Monday, February 10, 2025

Meeting summary - 242nd RTI & Legal Webinar - Recent Orders of SC on Appointment of ICs (02/09/2025)


*Meeting summary for Shivanand Dwivedi - 242nd RTI & Legal Webinar - Recent Orders of SC on Appointment of ICs (02/09/2025)*


*Quick recap*


The team discussed the importance of mindset change, transparency, and accountability in the functioning of the RTI system, with a focus on the role of the government in monitoring and regulating various systems. They also explored the challenges faced in implementing the Right to Information Act, including the need for a roadmap, qualified staff, and clear instructions for the appointment of information commissioners. The conversation ended with discussions on the functioning of the Information Commission, the challenges in handling RTI cases, and the importance of effective communication and timely responses to public concerns.


*Summary*


*Mindset Change, RTI Act, and Accountability*


Amrita discussed the importance of mindset change and the role of the government in monitoring and regulating various systems. She also touched on the financial implications of the RTI Act and the retirement age of 65. Amrita emphasized the need for a roadmap and a blueprint to tackle the backlog of cases. She also highlighted the importance of transparency and accountability in the functioning of the RTI system. Shivanand and Shailesh contributed to the discussion, with Shailesh suggesting the need for a detailed reasoning in certain cases. The conversation ended with a mention of a case scheduled for Tuesday in the Delhi High Court.


*Implementing RTI Act in India Challenges*


The meeting involved discussions about the implementation and challenges of the Right to Information (RTI) Act in India. Shivanand and Rahul expressed frustration with the bureaucratic approach and anti-RTI attitude of some government officials. They highlighted the need for transparency and accountability in government functions. Amrita suggested the use of live streaming to increase transparency, which was agreed upon by the team. Anjali, a former Information Commissioner, emphasized the importance of the RTI Act in promoting transparency and preventing corruption. The team also discussed the need for qualified staff and the importance of speaking orders in the RTI process.


*Roles and Responsibilities of Commissioners*


Anjali led a discussion about the roles and responsibilities of information commissioners and the challenges they face. She highlighted the importance of transparency and accountability in the appointment process, suggesting that the leader of opposition or the single largest party should be involved. Anjali also discussed the need for clear instructions and guidelines for the appointment of commissioners. The conversation also touched on the role of the Supreme Court in guiding the appointment process and the need for a more robust system to ensure compliance with the Right to Information Act. The conversation ended with a discussion on the need for better conduct of election rules and the potential for legal challenges in this area.


*RTI Act Implementation and Compliance*


Bhaskar discussed the directives, policies, and applications of the Right to Information (RTI) Act, emphasizing the importance of proper implementation and compliance. He also mentioned the role of the Central Information Commission and the need for technical soundness in handling RTI applications. Shivanand and Virendrakumar discussed the need for public authorities to register and maintain records, while Amrita highlighted the importance of not misusing the RTI Act and the need for transparency in public authorities' actions. Rahul suggested that genuine cases should not be rejected outright and that penalties should be imposed for misuse. Asis brought up a case of online harassment and the lack of intervention by the commission. The conversation ended with Amrita emphasizing the need for proper documentation and transparency in handling RTI applications.


*Information Commission and RTI Act Challenges*


The meeting involved discussions about the functioning of the Information Commission and the Right to Information Act. The participants, including Shivanand, Rahul, Amrita, and others, discussed the challenges faced in handling RTI cases and the need for efficient mechanisms to address them. They also discussed the role of the Information Commission in handling grievances and the importance of adhering to the guidelines and procedures outlined in the RTI Act. The conversation ended with a discussion on the need for effective communication and the importance of addressing the concerns of the public in a timely manner.


*Legal Proceedings and RTI Cases*


The group discusses various aspects of legal proceedings, particularly related to RTI (Right to Information) cases. They talk about lawyer fees, court procedures, and the challenges in implementing court orders. Virendrakumar explains that high court cases are generally simpler compared to lower courts, and advocates are often very busy. The conversation also touches on life and liberty cases, which require faster responses within 48 hours. Devendra mentions ongoing efforts to comply with a Supreme Court order, while Shivanand emphasizes the importance of healthy discussions and civil movements in addressing issues.


