Wednesday, August 13, 2025

MP//Rewa// कैथा में भागवत महायज्ञ का दूसरा दिन// कर्मयोग ही श्रेष्ठ, विहित कर्म से विमुख होकर शांति की प्राप्ति नहीं – डॉक्टर गौरीशंकर शुक्ला

दिनांक 13 अगस्त 2025 रीवा मप्र।
     दिनांक 11 अगस्त सोमवार से कलश यात्रा के साथ प्रारंभ हुई श्रीमद भागवत भक्ति ज्ञान महायज्ञ 2025 का दिनांक 13 अगस्त को तीसरा दिन रहा. इस बीच व्यासपीठ पर विराजमान डॉक्टर भगवताचार्य गौरीशंकर शुक्ला द्वारा भागवत ज्ञान महायज्ञ में आत्मदेव के पुत्र धुंधकारी के प्रेत योनि से उद्धार का वर्णन किया गया. इसके साथ अश्वथामा द्वारा पांडव पुत्रों का वध, अर्जुन द्वारा अश्वथामा वध की प्रतिज्ञा, द्रोपदी द्वारा ऐसा कृत्य न करने से रोकना, गर्भ में राजा परीक्षित के आने से अश्वथामा द्वारा नष्ट करने का उपक्रम, श्रीकृष्ण के द्वारा राजा परीक्षित की रक्षा करना आदि कथा प्रसंगों का वर्णन किया गया.

  *कर्मयोग ही श्रेष्ठ, विहित कर्म से विमुख होकर शांति की प्राप्ति नहीं – डॉक्टर गौरीशंकर शुक्ला*

   इस बीच भागवत के कथा प्रसंगों की चर्चना और व्याख्या करते हुए डॉक्टर गौरीशंकर शुक्ला ने बताया की श्रीकृष्ण कर्मयोगी हैं. उनका जीवन न केवल भारत के लोगों के लिए अनुकरणीय है बल्कि सम्पूर्ण विश्व और मानवजाति के लिए एक प्रेरणा का श्रोत है. व्यक्ति कैसे समाज में रहते हुए निष्काम कर्मयोग में रत रहकर मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है इसकी शिक्षा उन्होंने श्रीमद भगवद गीता में दी है. व्यक्ति के कर्म की जिम्मेदारी उसकी स्वयं की है वह उससे पलायन नहीं कर सकता. मनुष्य कर्म तो कर सकता है लेकिन उस कर्म फल पर उसका अधिकार नहीं है. मनुष्य के अंतःकरण में मात्र दो शत्रु बसते हैं वह हैं काम और क्रोध. अतः काम क्रोध के वशीभूत होकर किये जाने वाले कर्म बंधनकारी होते हैं और शास्त्रों में नर्क के द्वार बताए गए हैं. नर्क कहीं और नहीं बल्कि कर्मों के बंधन में जकड़ना ही नरक है.

   बताया गया है की श्रीकृष्ण का चरित्र सर्वज्ञ है. श्री कृष्ण मानव को यह शिक्षा देते हैं है की सत्कर्म कर पाप से बचा जा सकता है. श्रीकृष्ण कहते हैं की मानव का स्वभाव ऐसा होता है की वह बिना कर्म किये रह नहीं सकता इसलिए कर्मों से पलायन तो संभव ही नहीं है. व्यक्ति दो प्रकार के ही कर्म सकता है. या की वह अच्छा कर्म करेगा अथवा बुरा कर्म करेगा. यदि वह सत्कर्म करेगा तो उसका फल अच्छा होगा और यदि गलत कर्म करेगा तो उसका फल बंधनकारी और विनाशक होगा. इसलिए मानव को चाहिए की सदैव वह सत्कर्म और धर्मविहित कर्म ही करे. इसी से मानव मोक्ष की प्राप्ति करेगा.

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Tuesday, August 12, 2025

Breaking// श्रीमद भागवत महायज्ञ का पहला दिन - ईश्वर दृष्ट नही है, ईश्वर दृष्टा हैं ( कैथा की पावन पुनीत स्थली पर चल रही भागवत कथा में चल रहा प्रथम एवं द्वितीय स्कंध का वर्णन, 18 को हवन भंडारे के साथ होगा कथा का विसर्जन)

दिनांक 12 अगस्त 2025, स्थान - रीवा मप्र
    विंध्य क्षेत्र में जनजागरण का केंद्र कैथा श्रीहनुमान श्री शिव मंदिर प्रांगण में आयोजित श्रीमद भागवत महापुराण महायज्ञ का दिनाँक 12 अगस्त को प्रथम दिवश रहा। इस बीच 11 अगस्त को कलश यात्रा एवं 12 अगस्त को बैठकी के साथ प्रारम्भ हुई कथा निरंतर चल रही है। अमृतमयी मोक्षप्रदायक भगवत कथा का प्रवचन एवं परायण का कार्य भगवताचार्य डॉक्टर श्री गौरीशंकर शुक्ला के मुखारविंद से किया जा रहा है जिसका रसास्वादन करने के लिए सैकड़ों की संख्या में भक्त श्रद्धालुगण उपस्थित होकर अपने जीवन को धन्य बना रहे हैं।

