Tuesday, November 29, 2016

(Rewa, MP) हिनौती-सेदहा के लोहरा में बिजली के करंट से पुनः हुआ नीलगाय का शिकार - सिरमौर वन परिक्षेत्र रीवा का प्रकरण



दिनांक: 29/11/2016
स्थान: लोहरा (हिनौती, रीवा मप्र)


विषय – सेदहा-हिनौती पंचायत अंतर्गत लोहरा नामक स्थान पर बिजली के अवैध खुले करंट से फिर हुआ नीलगाय का अवैध शिकार.


   (हिनौती, रीवा मप्र – शिवानन्द द्विवेदी)  अभी हाल ही में कुछ दिनों पूर्व ही सिरमौर वन परिक्षेत्र के भमरिया-डकरकुण्ड क्षेत्र के आसपास विद्युत् करंट लगाकर जंगली जानवरों जैसे नीलगाय, शुअर आदि का शिकार और साथ ही घरेलू  पशुओं जैसे गाय, बैल आदि का भी करंट में फसकर मरने का प्रकरण रीवा जिले में पेपर पत्रिकाओं में सिटी संस्करण के मुख्य पृष्ठ में प्रकाशित हुआ था और सोशल मीडिया में भी छाया रहा.
हिनौती-सेदहा के लोहरा में बिजली के करंट से पुनः हुआ नीलगाय का शिकार
    अभी पुनः एक प्रकरण की जानकारी मिली जिसमे ग्रामीणों और इस क्षेत्र के लोगों द्वारा एक रोझ अथवा नीलगाय के मरने की सूचना सेदहा-हिनौती पंचायती क्षेत्र के पास दी गयी जो की वनपरिक्षेत्र सिरमौर के अंतर्गत ही आता है. दिनांक 29 नवम्बर 2016 को सूचना मिलने पर पर्यावरण एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता द्वारा सर्वप्रथम सिरमौर के रेंज ऑफिसर श्री बाजपाई को सूचित किया गया. उनके दवारा त्वरित कार्यवाही न होने पर कांकर के प्रशिक्षु बीटगार्ड मनोज तिवारी को साथ लेकर हिनौती-सेदहा के लोहरा क्षेत्र के पास ग्राम बडोखर निवासी राजकुमार सिंह वैस की डबरी के पास जाया गया जहाँ एक ट्रांसफार्मर के पास तथा शारदा सिंह निवासी बडोखर के अहरी के पास अभी ताजा मरे हुए नील गाय का कंकाल मिला जिसमे भारी बदबू आ रही थी. कंकाल के पास ही उसका गोबर पड़ा मिला जो ताज़ा था जिससे रोझ होने की पुष्टि होती है. कंकाल से लगभग पचास मीटर दूर चलने पर एक छोटे से पेंड के पास वहीँ लोहरा में ही रोझ अथवा काले नीलगाय का सींग सहित शिर का ऊपरी भाग मिला जिसको की वहां से एक बोरी में भरकर फारेस्ट गार्ड मनोज तिवारी की उपस्थिति में अग्रिम कार्यवाही और जांच के लिए लाया गया जिसमे शिर के ऊपरी भाग की फॉरेंसिक एवं डीएनए जांच की मांग की गयी है.    
रेंज ऑफिसर सिरमौर श्री बाजपाई से लेकर पीसीसीएफ भोपाल श्री अनिमेष शुक्ला तक सूचना प्रेषित पर घटनास्थल पर कोई अधिकारी समय पर नहीं पंहुचा
     यह जानकारी प्रारंभिक तौर पर सिरमौर रेंज के वन परिक्षेत्र अधिकारी श्री बाजपाई (मोबाइल - 09926764285) को प्रेषित की गयी वहां से घंटों कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर वन मंडलाधिकारी रीवा श्री गुप्ता (मोबाइल - 09424793326), सहायक वन संरक्षक श्री ए के शर्मा (मोबाइल - 09424793327) मुख्य वन संरक्षक श्री मुद्रिका सिंह (मोबाइल - 09424793325) , और पीसीसीएफ श्री अनिमेष शुक्ला भोपाल (मोबाइल -  09424790001) को दी गयी. लगभग तीन बजे तक इंतज़ार करने पर भी जब कोई वन अधिकारी घटनास्थल पर नहीं आया तो मरे हुए नील गाय का शिर का अग्र  भाग लेकर घटनास्थल से हिनौती लाया गया.   