*AI-generated content may be inaccurate or misleading. Always check for accuracy*

Thursday, January 9, 2025

Breaking: रीवा लोकायुक्त के पास लगभग 400 से अधिक लंबित प्रकरण? विवेचकों के 7 स्वीकृत पदों के विरुद्ध मात्र 3 पद भरे शेष 4 खाली// एक केस की विवेचना में लगते हैं कम से कम 6 महीने// वर्षों से लंबित प्रकरणों में नही पेश हो पाए चालान// अब अभियोजन स्वीकृति भी बनी अलग समस्या // अभियोजन स्वीकृति न मिलने से भी बढ़ रही पेंडेंसी// लोकायुक्त कार्यवाहियों के प्रति जनता में बढ़ रहा अविश्वास//

*Breaking: रीवा लोकायुक्त के पास लगभग 400 से अधिक लंबित प्रकरण? विवेचकों के 7 स्वीकृत पदों के विरुद्ध मात्र 3 पद भरे शेष 4 खाली// एक केस की विवेचना में लगते हैं कम से कम 6 महीने// वर्षों से लंबित प्रकरणों में नही पेश हो पाए चालान// अब अभियोजन स्वीकृति भी बनी अलग समस्या // अभियोजन स्वीकृति न मिलने से भी बढ़ रही पेंडेंसी// लोकायुक्त कार्यवाहियों के प्रति जनता में बढ़ रहा अविश्वास//*
दिनांक 09/01/2025 रीवा मप्र।

  रीवा जिले में लोकायुक्त और विशेष पुलिस स्थापना की बढ़ती ट्रैप की कार्यवाहियों के बीच बढ़ रही पेंडेंसी को लेकर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। पिछले कई ऐसे भी मामले देखे गए जहां एक ही लोक सेवक को एक से अधिक बार ट्रैप किया गया जिससे यह सवाल खड़े होने लाजमी हैं की आखिर जब पहली ट्रैप की कार्यवाही हुई तब समय पर चालान पेश होकर अभियोजन स्वीकृति लेकर कार्यवाही क्यों नहीं की गई? आखिर क्यों एक ही लोकसेवक को इतना अधिक समय दिया गया की वह भ्रष्टाचार पर भ्रष्टाचार करता रहा और लोकायुक्त को दुबारा ट्रैप करना पड़ा? 

  सामाजिक और आरटीआई कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने मामले पर सवाल पूछा है की आखिर सरकारें क्यों समय पर अभियोजन स्वीकृति देकर कार्यवाही पूर्ण करने के लिए प्रयास करती? प्रदेश में जिलों और संभागों में विशेष पुलिस स्थापना के खाली पदों को क्यों नहीं भरा जा रहा? सूत्रों से प्राप्त जानकारी को मानें तो इस समय रीवा संभाग में ही अकेले लोकायुक्त के लगभग 400 प्रकरण बताए गए हैं जिनकी विवेचना प्रक्रिया में है। जहां तक सवाल खाली पदों का है तो वर्तमान में तो लोकायुक्त एसपी रीवा का ही पूर्णकालिक पद खाली पड़ा है साथ ही विवेचकों के स्वीकृत 7 पदों के विरुद्ध में मात्र 3 विवेचक ही इस समय रीवा में पदस्थ हैं। ऐसे में जाहिर है मामले लंबित होंगे और कार्यवाहियां करने में भी देरी होगी। 

बताया गया आए दिन लोकायुक्त ट्रैप की कार्यवाहियां तो हो रही हैं लेकिन इसका खौफ भ्रष्ट लोकसेवकों पर दिखाई नहीं दे रहा है। जिसका नतीजा यह है की ट्रैप के बावजूद भी भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है। 

देखिए मामले पर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने क्या कुछ कहा है।

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Tuesday, January 7, 2025

Breaking: ईई आरईएस टीपी गुर्दवान का एक और कारनामा, फर्जी कोटेशन से मनी मोटिवेशन // कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग रीवा में फर्जी निविदा कोटेशन जारी कर अपने खासमखास नेताओं और विधायकों सांसदों के दलालों को किया जा रहा उपकृत // खाली बिना रेट के कोटेशन डालकर कम रेट में अंतिम में भरकर ठेकेदारों से चलती है सांठगांठ // आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी की एक आरटीआई ने फिर किया सांठगांठ का भंडाफोड़ // लम्बे अरसे से चलता रहा है ऑफलाइन फर्जी निविदा कोटेशन का फर्जी खेला // न केवल संभाग क्रमांक 01 बल्कि सभी संभागों में यही प्रैक्टिस बदस्तूर जारी //

*Breaking: ईई आरईएस टीपी गुर्दवान का एक और कारनामा, फर्जी कोटेशन से मनी मोटिवेशन // कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग रीवा में फर्जी निविदा कोटेशन जारी कर अपने खासमखास नेताओं और विधायकों सांसदों के दलालों को किया जा रहा उपकृत // खाली बिना रेट के कोटेशन डालकर कम रेट में अंतिम में भरकर ठेकेदारों से चलती है सांठगांठ // आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी की एक आरटीआई ने फिर किया सांठगांठ का भंडाफोड़ // लम्बे अरसे से चलता रहा है ऑफलाइन फर्जी निविदा कोटेशन का फर्जी खेला // न केवल संभाग क्रमांक 01 बल्कि सभी संभागों में यही प्रैक्टिस बदस्तूर जारी //*