*प्रथम एवं द्वितीय स्कंध तक कि कथा*

   इस बीच दिनाँक 12 अगस्त दिन मंगलवार को श्रीमद भागवत कथा के प्रथम एवं द्वितीय स्कंध की कथा प्रसंगों का वर्णन किया गया जिसमें सच्चिदानंद स्वरूप भगवान श्रीकृष्ण का वंदन, गोकर्ण कथा, भागवत सप्ताह महायज्ञ की विधि, सुदामा जी की निष्काम भक्ति, गोपियों की निष्काम भक्ति, वैराग्य से ही ज्ञान सम्भव, भक्ति में सभी का अधिकार, परीक्षित की जन्मकथा, श्रीकृष्ण की काम विजय, कलयुग का आगमन, जगत की उत्पत्ति की कथा, भगवत्सेवा से ही सुख की प्राप्ति, सुख-दुःख का कारण माया आदि कथा प्रसंग सम्मिलित रहे।

  *ईश्वर दृश्य नही बल्कि स्वयं सर्वदृष्टा है* 

   डॉक्टर शुक्ला ने बताया कि ईश्वर दृश्य नही बल्कि ईश्वर दृष्टा है। ईश्वर ने ही आंखों को देखने की शक्ति दी है लेकिन इतनी शक्ति नही दी कि वह उन नग्न आंखों से ईश्वर को देख सकें। ईश्वर दृश्य नही है क्योंकि सांसारिक आंखें सर्वव्यापी परमात्मा को नही देख सकतीं उसके लिए अन्तरचक्षु की आवश्यकता होती है। जब ज्ञान रूपी प्रकाश पुंज का उदय हृदय में होगा तभी वह सर्वव्यापक परमात्मा देखा जा सकेगा।फिर हम शुख दुःख लाभ हानि जय पराजय और द्वैत भाव से ऊपर उठकर सभी मे उसी परमात्मा को अनुभव करेंगे। यही वेदांत का सिद्धांत भी है। वेदांत वेदों का निचोड़ ज्ञान है। 

   *भक्ति की शक्ति से ईश्वर दृश्य हो जाता है*

   डॉक्टर गौरीशंकर शुक्ल ने बताया कि भक्ति की शक्ति ही आत्मा और मन मे जमे हुए बाहरी विकारों, मोह माया, दुर्गुणों, द्वेष ईर्षा आदि बुरे संस्कारों और भावों को धोकर मन और आत्मा में सन्निहित ज्ञान पुंज को खोल देती है। उस भक्ति को प्राप्त करने के श्रीरामचरित मानस में 9 मार्ग बताए हैं जिन्हें नवधा भक्ति कहा गया है। बताया गया कि भगवान श्रीराम ने भीलनी शबरी को नवधा भक्ति का राज बताया था।

  भक्ति जब बढ़ती है और अपने चरम पर पहुचती है तब भगवान को भी भक्त के लिए दृश्य होना पड़ता है। 
  
   *वृंदावन क्या है? हृदय ही वृंदावन है*

    डॉक्टर शुक्ला ने बताया कि मॉनव हृदय वास्तव में वृंदावन जैसा ही है। जिस प्रकार भागवत महापुराण में आया कि वृंदावन में भक्ति ज्ञान और वैराग्य निवास करते हैं और कलिकाल के प्रभाव से ज्ञान और वैराग्य मूर्छित हो जाते हैं जबकि भक्ति छिन्न भिन्न हो जाती है ऐसे में नारद मुनि स्वयं चिंतित हो जाते हैं। भोग प्रधान जीवन मे भगवान गौंड़ हो गए हैं धन और पैसा मुख्य हुआ है। भक्ति हृदय में निवास करती है और भक्ति भगवान की ही शक्ति है। आचार्य ने बताया कि ऐसे लोग भी जो ऐसी धारणा पालकर रखे हुए हैं कि वह भगवान और भक्ति कुछ नही मानते उनके भी हृदय में भक्ति निवास करती है। ईश्वर पर आस्था न भी रखने वाले लोग जब अत्यंत दुखी होते हैं तब वह भी यह विचार करते हैं कि यह सृष्टि किसी शक्ति के अधीन ही है और ऐसे नास्तिक भी अंततः ईश्वरीय शक्तियों पर विश्वास करते हैं। 

    इस प्रकार वृंदावन रूपी हृदय में ज्ञान वैराग्य और भक्ति की अलख जगाने से हमारा हृदय ही देवस्थल बन जाता है और परमशान्ति की प्राप्ति होकर मोक्ष की प्राप्ति होती है।
 
     श्रीहनुमान मन्दिर प्रांगण में चल रही श्रीमद भगवत कथा 18 अगस्त 2025 तक चलेगी। महापुराण कथा का विसर्जन हवन एवं भंडारे के साथ किया जाएगा जिसमे सभी भक्त श्रद्धालुओं को सादर आमंत्रित किया गया है।

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Breaking: साप्ताहिक भागवत कथा का कार्यक्रम कलश यात्रा के साथ प्रारंभ// यज्ञों की पावन स्थली कैथा में प्रारंभ हुई साप्ताहिक श्रीमद भागवत महायज्ञ// आचार्य डॉक्टर गौरीशंकर शुक्ला के मुखार बिंद से कथा का होगा प्रवचन और पारायण कार्य// सोमवार 18 अगस्त को हवन भंडारे के साथ होगा समापन//

