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। वेबिनार में सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के संवैधानिक महत्व, इसके प्रभावी कार्यान्वयन और जमीनी स्तर पर आने वाली चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की गई।

नीचे इस वेबिनार से जुड़ी मुख्य बातें और विभिन्न मामलों में दिए गए कानूनी परामर्श की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है:

1. *आरटीआई का संवैधानिक आधार और विकास* 

मुख्य वक्ता वीरेंद्रकुमार ठक्कर ने स्पष्ट किया कि आरटीआई केवल एक वैधानिक कानून नहीं है, बल्कि यह संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) (भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता), अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) के तहत एक मौलिक अधिकार के रूप में निहित है।

उन्होंने इसके विकासक्रम को रेखांकित करते हुए बताया कि कैसे 1996 के जन आंदोलनों (जैसे राजस्थान में मजदूर किसान शक्ति संगठन की जनसुनवाई) से होते हुए अक्टूबर 2005 में यह एक राष्ट्रव्यापी सशक्त कानून बना। आरटीआई मुख्य रूप से तीन स्तंभों पर काम करता है:

*सक्रिय प्रकटीकरण (धारा 4):* सरकारी विभागों द्वारा स्वतः जानकारी सार्वजनिक करना।

*मांग पर पहुंच:* नागरिकों द्वारा आवेदन करने पर 30 दिनों के भीतर सूचना देना।

*प्रवर्तन तंत्र:* सूचना न देने पर अपील प्रक्रिया और लोक सूचना अधिकारियों (PIO) पर दंड का प्रावधान।

2. *आरटीआई कार्यान्वयन में मुख्य चुनौतियां*

वेबिनार में देश भर में आरटीआई के क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई:

*सूचना आयोगों में बैकलॉग:* अदालतों और आयोगों में लंबित मामलों और आयुक्तों के खाली पदों के कारण फैसलों में देरी हो रही है।

*कार्यकर्ताओं की सुरक्षा:* उत्तराखंड जैसे राज्यों का हवाला देते हुए आरटीआई कार्यकर्ताओं के खिलाफ बढ़ती धमकियों और हिंसा पर चिंता जताई गई।

*गोपनीयता बनाम जनहित:* आरटीआई अधिनियम की धारा 8 के तहत दी गई छूट और नए डेटा संरक्षण कानूनों के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया, ताकि व्यक्तिगत गोपनीयता की आड़ में महत्वपूर्ण जनहित की सूचनाओं को दबाया न जा सके।

*प्रशासनिक शिथिलता:* गुजरात और पंजाब जैसे राज्यों में जन सूचना अधिकारियों द्वारा जानकारी देने में की जा रही देरी और मनमाने आदेशों की आलोचना की गई।

3. *नए श्रम कानूनों और ईपीएफ (EPF) पर चर्चा*

वेबिनार में 21 नवंबर, 2025 से लागू हुए नए श्रम संहिताओं (Labour Codes) पर भी चर्चा हुई। वीरेंद्रकुमार ठक्कर ने बताया कि इन सुधारों ने 29 पुराने कानूनों को समाहित कर लिया है, जिससे इसका दायरा 18 करोड़ से बढ़कर 50 करोड़ कामगारों (जिसमें प्लेटफॉर्म वर्कर्स भी शामिल हैं) तक पहुंच गया है। कर्मचारियों द्वारा भविष्य निधि (PF) कटौती की 1800 रुपये की नई सीमा पर जताई गई चिंताओं पर उन्होंने सलाह दी कि किसी भी प्रकार के उल्लंघन के खिलाफ श्रम अदालतों और आरटीआई के माध्यम से कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।

*विभिन्न मामलों में विशेषज्ञों द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश (Action Items)*

बैठक के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े कानूनी और प्रशासनिक मामलों पर विशेषज्ञों ने निम्नलिखित रणनीतिक सुझाव दिए:

*छत्तीसगढ़ पर्यावरण मामला:* छत्तीसगढ़ पर्यावरण विभाग को व्यापक जानकारी मांगने के बजाय केंद्रीय/राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB/SPCB) की विशिष्ट और मौजूदा रिपोर्टों पर केंद्रित आरटीआई आवेदन दोबारा तैयार करने की सलाह दी गई।

*राष्ट्रीय महिला आयोग में शिकायत:* सेवा मामलों में महिलाओं के अधिकारों के उल्लंघन को लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) में शिकायत दर्ज कराने और यह स्पष्ट घोषणा करने को कहा गया कि यह मामला किसी अन्य अदालत में लंबित नहीं है।

*बिजली चोरी और जुर्माना मामला:* बिजली विभाग में मीटरिंग की समस्या के बावजूद चोरी का जुर्माना लगाने के खिलाफ नियमानुसार 50% राशि जमा कर अधीक्षण अभियंता (Superintending Engineer) के समक्ष अपील दायर करने का निर्देश दिया गया।

*उत्तर प्रदेश सूचना आयोग का नियम:* यूपी के उस नियम को उच्च न्यायालय में चुनौती देने का सुझाव दिया गया जो आयोग को अपने ही फैसलों पर पुनर्विचार (Review) की अनुमति देता है, क्योंकि यह मूल आरटीआई अधिनियम की भावना के विपरीत हो सकता है। इसके अलावा, झूठे हलफनामों के मामले में आरटीआई के जरिए तारीखें साबित कर कानूनी कार्रवाई करने की बात कही गई।

*सीएम हेल्पलाइन शिकायत:* शिकायत को बिना उचित समाधान के बंद करने के कारणों को जानने के लिए संबंधित विभाग में नया आरटीआई आवेदन दायर करने की सलाह दी गई।

*प्रथम अपील में देरी:* प्रथम अपीलीय प्राधिकारी द्वारा समय पर निर्णय न लेने के खिलाफ राज्य सूचना आयोग (SIC) में दूसरी अपील करने तथा दोषी अधिकारियों के खिलाफ सामान्य प्रशासन विभाग में शिकायत दर्ज कराने की रणनीति सुझाई गई।

*महाराष्ट्र सरकार के नियमों को चुनौती:* आरटीआई के संबंध में महाराष्ट्र सरकार के कुछ नियमों को 'अल्ट्रा वायर्स' (मूल कानून के दायरे से बाहर) होने के आधार पर उच्च न्यायालय में चुनौती देने का परामर्श दिया गया।

*पारिवारिक पेंशन मामला:* बच्चे की आजीविका से जुड़े इस संवेदनशील मामले में त्वरित समाधान के लिए संबंधित सूचना आयुक्त से व्यक्तिगत मुलाकात कर अनुरोध करने की सलाह दी गई।

*पर्यावरणीय उल्लंघन:* नदी के पास औद्योगिक गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण के खिलाफ उचित दस्तावेजों के साथ राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में 'पत्र याचिका' (Letter Petition) दायर करने का सुझाव दिया गया।

*निष्कर्ष और आगे की राह*

विशेषज्ञ आत्मदीप ने सत्र का समापन करते हुए प्रतिभागियों को सलाह दी कि वे केवल शिकायतें दर्ज कराने के बजाय 'अपील मार्ग' का अधिक उपयोग करें, क्योंकि अपीलीय प्राधिकारियों के पास व्यापक अधिकार क्षेत्र होता है और वे जुर्माना भी लगा सकते हैं। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया कि आरटीआई को सूचना प्राप्त करने का एकमात्र जरिया न मानकर अन्य वैकल्पिक कानूनी रास्तों का भी इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

सभी प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति जताई कि लोकतंत्र को अधिक जवाबदेह बनाने के लिए भविष्य में ऐसे आरटीआई चर्चा कार्यक्रमों में आम जनता की भागीदारी को बड़े पैमाने पर बढ़ाना अनिवार्य है।

Wednesday, July 1, 2026

एक्टिविज्म का असर: हिनौती शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर से हटाई गई खतरनाक बिजली लाइन, 700 विद्यार्थियों और स्टाफ को मिली राहत

*एक्टिविज्म का असर: हिनौती शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर से हटाई गई खतरनाक बिजली लाइन, 700 विद्यार्थियों और स्टाफ को मिली राहत*

रीवा, 01 जुलाई 2026

   वर्षों से दुर्घटना की आशंका के बीच संचालित हो रहे गंगेव जनपद के हिनौती शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आखिरकार बिजली विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए विद्यालय परिसर से गुजर रही खतरनाक एलटी बिजली लाइन और खंभों को हटाने का कार्य शुरू कर दिया है। यह कार्रवाई सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी द्वारा लगातार उठाए गए मुद्दे और विभागीय अधिकारियों के संज्ञान में मामला लाने के बाद संभव हो सकी। वर्तमान में बिजली विभाग के ठेकेदार द्वारा लाइन शिफ्टिंग का कार्य तेजी से किया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, विद्यालय परिसर के बीचोंबीच से गुजर रही खुली बिजली लाइन वर्षों से विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए गंभीर खतरा बनी हुई थी। विद्यालय में लगभग 700 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जबकि बड़ी संख्या में शिक्षक एवं अन्य कर्मचारी प्रतिदिन इसी परिसर में कार्य करते हैं। खुले बिजली के तार विद्यालय के खेल मैदान, प्राचार्य कक्ष तथा अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों के ऊपर से गुजर रहे थे, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती थी।
*शिक्षकों ने जताई थी गहरी चिंता*

विद्यालय के शिक्षकों एवं प्राचार्य ने कई बार शिक्षा विभाग और बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर परिसर से बिजली लाइन हटाने की मांग की थी। उनका कहना था कि प्रतिदिन सैकड़ों बच्चों और पूरे स्टाफ की जान जोखिम में डालकर शिक्षण कार्य संचालित करना उनकी मजबूरी बन गई थी। हालांकि लंबे समय तक विभागीय स्तर पर केवल पत्राचार चलता रहा और समस्या का समाधान नहीं हो सका।

*सामाजिक कार्यकर्ता की पहल के बाद हरकत में आया विभाग*

मामले की गंभीरता को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने स्वयं विद्यालय पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया और इसकी रिपोर्ट तैयार कर बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत की। उन्होंने कार्यपालन अभियंता आशीष बैन, सहायक यंत्री उमाशंकर द्विवेदी तथा कनिष्ठ अभियंता प्रणव वर्मा को अवगत कराया कि विद्यालय परिसर से गुजर रही बिजली लाइन कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्यपालन अभियंता एवं सहायक यंत्री ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद बिजली विभाग ने ठेकेदार को मौके पर भेजकर लाइन शिफ्टिंग का कार्य प्रारंभ कराया। बुधवार, 01 जुलाई 2026 को विद्यालय परिसर में शिक्षकों की उपस्थिति में बिजली के तार एवं खंभों को हटाकर विद्यालय की बाउंड्री के बाहर स्थानांतरित करने का कार्य प्रगति पर रहा। अब विद्यालय को बाहरी मार्ग से सुरक्षित विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराई जाएगी।
*बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होने से अभिभावकों में भी राहत*

विद्यालय परिसर से बिजली लाइन हटने के बाद न केवल विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि अभिभावकों की वर्षों पुरानी चिंता भी समाप्त होगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते यह कार्रवाई नहीं होती तो भविष्य में कोई गंभीर दुर्घटना होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता था।