दिनांक 07/01/2025 रीवा मप्र 

   ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग रीवा क्रमांक 01 में पदस्थ कार्यपालन यंत्री श्री टीपी गुर्दवान के द्वारा अपने कार्यकाल के दौरान निविदा प्रक्रिया, कोटेसन आमंत्रण में अपने संपर्क के ख़ास व्यक्तियों को लाभ पहुचाने और निविदा स्वीकृत करने के लिए खाली कोटेसन पत्रक बिना मटेरियल रेट डाले जाने और बाद में डेट परिवर्तित कर उसे सबसे कम रेट का भरे जाने आदि सम्बन्धी षड्यंत्र और भ्रष्टाचार की जाँच किये जाने हेतु कमिश्नर रीवा संभाग एवं जिला सीईओ को शिकायत की गयी है. आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी द्वारा यह शिकायत की गयी है जिसमे जाँच की माग की गयी है. शिकायत में सूचना के अधिकार से प्राप्त महत्वपूर्ण दस्तावेज संलग्न किये गए हैं जिनमे हस्ताक्षरित एवं सील लगाए हुए खाली कोटेशन पाए गए हैं जिससे मामले की पुष्टि होती है. बड़ा सवाल यह है की जब कोटेशन भरकर आवेदन किये जाते हैं तो कोटेशन आवेदनों में खाली कोटेशन कैसे सम्मिलित किये गए? चलिए मान लेते हैं की गलती से कहीं एकात खाली कोटेशन डाल दिए गए तो फिर उन खाली कोटेशन में कार्यपालन यंत्री टीपी गुर्दवान के हस्ताक्षर और सील कैसे है? इसका क्या मतलब समझा जाय? यह सभी प्रश्न निविदा और कोटेशन जारी करने की टेबल के नीचे और ऑफलाइन प्रक्रिया में व्यापक गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की तरफ इशारा करते हैं. कैसे टेबल के नीच अपने ख़ास और चहेतों को विशेष लाभ देने के उद्येश्य से आवेदन तो ले लिए जाते हैं लेकिन आवेदन तिथि के बाद जितने कोटेशन निविदाएँ प्राप्त होती हैं उन प्राप्त वास्तविक आवेदनों से मटेरियल सप्लायर और वेंडर न चुनकर अपने खास व्यक्ति के लिए अलग से रेट सूची वाला कालम भरकर उपकृत किया जाता है. इस मामले में अभी ताजा उदाहरण भी देखने को मिला है जहाँ कुछ खास विधायकों एवं जनपद अध्यक्षों के चेलों को टेबल के नीचे से ऑफलाइन टेंडर प्रक्रिया खोलकर लेनदेन कर टेंडर ऑफर किये गए हैं. इसकी चर्चा भी आरईएस की गलियारों में रही की कौन-कौन ऐसे खास ठेकदार थे जिनको इस विशेष भ्रष्टाचार वाली योजना का लाभ आरईएस विभाग में दिया गया. खैर जहाँ तक टीपी गुर्दवान का सवाल है तो यदि टीपी गुर्दवान के कक्ष में लगाया हुआ सीसीटीवी कैमरा देख लिया जाय तो गुर्दवान सरकारी काम कम कर्ता है अधिकतर इसके इर्दगिर्द और कक्ष में नेताओं जनपद जिला अध्यक्षों, विधायकों और संसद के दलाल ही बैठे मिलेंगे. बड़ा सवाल यह है की आखिर निरंतर इनके कक्ष चलता हुआ चाय पानी और नास्ता किस बाट के लिए है? क्या यह टीपी गुर्दवान का निजी घर है अथवा सरकारी कार्यालय यह भी सवाल के घेरे में है.   