जांचकर्ता वनपरिक्षेत्र अधिकारी अतरैला द्वारा बदतमीजी से पेस आना इनकी वन अपराध में संलिप्तता दर्शाता है   
      इसके पूर्व जाँच के लिए आये सहायक वन संरक्षक श्री योगेश्वर वर्मा द्वारा बताया गया की अभी हाल ही में कांकर पनगड़ी बीट की जांच अतरैला के वनपरिक्षेत्र अधिकारी (मोबाइल - 07692053520) समेत एक पूरी टीम को सौपी गयी है जिसके सिलसिले में वह जाँच करने हेतु आ रहे हैं. इस जांच के सिलसिले में सूचना मिलने पर सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता सतत इस जांच टीम के एक सदस्य अतरैला के रेंजर के संपर्क में रहा जिनको सुबह 11 बजे तक आना बताया गया था. पर जब अतरैला रेंजर अपने दल के साथ 11 बजे तक नहीं आये तो उनसे जानकारी चाही गयी जिस पर उनका कहना था की वह पनगड़ी अथवा कांकर बीट में नहीं आ रहे बल्कि आवेदक स्वयं ही सिरमौर में आये और जांच में भागीदारी दे और कुछ बदतमीजी पूर्ण बातें की गयी. जाहिर है ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि पूरा रीवा वन विभाग ही सामाजिक एवं पर्यावरण कार्यकर्ता के जांच वाले बिन्दुओं से भयभीत है और क्योंकि इन वन कर्मचारियों और आला अधिकारियों के पास कोई जबाब देने को नहीं बचा है अतः स्वाभाविक रूप से अपनी भड़ास किसी न किसी माध्यम से निकाल रहे हैं जिसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है.
      अब प्रश्न यह उठता है की भड़ास निकालने और आवेश में आने से न ही जांच संभव है और न ही वन अपराधों पर लगाम ही लग सकती है. सच्चाई जब भी सामने आती है तो उसके विपरीत कार्यों में संलिप्त माफिया की सांठ-गांठ से अवैध शिकार, अवैध उत्खनन, अवैध वनों की कटाई करवाने वाले यह वन अधिकारी और कर्मचारी आवेशित होकर अपने आपको और भी दोषी ही सिद्ध कर रहे हैं और साथ ही उनका बदतमीजी से पेश आने से मामला और भी गंभीर ही बनेगा. पूरे वन विभाग का ही यही हाल है की जब भी कोई वन अपराध की जानकारी किसी न किसी माध्यम से इनके उच्चाधिकारियों को प्रेषित की जाती है तो इनके कान खड़े हो जाते हैं, और फिर यह दोषी अधिकारी-कर्मचारी शिकायतकर्ता और आवेदक के चक्कर लगाने लगते हैं की वह अपनी शिकायत अथवा आवेदन वापस ले ले. कई मर्तबा ऐसा हुआ की यह वन कर्मचारी कोई तथाकथित गणमान्य व्यक्ति को लेकर पंहुच जाते और विभिन्न माध्यमों से आवेदकों और शिकायतकर्ताओं पर दवाब बनवाते की इन्हें माफ़ कर दिया जाए और यह वन कर्मचारी-अधिकारी अपनी कार्यशैली में जल्दी ही शुधार कर लेंगे पर हमेशा ही उसका उल्टा हुआ और जब भी इनको छोंड दिया जाता तो वन अपराध और भी धड़ल्ले से बढ़ते नज़र आये जो की हमारे वन और पर्यावरण के लिए बहुत घातक है जिस पर संज्ञान लेना अति आवश्यक हो गया है.
      यह जानकारी लिखे जाने तक बीट गार्ड मनोज तिवारी के अतिरिक्त कोई भी वन अधिकारी घटनास्थल पर मरे हुए नील गाय के पंचनामे और कंकाल उठाकर डीएनए अथवा फॉरेंसिक जांच के लिए नहीं लाया है. अभी भी अपेक्षा की जा रही है घटनास्थल का सघन निरीक्षण किया जायेगा और जो भी दोषी व्यक्ति अवैध खुले हुए बिजली के तार लगाकर करंट फैलाए हुए हैं उन्हें सख्ती से दण्डित किया जाएगा और जो भी व्यक्ति लोहरा क्षेत्र में मृतक पायी गयी नीलगाय की मौत का दोषी होगा उसके विरुद्ध भी वन्य प्राणी सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही कर दण्डित किया जाएगा.
  संलग्न – कुछ फोटोग्राफ एवं देखें यूट्यूब विडियो जिसमे करंट से मरे हुए नीलगाय के कंकाल और शिर के भाग और साथ ही उसकी गोबर को दिखाया गया है:
  
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Shivanand Dwivedi
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Friday, November 25, 2016

(Rewa, MP) - दबंगों ने सेदहा, डाढ़ और हिनौती ग्राम पंचायत के पास भमरिया में गायों के लिए एक बार फिर बनाया अवैध वांडा/कैदखाना


दिनांक: 25/11/2016
स्थान: भमरिया (हिनौती, रीवा मप्र)


सेदहा, डाढ़ और हिनौती ग्राम पंचायत के पास भमरिया में एक बार पुनः गायों के लिए बनाया गया अवैध वांडा.