*प्रदेशभर के स्कूलों में ऐसे मामलों के सर्वे की उठी मांग*

सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी का कहना है कि प्रदेश के अनेक शासकीय विद्यालयों और आंगनवाड़ी केंद्रों के ऊपर अथवा परिसर के बीचोंबीच आज भी हाईटेंशन एवं एलटी बिजली लाइनें गुजर रही हैं। उनका दावा है कि यदि राज्य स्तर पर व्यापक सर्वे कराया जाए तो बड़ी संख्या में ऐसे शैक्षणिक संस्थान सामने आएंगे जहां खुले बिजली के तार बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं।
उन्होंने मांग की है कि राज्य सरकार इस विषय पर स्पष्ट नीति एवं दिशा-निर्देश जारी कर स्कूल शिक्षा विभाग और बिजली विभाग के बीच समन्वय स्थापित करे तथा पूरे प्रदेश में अभियान चलाकर सभी विद्यालय परिसरों से खतरनाक बिजली लाइनें हटाने की कार्रवाई युद्ध स्तर पर कराई जाए।

*पहले भी कई विद्यालयों से हटवाई जा चुकी हैं बिजली लाइनें*

शिवानंद द्विवेदी के अनुसार हिनौती विद्यालय का मामला पहला नहीं है। इससे पूर्व भी उनके प्रयासों से डाढ़ पंचायत की करहिया प्राथमिक पाठशाला, पताई पंचायत के अतरैला एवं पताई सहित आसपास के लगभग आधा दर्जन विद्यालय परिसरों से हाईटेंशन एवं एलटी बिजली लाइनें हटवाई जा चुकी हैं। उनका कहना है कि ऐसे कार्य विभागों को स्वतः संज्ञान लेकर करने चाहिए, लेकिन कई मामलों में जनहित के मुद्दों को लेकर सार्वजनिक पहल करनी पड़ती है।
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि हिनौती विद्यालय में हुई यह कार्रवाई केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे पूरे जिले और प्रदेश के लिए एक मॉडल बनाकर सभी शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु व्यापक अभियान चलाया जाना चाहिए।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Sunday, June 28, 2026

Breaking: डेमोक्रेसी और संविधान पर आयोजित हुआ 314 वाँ राष्ट्रीय वेबिनार// कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण पुस्तक “भारत में लोकतंत्र का उद्भव जैसा कि हमारे चारों तरफ हो रहा है पर केंद्रित रहा”// यूनाइटेड नेशंस में भारत के पूर्व राजनयिक रवींद्र पाल सिंह सहित कई विशिष्ट वक्ताओं ने कार्यक्रम में लिया हिस्सा//

*Breaking: डेमोक्रेसी और संविधान पर आयोजित हुआ 314 वाँ राष्ट्रीय वेबिनार// कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण पुस्तक “भारत में लोकतंत्र का उद्भव जैसा कि हमारे चारों तरफ हो रहा है पर केंद्रित रहा”// यूनाइटेड नेशंस में भारत के पूर्व राजनयिक रवींद्र पाल सिंह सहित कई विशिष्ट वक्ताओं ने कार्यक्रम में लिया हिस्सा//*
दिनांक 28 जून 2026 रीवा मप्र।

   यह बैठक भारत में लोकतंत्र पर चर्चा करने के लिए एक वेबिनार थी, जिसमें लेखक सचिन पेथकर और अन्य द्वारा लिखित पुस्तक 'द इवोल्यूशन ऑफ डेमोक्रेसी ऐज हैपनिंग इन इंडिया' पर ध्यान केंद्रित किया गया था। चर्चा में पूर्ण यूएन रिप्रेजेंटेटिव रविंदर पाल सिंह सहित कई वक्ताओं ने नागरिक संप्रभुता, संवैधानिक सर्वोच्चता, कानून के शासन, शक्तियों के पृथक्करण और नियंत्रण और संतुलन सहित लोकतंत्र के मौलिक सिद्धांतों के बारे में बात की। रविंदर ने जोर देकर कहा कि बहुसंख्यकवाद और संस्थागत स्वतंत्रता की कमी के कारण भारत के लोकतांत्रिक संस्थान कमजोर हो रहे हैं। शिक्षाविद जगमोहन सिंह, आरटीआई एक्टिविस्ट संतोष सिंह और लेखक अशोक भाई पटेल सहित अन्य वक्ताओं ने राजनीतिक दलों की भूमिका, चुनाव सुधार, प्रतिनिधियों की जवाबदेही और केवल प्रसारण के बजाय वास्तविक लोकतांत्रिक भागीदारी की आवश्यकता सहित विभिन्न लोकतांत्रिक चुनौतियों पर चर्चा की। बातचीत में यह पता लगाया गया कि राजनीतिक दलबदल, प्रतिनिधि जवाबदेही की कमी और संस्थागत स्वतंत्रता के क्षरण जैसे मुद्दों के माध्यम से लोकतांत्रिक मूल्यों से कैसे समझौता किया जा रहा है, जिसमें प्रतिभागियों ने भारत में लोकतांत्रिक संस्थानों को मजबूत करने के लिए सार्थक सुधारों का आह्वान किया।

*भारत में लोकतंत्र पर चर्चा*

    ऑनलाइन बैठक भारत में लोकतंत्र और इस विषय पर लेखकों की पुस्तक पर चर्चा करने पर केंद्रित थी। रविंदर पाल ने नागरिकों की संप्रभुता, संविधान की सर्वोच्चता और कानून के शासन सहित लोकतंत्र के सिद्धांतों पर चर्चा की। उन्होंने स्वतंत्र संस्थानों और नियंत्रण और संतुलन के महत्व पर जोर दिया। सचिन पेथकर और अशोक भाई पटेल ने अपनी पुस्तक प्रस्तुत की, जो चुनावी प्रक्रियाओं, राजनीतिक दलों की भूमिका और संसद के कामकाज जैसे मुद्दों की जांच करती है। उन्होंने तर्क दिया कि राजनीतिक दलों ने लोकतंत्र का अपहरण कर लिया है और प्रतिनिधि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए सुधारों का सुझाव दिया है। चर्चा में भारत में लोकतंत्र की वर्तमान स्थिति और सार्थक राजनीतिक भागीदारी और संस्थागत स्वतंत्रता की आवश्यकता के बारे में चिंताओं पर प्रकाश डाला गया।

*भारतीय लोकतंत्र संवैधानिक सुधारों पर चर्चा*

   ऑनलाइन बैठक में संवैधानिक परिवर्तनों और भारत में लोकतंत्र की स्थिति के बारे में चर्चा की गई। संतोष सिंह ने नीट परीक्षा के पेपर लीक और न्याय वितरण में देरी जैसे मुद्दों का हवाला देते हुए सरकार में जवाबदेही के बारे में चिंता जताई और सवाल किया कि क्या निर्वाचित प्रतिनिधि वास्तव में लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। पालनपुर लॉ कॉलेज के प्रोफेसर अश्विन कारिया ने चुनाव सुधार की आवश्यकता पर सहमति जताते हुए सुझाव दिया कि मंत्रियों और विधायकों को दोहरे पद पर नहीं रहना चाहिए और निर्वाचित सरकारों को दलबदल के जरिए अपदस्थ किए बिना अपना कार्यकाल पूरा करना चाहिए। चर्चा में वर्तमान लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बारे में चिंताओं और सही प्रतिनिधित्व और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रणालीगत बदलावों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया।
*लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक चिंताएं*

    प्रोफेसर अश्विन कारिया ने लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक मुद्दों के बारे में चिंताओं पर चर्चा की, सवाल किया कि क्या राजनीतिक दलबदल पर प्रतिबंध होना चाहिए और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा में न्यायपालिका की प्रभावशीलता के बारे में चिंता व्यक्त की। उन्होंने अदालतों में भाषा की बाधाओं का उदाहरण दिया और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच अधिक से अधिक जन जागरूकता और जवाबदेही की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। प्रवीण पटेल ने सुझाव दिया कि वीरेंद्र ठक्कर को डॉ. सचिन पेडकर की पुस्तक और चर्चा किए गए मुद्दों को संबोधित करने के लिए इसके संभावित समाधान।

*भारत के लोकतांत्रिक ढांचे की चुनौतियां*

आरटीआई रिसोर्स पर्सन वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने भारत के संवैधानिक ढांचे, चुनावी प्रणाली और लोकतांत्रिक चुनौतियों पर एक व्यापक प्रस्तुति दी। उन्होंने 1950 के बाद से संविधान के विकास पर चर्चा की, जिसमें संशोधन, चुनाव आयोग की भूमिका और राजनीतिक दल के वित्त पोषण और आंतरिक पार्टी लोकतंत्र के मुद्दों पर चर्चा की। वीरेंद्र कुमार ने लोकतांत्रिक सूचकांकों में भारत की घटती वैश्विक रैंकिंग को ध्यान में रखते हुए प्रेस की स्वतंत्रता, आरटीआई कार्यान्वयन और चुनाव सुधारों की आवश्यकता के बारे में चिंताओं पर प्रकाश डाला। चर्चा का समापन प्रवीण पटेल ने अशोक पटेल को अपने विचारों को साझा करने और वीरेंद्र कुमार ठक्कर की प्रस्तुति के आधार पर संभावित कार्यों पर चर्चा करने के लिए आमंत्रित करने के साथ किया।

*भारत में लोकतंत्र वेबिनार*

सोशल एक्टिविस्ट एवं लेखक अशोक भाई पटेल ने देश में लोकतांत्रिक चुनौतियों पर चर्चा करने वाले एक वेबिनार में अपनी पुस्तक ‘द इवोल्यूशन ऑफ डेमोक्रेसी इन इंडिया* पेश की। उन्होंने बूथ, राज्य और शहर स्तर पर स्वायत्त चुनाव आयोग बनाने सहित समाधानों का प्रस्ताव दिया, जिसमें प्रत्येक बूथ से 4 स्वयंसेवक चुनाव आयोग के प्रतिनिधियों के रूप में काम करते हैं। चर्चा में राजनीतिक दलों के प्रभुत्व, न्यायिक स्वतंत्रता और शासन में पारदर्शिता की आवश्यकता के बारे में चिंताएं शामिल थीं। पूर्व यूएन रिप्रेजेंटेटिव रविंदर पाल सिंह और अन्य सहित प्रतिभागियों ने संवैधानिक सिद्धांतों पर बहस की, जिसमें रविंदर पाल सिंह ने कार्यपालिका, विधायीका और न्यायपालिका शाखाओं के बीच नियंत्रण और संतुलन के महत्व पर जोर दिया। बातचीत विशिष्ट कानूनी और लोकतांत्रिक शासन विषयों पर भविष्य के वेबिनार की योजनाओं के साथ समाप्त हुई।

कार्यक्रम का संचालन सामाजिक एवं आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी द्वारा किया गया जबकि प्रतिभागियों में देवेंद्र अग्रवाल, जयपाल सिंह खींची, नरेश कुमार सैनी, रामदास सहित सैकड़ों प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Sunday, June 21, 2026