सामाजिक कार्यकर्त्ता शिवानंद द्विवेदी ने आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर जो आरोप लगाये हैं उनके बताया गया है उनमे ई.ई टीपी गुर्दवान ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्रमांक 01 रीवा द्वारा ऐसे कार्यों की सूची भी उपलब्ध कराई गयी है:
 
इन इन कार्यों के बिना रेट सूची डाले ही खाली सत्यापित कोटेशन आरटीआई से मिले: - सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त तकनीकी कार्यों की सामग्री सप्लाई के संलग्न कोटेसन पेज क्रमांक 68 में कार्य का नाम पीसीसी रोड एवं ग्रेवल रोड निर्माण सखिया प्रजापति के घर से बगीचे एवं नदी की तरफ ग्राम पंचायत पटना जनपद पंचायत गंगेव जिला रीवा मप्र, कोटेसन के पेज क्रमांक 75 में कार्य का नाम पीसीसी रोड एवं ग्रेवल रोड निर्माण करारी आदिवासी बस्ती से फूल पहुँच मार्ग तरफ ग्राम पंचायत पटना जनपद पंचायत गंगेव जिला रीवा मप्र, कोटेसन के पेज क्रमांक 87 कार्य का नाम – दो अतिरिक्त कक्ष निर्माण कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल लालगांव ग्राम पंचायत लालगांव उपसंभाग सिरमौर जिला रीवा मप्र, नरोत्तम प्रसाद मिश्रा शिवाजी नगर मैदानी द्वारा प्रस्तुत कोटेसन के पेज क्रमांक 155 में कार्य का नाम – पीसीसी रोड एवं ग्रेवल निर्माण ग्राम लोटनी से कठमना पहुँच मार्ग तरफ ग्राम पंचायत लोटनी जनपद पंचायत गंगेव जिला रीवा मप्र, कोटेसन के पेज क्रमांक 174 में कार्य का नाम – पीसीसी रोड एवं ग्रेवल रोड निर्माण संतोष सिंह के घर से होते हुए देवी मंदिर तरफ ग्राम पंचायत पटना जनपद गंगेव जिला रीवा मप्र में प्रस्तुत बिना दर/रेट के ही सत्यापित किया गया है जिसमे कार्यपालन यंत्री टीपी गुर्दवान के हस्ताक्षर और सील तक मौजूद हैं. बड़ा सवाल यह है की दर वाले कालम में बिना रेट डाले ही कोई कोटेसन कैसे सत्यापित किया जा सकता है? यह पूर्णतया नियम विरुद्ध है क्योंकि कम दर वाले का कोटेसन स्वीकृत किया जाना है और दर न लिखे जाने से पूरी प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण और संदेहास्पद है जिसमे लेनेदेन कर ऐसे ही अंत में जिसे स्वीकृत देना होता है उसकी न्यूनतम रेट को अलग से भर लिया जाता था और निविदा आमंत्रण के बाद ऐसे साठगांठ कर रेट भरे जाते हैं और टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार किया जाकर मनमुताबिक अपने ख़ास व्यक्ति को लाभ पहुचाने हेतु टेंडर/कोटेसन का लाभ दे दिया गया है.
 
शिवानंद द्विवेदी ने इसे अत्यंत गंभीर मामला बताते हुए कमिश्नर रीवा संभाग सहित वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायतें की हैं की आखिर इतने बड़े वरिष्ठ पद पर बैठे हुए तकनीकी अधिकारी जिले के कार्यपालन यंत्री द्वारा यह अवैधानिक कृत्य किया गया है जिस पर कठोर दंडात्मक कार्यवाही किये जाने की माग की गयी है और 420 का प्रकरण भी दर्ज किये जाने की माग की है. 

*कमिश्नर रीवा संभाग ने अधीक्षण यंत्री आरई एस से जांच किये जाने जारी किया पत्र*: - 

मामले की गंभीरता को देखते हुए कमिश्नर रीवा संभाग ने अधीक्षण यंत्री आरईएस को पत्र जारी किया है जिसके बाद अधीक्षण यंत्री ने कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्रमांक 02 एसबी रावत को पत्र लिखा है. लेकिन जिस मामले की जांच पुख्ता और प्रमाणिक आरटीआई से उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर तत्काल हो जानी चाहिए थी उस पर पत्र-पत्र का खेल खेला जा रहा है. ऐसे में क्या यह मान लिया जाय की इस पूरे भ्रष्टाचार में सभी की सहभागिता है? आज जनता यह जानना चाहती है की भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस की अलाप करने वाली यह सरकार आखिर इतने गंभीर भ्रष्टाचार के मामलों पर चुप क्यों है?

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Sunday, January 5, 2025

Meeting summary for 237th RTI & Legal Webinar - Qualifications & Training of PIOs & Appellate Authorities (01/05/2025)

*Meeting summary for 237th RTI & Legal Webinar - Qualifications & Training of PIOs & Appellate Authorities (01/05/2025)*


*Quick recap*

The meeting involved discussions on various legal matters, including the jurisdiction of different courts, the role of the Central Information Commission (CIC) and State Information Commission (SIC), and the responsibilities of Public Information Officers (PIOs). The participants also discussed the importance of transparency, accountability, and proper training for PIOs, as well as the need for regular updates to guidelines and the role of the first appellate authority. The conversation ended with discussions on the importance of annual reports and audits for government departments, the imposition of penalties on PIOs for denying information, and the protection of personal information.