दिनांक 11 अगस्त 2025 रीवा मप्र।
  यज्ञों की पवनस्थली कैथा हनुमान जी मंदिर प्रांगण में साप्ताहिक श्रीमद् भागवत कथा का प्रारंभ सोमवार दिनांक 11 अगस्त 2025 को कलश यात्रा के साथ हुआ। गौरतलब है की हनुमान जी स्वामी मंदिर प्रांगण में श्रीमद् भागवत महायज्ञ का कार्यक्रम परंपरागत रूप से आयोजित किया जाता रहा है। पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी आचार्य डॉक्टर गौरीशंकर शुक्ला जी के मुखारविंद से अमृतमयी पाप विनाशक मोक्ष प्रदायक श्रीमद भगवत भक्ति ज्ञान महायज्ञ का प्रवचन एवं परायण कार्य किया जाएगा। 

  *कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कलश यात्रा में सम्मिलित हुए श्रद्धालु*

  बैठकी के पूर्व दिनांक 11 अगस्त को कलश यात्रा का कार्यक्रम रखा गया जिसमें आसपास के नजदीकी ग्राम कैथा सोरहवा मिसिरा बड़ोखर करहिया हिनौती इटहा अकलसी आदि ग्रामों के काफी संख्या में भक्त श्रद्धालुगण सम्मिलित हुए। कलश यात्रा का प्रारंभ हनुमान जी स्वामी मंदिर प्रांगण कैथा से प्रारंभ होकर श्रीमद् शारदा देवी मंदिर प्रांगण कैथा तक रहा जहां देवी मंदिर प्रांगण में कलश स्थापना के साथ वापस कलश यात्रा हनुमान जी मंदिर प्रांगण में पहुंची जहां पर कलश की स्थापना की गई। 

*18 अगस्त दिन सोमवार को हवन भंडारे के साथ कार्यक्रम का होगा विसर्जन*

  परंपरागत तौर पर हनुमान जी स्वामी मंदिर प्रांगण में प्रारंभ हुई श्रीमद भागवत कथा का विसर्जन हवन और भंडारे के साथ दिनांक 18 अगस्त 2025 को किया जाएगा। 
   हवन और भंडारे में सम्मिलित होने के लिए आयोजक मंडल ने समस्त भक्त श्रद्धालुओं को सादर आमंत्रित किया है।

*संलग्न* - कार्यक्रम से संबंधित तस्वीरें।

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Saturday, August 9, 2025

सीईओ जिला पंचायत धारा 89, 40 और 92 की कार्यवाही पर दें विशेष ध्यान -एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी

Breaking// सीईओ जिला पंचायत धारा 89, 40 और 92 की कार्यवाही पर दें विशेष ध्यान -एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी// जिला पंचायत रीवा और मऊगंज में पंचायतों में व्याप्त व्यापक भ्रष्टाचार को लेकर शिवानंद द्विवेदी ने जिला पंचायत की कार्यप्रणाली को ठहराया जिम्मेदार// जिला पंचाउत सीईओ नहीं कर रहे सुनवाई, धारा 40 92 के आदेश वर्षों से नहीं हुए पारित// वर्तमान में पिछले 7 माह से मेहताब सिंह गुर्जर हैं सीईओ जिला पंचायत रीवा// जिला पंचायत सदस्य लालमणि त्रिपाठी और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने खाली जिला सीईओ के पद के लिए किया था आंदोलन//


दिनांक 10 अगस्त 2025 रीवा मप्र।


  एक बार फिर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मेहताब सिंह गुर्जर की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने कहा की जिला पंचायत में पंचायत राज अधिनियम की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाए की मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993-94 की धारा 89, 40 एवं 92 की कार्यवाही ठप्प जैसी पड़ी हुई है जिसके लिए पूरी तरह मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा जिम्मेदार है। उन्होंने कहा की मात्र दिखावे के तौर पर कुछ पंचायत की सुनवाईयां की जा रही हैं और साथ में कोई निर्णय भी पारित नहीं किया जा रहे हैं लेकिन ऐसी सैकड़ो पंचायतें हैं जिन पर व्यापक स्तर का भ्रष्टाचार व्याप्त है लेकिन कोई कार्यवाही न किए जाने से भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद हैं। आपको बता दें कि पंचायत राज अधिनियम में धारा 89 की सुनवाई की शक्ति पहले अनुविभागीय एवं दंडाधिकारी को थी जिसके बाद ट्रांसफर कर सुनवाई किए जाने की शक्ति संबंधित जिला कलेक्टरों को दे दी गई थी। परंतु वर्तमान व्यवस्था में अब इस अर्धन्यायिक व्यवस्था की जिम्मेदारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को होती है। जब से मध्य प्रदेश में सुनवाई की यह शक्ति मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायतों के पास आई है तब से न केवल रीवा जिले में बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में ही यही हाल है। जानकारों का मानना है की क्योंकि मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत स्वयं भी पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से ही संबंधित वरिष्ठ अधिकारी होते हैं इसलिए वह भ्रष्ट सरपंच सचिव इंजीनियर और अपने कर्मचारियों को बचाने का प्रयास करते हैं जिसके कारण इस अर्धन्यायिक व्यवस्था में सवाल खड़े हो गए हैं। 


  देखिए पूरे मामले को लेकर के सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने क्या कुछ कहा है।


*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Sunday, April 6, 2025

Meeting summary for 249th RTI Meet- Lokayukta Trap of Karnataka IC & Blacklisting Business (03/30/2025)

*Meeting summary for Shivanand Dwivedi - 249th RTI Meet- Lokayukta Trap of Karnataka IC & Blacklisting Business  (03/30/2025)*