Breaking: सुप्रीम कोर्ट के RTI एक्टिविज्म एक नया बिजनेस वाले विवादित मौखिक कमेंट को लेकर आयोजित हुआ 313 वाँ RTI वेबिनार// सुप्रीम कोर्ट की युगल पीठ ने खारिज की थी RTI लगाने वाले दो लोगों की अग्रिम जमानत याचिका// हाई कोर्ट इलाहाबाद के 3 जजों के पैनल ने मामले पर रखे अपने विचार // जस्टिस कमलेश्वरनाथ, जस्टिस आदित्य नाथ मित्तल एवं जस्टिस सुधीर सक्सेना ने वेबिनार में रखे अपने विचार// फोरम फॉर फास्ट जस्टिस से प्रवीण पटेल एवं RTI रिसोर्स पर्सन वीरेंद्र ठक्कर ने भी इसे बताया दुर्भाग्यपूर्ण// हरियाणा के एक मामले सड़क निर्माण कार्य के मामले में अवरोध उत्पन्न करने एवं गालीगलौज करने के आरोप में मामला पहुंचा था सुप्रीम कोर्ट//

*Breaking: सुप्रीम कोर्ट के RTI एक्टिविज्म एक नया बिजनेस वाले विवादित मौखिक कमेंट को लेकर आयोजित हुआ 313 वाँ RTI वेबिनार// सुप्रीम कोर्ट की युगल पीठ ने खारिज की थी RTI लगाने वाले दो लोगों की अग्रिम जमानत याचिका// हाई कोर्ट इलाहाबाद के 3 जजों के पैनल ने मामले पर रखे अपने विचार // जस्टिस कमलेश्वरनाथ, जस्टिस आदित्य नाथ मित्तल एवं जस्टिस सुधीर सक्सेना ने वेबिनार में रखे अपने विचार// फोरम फॉर फास्ट जस्टिस से प्रवीण पटेल एवं RTI रिसोर्स पर्सन वीरेंद्र ठक्कर ने भी इसे बताया दुर्भाग्यपूर्ण// हरियाणा के एक मामले सड़क निर्माण कार्य के मामले में अवरोध उत्पन्न करने एवं गालीगलौज करने के आरोप में मामला पहुंचा था सुप्रीम कोर्ट//*
दिनांक 21 जून 2026 रीवा मप्र।

  पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट का एक निर्णय पूरे देश में चर्चा का केंद्र बना जहां हरियाणा के एक मामले में RTI लगाने वाले आवेदकों के एक अग्रिम जमानत याचिका मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए RTI कानून को लेकर ही सवाल खड़े कर दिए। जजों ने कुछ इस प्रकार कहा कि आरटीआई एक्टिविज्म एक किस्म का नया बिजनेस बन गया है और उन आवेदकों को यह भी कहा कि सड़क निर्माण की निगरानी करने वाले वह कौन होते हैं? हालांकि सामान्य तौर पर जिस प्रकार सुनवाई के दौरान अक्सर जजों द्वारा या कि अधिकारियों को हड़का दिया जाता है अथवा वकीलों के भी विषय में टिप्पणी कर दी जाती है अथवा फिर अन्य मामलों जैसे कई बार टिप्पणियां प्रकाश में आती रहती हैं ठीक यह टिप्पणी भी वैसे ही है न कि यह उनके ऑर्डर में कहीं लिखा गया है। अतः कई विश्लेषकों का यह मानना है कि इन टिप्पणियों के कानूनी पक्ष को ज्यादा गंभीरता से लेने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन विश्लेषकों का यह भी मानना है कि जिस प्रकार कुछ समय से एपेक्स कोर्ट के निर्णयों अथवा सुनवाई के दौरान बयानबाजी हो रही हैं उससे कहीं न कहीं कोर्ट की गरिमा और गंभीरता पर भी सवालिया निशान उठने लगे हैं और चर्चा का बाजार गरम हो रहा है। गौरतलब है कि अभी कुछ सप्ताह पहले ही वकीलों, आरटीआई एक्टिविस्ट और बेरोजगार युवाओं को लेकर भी इसी प्रकार के कमेंट किए गए थे जिसको लेकर कॉकरोच जनता पार्टी अथवा अन्य संगठनों के प्रदर्शन आज भी हो रहे हैं। 

*कोर्ट के कमेंट प्रकरण आधारित और इसका सामान्यीकरण किया जाना उचित नहीं - जस्टिस आदित्य नाथ मित्तल*

 कार्यक्रम में पधारे इलाहाबाद हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस आदित्य नाथ मित्तल ने बताया कि वह राकेश बहल मामले में यह नहीं जानते कि बहल ने कौन से आरटीआई के सवाल पूछें थे अथवा किस मामले में उनके द्वारा सड़क निर्माण कार्य का निरीक्षण किया जा रहा था अतः उसके अभाव में कुछ कहा नहीं जा सकता लेकिन कई बार आरटीआई और पीआईएल के नाम पर दुरुपयोग होता है जिसके कारण कोर्ट को ऐसा कमेंट करना पड़ सकता है। सुनवाई के दौरान कई बार ऐसी परिस्थितियां निर्मित कर दी जाती हैं जहां आरटीआई अथवा अपने सामाजिक स्टेटस का दबाव बनाकर कोर्ट में बाते रखीं जाती हैं जिस पर कई बार कोर्ट यह सवाल कर देते हैं लेकिन इस मामले में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील द्वारा ऐसा क्या कहा गया जिससे कोर्ट पर नकारात्मक कमेंट करने के लिए मजबूर होना पड़ा होगा यह अलग विषय है जिसकी जानकारी होना जरूरी है। श्री जस्टिस मित्तल ने बताया कि पीआईएल एवं आरटीआई दोनों का दुरुपयोग बंद होना चाहिए। राकेश बहल के मामले में कार्य ने कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है जबकि मात्र अग्रिम जमानत याचिका खारिज हुई है इसलिए इसे इतना गंभीरता से भी लेने की आवश्यकता नहीं है। अग्रिम जमानत देना कोर्ट के स्वयं के विवेकाधिकार पर निर्भर करता है अतः कई बार अग्रिम जमानत दे दी जाती है तो कई बार खारिज कर दी जाती है। 
*जजों को मामले में सुनवाई के दौरान किसी भी प्रकार की बयानबाजी से बचना चाहिए, कलम की ताकत पर दिया जाय ध्यान- जस्टिस कमलेश्वरनाथ* 

   वहीं मामले पर अपना पक्ष रखते हुए इलाहाबाद के वरिष्ठ रिटायर्ड जस्टिस कमलेश्वरनाथ ने बताया कि आज कल कोर्ट में सुनवाई के दौरान बयानबाजी हो रही हैं जिससे मीडिया में बातें आ जाती हैं। यह चर्चा का विषय बन जाता है। उन्होंने दो बातों पर जोर दिया। पहला बताया गया कि जजों को बयानबाजी से बचना चाहिए। सुनवाई के दौरान याचिका को स्वीकार करना है अथवा खारिज करना है कर दें लेकिन बयानबाजी न करें यह उचित नहीं है। साथ ही कोर्ट की गरिमा भी प्रभावित होती है। दूसरा जस्टिस कमलेश्वरनाथ ने बताया कि सड़क निर्माण में गड़बड़ियां हैं। जैसे बरसात होती है वैसे ही सड़कें खराब हो जाती है उनमें गड्ढे हो जाते हैं। ग्रामों में कोई निगरानी नहीं होती उससे भी स्थितियां खराब रहती हैं इसलिए संविधान की कंडिका 19 एवं आरटीआई कानून में आम जनता को इसकी शक्ति मिली है कि वह सवाल करें। साथ ही उन्होंने बताया जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों का भी दायित्व है कि वह इस प्रकार के विकास कार्यों की निगरानी करें और सवाल उठाये लेकिन वह ऐसा नहीं कर रहे इसलिए आमजनता यदि सवाल कर रही है तो सवाल करना उसका संवैधानिक अधिकार है जिससे उसे वंचित नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर जस्टिस कमलेश्वरनाथ ने सड़क निर्माण और मूलभूत संरचनाओं में भ्रष्टाचार को स्वीकार किया और जनता के सवाल और जानने के अधिकार का पक्ष रखा। 
*आरटीआई भ्रष्टाचार उजागर करने का टूल है लेकिन भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लग रही यह चिंता का विषय - जस्टिस सुधीर सक्सेना* 

  आरटीआई एक्टिविज्म है अथवा बिजनेस एवं सुप्रीम कोर्ट के अभी हालिया फैसले एवं सुनवाई कर रहे जजों के कमेंट पर अपना पक्ष रखते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस सुधीर सक्सेना ने कहा कि आरटीआई कानून आम जनता का एक सशक्त अधिकार है। इस कानून के आने के बाद भ्रष्टाचार के मामले सामने आये हैं लेकिन ऐसे कई मामलों में कोई बड़ी कार्यवाही देखने को नहीं मिल रही है। इसलिए भ्रष्टाचार पर कार्यवाही हो इस विषय पर मंथन किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि कई बार अच्छे और निर्दोष अधिकारी भी प्रताड़ित हो जाते हैं जिसमें यूपी के आईएएस अधिकारी श्रीवास्तव का उदाहरण दिया गया। उन्होंने वेबिनार के टॉपिक पर कहा कि यह भ्रष्टाचार और आरटीआई जैसे टॉपिक पर भी आयोजित किया जाना चाहिए। जस्टिस सक्सेना ने बताया कि आरटीआई कार्यकर्ता आरटीआई लगाकर कई बार जानकारी प्राप्त करते हैं और उसमें भ्रष्टाचार सामने आता है इसलिए आरटीआई कार्यकर्ता समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। सुप्रीम कोर्ट के हालिया विवादित कमेंट मामले पर उन्होंने भी कहा कि यह व्यक्तिगत मामले हैं जिसका जनरलाइजेशन नहीं किया जाना चाहिए। कई बार जज सुनवाई के दौरान ऐसे कमेंट पास कर देते हैं जो उतने गंभीरता से नहीं लिए जा सकतें यह उस केस और परिस्थिति पर निर्भर करता है जिसका ऑर्डर में उल्लेख नहीं होता। उन्होंने कहा कि कानून के दुरुपयोग भी होते हैं लेकिन काफी कम हैं इसलिए आरटीआई एक्टिविस्ट को ब्लैक मेलर कहना भी उचित नहीं। वह इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते कि आरटीआई एक्टिविस्ट ब्लेकमेल करते हैं। आरटीआई एक्टिविस्टों ने शासन प्रशासन के बड़े मामले उजागर किए हीं इसलिए योगदान महत्वपूर्ण है।