*Next steps*

• Rahul to provide guidance on the WhatsApp message sent by Bharat.

• Virendrakumar to clarify the process for imposing minor penalties without disciplinary proceedings.

• Information Commission to conduct online training sessions for PIOs (Public Information Officers).

• Rahul to share the contradicting judgments from the High Court double bench regarding penalty imposition on PIOs.

• Bharat to be added to the WhatsApp group.

• Participants to discuss 5 cases of RTI misuse in the next meeting.

• Shailesh to organize a seminar or webinar on RTI for Commissioners and PIOs.

• Information Commission to review and potentially update the training curriculum for PIOs.

• Participants to explore ways to improve transparency in the RTI process.

*Summary*

*Legal Matters and Commission Responsibilities*

The meeting involved discussions about various legal matters, including the jurisdiction of different courts, the role of the Supreme Court, and the responsibilities of the Central Information Commission (CIC) and State Information Commission (SIC). There were also discussions about the workload of these commissions and the need for appropriate action and audit for good governance and accountability. The meeting also touched upon the expansion of certain territories and the implications for jurisdiction. However, the transcript was largely incoherent and lacked clear decisions, alignments, next steps, action items, or open questions.

*RTI Application and Public Records*

In the meeting, Bharat raised an issue regarding his RTI application seeking information about the list of officers who have served in the Tehsildar's office since its inception. Despite the First Appellate Authority's order to provide the information, the Tehsildar's office claimed they only have records from 2019 onwards when the new office started. Bharat highlighted that maintaining such records is a public interest matter and should be available. The discussion also touched upon the Delhi High Court's order emphasizing that efforts must be made to collate information from various sources and provide it under the RTI Act, even if it is voluminous or time-consuming. The participants stressed the significance of transparency and the obligation of public authorities to furnish information sought through RTI applications, subject to exceptions.

*RTI Act Interpretation and Training*

The meeting involved a discussion about the interpretation and application of the Right to Information (RTI) Act in India. The participants, including Virendrakumar, Devendra, Asis, Randhir, and others, debated the role of PIOs (Public Information Officers) and the need for transparency in the handling of RTI requests. They also discussed the importance of proper training for PIOs and the need for accountability in the handling of RTI cases. The conversation ended with a discussion on the need for transparency in the training process for PIOs.

*Training and Transparency in Public Info*

Shailesh discussed the importance of training and the need for transparency in the public information system. He emphasized the role of the PIO and the need for proper training to ensure compliance with the RTI Act. Devendra and Virendrakumar also contributed to the discussion, highlighting the importance of proper training and the need for accountability in the public information system. They also discussed the role of the first appellate authority and the need for regular updates to guidelines. The conversation ended with a discussion on the need for online training sessions and the importance of monitoring the public information system.

*Training, Accountability, and Government Departments*

Shailesh discussed the importance of training and dedication in their work, emphasizing the need for sincerity and experience. Rahul suggested compensating PIOs for their job responsibilities. DR. highlighted the need for transparency and accountability in government departments, citing examples of corruption and sexual abuse. Virendrakumar brought up the issue of additional burdens and the need for proper training. The conversation ended with a discussion on the importance of annual reports and audits for government departments.

*RTI Application and PIO's Inaction*

Maurya filed an RTI application seeking information under Section 4 of the RTI Act. The public information officer (PIO) did not provide the requested information. Rahul explains that the Central Information Commission (CIC), as the second appellate authority under Section 19(6), can issue directions to the PIO to provide the information. Additionally, the CIC has the power to impose penalties under Section 20 and recommend disciplinary action against the PIO for denying information without reasonable cause. Rahul advises Maurya to file a second appeal with the CIC against the PIO's inaction.

*RTI Act Penalties and Enforcement*

In the meeting, the discussion focused on imposing penalties on Public Information Officers (PIOs) for denying information under the RTI Act. Rahul emphasized that there are contradictory judgments from the High Court regarding when penalties should be imposed on PIOs - one view is that penalties must be imposed if the PIO is guilty, while the other view allows the appellate authority to decide whether to impose penalties or not. Samsung shared an example where the CIC imposed a penalty of ₹5,500 on a PIO from the Ministry of Defense for willfully denying information with delay. The participants agreed on the importance of speaking orders justifying the decisions taken and strict enforcement of the RTI Act, while also acknowledging that penalties are imposed in limited cases.