   (हिनौती, रीवा मप्र – शिवानन्द द्विवेदी) गायों को अवैध तरीके से कैदखाने में रखने का एक और प्रकरण पुनः असामाजिक तत्वों द्वारा किया जा रहा है. जी हाँ यह प्रकरण है हिनौती, डाढ़ और सेदहा पंचायत के पास का और दोनों पंचायतों के संपर्क बिदु भमरिया अथवा भमरगढ़ नामक स्थान के पास का. यहाँ पर मंत्री उर्फ़ पुष्पेन्द्र सिंह पिता दिवाकर सिंह निवासी बडोखर, सूर्यकांत सिंह उर्फ़ बड़े बाबा पिता नर्मदा सिंह निवासी बडोखर, आनंद सिंह पिता समरबहादुर सिंह निवासी सेदहा, बिजेंद्र सिंह निवासी बडोखर और राजेंद्र त्रिपाठी पिता अमरनाथ निवासी करहिया-डाढ़ की सांठ-गाँठ से मंत्री उर्फ़ पुष्पेन्द्र सिंह पिता दिवाकर सिंह की जमीन पर अवैध तरीके से गायों के लिए कैदखाने/बाड़ा का निर्माण किया गया है जिसमे न तो चारे, न तो पानी और न ही आसमान पर छत है. गौ हत्या में तत्पर इन तथाकथित संभ्रांत दबंगों द्वारा एक बार पुनः कानून को ताक पर रखकर गौ हत्या निवारण अधिनियम मप्र, पशु अतिचार निवारण अधिनियम भारत को धता बताकर गौ-वंशों पर अतिचार किया जा रहा है जिसको देखने वाला कोई शासन-प्रशासन नहीं दीख रहा है जबकि कहा जाए तो मप्र एवं भारत में हिन्दू धर्म और गौवंशों का तथाकथित समर्थन करने वाली हिंदूवादी सरकार का ही राज चल रहा है.
  यह सब ज्यादातर दबंग और अपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्ति हैं जो वहीँ पास स्थित कांकर पनगड़ी बीट के जंगलों से अवैध तरीके से गिट्टी पत्थर का परिवहन करते हैं और अवैध तरीके से लकड़ी की कटाई भी किया करते हैं.
  अभी हाल ही में आबकारी और पुलिश विभाग के छापों में बिजेंद्र सिंह निवासी बडोखर की हिनौती स्थित दुकान से देशी-विदेशी मदिरा भी पकड़ी गयी थी. बिजेंद्र सिंह अवैध तरीके से मदिरा बेचने का भी व्यापर करता है जिसकी सीएम हेल्पलाइन 181 में भी शिकायत दर्ज है.
  श्रीमती मनेका गाँधी जी के पीपल फॉर एनिमल एनजीओ का हस्तक्षेप –
अभी हाल ही में दिनांक 21 नवम्बर 2016 को सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता द्वारा श्रीमती मनेका गाँधी जी के पीपल फॉर एनिमल नामक एनजीओ को किये गए ईमेल जिसमे की कैदखाने में अवैध तरीके से बंद की गई गायों से सम्बंधित एक विडियो भी यूट्यूब के माध्यम से भेजा गया था जिसमे बाड़े में बंद की हुई गायों को लगभग सुबह साढ़े दश बजे के आसपास दिखाया गया था.
       इस पर संज्ञान लेते हुए श्रीमती गाँधी जी के कार्यालय से अगले ही दिन लगभग नौ बजे सुबह के आसपास एक मैडम का कॉल कई मर्तबा आया जिसमे उन महोदया ने बंद की गयी गायों के विषय में जानकारी चाही थी. सम्पूर्ण जानकारी एवं साथ ही गढ़ टी आई श्री वृजराज सिंह (मोब- 7049122845), जिला रीवा एसपी श्री संजय कुमार (मोब: - 7049100455) एवं रीवा कलेक्टर श्री राहुल जैन (मोब: - 9425903973) का मोबाइल नंबर क्रमश: सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा तत्काल बताया गया. इस प्रकार केन्द्रीय मंत्रालय के उच्चस्तर से जब दबाब लगाया गया और उक्त उच्चाधिकारियों से जानकारी चाही गयी तो रीवा एसपी संजय कुमार एवं कलेक्टर राहुल जैन के संज्ञान में तत्काल गढ़ पुलिश प्रभारी टी आई श्री बृजराज सिंह के द्वारा घटनास्थल पर पंहुच कर स्थिति का जायजा लेते हुए लोगों को आगाह किया गया की वह ऐसी असंवैधानिक गतिविधि में न लगें अन्यथा प्रकरण दर्ज कर कड़ी कार्यवाही की जाएगी. वर्तमान समय तक कोई भी आपराधिक प्रकरण दोषियों के ऊपर दर्ज नहीं हुआ है और मात्र मौखिक ही नोटिस दी गयी है और सम्बंधित पंचायतों के सरपंचों से जानकारी चाही गयी है.
   गदही-डकरकुण्ड क्षेत्र में बिजली के खुले तार लगाकर जंगली जानवरों जैसे रोझ और जंगली सूअर का शिकार –
हिनौती और सेदहा पंचायती क्षेत्र में एक और भी प्रकरण का खुलासा हुआ है जिसमे आपराधिक प्रकृति के लोगों द्वारा गदही-डकर-कुण्ड क्षेत्र में बिजली के खुले तार लगाकर रात में करंट सप्लाई कर दिया जाता है जिससे वहां पर आने वाले जंगली जानवर जैसे रोझ-नीलगाय, जंगली सूअर, गायें, बैल आदि फंसकर मर जाते हैं. यह प्रकरण कई बार प्रकाश में आया है जिस पर आज तक न तो वन विभाग ने और ना ही पुलिश विभाग ने कोई संज्ञान लिया है. वहरहाल अभी हाल ही में श्रीकांत मिश्रा निवासी ग्राम बडोखर का एक बैल और एक गाय गदही क्षेत्र में अवैध तरीके से फैलाए गए करंट की चपेट में आने से मर गए थे जिस पर पीड़ित ने दबंगों के डर से चुप साधना उचित समझा परन्तु अब यह जानकारी पूरे क्षेत्र में व्याप्त है.
यह जानकारी लिखे जाने तक सूत्रों के माध्यम से प्राप्त जानकारी से पता चला है की अभी भी दबंगों ने पुनः पशुओं को कैद कर दिया है और एक बार पुनः नियम कानून को धता बता दिया है.