*Quick recap*


बैठक में कर्नाटक में सूचना आयुक्तों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों पर चर्चा की गई, जिसमें पूरे भारत में न्यायिक प्रणाली और सूचना आयोगों में ईमानदारी और जवाबदेही के बारे में चिंताओं पर प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों ने आरटीआई कार्यकर्ताओं और पत्रकारों पर डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम के निहितार्थों की भी जांच की, लंबित मामलों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर इसके संभावित प्रभाव पर बहस की। समूह ने भ्रष्टाचार और कानूनी मुद्दों के साथ व्यक्तिगत अनुभव साझा किए, अधिकारों के लिए लड़ने और समान चुनौतियों का सामना करने वाले अन्य लोगों के साथ जुड़े रहने के महत्व पर जोर दिया।


*Next steps*


• कर्नाटक के राज्यपाल ने अन्य सूचना आयुक्तों के खिलाफ लंबित भ्रष्टाचार की शिकायतों की समीक्षा की

• कर्नाटक सूचना आयोग ने शशि बेनाकरनाहली के सभी 112 लंबित मामलों की समीक्षा की

• कर्नाटक सूचना आयोगः हाल ही में नियुक्त 8 सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया की समीक्षा करें, जिन्हें स्क्रीनिंग समिति के बिना चुना गया था

• कर्नाटक: अधिसूचना के लिए आवेदन किए बिना नियुक्त किए गए वर्तमान मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति की जांच करें

• लोकायुक्त पुलिस: अन्य आयुक्तों के साथ संभावित कनेक्शन की पहचान करने के लिए गिरफ्तार सूचना आयुक्त के सीडीआर, व्हाट्सएप संदेशों और मोबाइल संचार की जांच करें

• वीरेश: फंसे सूचना आयुक्त द्वारा पारित सभी आदेशों की समीक्षा के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए राज्यपाल को एक औपचारिक अनुरोध प्रस्तुत करें

• वीरेश: कर्नाटक में सूचना आयुक्तों के लिए आचार संहिता स्थापित करने की मांग वाली याचिका दायर करें

• कानूनी टीम: कुशल कानूनी कार्यवाही के लिए कई ब्लैकलिस्टिंग मामलों को मिलाकर समेकित याचिका तैयार करें

• मियांवर और टीम: सूचना आयुक्त के ब्लैकलिस्टिंग आदेशों को चुनौती देने के लिए अगले सप्ताह अतिरिक्त याचिकाएं दायर करने के साथ आगे बढ़ें

• रिंकू: दो महीने पहले भेजे गए पुलिस चार्जशीट की स्थिति को सत्यापित करने के लिए अदालत के साथ फॉलो अप करें

• वीरेश: भविष्य में इसी तरह के आदेशों को रोकने के लिए सूचना आयोग के साथ प्रावधानों को ब्लैकलिस्ट करने के संबंध में गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश को इकट्ठा करें और साझा करें

• मियांवर: अगली बैठक में अन्य आरटीआई कार्यकर्ताओं के साथ उच्च न्यायालय के हालिया स्थगन आदेश का विवरण साझा करें

• जगदीश और टीम: कर्नाटक में आरटीआई कार्यकर्ताओं को काली सूची में डालने के खिलाफ उच्च न्यायालय के आदेश पर फॉलोअप

• आरटीआई कार्यकर्ताओं को कानूनी सलाह देने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप में संपर्क नंबर साझा करें: रोहित त्रिपाठी

• आत्मदीपः डेटा संरक्षण संशोधनों के कार्यान्वयन के संबंध में राज्य सरकार के परिपत्र को प्राप्त करें और साझा करें

• ग्रुप एडमिन: रोहित त्रिपाठी को अपने दिए गए फोन नंबर का उपयोग करके व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ें


*Summary*


*कर्नाटक के सूचना आयुक्त गिरफ्तार*


कर्नाटक सूचना आयोग (Karnataka Information Commission) के सूचना आयुक्त रवींद्र गुरुनाथ ढकप्पा (Ravindra Gurunath Dhakappa) को लोकायुक्त पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. 1 लाख रुपए। यह गिरफ्तारी आरटीआई कार्यकर्ता साईबन्ना नासी द्वारा शिकायत के बाद हुई है कि ढकप्पा ने रुपये की मांग की थी। उनकी अपील में अनुकूल आदेश जारी करने के लिए 3 लाख रुपये। इस घटना ने सूचना आयोग की अखंडता पर सवाल खड़े किए हैं और ढकप्पा को बर्खास्त करने की मांग की है। फिलहाल लोकायुक्त पुलिस मामले की जांच कर रही है।


*कर्नाटक भ्रष्टाचार मामला: लोकायुक्त की भूमिका*


वीरेश कर्नाटक में एक सूचना आयुक्त से जुड़े भ्रष्टाचार के हालिया मामले की पृष्ठभूमि बताते हैं। राजनीतिक कनेक्शन वाले पूर्व ठेकेदार कमिश्नर लोकायुक्त (भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल) द्वारा निर्धारित रिश्वत के जाल में फंस गए थे। जाल सफल रहा, और आयुक्त को न्यायिक हिरासत में ले लिया गया। वीरेश सूचना आयुक्तों पर लोकायुक्त के अधिकार क्षेत्र के कानूनी आधार और ट्रैप ऑपरेशन के प्रमुख तत्वों का विवरण देते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कुछ आरटीआई कार्यकर्ताओं पर भ्रष्ट आयुक्तों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया गया है। वीरेश इस बात पर जोर देते हैं कि यह घटना पूरे भारत में सूचना आयोगों में भ्रष्टाचार को साबित करती है और आयुक्तों के खिलाफ शिकायतों की विस्तृत जांच की मांग करती है।