*RTI Act Discussion and Enforcement*

In the meeting, the participants discussed various aspects of the Right to Information (RTI) Act. They talked about whether the State Information Commissioner (SIC) can summon district officials or take action against them for non-compliance. The legal grounds for penalizing public information officers (PIOs) under Section 20(1) were discussed. There was a debate on the definition of "personal information" exempt from disclosure under Section 8(1)(j) of the RTI Act, drawing from case laws and dictionary meanings. Some key points were about the SIC's power to seek personal presence or affidavits from PIOs, the recourse to higher authorities like the Chief Information Commissioner or the courts against adverse orders, and the determination of public interest while deciding exemptions.

*Protecting Personal Info and Public Interest*

In the meeting, Devendra and Rahul discussed the misuse of certain information and the need to protect personal information. They also touched upon the concept of public interest and the responsibility of commissioners to protect the good faith of work done in the interest of public welfare. Virendrakumar and Satyendra Singh discussed the imposition of minor penalties and the importance of disciplinary proceedings. Bharat requested to be added to a group on WhatsApp, and the conversation ended with a discussion about the need for guidance and the protection of personal information.

*AI-generated content may be inaccurate or misleading. Always check for accuracy*

Friday, June 21, 2024

Breaking: ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग रीवा के अधीक्षण यंत्री अतुल चतुर्वेदी पर भ्रष्टाचार बढ़ाने का आरोप// अधीक्षण यंत्री कमिश्नर रीवा की फाइलें दबाकर बैठा// एक साल से लगातार कर रहा भ्रष्टाचार का संरक्षण // लाखों की वसूली और कार्यवाही वाली जांचों पर सांप की तरह कुंडली मारकर बैठा अधीक्षण यंत्री अतुल चतुर्वेदी// मढ़ी कला, रायपुर, खारा आदि पंचायतों के जांच प्रतिवेदन पर कुंडली मारकर बैठा ग्रामीण यांत्रिकी सेवा का अधीक्षण यंत्री//

Breaking: ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग रीवा के अधीक्षण यंत्री अतुल चतुर्वेदी पर भ्रष्टाचार बढ़ाने का आरोप// अधीक्षण यंत्री कमिश्नर रीवा की फाइलें दबाकर बैठा// एक साल से लगातार कर रहा भ्रष्टाचार का संरक्षण // लाखों की वसूली और कार्यवाही वाली जांचों पर सांप की तरह कुंडली मारकर बैठा अधीक्षण यंत्री अतुल चतुर्वेदी// मढ़ी कला, रायपुर, खारा आदि पंचायतों के जांच प्रतिवेदन पर कुंडली मारकर बैठा ग्रामीण यांत्रिकी सेवा का अधीक्षण यंत्री//
दिनांक 21 जून 2024 रीवा मप्र।

    ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग रीवा में व्यापक स्तर का भ्रष्टाचार देखने को मिल रहा है. आलम यह हैं की कमिश्नर रीवा संभाग से अधीक्षण यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के नाम पर भेजी गयी जांचों में लगातार लीपापोती की जा रही है. यह कार्य कोई और नहीं बल्कि स्वयं अधीक्षण यंत्री अतुल चतुर्वेदी पर करने के आरोप लग रहे हैं. सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने वर्तमान अधीक्षण यंत्री अतुल चतुर्वेदी पर लगातार भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप लगाया है. मामला बड़ा ही गंभीर है जिसमे शिवानंद द्विवेदी ने बताया की पिछले एक वर्ष से रीवा संभाग में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा में पदस्थ अधीक्षण यंत्री अतुल चतुर्वेदी द्वारा कोटेसन निविदा प्रक्रिया और इसके बाद समय पर कार्य न पूर्ण करने वाली निर्माण एजेंसियों पर जुर्माने और अर्थदंड 10 प्रतिशत तक न लगाकर मात्र एक अथवा 2 प्रतिशत अर्थदंड लगाकर अथवा बिना किसी दंड के शेष लेनदेन कर मामलों को रफा दफा कर दिया जाता है. इसी प्रकार अतुल चतुर्वेदी जिस दिन से रीवा संभाग में पदस्थ हुए हैं कुछ न कुछ मेडिकल बहाना बनाकर कार्यालय से लापता रहते हैं जिससे सभी प्रकार के कार्य प्रभावित रहते हैं. सामान्य पत्रों को भी इधर से उधर करने के लिए कोई प्रभार में नहीं रहता है जिसका नतीजा यह है वर्षीं से जांचें लंबित पड़ी हुई हैं और जिन पंचायतों की जाँच रिपोर्ट आ चुकी है उनको भी यह सब दबाकर बैठे हुए हैं. 