संलग्न – कुछ फोटोग्राफ एवं देखें यूट्यूब विडियो जहाँ पर गायों का कैदखाना खुले आसमान के नीचे बनाया गया है:  अवैध तरीके से कैदखाने में बंद की गयी गायों को दिखाता youtube विडियो - सौजन्य शिवानन्द द्विवेदी (सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता) 


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Sunday, October 2, 2016

(Rewa, MP) कैथा के अति प्राचीन श्री हनुमान मंदिर प्रांगण में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाई गई गाँधी और शास्त्री जयंती



स्थान – कैथा-गढ़ (रीवा, म.प्र.), दिनांक: 02.10.2016, दिन रविवार,

 (कैथा-गढ़, रीवा) आज जब हमारे भारत देश को बाहरी और आतंरिक दुश्मनों से खतरा बढ़ गया है आज वह समय आ गया है जब हम उन वीर सपूतों को याद करें जिन्होंने अपने परिवार और स्वयं की कोई फ़िक्र न करते हुए हँसते-हँसते अपने जीवन को देश सेवा में बलिदान कर दिया.
जी हाँ! आज दो अक्टूबर का दिन ऐसे ही भारत के दो महान सपूतों के जन्म दिन के रूप में मनाया जाता है. यह दिन भारत के वर्तमान और आधुनिक काल के इतिहास के अमिट दिन हैं. इस दिन अहिंसा और सत्य के पुजारी श्री मोहनदास करमचन्द्र गाँधी और “जय जवान जय किसान” का नारा देने वाले भारत के सपूत और पूर्व प्रधानमंत्री श्री लालबहादुर शास्त्री जी का जन्म हुआ था.
भारतीय संस्कृति में श्रीमद भगवद गीता का अपना एक अति महत्वपूर्ण स्थान है. गीता के पुजारी और उसके प्रत्येक श्लोक का अपने जीवन काल में अनुकरण कर जीवन यापन करने वाले महात्मा गाँधी शायद गौतम बुद्ध के बाद अहिंसा के सिद्धांत को आधुनिक काल में अक्षरसः जीने वाले प्रथम और अविरल व्यक्ति हुए हैं.
वहीँ श्री लालबहादुर शास्त्री एक मझे हुए और दृढ शासक-प्रशासक के उदहारण हैं. उनके नेतृत्व काल में भारत ने अत्यंत विकट स्थिति से गुजरते हुए देश के जवानों और किसानों को आत्मबल और नैतिक बल प्रदान किया. उन्होंने ही यादगार “जय जवान जय किसान” का नारा दिया और उसके बाद ही भारत में दोनों ही क्षेत्रों में अभूतपूर्व परिवर्तन हुए. हरित क्रांति के जनक थे पूर्व प्रधानमंत्री श्री शास्त्रीजी.
आज जब भारत को पडोसी देशों से आतंकवाद और युद्ध जैसे भयानक खतरे छाये हुए हैं आज आवश्यकता है इन महान पुरुषों के जीवन और इनकी दृढ़ता को याद कर इनसे शिक्षा ग्रहण करने की.
आज गाढ़ी और शास्त्री जयंती के महान अवसर पर पावन यज्ञस्थली कैथा के अति प्राचीन श्री हनुमान मंदिर प्रांगण में शक्ति की उपासना के पर्व के दूसरे दिन इन महापुरुषों को यादकर श्रद्धांजलि दी गयी. इस बीच समाज के गणमान्य व्यक्ति और बच्चे उपस्थित रहे.

|||धन्यवाद|||
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शिवानन्द द्विवेदी
(सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता)
ग्राम कैथा, पोस्ट अमिलिया, थाना गढ़,
जिला रीवा  (म.प्र.) पिन ४८६११७
मोबाइल नंबर – 07869992139



   


Friday, September 30, 2016

REWA/BHOPAL - SDM Mangawan KP Pandey and CEO Janpad Gangev Pradeep Paul must be removed and Suspended for Not taking lawful actions



Status as on 01 Oct 2016
Registration Number:PMOPG/E/2016/0372558
Name Of Complainant:Shivanand Dwivedi Social Activists
Date of Receipt:01 Oct 2016
Received by:Prime Ministers Office
Officer name:Shri Ambuj Sharma
Officer Designation:Under Secretary (Public)
Contact Address:Public Wing
5th Floor, Rail Bhawan
New Delhi110011
Contact Number:011-23386447
e-mail:ambuj.sharma38@nic.in
Grievance Description:Mr. Prime Minister, I would like to bring in your kind attention that in Madhya Pradesh Rewa district, Janpad Panchayat Gangev CEO Mr. Pradeep Paul and SDM Mangawan KP Pandey Not taking actions over the complaints and issues of public importance submitted by me through CM helpline, Written and through PG Portal. I demand for the immediate action against the CEO Janpad Pradeep Paul and Mangawan Tehsil SDM KP Pandey. Pradeep Paul and KP Pandey MUST be terminated for NOT taking actions over above issues and also for Not taking actions on issues of social and public importance. There are high level of corruptions in Janpad and Tehsil level in GANGEV and MANGAWAN. The MGNREGA and PANCHAYATI work are not done by the labors and fraud muster roll are made. Please see the PMOPG Complaints No: PMOPG/E/2016/0358291 registered by applicant Shivanand Dwivedi in your pgportal webpage. ------- Sincerely, SHIVANAND DWIVEDI (Social and Human Rights Activists) Village Kaitha, Post Amiliya, Tehsil Mangawan, District Rewa, MP Mobile 07869992139
Current Status:RECEIVED THE GRIEVANCE