*आरटीआई एक्टिविस्टों के लिए धरातल चुनौतियों से भरा हुआ - संतोष सिंह राठौर* 

  गुजरात में MDM और राशन आदि मामलों से लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर कार्य करने वाले एक्टिविस्ट संतोष कुमार राठौर ने बताया कि वास्तविक धरातल पर आरटीआई लगाने वाले लोगों के लिए जिंदगी चुनौतियों से भरी हुई होती हैं। यह सब इतना आसान नहीं होता है। कई बार आरटीआई लगाने के बाद आवेदनों को बार बार इस कार्यालय से उस कार्यालय में घुमाया जाता है। जानकारी न मिलने पर अपील शिकायत और रिट याचिकाएं लगानी पड़ती है फिर भी जानकारियां नहीं मिलती हैं। आरटीआई एक्टिविज्म कोई बिजनेस नहीं है और कोर्ट को ऐसे बयान नहीं देने चाहिए इससे आरटीआई के लिए काम करने वाले लोगों का मनोबल घटता है एवं जानकारी रोकने वाले लोगों का बढ़ता है। उन्होंने बताया कि आरटीआई ब्लैकमेल करने का नहीं बल्कि भ्रष्टाचार उजागर करने एवं पारदर्शिता जवाबदेही लाने का बढ़िया साधन है।
*आरटीआई में ब्लैकमेल नहीं होते बल्कि भ्रष्टाचार दबाने के प्रयास किए जाते हैं इसलिए जानकारी रोकते हैं - वीरेंद्र ठक्कर*

  उत्तराखंड के प्रोफेसर एवं आरटीआई रिसोर्स पर्सन वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने पूरे मामले को लेकर अपना पीपीटी प्रेजेंटेशन तैयार कर प्रस्तुत किया जिसमें सभी पहलुओं पर चर्चा की। प्रस्तुति के दौरान उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों का भी हवाला दिया। बताया गया कि आरटीआई कानून से दर्जनों देश स्तर के भ्रष्टाचार उजागर हुए हैं और इसी प्रकार लोकल स्तर में भी अनगिनत भ्रष्टाचार सामने आये और यह सब आरटीआई कानून के माध्यम से ही हुआ है। श्री ठक्कर ने कहा कि आज तक के किसी भी कोर्ट ऑर्डर में यह बात सिद्ध नहीं हो पाई है कि आरटीआई कानून का दुरुपयोग कर किसी को ब्लैक मेल किया गया है। यह सिर्फ एक धारणा हो सकती है और पूर्वाग्रह हो सकता है लेकिन किसी कोर्ट ने आरटीआई से बैकमेल होना सिद्ध नहीं किया है। 

मामले को लेकर फोरम फॉर फास्ट जस्टिस एवं सोसाइटी फॉर फेडरेशन ऑफ फास्ट जस्टिस के संयोजक प्रवीण पटेल ने भी आरटीआई से उजागर हुए भ्रष्टाचार को लेकर अपने विचार रखे और अपेक्स कोर्ट ने बयानबाजी को लेकर चिंता जाहिर किम श्री पटेल ने कहा कि कोर्ट को और जिम्मेदार और संयमित होने की आवश्यकता है। नेता और अधिकारी क्या कहते हैं वह इतना मायने नहीं रखता लेकिन जब माननीय जस्टिस कोई बात कहते हैं तो उसे पूरा देश बड़े ध्यान से सुनता है।। इसलिए कोर्ट के आदेश हमेशा रेफर किए जाते हैं।

वेबिनार कार्यक्रम का संचालन सोशल एवं आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी द्वारा किया गया जबकि कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ से देवेंद्र अग्रवाल, बुरहानपुर से हरीश सोलंकी, मप्र से सत्येंद्र सिंह चौहान एवं जयपाल सिंह खींची सहित कई कार्यकर्ताओं ने अपने विचार रखे और आरटीआई से जुड़े सवाल जवाब किए।

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट मप्र*

Sunday, June 7, 2026

Breaking: विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित हुआ वेबीनार// जाने माने वक्ता वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने दिया प्रस्तुति// सैकड़ों पार्टिसिपेंट हुए कार्यक्रम में सम्मिलित// बुरहानपुर से हरीश प्रसाद सोलंकी ने भी साझा किए जल प्रदूषण से संबंधित डेटा// छत्तीसगढ़ से देवेंद्र अग्रवाल और ग्वालियर से राज तिवारी ने भी बताए अपने अनुभव// सर्वसम्मति से पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक्शन प्लान की बनी सहमति//

*Breaking: विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित हुआ वेबीनार// जाने माने वक्ता वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने दिया प्रस्तुति// सैकड़ों पार्टिसिपेंट हुए कार्यक्रम में सम्मिलित// बुरहानपुर से हरीश प्रसाद सोलंकी ने भी साझा किए जल प्रदूषण से संबंधित डेटा// छत्तीसगढ़ से देवेंद्र अग्रवाल और ग्वालियर से राज तिवारी ने भी बताए अपने अनुभव// सर्वसम्मति से पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक्शन प्लान की बनी सहमति//* 
दिनांक 07 जून 2026 रीवा मप्र।

   5 जून विश्व पर्यावरण दिवस को लेकर इस रविवार राष्ट्रीय स्तर पर विशेष वेबीनार का आयोजन किया गया। आयोजन में मुख्य वक्ता के रूप में पद्मश्री बाबूलाल दहिया, गुजरात से पर्यावरणविद महेश पंड्या, जाने-माने कार्यकर्ता एवं आरटीआई रिसोर्स पर्सन वीरेंद्र कुमार ठक्कर, छत्तीसगढ़ से देवेंद्र अग्रवाल, पूर्व मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह, ग्वालियर से राज तिवारी, बुरहानपुर से हरीश सोलंकी सहित सैकड़ों एक्टिविस्ट एवं पार्टिसिपेंट्स सम्मिलित हुए। 

    कार्यक्रम का सफल संचालन हमेशा को भांति सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के द्वारा किया गया। 
*जीवन के किए पर्यावरण संरक्षण अत्यंत आवश्यक*

  उत्तराखंड से जाने-माने आरटीआई रिसोर्स पर्सन एवं टिहरी गढ़वाल यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस एवं तकनीक के विशेषज्ञ वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने अपने स्लाइड प्रेजेंटेशन में वैश्विक पर्यावरण को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की जिसमें उनके द्वारा स्लाइड प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया गया कि किस प्रकार से पिछले कई दशकों में प्रदूषण का स्तर निरंतर बड़ा है जिसकी वजह से ग्लोबल वार्मिंग एवं जल नभ थल में प्रदूषण के आंकड़े बढ़े हैं। वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने वर्तमान तापमान में वृद्धि को भी प्रदूषण से ही जोड़ा और बताया कि कैसे यह विशेष तौर पर भारत को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है। 
    आज के औद्योगिक युग में प्रदूषण के बढ़ते स्तर से पर्यावरण को खतरा बना हुआ है। जमीन के अंदर खनिज को लेकर जंगली क्षेत्रों का सफाया किया जा रहा है। खेती योग्य जमीन को भी अधिग्रहित कर औद्योगीकरण के लिए लिया जा रहा है जिससे कृषि योग्य भूमि का दायरा भी कम होता जा रहा है जबकि देखा जाए तो जनसंख्या निरंतर बढ़ रही है। ऐसे में आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर पर्याप्त आबादी के लिए भोजन की व्यवस्था भी किया जाना मुश्किल पड़ेगा। आए दिन नई-नई गंभीर बीमारियां बढ़ रही है जो कि प्रदूषण के ही कारण है ऐसे में पर्यावरण को भारी क्षति का सामना करना पड़ रहा है और यह चिंता का विषय है। इस विषय पर एक्शन प्लान बनाया जाकर गंभीरता से काम करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
   *प्रदूषण की शिकायत करने और आरटीआई लगाने पर एक्टिविस्ट को पहुंचाया जेल की गई मारपीट*

     बुरहानपुर से हरीश सोलंकी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने नदियों में प्रदूषण को लेकर आवाज उठाई थी और साथ में कुछ आरटीआई भी लगाई थी। नदियों नालों में बढ़ते जल प्रदूषण की शिकायतें की थी जिसके लिए न्यायपालिका के कुछ जजों के द्वारा उनके ऊपर कार्यवाही करवाई गई और उनके साथ मारपीट किया जाकर फर्जी मुकदमे गढ़े गए और जेल में भी रखा गया जिसकी की उन्होंने शिकायत मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली में की थी जिसमें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली के हस्तक्षेप के बाद मामले की जांच की गई और तब जाकर उन्हें एक लाख रुपए का मुआवजा दिलवाया गया और आगे की कार्यवाही प्रचलन में है। 

छत्तीसगढ़ से देवेंद्र अग्रवाल एवं ग्वालियर से राज तिवारी सहित अन्य वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने भी अपने अनुभव साझा किया और पर्यावरण संरक्षण की जरूरत पर जोर दिया।

कार्यक्रम का संचालन सदैव की भांति सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के द्वारा किया गया।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*



Sunday, May 31, 2026

Nagpur: यू ईरा मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल नागपुर के सीईओ डॉ आनंद भूतड़ा ने मानवता की मिसाल पेश की

न्यू ईरा मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल नागपुर के सीईओ डॉ आनंद भूतड़ा ने मानवता की मिसाल पेश की।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक रीवा जिले के निवासी देवेंद्र तिवारी को एक मई को नागपुर में ही बेटी हुई थीं,
और और बच्ची का जब सोनोग्राफी की गई तो मालूम हुआ कि बच्ची का आंत में ब्लॉकेज है और बच्ची को सही सलामत रखने के लिए तुरन्त ऑपरेशन कराया जाना आवश्यक है। 
अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा बच्ची के पिता को मामले से अवगत कराया और ओपन सर्जरी की सलाह दी ओर सहमत पश्चात 5 मई को बच्ची का ऑपरेशन हुआ और डॉक्टरों द्वारा बताया गया कि बच्चों का ऑपरेशन सफल हुआ है अभी कुछ दिनों के लिए बच्चों को NICU वार्ड में ही रखना पड़ेगा इलाज जारी रहा लेकिन बच्चों की रिकवरी में टाइम लग रहा था जिससे NICU खर्च बहुत 
ज्यादा होता जा रहा था इसको लेकर बच्ची के पिता काफी परेशान थे जो भी पैसा था उनके पास वो सब उसके इलाज में लगा दिए थे।
फिर जब कुछ रास्ता नहीं दिखाई दिया तो बच्ची के पिता ने हॉस्पिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ आनंद भूतड़ा से पैसे न होने की बात बताई और निवेदन किया कि कोई भी सरकारी हॉस्पिटल में बच्ची को शिफ्ट कर दिया जाए चूंकि हमारे पास जो भी पैसे थे हम सब खर्च कर चुके।
जिस पर डॉ आनंद भूतड़ा ने कहा तिवारी जी हम केवल पैसे के लिए काम नहीं कर रहे है ।
यदि आपको पैसे की समस्या है तो आप परेशान न हो बच्ची इसी हॉस्पिटल से अच्छी हो कर अपने घर जाएगी और अब से बच्ची की जिम्मेदारी हमारी इतना सुनते ही बच्ची के पिता भावुक हो गए।
आपको बता दें कि बच्ची का इलाज 28 दिन new era mother chaild hospital में चला और अब बच्ची की छुट्टी अस्पताल से छुट्टी कर दी गई है।
इस घटना से यह मालूम होता है कि आज भी इन्सानियत मौजूद है।
हालांकि प्राइवेट हॉस्पिटल में ऐसे प्राइवेट संचालक बहुत ही कम पाए जाते हैं जो पैसों को लेकर नर्मी बरते लेकिन न्यू ईरा मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर द्वारा जिस तरह से बच्चों की इलाज के साथ-साथ बच्ची के परिवार जनों को आर्थिक सहयोग दिया जो काबिले तारीफ है।।