*भारतीय न्यायपालिका में विश्वसनीयता का संकट*


वीरेंद्र भारतीय न्यायपालिका में विश्वसनीयता के संकट पर चर्चा करते हैं, विशेष रूप से भ्रष्टाचार के मामलों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। वह बताते हैं कि रिश्वतखोरी से जुड़े जाल मामलों पर मुकदमा चलाना आसान है, जबकि आय से अधिक संपत्ति के मामले अधिक जटिल हैं। वीरेंद्र एमसीआई चेयरमैन सहित हाई-प्रोफाइल भ्रष्टाचार के मामलों पर प्रकाश डालते हैं, और उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में जनता के विश्वास में गिरावट के बारे में चिंता व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में व्यापक भ्रष्टाचार की धारणा ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी है जहां लोग कानूनी प्रणाली में विश्वास खो रहे हैं और विवाद समाधान के वैकल्पिक साधनों का सहारा ले सकते हैं।


*सूचना आयोग में भ्रष्टाचार उजागर*


चर्चा सूचना आयोग के भीतर भ्रष्टाचार और कदाचार पर केंद्रित है। सिद्धू ने एक मामले के बारे में विवरण साझा किया, जिसमें एक सूचना आयुक्त एक आवेदक को काली सूची से हटाने के लिए रिश्वत मांगने के लिए फंस गया था। शिवानंद ने ब्लैकलिस्टिंग और बाद में रिश्वत की मांग में शामिल कई सूचना आयुक्तों के बीच संभावित संबंधों को उजागर करने के लिए मोबाइल और व्हाट्सएप संदेशों सहित सभी संचार रिकॉर्ड की जांच के महत्व पर जोर दिया। प्रतिभागी इस बात से सहमत हैं कि आयोग के भीतर किसी भी मौजूदा सांठगांठ का पर्दाफाश करने के लिए एक व्यापक जांच आवश्यक है।


*कर्नाटक सूचना आयुक्त भ्रष्टाचार मामले*


चर्चा कर्नाटक में सूचना आयुक्तों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों पर केंद्रित है। वीरेश बताते हैं कि एक वर्तमान सूचना आयुक्त, जो पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लिए एक ठेकेदार थे, को गिरफ्तार किया गया है और भ्रष्टाचार के लिए न्यायिक हिरासत में है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कर्नाटक में सूचना आयुक्तों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण है, बिना उचित आवेदन के कोई स्क्रीनिंग समिति और नियुक्तियां नहीं की गई हैं। राहुल सूचना आयोग में भ्रष्टाचार की सीमा पर आश्चर्य व्यक्त करते हैं और चर्चा करते हैं कि यह अन्य विभागों से कैसे तुलना करता है। समूह पिछले एक मामले के बारे में भी बात करता है जहां एक सूचना आयुक्त को इस्तीफा देने से पहले गिरफ्तार किया गया था और दो महीने तक जेल में रखा गया था।


*कर्नाटक के सूचना आयुक्त गिरफ्तार*


कर्नाटक राज्य सूचना आयुक्त को रिश्वत मांगने और स्वीकार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। वह लोकायुक्त द्वारा एक कंपनी को ब्लैकलिस्ट से हटाने के लिए सीधे फोन पर पैसे की मांग करने के बाद एक जाल में पकड़ा गया था। यह देश में सूचना आयुक्त की इस तरह की पहली घटना है। इस मामले ने सूचना आयुक्तों की प्रतिरक्षा और निगरानी के बारे में सवाल उठाए हैं। हालांकि यह एक अलग घटना है, यह बेहतर जवाबदेही तंत्र की आवश्यकता पर प्रकाश डालती है। गिरफ्तार आयुक्त सेवानिवृत्ति के करीब था और पहले प्रदूषण नियंत्रण में काम कर चुका था। इस घटना ने अन्य सूचना आयुक्तों को एक कड़ा संदेश दिया है कि वे आपराधिक अभियोजन से मुक्त नहीं हैं।


*डिजिटल डेटा संरक्षण अधिनियम के निहितार्थ*


समूह डिजिटल डेटा संरक्षण अधिनियम और आरटीआई कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के लिए इसके निहितार्थों पर चर्चा करता है। शिवानंद और अन्य लोगों ने निराशा व्यक्त की कि जागरूकता बढ़ाने के उनके प्रयासों के बावजूद, जब शुरू में विधेयक का प्रस्ताव किया गया था तो अधिक विरोध नहीं हुआ था। राहुल ने नोट किया कि उन्होंने और एक अन्य सूचना आयुक्त ने उस समय संशोधन पर औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी। प्रतिभागियों ने बहस की कि अब इस मुद्दे पर अचानक अधिक ध्यान क्यों दिया गया है, कुछ सुझाव देते हैं कि यह डेटा संरक्षण बोर्ड के आसन्न गठन के कारण है। वे पत्रकारों पर संभावित प्रभाव पर भी चर्चा करते हैं, जिसमें स्रोतों का खुलासा करने के लिए संभावित बड़े जुर्माना भी शामिल हैं।