Thursday, September 29, 2016

(Rewa, MP) गंगेव ब्लाक के हिनौती, अमिलिया, गढ़ शंकुल केन्द्रों की कैथा सहित पचासों स्कूलों की बदहाल स्थिति - छात्रों के शिक्षा और मानव के अधिकार का हनन



स्थान – कैथा-गढ़ (रीवा, म.प्र.), दिनांक: 29.09.2016, दिन गुरुवार,

हिनौती और अमिलिया संकुल केंद्र स्थित कैथा शा. पूर्व माध्यमिक शाला का भवन वर्षों से क्षतिग्रस्त है, फर्श उखड़ी, माल मवेशी बैठते हैं, बच्चों के शिक्षा के अधिकार और मानवाधिकार का हनन   

 (कैथा-गढ़, रीवा) आज भारत के संविधान में मानवाधिकार, शिक्षा का अधिकार, जीने का अधिकार, मूलभूत अधिकार, बाल अधिकार, महिलाओं का अधिकार, वृद्ध जनों का अधिकार,  आदि ऐसे कितने अधिकार हैं पर क्या इन अधिकारों का भारत गणराज्य में सही क्रियान्वयन हो पा रहा है, आज यह बहुत बड़ा प्रश्न है? इन सबकी वास्तविक स्थिति देखनी है तो आप चले जाएँ किसी भी सरकारी संस्था में और स्वयं देख लें कि वहां पर क्या कुछ व्यवस्थाएं हैं और कोई भी कानून का कितना पालन हो पा रहा है.

कैथा स्कूल का भवन परिसर वर्षों से क्षतिग्रस्त – आइये आपको कैथा स्कूल में छात्रो की व्यवस्था पर गौर फरमाते हैं और कुछ ऐसी प्रशासनिक स्थिति पर नज़र डालते हैं जिसे देख आज मंत्रालय और कानून की उच्च सीढ़ियों में बैठे हुए नीति निर्माता भी चकित रह जायेंगे और शर्म से मुह फेर लेंगे. इन तस्वीरों को देख यह सहज ही समझ आएगा की देश की ग्रामीण विद्यालयों में पता नहीं कितने ऐसे सुमार होंगे जिनमे आज मूलभूत ढांचा का आभाव और उसके रख-रखाव की समस्या बनी हुई है. आज विकासवाद की अवधारणा के साथ सरकारें मूलभूत ढांचों के वास्ते पैसा तो खूब बहा रही है पर वह सब विकराल भ्रस्ट्राचार रुपी दानव की भेंट चढ़ रहा है जिसकी निगरानी करने वाला कोई नहीं है. प्रश्न उठता है क्या लोकपाल जैसी संस्थाएं होती तो इन शासकीय कार्यों की निगरानी नहीं करती? प्रश्न यह भी है की क्या अभी भी हर एक सरकारी विभाग में निगरानी और जाँच टीमें नहीं हैं? अब कैथा स्कूल का ही प्रकरण ले लें, इस सन्दर्भ में बहुत पहले भी मप्र. शासन की तथाकथित जन शिकायत निवारण हेतु चलायी गयी सीएम हेल्पलाइन में भी प्रकरण पूर्व में रखे गए थे परन्तु कोई सार्थक समाधान नहीं निकला. देखें सीएम हेल्पलाइन क्र. 328521. जाँच कर्ताओं द्वारा तो यह स्वीकार किया गया था की स्कूल परिसर क्षतिग्रस्त है पर इसकी भरपाई हेतु राशि डीपीसी से ही आएगी ऐसा बताया गया था. बहरहाल जाँच दल जिसमे गंगेव के एक इंजिनियर श्री द्विवेदी भी सम्मिल्लित थे, ने डीपीसी को प्रोजेक्ट बनाकर तो दे दिया था परन्तु आज तक उसका क्या हुआ इसकी कोई खबर नहीं है. संलग्न तस्वीरों में देखें की कैसे जर्जर स्कूल भवन के अन्दर फ़र्स उखाड़कर रेत बाहर निकल आई है और माल मवेशी के बैठने के कारण वहां गोबर भी भरा पड़ा है. लगभग एक वर्ष पूर्व जब यह प्रकरण सामाजिक कार्यकर्ता की नजर में आया तो यह प्रशासन की नजर में भी रखा गया और जाँच भी की गयी परन्तु अव्यवस्था ज्यों की त्यों बनी हुई है. शायद शासन प्रशासन की नजर में संविधान में ही ग्राम और शहरों की कानून में अंतर होगा? जो मीडिया की नजर में जल्दी आ जाये या फिर जिले में बैठे उच्चाधिकारियों के ऊपर शहरी क्षेत्र में दबाब बनाकर रखा जाये तो उस पर तत्काल कार्यवाही होती है पर वही प्रकरण यदि शहरी क्षेत्र से दूर कहीं ग्रामों का है तो भला शासन-प्रशासन का उससे क्या लेना है क्योंकि वह तो ग्राम हैं वहां पशुओं जैसे जीवन यापन करने वाले ग्रामीण रहते हैं जिनकी धान, गेंहू, शब्जी-भाजी ही शासन प्रशासन के कर्मचारियों और मीडिया को चाहिए इसके अतिरिक्त भला गाँव की समस्याओं को मीडिया में भी स्थान देने से टीआरपी थोड़ी बढ़ने वाली है. ग्राम के लोगों को जीवन यापन करने के लिए उत्पादन तो करना ही पड़ेगा. जो उत्पादित होगा उसे बेंचना भी पड़ेगा. सरकारी और शहरी पैसे वाले रसूखदार और ज्यादातर दो नंबर की की कमाई करने वालों के लिए एक ग्राम के किसान और मजदूर की सालभर की उपज मात्र रोज दो रोज की दो नंबर की कमाई से खरीद लेने का अहंकार तो रहेगा ही. इतनी तो समझ और शक्ति ग्रामीण किसान मजदूर में हो ही नहीं सकती वह अपनी उपज और डेरी उत्पादन को मात्र अपने उपयोग के अतिरिक्त सब कूड़े गर्त में डाल दे फिर देखें कैसे सरकार और प्रशासन में बैठे और पूंजीपति लोग अन्न खाते हैं? अन्नदाता और मजदूरों का शोषण तो अन्नदाताओं और मजदूरों की एकता से ही बंद होगा पर वह हमारे भारत वर्ष में कभी आ ही नहीं सकती क्योंकि फूट डालो और शासन करो अंग्रेजों ने भारत को पहले ही सिखा दिया है. आज यदि पत्रकारिता की तरफ ध्यान दें तो भला ग्रामीण पत्रकारिता में रखा ही क्या है? न पैसा न सोहरत और न ही कोई राजनीतिक लाभ. टीआरपी पॉपुलैरिटी तो सेलेब्रिटी की छींक और जमुहाई कब हुई और वह कब उठे और कब टॉयलेट करने के लिए गए यह सब ब्रेकिंग न्यूज़ और लाइव दिखाने से मिलती है. भला गाँव की स्कूल भवन में क्या व्यवस्था है? गाँव का मजदूर और किसान किस स्थिति में है? ग्रामीण महिलाओं और बच्चों की क्या स्थिति है? ग्राम सडकों की क्या स्थिति है? हैंडपंप और पानी नाहर की व्यवस्था की क्या स्थिति है? ग्राम के बच्चों और लोगों का जीवन यापन कैसे हो पा रहा है, शिक्षा में सुधार के लिए क्या किया जाए? कैसे बच्चों को अपने गाँव में ही अच्छी शिक्षा मिले? यह सब न्यूज़ तो मात्र अखबार और मीडिया की फ़ालतू की जगह ही घेर सकती हैं इनसे मीडिया को तो लाभ कुछ नहीं होगा.