Sunday, May 24, 2026

#Breaking: लोकायुक्त मप्र बनाम पुलिस निरीक्षक कामता प्रसाद मिश्रा मामले पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आयोजित हुआ 309 वा राष्ट्रीय वेबीनार// सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के कॉकरोच एवं पैरासाइट बयान की एक बार फिर हुई चर्चा// गुजरात से RTI एक्टिविस्ट और सोशल वर्कर पंक्ति जोग ने भी रखे विचार// पूर्व मप्र सूचना आयुक्त राहुल सिंह एवं कामता प्रसाद मिश्रा ने भी रखे विचार// लोकायुक्त ट्रैप के आरोपी रहे टीआई कामता मिश्रा// लोकायुक्त से RTI की जानकारी माजी थी जिसे लोकायुक्त ने देने से किया था मना// हाई कोर्ट के।आदेश के पालन के बाद मामला पहुंचा था सुप्रीम कोर्ट// देश के विभिन्न हिस्सों से सैकड़ों पार्टिसिपेंट हुए सम्मिलित// आरटीआई कार्यकर्ता एवं समाजसेवियों ने भी रखे विचार कहा सीजेआई का बयाना दुर्भाग्यपूर्ण// वहीं कामता प्रसाद मिश्रा के मामले बताया ऐतिहासिक//

*#Breaking: लोकायुक्त मप्र बनाम पुलिस निरीक्षक कामता प्रसाद मिश्रा मामले पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आयोजित हुआ 309 वा राष्ट्रीय वेबीनार// सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के कॉकरोच एवं पैरासाइट बयान की एक बार फिर हुई चर्चा// गुजरात से RTI एक्टिविस्ट और सोशल वर्कर पंक्ति जोग ने भी रखे विचार// पूर्व मप्र सूचना आयुक्त राहुल सिंह एवं कामता प्रसाद मिश्रा ने भी रखे विचार// लोकायुक्त ट्रैप के आरोपी रहे टीआई कामता मिश्रा// लोकायुक्त से RTI की जानकारी माजी थी जिसे लोकायुक्त ने देने से किया था मना// हाई कोर्ट के।आदेश के पालन के बाद मामला पहुंचा था सुप्रीम कोर्ट// देश के विभिन्न हिस्सों से सैकड़ों पार्टिसिपेंट हुए सम्मिलित// आरटीआई कार्यकर्ता एवं समाजसेवियों ने भी रखे विचार कहा सीजेआई का बयाना दुर्भाग्यपूर्ण// वहीं कामता प्रसाद मिश्रा के मामले बताया ऐतिहासिक//*

दिनांक 24 मई 2026 रीवा मप्र।
  भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के बेरोजगार युवकों को लेकर की गई टिप्पणी जिसमें उनके द्वारा ऐसे बेरोजगार जिनको काम नहीं मिल पा रहा है और सोशल मीडिया, मीडिया ज्वाइन कर लेते हैं और साथ में आरटीआई एक्टिविस्ट बन जाते हैं वह एक कॉकरोच और परजीवी की तरह हैं, को लेकर आलोचनाओं का बाजार निरंतर गर्म है। बताया गया की देखा जाय तो यह स्वाभाविक भी है कि देश के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के द्वारा ऐसी टिप्पणी किया जाना काफी दुर्भाग्यपूर्ण भी है जिसको लेकर 309 वें सूचना के अधिकार और राष्ट्रीय वेबीनार में उपस्थित विशेषज्ञों ने अपनी चिंताएं जाहिर की और इसे काफी दुर्भाग्यपूर्ण बताया। 309 वें वेबीनार में जहां मुख्य न्यायाधीश के बयान पर भी चर्चा हुई वहीं लोकायुक्त मध्य प्रदेश बनाम पूर्व पुलिस निरीक्षक कामता प्रसाद मिश्रा के प्रकरण को लेकर अभी हाल में सुप्रीम कोर्ट आफ इंडिया के द्वारा 14 मई 2026 को दिए गए एक आदेश और ऐतिहासिक टिप्पणी पर भी चर्चा हुई जिसमें सुप्रीम कोर्ट की दो बैंच के जजों के द्वारा कहा गया था कि क्या मध्यप्रदेश लोकायुक्त कोई खुफिया एजेंसी है जिसके द्वारा आरटीआई से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी नहीं दी जा रही है और क्या इनको इस तरह की जानकारी न देने के लिए कोई विशेष छूट है? दोनों ही मामलों को लेकर देश के विभिन्न कोनों से सूचना के अधिकार के क्षेत्र से जुड़े हुए लोग और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी बातें रखी और विचार व्यक्त किया।
    कार्यक्रम का संचालन सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के द्वारा सुबह है 11:00 बजे से लेकर दोपहर 2:00 बजे तक 3 घंटे के लिए किया गया।
*युवाओं को कॉकरोच अथवा पैरासाइट कहना अनुचित, इससे मनोभवना आहत होती है - पंक्ति जोग*

गुजरात से माहिती अधिकार पहल गुजरात एवं आरटीआई हेल्पलाइन की कार्यकर्ता एवं समाजसेवी पंक्ति जोग ने बताया की सीजेआई के कथन जिसमें उनके द्वारा कॉकरोच और परजीवी की संज्ञा बेरोजगार युवकों के लिए दी गई वह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे देश की एक बहुतायत युवा आबादी आहत होती है। देश के महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर बैठे हुए व्यक्तियों को ऐसे कथनों से परहेज करना चाहिए। लोकायुक्त मध्य प्रदेश बनाम कामता प्रसाद मिश्रा मामले में पंक्ति जोग ने बताया कि यह मामला काफी गंभीर है और लोकायुक्त को ऐसी जानकारियां साझा करनी चाहिए। बताया गया कि 20 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद हुए अगले आदेश पर टिकी हुई है।
*लोकायुक्त से संबंधित जानकारी देने के कई आदेश दिए - सूचना आयुक्त राहुल सिंह*

  कार्यक्रम में पधारे मध्य प्रदेश के पूर्व राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने कार्यकाल में लोकायुक्त से जुड़े हुए कई प्रकरणों में जानकारी दिए जाने के आदेश दिए हैं और उनके द्वारा कई मामलों में जुर्माना भी लगाए गए हैं। राहुल सिंह ने कहा कि लोकायुक्त निश्चित तौर पर एक संगठन है जिसमें कुछ विशेष जानकारी को छोड़कर शेष सभी जानकारी दिए जाने का प्रावधान रहता है और इसमें किसी भी प्रकार से छूट का प्रावधान नहीं है और ऐसे संगठनों को पारदर्शिता एवं जवाबदेही के लिए जानकारी देनी चाहिए। सीजेआई सूर्यकांत के कॉकरोच और परजीवी के बयान को लेकर उन्होंने भी चिंता जाहिर की और कहा कि इस प्रकार के बयान से देश की बहुतायत जनता आहत होती है और लोकतंत्र कमजोर होता है। वरिष्ठ संवैधानिक पदों पर बैठे हुए व्यक्तियों को ऐसे बयानों से बचना चाहिए।
*देश में 6 करोड़ की न्यायिक मामलों पर कार्यवाही पहली जरूरत, बयानवाजी से नहीं सुलझेंगे मामले - प्रवीण पटेल*

  कार्यक्रम में पधारे गुजरात एवं वर्तमान में रह रहे छत्तीसगढ़ से समाजसेवी एवं फोरम फॉर फास्ट जस्टिस के कन्वीनर एवं ट्रस्टी प्रवीण पटेल ने बताया कि देश में इस समय लगभग 6 करोड़ के आसपास न्यायिक पेंडेंसी बढ़ती जा रही है जो काफी चिंता का विषय है और गंभीर मामला है। सुप्रीम कोर्ट आफ इंडिया और सभी हाई कोर्ट को मिलकर इस विषय पर कार्य करने की जरूरत है कि कैसे मामलों का जल्दी निराकरण हो और लोगों को न्याय मिले। न्याय में देरी एक समस्या है और ऐसे में परजीवी और काकरोच जैसे बयान से न्याय व्यवस्था कमजोर होती है और कहीं न कहीं इसकी कमियां उजागर होती है जिस पर ज्यादा चिंतन और मनन किया जाने की जरूरत है।

*मेरा शोषण हुआ, गलत तरीके से ट्रैप में फसाया गया और लोकायुक्त से जानकारी मागी तो देने से मना किया - पूर्व टीआई कमाता मिश्रा* 

  लोकायुक्त प्रकरण के ट्रैप की कार्यवाही में तत्समय कटनी में पदस्थ रहे पुलिस निरीक्षक कामता प्रसाद मिश्र ने बताया कि उनके द्वारा शराब माफिया और अपराधियों के विरुद्ध कार्यवाही की गई थी जिसके बाद उन्हें ट्रैप की कार्यवाही में फंसा दिया गया और अब तक कोई चालान तक पेश नहीं कर पाई जबकि 7 साल का समय व्यतीत हुआ है जिसको लेकर उन्होंने आरटीआई लगाकर अपने आप को निर्दोष साबित करने के लिए जानकारी मांगी थी लेकिन लोकायुक्त के द्वारा जानकारी देने से मना किया गया। जिसके बाद उन्होंने सूचना आयोग में अपील की। सूचना आयुक्त ने भी जानकारी नहीं दिलवाई तो हाईकोर्ट गए जिसमें जानकारी देने के आदेश हुए और 5 हजार रुपए का जुर्माना भी संबंधितों के विरुद्ध लगाया गया। इसके बाद लोकायुक्त स्वयं इस आदेश के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट गया और सुप्रीम कोर्ट ने अभी हाल ही में सुनवाई पूरी की है और आदेश सुरक्षित रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने लोकायुक्त को कहा है कि क्या लोकायुक्त कोई खुफिया ऑर्गनाइजेशन है जो इस प्रकार की महत्वपूर्ण देने योग्य जानकारी रोक रहे हैं अथवा उन्हें क्या धारा 24 के तहत ऐसी कोई छूट मिली हुई है? इसका जवाब लोकायुक्त से मांगा था।

मामले में उत्तराखंड से आरटीआई रिसोर्स पर्सन वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने भी अपने 15 पेज के पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन में देश की पूरी न्यायिक व्यवस्था और लोकायुक्त एस्टेब्लिशमेंट एक्ट एवं आरटीआई के विषय में उपस्थित पार्टिसिपेंट्स को जानकारी दी। 

कार्यक्रम में पूरे देश के सैकड़ो आरटीआई एक्टिविस्ट सामाजिक कार्यकर्ता जुड़े। 

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Sunday, August 17, 2025

Breaking:// पावन यज्ञस्थली कैथा में भागवत महापुराण का छठा दिन – मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और परशुराम के चरित्र का हो रहा वर्णन// मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और लीला पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण का चरित्र अनुकरणीय - डॉक्टर गौरीशंकर शुक्ला//