*पत्रकारिता पर डीपीडीपी अधिनियम का प्रभाव*


समूह डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम के कार्यान्वयन और लंबित मामलों पर इसके प्रभाव पर चर्चा करता है। राहुल ने स्पष्ट किया कि यह अधिनियम अधिसूचना की तारीख से प्रभावी है और पुराने लंबित मामलों में इसका उल्लेख नहीं किया जाएगा। कार्यान्वयन चरणों में हो रहा है, कुछ प्रावधान पहले से ही प्रभावी हैं। वीरेंद्र कुमार बताते हैं कि केंद्र सरकार के पास डीपीडीपी कार्यान्वयन पर पूरी शक्ति है, जबकि आरटीआई के विपरीत जहां राज्यों के पास कुछ अधिकार हैं। समूह नए अधिनियम के तहत पत्रकारों के लिए संभावित दंड पर भी बहस करता है, जिसमें गंभीर जुर्माना के बारे में चिंता जताई गई है। कर्नाटक के पूर्व सूचना आयुक्त मियांवर ने आरटीआई शिकायतों से निपटने के अनुभव साझा किए और पत्रकारिता पर डीपीडीपी अधिनियम के प्रभाव के बारे में चिंता व्यक्त की।


*लंबित आदेश चर्चा नीचे हड़ताल*


टीम ने एक लंबित आदेश और भविष्य के मामलों पर इसके संभावित प्रभाव पर चर्चा की। वे इस बात पर सहमत हुए कि प्राकृतिक न्याय सिद्धांतों की कमी के कारण आदेश को रद्द किया जाना चाहिए। टीम ने शिकायतकर्ता की उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर अपीलों या शिकायतों को खारिज करने के लिए आरटी अधिनियम में प्रावधानों की कमी पर भी चर्चा की। उन्होंने कानून और नियमों का पालन करने के महत्व पर जोर दिया। टीम ने अपने अधिकारों के लिए लड़ने की आवश्यकता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के महत्व पर भी चर्चा की।


*पुलिस विभाग ने तारीख देने से किया इनकार*


रिंकू ने एफआईआर और चार्जशीट भेजने की तारीख देने से पुलिस विभाग के इनकार पर चिंता जताई। राहुल ने स्पष्ट किया कि आरोप पत्र प्रदान किया जा सकता है, लेकिन इसे भेजने की तारीख की आवश्यकता नहीं है। शिवानंद ने सुझाव दिया कि चार्जशीट भेजने की तारीख बताते हुए एक साधारण पत्र पर्याप्त होना चाहिए। राहुल ने यह भी उल्लेख किया कि पुलिस विभाग कभी-कभी अपने रजिस्टरों में संवेदनशील जानकारी रखता है, जो वे प्रदान करने के लिए बाध्य नहीं हैं। शिवानंद ने सहमति व्यक्त की कि पुलिस विभाग को अतिरिक्त रिकॉर्ड बनाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। टीम ने आवेदन को अदालत में स्थानांतरित करने की संभावना पर भी चर्चा की।


*भ्रष्टाचार और कानूनी मुद्दों पर चर्चा*


बैठक में शिवानंद और रोहित ने भ्रष्टाचार और कानूनी मुद्दों के साथ अपने अनुभवों पर चर्चा की। रोहित ने उच्च न्यायालय में एक मामला लड़ने के अपने व्यक्तिगत अनुभव और कैसे वह भ्रष्टाचार पर काबू पाने में कामयाब रहे। उन्होंने प्रभावी कानूनी प्रतिनिधित्व के लिए मामले से संबंधित व्यक्तिगत अनुभव और भावनाओं के महत्व पर जोर दिया। समूह ने कानूनी सलाह की आवश्यकता और समान अनुभव वाले अन्य लोगों के साथ जुड़े रहने के महत्व पर भी चर्चा की। रोहित ने आगे के संचार के लिए अपना फोन नंबर साझा करने के साथ बातचीत समाप्त की।


*AI-generated content may be inaccurate or misleading. Always check for accuracy.*

Meeting summary for 250th RTI Meet- Judiciary and the Question of Corruption (04/06/2025)

*Meeting summary for 250th RTI Meet- Judiciary and the Question of Corruption (04/06/2025)*


*Quick recap*


बैठक में न्यायपालिका प्रणाली में भ्रष्टाचार पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और त्वरित न्याय के लिए एक मंच बनाने, कॉलेजियम प्रणाली में सुधार और फेसलेस निर्णय प्रणाली को लागू करने जैसे समाधानों का प्रस्ताव दिया। चर्चा में न्यायाधीशों को कदाचार के लिए जवाबदेह ठहराने, कानूनी प्रणाली पर कॉरपोरेट संस्थाओं के प्रभाव और न्यायिक सुधार की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया। बातचीत आगे की कार्रवाई और इन मुद्दों के समाधान के लिए सहयोग के आह्वान के साथ समाप्त हुई, जिसमें केस डायरी प्राप्त करने के लिए आरटीआई अनुरोधों के संभावित उपयोग और विशेषज्ञों से इनपुट के साथ एक कार्य योजना का विकास शामिल है।


*Next steps*


• सुप्रीम कोर्ट टीम: सीजीआई के नए निर्देश के अनुसार सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर जजों की संपत्ति और आय के स्रोतों को सार्वजनिक करें

• सभी प्रतिभागी: न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक जन अभियान शुरू करने के लिए सुझाव और रणनीति तैयार करें जो सत्ता के उच्चतम स्तर तक पहुंच सके