*रायपुर और खारा पंचायत की जाँच पर कुंडली मारकर बैठे अधीक्षण यंत्री* 

  बताया गया की अधीक्षण यंत्री अतुल चतुर्वेदी त्योंथर की रायपुर सहित सिरमौर की खारा पंचायत की जाँच रिपोर्ट सबमिट होने के बाद भी उन पर नाग की तरह कुंडली मारकर बैठे हुए हैं. अब इस कुंडली की क्या वजह है यह तो नहीं पता लेकिन सूत्रों का कहना है की जाँच रिपोर्ट आने के बाद उनमे बारगेनिंग का भी काम अधीक्षण यंत्री कार्यालय में चल रहा है. इस बारगेनिंग में बकायदे बाबुओं को लगा रखा है जिसमे रमा निवास पटेल नमक सहायक ग्रेड 04 का नाम सबसे पहले आता है जिस पर तत्काल कार्यवाही की माग की गई है.

*अधीक्षण यंत्री क्यों कार्यालय से रहते हैं अनुपस्थित?*

 बड़ा सवाल यह है की आखिर अधीक्षण यंत्री अतुल चतुर्वेदी ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग रीवा में कार्यालय से क्यों अनुपस्थित रहते हैं और यदि यह मेडिकल कारणों बस अथवा किन्ही कारणों से छूटी में हैं तो इनके स्थान पर कार्यालय का काम काज कौन देखता है? क्या इतने बड़े संभागीय स्तर पर कार्यालय की निगरानी और सीट संचालन करने वाला कोई नहीं होना चाहिए यह बड़ा सवाल है. जानकारी अनुसार जब भी अधीक्षण यंत्री अतुल चतुर्वेदी कार्यालय में अनुपस्थित रहते हैं तो कार्यालय का काम काज पूरी तरह से ठप्प पडा रहता है और बाबू से लेकर सभी कर्मचारी बेलगाम रहते हैं. 

*अधीक्षण यंत्री कार्यालय में बाबू और कर्मचारी टांग फैलाये आराम फरमाते देखे जा सकते हैं*

  कोई कभी भी अधीक्षण यंत्री कार्यालय संभाग रीवा यदि जाए तो कोई भी कर्मचारी अपनी सीट पर काम करते हुए नहीं मिलेगा. कोई मोबाइल में पिक्चर देखते हुए तो कोई न्यूज़ देखते हुए तो कोई गाना बजाना सुनते हुए तो कोई टांग कुर्सी पर रखे हुए सोते हुए तो कोई जमुहाते हुए तो कोई अपनी सीट पर अनुपस्थित तो कोई कार्यालय के सामने स्थित चाय पान की दूकान में चाय पान करते हुए तो कोई गप्प मारते हुए यही आये दिन रोज की इन बाबुओं और कर्मचारियों की दिनचर्या है. अब बड़ा सवाल यह है की इतने कर्मचारियों से लैस अधीक्षण यंत्री कार्यालय में आखिर इनकी निगरानी और इनके कार्यों की जिम्मेदारी का बटवारा कौन करता है? जाहिर है यदि अधीक्षण यंत्री ही अपनी सीट से वर्षों से लापता हैं तो इन छोटे मोटे कर्मचारियों पर लगाम कौन लगाएगा? कौन इनके कार्यों और जिम्मेदारियों का बटवारा करेगा? 

*अधीक्षण यंत्री अतुल चतुर्वेदी को हटाये जाकर कार्यवाही की माग*

  सामाजिक कार्यकर्त्ता शिवानंद द्विवेदी ने ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग रीवा के वर्तमान अधीक्षण यंत्री अतुल चतुर्वेदी को एक अक्षम और अयोग्य अधिकारी बताते हुए इनकी कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाते हुए इन्हें रीवा संभाग से न केवल हटाये जाने की माग की है बल्कि इनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की भी माग की है. उन्होंने बताया की अतुल चतुर्वेदी के कार्यकाल के दौरान सभी पेंडिंग पड़ी शिकायतों की स्क्रूटिनी होनी चाहिए और इनके द्वारा किये गए टेंडर निविदा कार्यों एवं समय पर कार्य न पूरा करने वाली निर्माण एजेंसियों सहित सभी कार्यों की समीक्षा की जानी चाहिए और यह कार्यालय से कब कब और क्यों अनुपस्थित रहे हैं और इनकी अनुपस्थिति में कौन प्रभार में रहा है और क्यों पेंडिंग पड़े कार्यों आवेदनों और शिकायतों पर कार्यवाही नहीं हुई और इसके लिए कौन कौन जिम्मेदार है सभी को चिन्हित करते हुए अनुशासनात्मक कार्यवाही किया जाना चाहिए. 