दिनांक 17 अगस्त 2025 रीवा मप्र।
   पावन पुनीत यज्ञस्थली कैथा हनुमान जी स्वामी मंदिर प्रांगण में पाप विनाशक मोक्ष प्रदायक श्रीमद भागवत कथा भक्ति ज्ञान महायज्ञ का कार्यक्रम सतत चल रहा है। दिनांक 17 अगस्त 2025 को कथा का छठा दिवस रहा। इस बीच व्यासपीठ पर विराजमान डॉक्टर शुक्ला ने कथा के मार्मिक कथाओं का वर्णन किया।

    *मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और लीला पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण का पावन पुनीत चरित्र अनुकरणीय*

  श्रीमद भागवत कथा में श्री नारायण के चौबीस अवतारों में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् श्रीराम और लीला पुरषोत्तम भगवान् श्रीकृष्ण का चरित्र उल्लेखनीय और अत्यंत अनुकरणीय है. भगवान श्रीराम का अवतरण दिन के 12 बजे हुआ बताया गया है और श्रीकृष्ण का अवतरण रात्रि 12 बजे होना बताया गया है. भगवान श्रीराम का चरित्र अत्यंत शांत और सीधा-सरल है जबकि भगवान् श्रीकृष्ण का चरित्र रहस्यमय और अत्यंत गूढ़ है. भगवान् श्रीकृष्ण अर्धरात्रि में अवतरित हुए जबकि भगवान श्री राम मध्यान दिन में. श्रीराम, शिव और श्रीकृष्ण भारतीय संस्कृति के आधार स्तम्भ हैं. आज सम्पूर्ण हिन्दू-सनातन संस्कृति में प्रत्येक माता-पिता अपने बालक-बालिकाओं का नामकरण इन्ही महान देवस्वरूप और नारी शक्तिओं (सीता, राधा, पार्वती, शक्ति आदि के विभिन्न नाम) के आधार पर करते हैं. नाम मात्र का स्मरण आते ही उस नाम विशेष में छिपे गुण और शक्तियों का ध्यान सहज ही आ जाता है. वैसे आज वर्तमान आधुनिक परंपरा में भारतीय संस्कृति की यह भी विशेषता समाप्त होती प्रतीत हो रही है. आज के बच्चों का नामकरण उनके माता-पिता पश्चिमी सभ्यता के नामों के आधार पर रखना ज्यादा पसंद करते है जो कि हमारे पतित होती संस्कृति का द्योतक है. ऐसे में होगा यह कि एक दिन व्यक्ति अपने आदर्शों को भी पूर्णतया भूल जायेगा. वैसे भी हमारे महान भगवत-स्वरुप पुरुष पहले आदर्श कम और हमारे संस्कृति के वास्तविक चरित्र ज्यादा थे. आज श्रीराम और श्रीकृष्ण वास्तविक चरित्र न होकर आदर्श बताये जा रहे हैं. आने वाले कल में यह भी संभव है कि इन महान चरित्रों को पूर्णतया काल्पनिक चरित्र बताकर एलियन अथवा दुसरे ग्रहों से आया हुआ बताया जाए. ऐसी परिस्थिति मात्र पश्चिमी संस्कृति के अन्धानुकरण और भारतीय संस्कृति और अपने प्रति हीनभावना से उत्पन्न हुई है. यदि इतिहास उठाकर देखा जाय तो सहज ही समझ में आ जायेगा की जो भी संस्कृतियाँ विलुप्तप्राय हुई हैं कहीं न कहीं ऐसे ही कुछ कारण रहे हैं. यद्यपि भारतीय संस्कृति के विषय में ऐसा पूर्ण विश्वास से कहा जा सकता है कि हमारी संस्कृति में जो अन्य संस्कृतियों को आत्मसात कर अपने आप में समाहित कर लेने की क्षमता है वह भारतीय संस्कृति को अन्य संस्कृतियों से अलग बनाती है. परन्तु आज हमे अतिसय आत्मविश्वास में पड़ने के स्थान पर अपनी संस्कृति को समयानुरूप परिवर्धित कर इसे कैसे अधिक सार्थक बनाया जाए इस बात के चिंतन-मनन की आवश्यकता है. इसीलिए आज आवश्यकता है भारतीय शास्त्र-ग्रंथों के वैज्ञानिक-अध्यात्मिक विवेचना की न की उनके आख्यानों को अक्षरसः लेने की. क्योंकि निश्चित रूप से यदि भागवत महापुराण अथवा अन्य हिन्दू शास्त्रों की सभी बातें अक्षरसः ग्रहण की जाएँगी तो वह आज के इस वर्तमान परिवेश में सही नहीं बैठ पाएंगी और संभव है कि इस वर्तमान पीढ़ी में अपने संस्कृति और शास्त्रों के प्रति ज्यादा अविश्वास पैदा करें, इसीलिए आवश्यकता है इनके सही टीका की और विज्ञान संगत व्याख्या की.  


  *भागवत कथा प्रसंग में नौवें स्कंध का भी वर्णन*

   पिछले दिनों की कथा प्रसंगों, जिसमे की समुद्र मंथन, देवासुर संग्राम, नारायण का वामन और मत्स्यावतार की चर्चना से सम्बंधित रही, से आगे बढ़ते हुए आते हैं नौवें स्कंध की कथा और भगवान् श्रीराम और परशुराम के अवतारों की कथा में. मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का अवतरण त्रेतायुग में बताया गया है. युगों में त्रेता युग द्वापर के पहले आता है इसीलिए भगवान के अवतारों में पहले मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का लीला प्रसंग आता है तत्पश्चात लीला पुरषोत्तम श्रीकृष्ण का अवतार द्वापर में आता है. जहाँ भगवान श्रीराम मर्यादा की प्रतिमूर्ति थे, वहीँ भगवान श्रीकृष्ण अपनी मानव लीलाओं के चलते लीला पुरषोत्तम कहलाये. भागवत महापुराण में अवतारों के क्रम को भलीभांति व्यवस्थित किया गया है. ऐसा माना जाता है कि काल-निर्धारण के क्रम में सबसे सात्विक और सत्यमार्ग की तरफ चलने की प्रेरणा देने वाला युग पहले आएगा और समय के साथ संस्कृतियों के पतन और अनाचार, अन्याय, अनैतिकता, झूठ-फरेब और मानव के नैतिक पतन की तरफ खींचने वाला कलिकाल या कलियुग अंत में आएगा. जैसे ही यह समय चक्र पूर्ण होगा, अन्याय, अत्याचार और अनैतिकता बढ़ने पर महाकाल रुपी वह परमेश्वर इस सृष्टि का संहार कर पुनः नवीन रचना करेंगे, ऐसा सिद्धांत हिन्दू-संस्कृति में माना जाता है. यह सिद्धांत काफी हद तक वैज्ञानिक भी है क्योंकि ऋग्वेद की नासदीय सूक्ति में सृष्टि की उत्पत्ति के पहले की क्या स्थिति थी इसका बहुत ही वैज्ञानिक विवरण आज से हजारों वर्ष पूर्व ही आ जाता है जब आज का तथाकथित विज्ञान पैदा भी नहीं हुआ था. आज का वर्तमान तथाकथित भौतिक/रासायनिक/जेनेटिक विज्ञान भी इस बात को मानता है की बिग-बैंग का जो सिद्धांत और ब्लैक-होल आदि का जो सिद्धांत प्रतिपादित किया गया है वह काफी हद तक ऋग्वेद में वर्णित सृष्टि के उत्पत्ति के सिद्धांत से ही सम्बंधित है. 

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Saturday, August 16, 2025

Breaking:// जन्म जन्मांतर के सत्कर्मों और सुसंस्कारों से मिलती है भागवत भक्ति// पावन यज्ञस्थली कैथा में भागवत महापुराण का पांचवां दिन - अजामिल के पतन और उद्धार की कथा, समुद्र मंथन देवासुर संग्राम का अध्यात्मिक-वैज्ञानिक दर्शन का वर्णन //

दिनांक 16 अगस्त 2025 रीवा मप्र।
  यज्ञों की पावन स्थली कैथा हनुमान जी स्वामी मंदिर प्रांगण में दिनांक 12 अगस्त से प्रारंभ हुई भागवत महायज्ञ का कार्यक्रम सतत रूप से चल रहा है। दिनांक 18 अगस्त को कार्यक्रम का विसर्जन हवन एवं विशाल भंडारे के साथ किया जाएगा। इस बीच आचार्य डॉक्टर गौरीशंकर शुक्ला के मुखारबिंद से अमृतमयी, पाप विनाशक, मोक्ष प्रदायक भागवत कथा का प्रवचन और पारायण कार्य निरंतर चल रहा है। 

   *अजामिल-यमदूत-नारायण प्रसंग की अध्यात्मिक विवेचना*

   अजामिल एक पतित ब्राह्मण था. यद्यपि अजामिल के पूर्वकर्म सात्विक और धार्मिक थे परन्तु कुसंस्कार वश अजामिल पतित हो जाता है. लेकिन उसके पूर्व शुभकर्म अंत में प्रभाव दिखाते हैं और ईश्वर अजामिल के मुक्ति का साधन बना देते हैं. समस्त जीव जो जन्म लेता है उसका शरीर त्याग सुनिश्चित है. यमदूत वह हैं जो अंत में शरीर को आत्मा से अलग कर इस नश्वर शरीर को पञ्च महाभूतों पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि, और आकाश को समर्पित कर देते हैं. आत्मा अज़र, अमर शाश्वत और सनातन है. श्रीमद भगवद गीता में कहा भी गया है. “न जायते म्रियते व कदाचित नायं भूत्वा भविता व न भूयः, अजो नित्यः शाश्वतोअयं पुराणों न हन्यते हन्यमाने शरीरे” अर्थात श्रीकृष्ण जी कहते है की हे अर्जुन यह मत भूलो की तुम आत्मा हो यह शरीर नहीं और “यह आत्मा न जन्म लेती है, न मरती है, यह न पहले कभी भूत में कभी जन्मी और न भविष्य में मरने वाली है, यह अज़र अर्थात जरा-रोग रहित है, यह नित्य और शाश्वत है, यह अत्यंत सनातन है, यह शरीर के नष्ट होने के बाद भी नष्ट नहीं होती”.