   शा. स्कूल कैथा के सामने खुली नाली छोटे बच्चों के मौत का आमंत्रण – वर्ष 2013-14 में उस समय के कैथा पंचायत द्वारा हरिजन-आदिवासी बस्ती और शा. पू. मा. वि. कैथा के सामने एक सरकारी नाली बनाई गई थी जिसका कि औचित्य आज तक नहीं समझ आया. पहली बात तो वह नाली तब अवश्यक थी जब वहां सामने से पीसीसी अथवा आरसीसी रोड होती. पर कच्ची सड़क के बाजू में हरिजन-आदिवासी बस्ती और कैथा स्कूल से जुडी हुई इस नाली में बनने से लेकर आज तक लगभग दर्ज़नों बच्चे गिर चुके हैं. कुछ के हाँथ पैर भी टूट चुके हैं और कुछ पांच वर्ष तक के बच्चे तो मरते मरते बचे थे. बनायी जा रही नाली के गुणवत्ता के विषय में भी तब सीएम हेल्पलाइन में प्रकरण क्र. 328789 रखा गया था तब थोडा इसमें सुधार हुआ था परन्तु अभी भी खर्च के मुताबिक नाली की गुणवत्ता निम्न दर्जे की है. साथ ही नाली के ऊपर कवर या ढक्कन होना चाहिए जिससे उसमे अनायास कोई फिसल कर गिरे नहीं परन्तु यह नाली आज भी बिलकुल खुली हुई है और खुली होने के कारण काफी हद तक भठ भी चुकी है. स्कूल प्रांगण के ठीक सामने होने से बच्चे खेलते हुए इसमें अक्सर गिर जाते हैं और हादसे होते रहते हैं लेकिन इसको देखने वाला न ही कैथा स्कूल विभाग ही है और न ही शासन प्रशासन.