• बार एसोसिएशन: स्थानीय अदालत परिसर में भ्रष्ट न्यायिक प्रथाओं के खिलाफ लिखित शिकायतों के लिए प्रणाली लागू करना

• फोरम फॉर फास्ट जस्टिस: वरिष्ठता, अपील दर, निर्णयों की ताकत, निर्णय विशेषता और प्रशासनिक व्यवहार के आधार पर न्यायाधीशों के मूल्यांकन के लिए वर्गीकरण और वर्गीकरण प्रणाली विकसित करना

• फोरम फॉर फास्ट जस्टिस: न्यायिक भ्रष्टाचार और सुधारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए राज्य स्तरीय सोशल मीडिया उपस्थिति बनाएं

• प्रवीण: अलीगढ़ के वकील सैनी से संपर्क करें ताकि उनके द्वारा दर्ज किए गए भ्रष्टाचार के मामलों के सबूत और दस्तावेज जुटाए जा सकें

• बार एसोसिएशन: भ्रष्टाचार के मुद्दों को संबोधित करने के लिए वकीलों के बीच जिला स्तर पर छोटे व्याख्यान और कार्यक्रम आयोजित करें

• प्रभाकर: न्यायिक बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए छत्तीसगढ़ में जिला स्तर पर आवास, पुस्तकालय और छात्रावासों के निर्माण की प्रक्रिया जारी रखें

• सभी प्रतिभागी: न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को संबोधित करने वाली ऑनलाइन याचिकाओं का मसौदा उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश को प्रस्तुत किया जाएगा

• प्रवीण: न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और न्यायिक सुधारों पर चर्चा जारी रखने के लिए अगले रविवार को एक अनुवर्ती बैठक आयोजित करें

• जलील: अगले सप्ताह की चर्चा में शामिल होने के लिए अन्य संगठन के सदस्यों के साथ बैठक लिंक साझा करें

• वीरेंद्र कुमार टक्कर: अगली बैठक में आरटीआई से संबंधित प्रश्नों पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान करें


*Summary*


*न्यायपालिका में भ्रष्टाचार*


चर्चा न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर केंद्रित है। प्रवीण विषय का परिचय देते हैं और तेजी से न्याय के लिए एक मंच बनाने का सुझाव देते हैं। शिवानंद ने सूचना आयुक्तों और कानूनी विशेषज्ञों सहित कई उल्लेखनीय प्रतिभागियों का परिचय दिया। प्रभाकर सिस्टम के शिकार के रूप में अपने अनुभवों को साझा करने का प्रयास करता है, लेकिन नेटवर्क के मुद्दे उन्हें अपने विचारों को पूरी तरह से व्यक्त करने से रोकते हैं। बातचीत तब निचली अदालतों में लंबित मामलों में स्थानांतरित हो जाती है, जिसमें भारत की न्यायिक प्रणाली में मामलों के बैकलॉग के बारे में आंकड़े साझा किए जाते हैं।


*न्यायिक भ्रष्टाचार और कदाचार पर चर्चा*


45 साल से अधिक के अनुभव के साथ सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के ने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और कदाचार के विभिन्न रूपों पर चर्चा की। उन्होंने न्यायाधीशों द्वारा रिश्वत लेने, यौन दुर्व्यवहार करने और कुछ समुदायों के प्रति पूर्वाग्रह दिखाने के उदाहरणों पर प्रकाश डाला। के ने उन मामलों का भी उल्लेख किया जहां न्यायाधीशों ने आरोपी व्यक्तियों को सरकार से ली गई राहत की वसूली में मदद की। उन्होंने न्यायाधीशों में ईमानदारी और निष्पक्षता के महत्व पर जोर दिया और सोशल मीडिया के माध्यम से लोकप्रियता हासिल करने के लिए कुछ न्यायाधीशों की आलोचना की। के ने न्यायपालिका पर अपने व्यक्तिगत अनुभवों और विचारों को भी साझा किया, जो प्लेटो और लॉर्ड राइट के दर्शन के साथ समानताएं बनाते हैं।


*न्यायिक भ्रष्टाचार पर भगवानजी की अंतर्दृष्टि*


'पीआईएल मैन' के नाम से जाने जाने वाले सेवानिवृत्त न्यायाधीश भगवानजी न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और जनहित याचिकाओं में आरटीआई (सूचना के अधिकार) के उपयोग पर अपने अनुभव और अंतर्दृष्टि साझा करते हैं। वह सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों से जुड़े कई हाई-प्रोफाइल मामलों और जनहित याचिका दायर करते समय सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करते हैं। भगवानजी एक मौलिक अधिकार के रूप में आरटीआई के महत्व और कानूनी कार्यवाही के लिए प्रामाणिक जानकारी प्रदान करने में इसकी भूमिका पर जोर देते हैं, जबकि सूचना आयोग में देरी और रिक्तियों को भी नोट करते हैं जो इसकी प्रभावशीलता में बाधा डालते हैं।