  *पूर्व जन्म के कर्मों और संस्कारों का परिणाम है वर्तमान जन्म*

     यमदूत हैं शरीर को आत्मा से पृथक करने वाले और जीव को उसके जीवनभर के बुरे कर्मो के फल देने वाले तत्व. वहीं नारायण के गण हैं- जीव के सत्कर्म और जीव के शुभ और भले कर्मों का फल देने वाले तत्त्व. यहाँ पर ध्यान देने की बात है की अजामिल के भी कथा प्रसंग से श्रीमद भगवद गीता के ही कर्म-फल और पुनर्जन्म के सिद्धांत को दृढ़ता दी गयी है. भगवान् श्री कृष्ण के द्वारा अर्जुन को कुरुक्षेत्र में भगवद गीता के ज्ञान के समय शरीर त्याग के वक्त प्राप्त होने वाले अगले जन्म के विषय में बताया गया है की अंत समय में जो व्यक्ति जिस भाव में अवस्थित रहेगा वह उसी भाव/योनी की प्राप्ति करेगा. यहाँ पर यद्यपि अजामिल एक धर्मात्मा ब्राह्मण था परन्तु पतित होने के बाद भी मात्र अपने पुत्र के नारायण नाम रखने के कारण और अपने अंतिम समय में उसी नाम के उच्चारण के फलस्वरुप भगवान् नारायण के लोक को प्राप्त होना और मोक्ष को प्राप्त करना बताया गया है. संतजनो का अजामिल और उसकी पूर्व की वेश्या पत्नी के घर आना मात्र संयोग नहीं बल्कि अजामिल के पूर्व शुभ सात्विक कर्मो का परिणाम था. इसी प्रकार उस वेश्या का संत समूह से झूंठ न बोलकर सच-सच अपने विषय में बता देना भी व्यक्ति के संगत के प्रभाव को दर्शाता है. यद्यपि वह पूर्व में व्यभिचारिणी वेश्या होते हुए भी जैसे ही अजामिल के सानिध्य में आयी वह गृहस्थ तो बनी ही साथ ही एक स्त्री-धर्म का भी पालन करने के संस्कार उस वेश्या नारी में पड़ गए और यह मात्र अजामिल (और उस वेश्या नारी के) के पूर्व के संस्कार कर्मो से हुआ. अजामिल का नारायण नाम का पुत्र प्राप्त होना, अजामिल का अपने पुत्र नारायण के प्रति अतिसय आसक्ति उत्पन्न होना और अजामिल का “नारायण” नाम के भाव में पूर्णतया दृढ हो जाना अजामिल के पूर्व कर्मों का फल और संस्कार से हुआ.  

  *प्रभु नाम स्मरण मात्र से मिलता है मोक्ष*

    इस प्रकार यह देखा जा सकता है की प्रभु नाम की महिमा और उनकी कृपा प्राप्त करना हमारे वश में नहीं है. यह सब हमारे पूर्व जन्म के संचित शुभ और प्रारब्ध कर्मों का सम्मिलित रूप होता है. पूर्व जन्म को तो नहीं परन्तु वर्त्तमान जन्म को तो सुधारा ही जा सकता है. हिन्दू-सनातन संस्कृति की महानतम उपलब्धि और कालजयी ग्रन्थ श्रीमद भागवत महापुराण के सतत सानिध्य से हम अपने इस जन्म और साथ ही पूर्व और भविष्य के जन्मों को भी सफल बना सकते हैं ऐसा उल्लेख बारम्बार भागवत में आता है. ऐसा भी कहा गया है की किसी भी कुल में जन्म लेने वाला व्यक्ति यदि भगवत-भक्ति का मार्ग ग्रहण करता है तो वह न केवल अपना उद्धार करता है साथ ही अपने कुल के सात जन्मों पूर्व और सात जन्म आगे के वंश का भी उद्धार करता है ऐसी है ईश्वर की शरणागति. श्रीमद भागवत महापुराण जैसे कालजयी ग्रन्थ का अभ्युदय ही इस कलिकाल में अजामिल और इनसे भी अधिक पतित मानवों के उद्धार के लिए हुआ है. आवश्यकता है मात्र सम्पूर्ण समर्पण भाव से ईश्वर शरणागति की.

राधे राधे

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Friday, August 15, 2025

Breaking// ईश्वर प्राणिधान एवं योग से मन और इन्द्रियों पर प्राप्त होता है नियंत्रण - डॉक्टर गौरीशंकर शुक्ला

दिनांक 15 अगस्त 2025 रीवा मप्र।
  यज्ञों की पावन पुनीत स्थली कैथा हनुमान जी स्वामी मंदिर प्रांगण में पापविनाशक मोक्षप्रदायक श्रीमद भागवत भक्ति ज्ञान महायज्ञ 2025 का प्रवचन एवं परायण कार्य सतत चल रहा है। डॉक्टर गौरीशंकर शुक्ला ने भागवत महापुराण के कई महत्वपूर्ण कथाओं का प्रवचन किया। इस बीच उन्होंने अजामिल, दुर्वासा, समुद्र मंथन आदि कथा प्रसंगों की तरफ ध्यान आकृष्ट कराया। 


  *ईश्वर नाम की महिमा एवं मन इन्द्रियों पर नियंत्रण का वर्णन*

     डॉक्टर गौरीशंकर शुक्ला जी ने बताया की शास्त्रों में वर्णित अजामिल के कथा प्रसंगों से यह भी भली भांति स्पष्ट हो जाता है की व्यक्ति को अपने दशों इन्द्रियों एवं मन से क्या कर्म करने चाहिए. आँख से क्या देखे और मन में क्या विचार लाये. अजामिल ने अपनी नजर को विचलित किया और कामावेश में स्त्री चरित्र को देखा इसलिए उसके मन में वही बात कौंध गयी. यदि वह ईश्वर का स्मरण करता हुआ अपने आँखों पर नियंत्रण किया होता तो यह अवस्था उत्पन्न नहीं होती. मन तो इन्द्रियों के ही अधीन है. इन्द्रियों से जो देखेंगे वही मन और बुद्धि में प्रविष्ट होता है. वही विचार और भाव मन में बन जाता है. अतः मन और इन्द्रियों को साधने और नियंत्रण की बात हिन्दू धर्म शास्त्रों, योग, वेदांत आदि में निरन्तर जोर दिया जाता रहा है. यह हमारी ऋषि मुनि मनीषी और वेदांत योग शास्त्री की उच्चतम बुद्धिमत्ता का ही फल है की हमारे दर्शन और अन्य शास्त्रों में मन बुद्धि इन्द्रियों पर निरंतर शोध होता आ रहा है. अष्टांग योग में तो मन इन्द्रियों को नियंत्रण की पूरी विधियाँ ही बताई गयीं हैं. पतंजलि योग सूत्र में चार अध्यायों में योग विज्ञान का पूरा वर्णन मिलता है. मन इन्द्रियों पर नियंत्रण से क्या क्या अनुभूतियाँ प्राप्त हो सकती हैं उसका भी पूरा वर्णन मिलता है साथ ही अंततः कैवल्य प्राप्ति अथवा मोक्ष प्राप्ति की स्थिति का भी पूरा वर्णन मिलता है.

      अजामिल के कथा प्रसंग से उस परमेश्वर परम ब्रह्म के विभिन्न नामों की महिमा का भी वर्णन मिलता है. वैसे भी सभी हिन्दू धर्म ग्रंथों में प्रभु के नाम की महिमा का वर्णन मिलता है. वर्तमान कलयुग में तो यहाँ तक कहा गया है की इस युग में मात्र भगवान् के नाम का सतत मन ही मन स्मरण ही आधार है. कलयुग में तो यहाँ तक कहा गया की सभी यज्ञों का फल मात्र नाम जप में ही सन्निहित है. अतः व्यक्ति को चाहिए की वह भगवान् के नाम का सतत स्मरण करता रहे और इसी से उसे मुक्ति मिल जायेगी.     
       श्रीकृष्ण जी ने श्रीमद भगवद गीता में यहाँ तक कहा की मृत्यु के समय जो भाव व्यक्ति के मन मस्तिष्क में रहता है उसे वही योनी की प्राप्ति होती है. अतः सतत मन ही मन भगवान् के नाम का स्मरण करते रहने से व्यक्ति उसी भगवान् के भाव में स्थिर होने लगता है और एक भाव में आरूढ़ होने से वह मृत्यु के समय भी उसी भाव में रहेगा। अतः श्रीकृष्ण जी कहते हैं की मेरे ऊपर निर्भर रहने वाला, मेरे ही नाम और भाव में आरूढ़ रहने वाला व्यक्ति मुझी को प्राप्त होता है. 

      पावन यज्ञ स्थली कैथा में भागवत महायज्ञ का विसर्जन 18 अगस्त 2025 को हवन एवं  विशाल भंडारे के साथ होगा.

      पावन यज्ञ स्थली कैथा में अमृतमयी, पाप विनाशक, एवं मोक्ष प्रदायक श्रीमद भागवत कथा का श्रवण पान करने के लिए आप सभी सादर आमंत्रित हैं.

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Thursday, August 14, 2025

MP//Rewa//- कैथा में भागवत कथा का तीसरा दिवस// जीव का जगत से आसक्ति मात्र माया है, जीवात्मा का ईश्वर से सम्बन्ध ही सच्चा - डॉक्टर गौरीशंकर शुक्ला// एकं सद विप्रः बहुधा बदंति अर्थात सत्य एक है ज्ञानीगण उन्हें अलग-अलग नामों से पुकारते हैं//

दिनांक 14 अगस्त 2025 रीवा मप्र।
     पावन यज्ञस्थली कैथा प्राचीन हनुमान मंदिर प्रांगण में श्रीमद भागवत महायज्ञ का दिनांक 14 अगस्त को तीसरा दिवस रहा. इस बीच व्यासपीठ पर विराजमान डॉक्टर गौरीशंकर शुक्ला जी के द्वारा विभिन्न कथा प्रसंगों का वर्णन किया गया.

   तीसरे दिन की कथा प्रसंगों में – सती कथा, ध्रुव चरित्र का वर्णन, अजामिल उपाख्यान, जड़ भरत कथा प्रसंग आदि का वर्णन हुआ

  *ईश्वरीय न्याय में मात्र घोटालेबाज को ही डर सताता है – डॉक्टर गौरीशंकर शुक्ला*


   डॉक्टर गौरीशंकर शुक्ला ने बताया की भगवान सभी को कुछ न कुछ देता है और जिसको जो दिया है उसका एक दिन हिसाब लेता है. जिसके हिसाब में घोटाला होता है मात्र ऐसे व्यक्तियों को ईश्वरीय न्याय से भय लगता है. जो अपना कर्म सच्चाई और पूरी निष्ठा से किया है वही ईश्वर की परीक्षा में सफल होता है. जिसका हिसाब बराबर रहता है वही निर्भय होता है और उसी को शांति मिलती है. बताया गया की काल के भी महाकाल परमात्मा है और उनकी शरण में जाने से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है.
 