कैथा स्कूल में शौचालय की बदहाल स्थिति – कैथा स्कूल परिसर दो भवनों में विभक्त है. एक पंचायत भवन कैथा के पास जहाँ पर कक्षा पांचवीं तक की कक्षाएं लगती है और एक हरिजन-आदिवासी बस्ती कैथा के पास जहाँ कक्षा छः से आठ तक की कक्षाएं लगती है. दोनों ही स्कूल भवनों में शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है. दशकों पुराने और नाम मात्र के लिए बनाये गए शौचालय पूरी तरह से समाप्त हो चुके हैं. यह बात कई बार सीएम हेल्पलाइन और फ़ोन मोबाइल के माध्यम सहित लिखित भी जिला रीवा के शिक्षाधिकारी सहित डीपीसी को दी गयी है पर अब तक शौचालय की कोई उचित व्यवस्था नहीं हुई है. देखें संलग्न तस्वीरें जिसमे खंड-विखंड शौचालय भी दिखाए गए हैं. शौचालय की व्यवस्था न होने से अक्सर स्कूल के लड़के लड़कियां शौच के लिए बाहर गांववालों के खेतों में जाते हैं जिससे उन्हें खरी खोटी भी सुननी भी पड़ती है साथ ही बच्चों के लिए भी खतरा बना रहता है.
अभी हाल ही में पिछले ग्रामोदय से भारत उदय अभियान 2016 के अंतर्गत जब गंगेव ब्लाक के सीईओ प्रदीप पॉल और अन्य नायब तहसीलदार शर्मा आदि उपस्थित थे तो उनके भी समक्ष यह मुद्दा उठाया गया और लिखित भी दिया गया परन्तु गाँव के कमज़ोर मजदूर और किसान वर्ग को शौचालय बनवाने, और न बनवाने पर गरीबों के खाद्यान बंद करवाने और कानूनी कार्यवाही की धमकी देने वाले इन अधिकारियो ने यह नहीं बताया की सरकारी भवनों में में जर्ज़र और समाप्त पड़े शौचालयों की व्यवस्था के लिए इन्होने क्या ठोस कदम उठाये हैं? कितना बड़ा मजाक है यह सब? दूसरों को नसीहत से बेहतर होता यदि देश के कलेक्टर, कमिश्नर, सीईओ, तहसीलदार आदि स्वयं यह देखने के प्रयास करते की इनके कार्यालयों के पास स्वयं भी कोई उचित शौचालयों की न तो व्यवस्था है और यदि थोड़ी बहुत है भी तो उसमे इतनी गन्दगी रहती है की शौचालय में जाना तो दूर वहां उसके पास खड़ा होना भी मुस्किल होता है.

हिनौती और गढ़ संकुल केन्द्रों अंतर्गत 70 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में बदहाल शौचालय – शा. उच्च. वि. हिनौती और गढ़ दोनों शंकुल केन्द्रों अंतर्गत लगभग साठ से अधिक स्कूल आते हैं परन्तु सभी स्कूलों में शौचालय की उचित व्यवस्था नहीं है. लगभग 70 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है और शेष 30 प्रतिशत स्कूलों में यदि शौचालय हैं भी तो उनकी भी उचित देख रेख साफ सफाई न होने से बदतर स्थिति में रहते हैं. किसी भी शौचालय के पास पानी की टंकी की व्यवस्था नहीं है. पानी न होने से बच्चे शौच के लिए बाहर जाते हैं. जो पहले शौच के लिए शौचालय में जाते हैं पानी न होने से गन्दगी वहीँ छोंड जाते हैं और उसकी कभी भी सफाई नहीं होती.
सबसे पहले तो जो शौचालय पहले से निर्मित हैं उन सभी के ऊपर पानी की टंकी बनाई  जाएँ और उन टंकियों को चाहे बाहर के पानी के टैंकर से प्रतिदिन भरा जाये अथवा प्रत्येक स्कूल परिसर में अपने बोरिंग-वेल की व्यवस्था और मोटर-पंप लगाये जाएँ. क्योंकि जब तक स्कूलों के शौचालय के पास पानी की उचित व्यवस्था और साफ़ सफाई कर्मी नहीं हैं तो शौचालय जैसी जगह का कोई औचित्य नहीं है. यह सब अव्यवस्थाएं कोई भी कभी भी जाकर देख सकता है. देखें सीएम हेल्पलाइन प्रकरण क्र. 1357580 जो की हिनौती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अंतर्गत आने वाली स्कूलों में शौचालय की बदहाल स्थिति के विषय में दर्ज करवाई गयी थी.  

हिनौती और गढ़ शंकुल केंद्र अंतर्गत आने वाले सभी स्कूलों में शिक्षा की निम्न गुणवत्ता – आज सबसे ज्यादा चिंतनीय विषय है सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गिरती गुणवत्ता. शहरी स्कूल तो अपेक्षाकृत थोडा ठीक स्थिति में हैं परन्तु सबसे बड़ी दुर्दशा ग्रामीण स्कूलों की है. आज भारत और प्रदेश सरकार ने सर्वशिक्षा अभियान से लेकर शिक्षा का अधिकार जैसे महत्वपूर्ण बिल तो पास कर दिया है पर सरकारों को देखना यह होगा की क्या बिल पास कर देने मात्र और संविधान की किताब में दर्ज़ कर देने मात्र से काम थोड़े ही पूरा हो जाता है. कोई भी नियम कायदा का तब तक कोई औचित्य नहीं जब तक उसका अक्षरसः पालन सभी के लिए समान रूप से न हो, और वह हमारे भारत देश में तो ऐसा लगता है कि कभी भी संभव होना नहीं दीखता.
शा. स्कूल हिनौती और गढ़ शंकुल केंद्र के अंतर्गत आने वाली स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हो रहा है. ज्यादातर स्कूलों में नियमित सरकारी शिक्षक नदारद रहते हैं और स्कूलें मात्र अतिथि शिक्षकों के बल बूते ही चल रही है. अतिथि शिक्षकों के विहित कार्यों में से चपरासी, रजिस्टर मेन्टेन करने, बाबूगिरी के कार्यों से लेकर पढ़ाने तक के कार्य सौंप कर नियमित शिक्षक अपने घर-परिवार खेती-किसानी के कार्यों में व्यस्त रहते हैं और यदि कभी भूल से घंटे दो घंटे के लिए यह सरकारी शिक्षक स्कूल आ भी जांयें तो मात्र कुर्सी तोड़ते बैठे रहते हैं. यह हाल है सरकारी स्कूलों और और वहां की शिक्षा व्यवस्था का. भला ऐसे में क्या ख़ाक देश और इसके बच्चे आगे बढ़ेगें चाहे कितने भी नियम कानून बना दो पर यदि उनका पालन ही नहीं हुआ तो किसी का कोई औचित्य नहीं है.