*न्यायाधीशों को जवाबदेह ठहराने में चुनौतियां*


वीरेंद्र कुमार ने कदाचार के लिए न्यायाधीशों को जवाबदेह ठहराने की चुनौतियों पर चर्चा की। वह बताते हैं कि न्यायाधीश संरक्षण अधिनियम न्यायाधीशों को उन्मुक्ति प्रदान करता है, जिससे उन पर मुकदमा चलाना मुश्किल हो जाता है। महाभियोग प्रक्रिया अव्यवहारिक है, जैसा कि भारत के इतिहास में सफल महाभियोगों की कमी से स्पष्ट है। वीरेंद्र कुमार ने न्यायिक नियुक्तियों के लिए कॉलेजियम प्रणाली के साथ मुद्दों पर भी प्रकाश डाला, यह सुझाव देते हुए कि यह भाई-भतीजावाद का केंद्र बन गया है। उनका प्रस्ताव है कि न्यायपालिका में विश्वास बहाल करने के लिए इन मुद्दों के बारे में जनता के बीच अधिक बहस और जागरूकता की आवश्यकता है।


*भारतीय न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से लड़ना*


चर्चा भारतीय न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर केंद्रित है। प्रभाकर ने कॉलेजियम प्रणाली को समाप्त करने और न्याय प्रणाली में सुधार के लिए जिला स्तर पर पुस्तकालयों और छात्रावासों के निर्माण जैसे उपायों को लागू करने का सुझाव दिया। प्रवीण न्यायाधीश नियुक्तियों में पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर देते हैं। अलीगढ़ के एक वकील ने बार एसोसिएशन से निलंबन सहित भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए प्रतिशोध का सामना करने के व्यक्तिगत अनुभव साझा किए। प्रतिभागी स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए एक मजबूत संगठन की आवश्यकता पर सहमत हैं, लेकिन ध्यान दें कि सरकार अक्सर ऐसे प्रयासों का समर्थन नहीं करती है।


*न्यायिक सुधार और कॉर्पोरेट प्रभाव*


बैठक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और न्यायिक सुधार की आवश्यकता पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने कानूनी प्रणाली पर कॉर्पोरेट संस्थाओं के प्रभाव और एक कट्टरपंथी परिवर्तन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने न्याय प्राप्त करने में व्यक्तियों के सामने आने वाली चुनौतियों और इन मुद्दों के समाधान के लिए जागरूकता और कार्रवाई की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। वार्तालाप आगे की कार्रवाई और परिवर्तन लाने के लिए सहयोग के आह्वान के साथ समाप्त हुआ।


*न्यायिक भ्रष्टाचार और समाधानों को संबोधित करना*


चर्चा न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और संभावित समाधानों पर केंद्रित है। देवेंद्र ने न्यायाधीशों, अभियोजकों और अन्य अधिकारियों की संपत्ति और आय का विवरण सार्वजनिक करने का सुझाव दिया। उन्होंने न्यायाधीशों को पदोन्नत करते समय वरिष्ठता, अपील दर और निर्णय की गुणवत्ता जैसे कारकों पर विचार करके कॉलेजियम प्रणाली में सुधार का भी प्रस्ताव किया है। गौरव ने आयकर आकलन के समान फेसलेस जजमेंट सिस्टम को लागू करने की सिफारिश की है। प्रवीण ने एक भ्रष्टाचार विरोधी इकाई बनाने और एक सार्वजनिक आंदोलन में अधिक लोगों को शामिल करने का सुझाव दिया। राज अदालत प्रणाली के निचले स्तर पर भ्रष्टाचार पर प्रकाश डालते हैं, जिसमें वकील और क्लर्क शामिल होते हैं। कुछ प्रतिभागियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने या भ्रष्टाचार के मुद्दों को हल करने के लिए सतर्कता विभाग का उपयोग करने का प्रस्ताव दिया।


*न्यायिक भ्रष्टाचार और आरटीआई अभियान*


बैठक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और आरटीआई (सूचना का अधिकार) अनुरोधों से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। आत्मदीप एक न्यायाधीश से जुड़े भ्रष्टाचार की हालिया घटना पर प्रकाश डालता है और न्यायिक प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर जोर देता है। उन्होंने इन मुद्दों के समाधान के लिए एक जन अभियान शुरू करने के लिए कदम उठाने का सुझाव दिया। समूह आरटीआई अनुरोधों के माध्यम से केस डायरी प्राप्त करने की संभावना पर भी चर्चा करता है, देवेंद्र ने समझाया कि कानूनी प्रावधानों के कारण केस डायरी आमतौर पर सार्वजनिक नहीं की जाती है। शिवानंद ने प्रतिभागियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि अगली बैठक में चर्चा जारी रहेगी, जहां वे विशेषज्ञों से इनपुट के साथ एक कार्य योजना विकसित करेंगे।


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Wednesday, April 2, 2025

दश पुरवा शिव मंदिर में रामचरित मानस पाठ और मानस प्रवचन का आयोजन

विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी शिव मंदिर दशपुरवा में 5 अप्रैल 2025 से प्रारंभ होकर 6 अप्रैल 2025 को राम चरित मानस का पारायण सम्पन्न होने के उपरांत दोपहर 2 बजे से श्री सौरभ कृष्ण जी महाराज के मुखारविंद से रामनवमी के अवसर पर राम कथा की सरिता का प्रवाह होना सुनिश्चित हुआ है अतः आप सभी धर्मानुरागी जनों से सादर निवेदन है कि ज्यादा से ज्यादा उपस्थिति के साथ श्री राम कथा के सुधा सरिता का परमानंद प्राप्त कर जीवन सार्थक बनाए l 5 अप्रैल को शाम 6 बजे से लक्ष्मी एवम् आरती शुक्ला बहनें अपना कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगी जो विशेष रूप से आमंत्रित की गई हैं l आयोजक मंडलों ने सभी श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया है!