  *जीव का जगत से आसक्ति मात्र माया है, जीवात्मा का ईश्वर से सम्बन्ध ही सच्चा - डॉक्टर गौरीशंकर शुक्ला*

  आचार्य ने बताया की जीव इस जगत के मोह में पड़कर भ्रमित हो जाता है और इसी दृश्य संसार को ही वास्तविक मान बैठता है जबकि जीव का इस जगत के साथ सम्बन्ध मात्र माया है। शास्त्रों में बताया गया है की जीवात्मा का ईश्वर से सम्बन्ध ही सच्चा है। पति-पत्नी, पिता-पुत्र, माता-पुत्र, आदि लौकिक सम्बन्ध मात्र जगत की दृष्टि से हैं जबकि पारलौकिक और अध्यात्मिक दृष्टि से यह सब आभासी संबध है और मात्र इस वर्तमान जीवन तक ही सीमित रहते हैं। यद्यपि अपने इन लौकिक संबंधों का भी निष्ठा पूर्वक और अनासक्त भाव के साथ निर्वहन करना मानव का दायित्व है। शास्त्रोक्त एवं तात्विक दृष्टि से देखा जाय तो यह सभी सम्बन्ध माया मात्र हैं। भगवान् के साथ सम्बन्ध रखते हुए अपने कर्त्तव्य मार्ग पर अविचल चलते रहना चाहिए। ईश्वर के साथ सम्बन्ध रखना चाहिए।

  *एको ब्रह्म द्वितीयो नस्ति अर्थात ईश्वर एक है दूसरा नहीं*

 आचार्य ने बताया की ईश्वर के सभी स्वरुप समान हैं और एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति सिद्धांत से एक हैं। व्यक्ति को ईश्वर का जो स्वरुप अच्छा लगे उसी स्वरुप पर ध्यान कर अपने इष्ट के तौर पर ध्यान करें। एकं सद विप्रः बहुधा बदंति अर्थात सत्य एक है ज्ञानीगण उन्हें अलग-अलग नामों से पुकारते हैं। श्रीकृष्ण जब हाँथ में धनुष-बाण धारण करते हैं तो वह श्रीराम कहे जाते हैं और जब चक्र-गदा धारण करते हैं तो वह विष्णु कहे जाते हैं और जब अधर्म अत्याचार बढ़ता है और तांडव कर डमरू धारण कर हाँथ में त्रिशूल लेकर अधर्मियों का संहार करते हैं तो शिव कहलाते हैं। ईश्वर के सभी स्वरुप सामान हैं और उनमे भिन्नता नहीं करनी चाहिए। जिसको ईश्वर का जो स्वरुप अच्छा लगे उसे उसी का स्मरण पूजन और ध्यान करना चाहिए।

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Wednesday, August 13, 2025

MP//Rewa// कैथा में भागवत महायज्ञ का दूसरा दिन// कर्मयोग ही श्रेष्ठ, विहित कर्म से विमुख होकर शांति की प्राप्ति नहीं – डॉक्टर गौरीशंकर शुक्ला

दिनांक 13 अगस्त 2025 रीवा मप्र।
     दिनांक 11 अगस्त सोमवार से कलश यात्रा के साथ प्रारंभ हुई श्रीमद भागवत भक्ति ज्ञान महायज्ञ 2025 का दिनांक 13 अगस्त को तीसरा दिन रहा. इस बीच व्यासपीठ पर विराजमान डॉक्टर भगवताचार्य गौरीशंकर शुक्ला द्वारा भागवत ज्ञान महायज्ञ में आत्मदेव के पुत्र धुंधकारी के प्रेत योनि से उद्धार का वर्णन किया गया. इसके साथ अश्वथामा द्वारा पांडव पुत्रों का वध, अर्जुन द्वारा अश्वथामा वध की प्रतिज्ञा, द्रोपदी द्वारा ऐसा कृत्य न करने से रोकना, गर्भ में राजा परीक्षित के आने से अश्वथामा द्वारा नष्ट करने का उपक्रम, श्रीकृष्ण के द्वारा राजा परीक्षित की रक्षा करना आदि कथा प्रसंगों का वर्णन किया गया.

  *कर्मयोग ही श्रेष्ठ, विहित कर्म से विमुख होकर शांति की प्राप्ति नहीं – डॉक्टर गौरीशंकर शुक्ला*

   इस बीच भागवत के कथा प्रसंगों की चर्चना और व्याख्या करते हुए डॉक्टर गौरीशंकर शुक्ला ने बताया की श्रीकृष्ण कर्मयोगी हैं. उनका जीवन न केवल भारत के लोगों के लिए अनुकरणीय है बल्कि सम्पूर्ण विश्व और मानवजाति के लिए एक प्रेरणा का श्रोत है. व्यक्ति कैसे समाज में रहते हुए निष्काम कर्मयोग में रत रहकर मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है इसकी शिक्षा उन्होंने श्रीमद भगवद गीता में दी है. व्यक्ति के कर्म की जिम्मेदारी उसकी स्वयं की है वह उससे पलायन नहीं कर सकता. मनुष्य कर्म तो कर सकता है लेकिन उस कर्म फल पर उसका अधिकार नहीं है. मनुष्य के अंतःकरण में मात्र दो शत्रु बसते हैं वह हैं काम और क्रोध. अतः काम क्रोध के वशीभूत होकर किये जाने वाले कर्म बंधनकारी होते हैं और शास्त्रों में नर्क के द्वार बताए गए हैं. नर्क कहीं और नहीं बल्कि कर्मों के बंधन में जकड़ना ही नरक है.

   बताया गया है की श्रीकृष्ण का चरित्र सर्वज्ञ है. श्री कृष्ण मानव को यह शिक्षा देते हैं है की सत्कर्म कर पाप से बचा जा सकता है. श्रीकृष्ण कहते हैं की मानव का स्वभाव ऐसा होता है की वह बिना कर्म किये रह नहीं सकता इसलिए कर्मों से पलायन तो संभव ही नहीं है. व्यक्ति दो प्रकार के ही कर्म सकता है. या की वह अच्छा कर्म करेगा अथवा बुरा कर्म करेगा. यदि वह सत्कर्म करेगा तो उसका फल अच्छा होगा और यदि गलत कर्म करेगा तो उसका फल बंधनकारी और विनाशक होगा. इसलिए मानव को चाहिए की सदैव वह सत्कर्म और धर्मविहित कर्म ही करे. इसी से मानव मोक्ष की प्राप्ति करेगा.

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Tuesday, August 12, 2025

Breaking// श्रीमद भागवत महायज्ञ का पहला दिन - ईश्वर दृष्ट नही है, ईश्वर दृष्टा हैं ( कैथा की पावन पुनीत स्थली पर चल रही भागवत कथा में चल रहा प्रथम एवं द्वितीय स्कंध का वर्णन, 18 को हवन भंडारे के साथ होगा कथा का विसर्जन)

दिनांक 12 अगस्त 2025, स्थान - रीवा मप्र
    विंध्य क्षेत्र में जनजागरण का केंद्र कैथा श्रीहनुमान श्री शिव मंदिर प्रांगण में आयोजित श्रीमद भागवत महापुराण महायज्ञ का दिनाँक 12 अगस्त को प्रथम दिवश रहा। इस बीच 11 अगस्त को कलश यात्रा एवं 12 अगस्त को बैठकी के साथ प्रारम्भ हुई कथा निरंतर चल रही है। अमृतमयी मोक्षप्रदायक भगवत कथा का प्रवचन एवं परायण का कार्य भगवताचार्य डॉक्टर श्री गौरीशंकर शुक्ला के मुखारविंद से किया जा रहा है जिसका रसास्वादन करने के लिए सैकड़ों की संख्या में भक्त श्रद्धालुगण उपस्थित होकर अपने जीवन को धन्य बना रहे हैं।

*प्रथम एवं द्वितीय स्कंध तक कि कथा*

   इस बीच दिनाँक 12 अगस्त दिन मंगलवार को श्रीमद भागवत कथा के प्रथम एवं द्वितीय स्कंध की कथा प्रसंगों का वर्णन किया गया जिसमें सच्चिदानंद स्वरूप भगवान श्रीकृष्ण का वंदन, गोकर्ण कथा, भागवत सप्ताह महायज्ञ की विधि, सुदामा जी की निष्काम भक्ति, गोपियों की निष्काम भक्ति, वैराग्य से ही ज्ञान सम्भव, भक्ति में सभी का अधिकार, परीक्षित की जन्मकथा, श्रीकृष्ण की काम विजय, कलयुग का आगमन, जगत की उत्पत्ति की कथा, भगवत्सेवा से ही सुख की प्राप्ति, सुख-दुःख का कारण माया आदि कथा प्रसंग सम्मिलित रहे।

  *ईश्वर दृश्य नही बल्कि स्वयं सर्वदृष्टा है* 

   डॉक्टर शुक्ला ने बताया कि ईश्वर दृश्य नही बल्कि ईश्वर दृष्टा है। ईश्वर ने ही आंखों को देखने की शक्ति दी है लेकिन इतनी शक्ति नही दी कि वह उन नग्न आंखों से ईश्वर को देख सकें। ईश्वर दृश्य नही है क्योंकि सांसारिक आंखें सर्वव्यापी परमात्मा को नही देख सकतीं उसके लिए अन्तरचक्षु की आवश्यकता होती है। जब ज्ञान रूपी प्रकाश पुंज का उदय हृदय में होगा तभी वह सर्वव्यापक परमात्मा देखा जा सकेगा।फिर हम शुख दुःख लाभ हानि जय पराजय और द्वैत भाव से ऊपर उठकर सभी मे उसी परमात्मा को अनुभव करेंगे। यही वेदांत का सिद्धांत भी है। वेदांत वेदों का निचोड़ ज्ञान है। 

   *भक्ति की शक्ति से ईश्वर दृश्य हो जाता है*

   डॉक्टर गौरीशंकर शुक्ल ने बताया कि भक्ति की शक्ति ही आत्मा और मन मे जमे हुए बाहरी विकारों, मोह माया, दुर्गुणों, द्वेष ईर्षा आदि बुरे संस्कारों और भावों को धोकर मन और आत्मा में सन्निहित ज्ञान पुंज को खोल देती है। उस भक्ति को प्राप्त करने के श्रीरामचरित मानस में 9 मार्ग बताए हैं जिन्हें नवधा भक्ति कहा गया है। बताया गया कि भगवान श्रीराम ने भीलनी शबरी को नवधा भक्ति का राज बताया था।

  भक्ति जब बढ़ती है और अपने चरम पर पहुचती है तब भगवान को भी भक्त के लिए दृश्य होना पड़ता है। 
  
   *वृंदावन क्या है? हृदय ही वृंदावन है*

    डॉक्टर शुक्ला ने बताया कि मॉनव हृदय वास्तव में वृंदावन जैसा ही है। जिस प्रकार भागवत महापुराण में आया कि वृंदावन में भक्ति ज्ञान और वैराग्य निवास करते हैं और कलिकाल के प्रभाव से ज्ञान और वैराग्य मूर्छित हो जाते हैं जबकि भक्ति छिन्न भिन्न हो जाती है ऐसे में नारद मुनि स्वयं चिंतित हो जाते हैं। भोग प्रधान जीवन मे भगवान गौंड़ हो गए हैं धन और पैसा मुख्य हुआ है। भक्ति हृदय में निवास करती है और भक्ति भगवान की ही शक्ति है। आचार्य ने बताया कि ऐसे लोग भी जो ऐसी धारणा पालकर रखे हुए हैं कि वह भगवान और भक्ति कुछ नही मानते उनके भी हृदय में भक्ति निवास करती है। ईश्वर पर आस्था न भी रखने वाले लोग जब अत्यंत दुखी होते हैं तब वह भी यह विचार करते हैं कि यह सृष्टि किसी शक्ति के अधीन ही है और ऐसे नास्तिक भी अंततः ईश्वरीय शक्तियों पर विश्वास करते हैं। 

    इस प्रकार वृंदावन रूपी हृदय में ज्ञान वैराग्य और भक्ति की अलख जगाने से हमारा हृदय ही देवस्थल बन जाता है और परमशान्ति की प्राप्ति होकर मोक्ष की प्राप्ति होती है।
 
     श्रीहनुमान मन्दिर प्रांगण में चल रही श्रीमद भगवत कथा 18 अगस्त 2025 तक चलेगी। महापुराण कथा का विसर्जन हवन एवं भंडारे के साथ किया जाएगा जिसमे सभी भक्त श्रद्धालुओं को सादर आमंत्रित किया गया है।

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*