हिनौती और गढ़ शंकुल केंद्र अंतर्गत आने वाली स्कूलों और साझा चूल्हा अंतर्गत आंगनवाडी केन्द्रों में मध्यान भोजन की बदहाल स्थिति - वैसे तो सम्पूर्ण रीवा जिले की ही ग्रामीण स्कूलों और साझा चूल्हा अंतर्गत आंगनवाडी केन्द्रों में मध्यान्न भोजन की स्थिति दयनीय है पर गंगेव ब्लाक अतर्गत हिनौती और गढ़ स्कूल शंकुल केन्द्र अंतर्गत आने वाली स्कूलों और आंगनवाडी केन्द्रों पर गौर फरमाना ज्यादा उचित होगा क्योंकि हमारे पास इनमे मध्यान्न भोजन सम्बन्धी अनियमितता के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं. मध्यान्न भोजन सम्बन्धी अनियमितता के प्रकरण मप्र शासन की सीएम हेल्पलाइन में भी रखे गए जिनके प्रकरण क्र. क्रमशः 314048, 313903, 377313, 404165, 379147, 405255, 379224, 1442109, 1467059, 1405660, 1403600 आदि हैं पर दुर्भाग्य इस देश का और यहाँ की सड़ांध ले चुकी शासन-प्रशासन का कि यहाँ सब कुछ लीपापोती कर दी जाती है. थोड़ी बहुत जांच होती है है. जांचकर्ता आते हैं शिक्षकों और दोषियों से पैसे ले लेते हैं झूंठा पंचनामा बनवा लेते हैं और सब कुछ ठीक बताकर चले जाते हैं.
शा. पू. मा. वि. और शा. प्राथमिक शाला कैथा, शा. उच्च. मा. वि., कन्या शाला हिनौती, अमिलिया, गढ़ और यहाँ तक की इसके अंतर्गत आने वाली सभी स्कूलों में कभी भी मध्यान भोजन सही तरीके से नहीं बनता. आंगनवाडी केद्रों की तो बात ही क्या करना वहां तो भोजन तब परोसा जायेगा जब स्कूलों में बनेगा क्योंकि आंगनवाडी तो स्कूलों के साथ चूल्हा साझा कर रहे हैं. जब स्कुल का चूल्हा ही जलेगा तो आंगनवाडी का कैसे जलेगा? जहाँ तक सवाल है मेनू के आधार पर भोजन का तो वह तो कभी भी नहीं बनता. कई बार मध्यान्न भोजन अनियमितता सम्बन्धी प्रकरण सीएम हेल्पलाइन में रखा गया परन्तु इसका कोई भी सार्थक समाधान नहीं निकला. सभी स्व. सहायता समूह मौज कर रहे हैं और स्कूलों आंगनवाडी केन्द्रों का पूरा-पूरा माल चट कर रहे हैं. इसमें ब्लाक के बी.आर.सी.सी. से लेकर शिक्षा विभाग के नीचे से लेकर उच्चाधिकारियों तक का परसेंट बंटा रहता है. स्व.-सहायता समूह का अध्यक्ष ले दे कर सब मामला सही कर लेते हैं और जहाँ तक सवाल है जांच और कार्यवाही की तो उनका कहना है की “चाहे शिकायत कहीं भी करो उससे क्या फर्क पड़ेगा. जांच करने के लिए तो सरकारी कर्मचारी ही आंएगे न. सभी को पैसा चाहिए होता है और इसी लालच में तो सब जांच करने आते हैं. जितना कुछ खाया है उसका कुछ हजार जाँच कर्ताओं को भी दे देंगे और अब मामला रफा दफा हो जायेगा.” बस अनुभव भी यही बताता है की सब कुछ बिलकुल ऐसे ही चल रहा है. शिकायतकर्ता अंत में मूर्ख साबित होता है और मात्र सुधार के नाम पर समाज और प्रशासन से अपने सम्बन्ध विगाड़ता है और इसके अतिरिक्त कुछ नहीं होता है. मृतक पशुओं पर टूट पड़ने वाले चील्ह, कौवे, बाज की तरह यह सरकारी कर्मचारी इस पैठ में बैठे रहते हैं की कहीं कोई शिकायत कर दे और हम बस शिकायत की जांच करने के लिए वहां पहुचेंगे और अच्छा माल मिलेगा. और बस क्या कहना जांचकर्ता निरीक्षण स्थल पर पंहुचा और बिना शिकायतकर्ता को बुलाये ले दे कर मामला का सफाया कर दिया. अब शिकायतकर्ता मूर्ख की तरह पड़ा रहे लेवल के गेम और अपना समय और पैसा फूंकता रहे समाजसेवा के नाम पर. न जाने कितनी हज़ार शिकायतें सीएम हेल्पलाइन और चौथे लेवल के ऊपर होंगी पर होना कहीं कुछ नहीं सब समय और ऊर्जा की बर्वादी सिद्ध होती है.   


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शिवानन्द द्विवेदी
(सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता)
ग्राम कैथा, पोस्ट अमिलिया, थाना गढ़,
जिला रीवा  (म.प्र.) पिन ४८६११७

मोबाइल नंबर – 07869992139