*संलग्न* - कृपया संलग्न देखिये अतुल चतुर्वेदी की फोटो एवं ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग रीवा में पेंडिंग पड़ी शिकायतों की सूची.

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*.

Sunday, December 10, 2023

Breaking: विश्व मानवाधिकार दिवस पर आयोजित हुआ राष्ट्रीय वेबीनार// देश के जाने माने संपादक, सूचना आयुक्त और ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट ने कार्यक्रम में लिया हिस्सा// सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी और प्रवीण पटेल ने मिलकर आयोजित किया वेबीनार//

*Breaking: विश्व मानवाधिकार दिवस पर आयोजित हुआ राष्ट्रीय वेबीनार// देश के जाने माने संपादक, सूचना आयुक्त और ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट ने कार्यक्रम में लिया हिस्सा// सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी और प्रवीण पटेल ने मिलकर आयोजित किया वेबीनार//*
दिनांक 10 दिसंबर 2023 रीवा मध्य प्रदेश

   10 दिसंबर विश्व मानवाधिकार दिवस के उपलक्ष पर राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया गया जिसमें देश के जाने-माने पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता, रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों, सूचना आयुक्त और मानवाधिकार संरक्षण से जुड़े हुए एक्टिविस्टों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी एवं फोरम फॉर फास्ट जस्टिस के ट्रस्टी एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रवीण पटेल के द्वारा किया गया।

  कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए नेशनल ह्यूमन राइट्स कमिशन नई दिल्ली के सदस्य और ह्यूमन राइट्स डिफेंडर उड़ीसा से मनोज जेना ने बताया कि वर्ष 2013-14 से लेकर अब तक ह्यूमन राइट्स वायलेशन बढ़ गए हैं और साथ ही ह्यूमन राइट डिफेंडर्स का काम भी प्रभावित हुआ है। कहीं न कहीं इसके लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया में कमी बड़ा कारण देखा जा रहा है। वहीं रिटायर्ड आईएएस अधिकारी जतीस मोहंती ने बताया की समाज में मानवाधिकार का हनन एक आम बात हो गई है जिसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है। 
     
     कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेष गांधी ने भी अपने विचार रखे और कोर्ट में बढ़ते हुए प्रकरण, निरंतर हो रहे मानवाधिकार के हनन और साथ में आरटीआई कानून को कमजोर करने को लेकर चिंता जाहिर की। कार्यक्रम में सोशल एक्टिविस्ट झरना पाठक ने भी अपने विचार रखें और मानवाधिकार को महिला उत्पीड़न से जोड़ते हुए समाज में महिलाओं के प्रति क्रूरता और अत्याचार को लेकर चिंता जाहिर की। अंग्रेजी दैनिक इंडियन एक्सप्रेस रायपुर से सहायक संपादक एजाज कैसर ने भी पत्रकारिता के माध्यम से अपने अनुभवों को साझा किया और बताया कि जब भी ऐसे मामले उनके संज्ञान में आए हैं उन्होंने पूरी जिम्मेदारी और तरीके से समाज के सामने रखा है। फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन और फ्रीडम ऑफ स्पीच सहित पत्रकारिता के क्षेत्र में बढ़ती दखलंदाजी को लेकर चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने कहा की स्वयं पत्रकारों का भी मानवाधिकार का हनन किया जा रहा है इसके कई उदाहरण उपलब्ध हैं। 

  कार्यक्रम में फोरम फॉर फास्ट जस्टिस के संयोजक सामाजिक कार्यकर्ता प्रवीण पटेल ने भी अपने विचार रखें और अपने अनुभवों को विस्तार से साझा किया और बताया की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में कमी की वजह से आज मानवाधिकार हनन से जुड़े हुए मुद्दों को उठाने वाले ह्यूमन राइट्स डिफेंडर्स और मानवाधिकार संरक्षण के लिए कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं को स्वयं भी खतरा उत्पन्न हो गया है। कार्यक्रम में कई पार्टिसिपेंट्स और अन्य लोगों ने भी अपने विचार साझा किए और ह्यूमन राइट्स वायलेशन से संबंधित प्रश्न रखें।
*संलग्न* - कृपया संलग्न कार्यक्रम से संबंधित जुड़ी हुई तस्वीरें प्राप्त करें।

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Saturday, December 9, 2023

Breaking: न्यायालयीन प्रकरणों में जवाब फाइल नहीं करवा रहे CEO जिला पंचायत रीवा // हाई कोर्ट के दर्जनों प्रकरणों में जवाब नही किए जा रहे फाइल// जानबूझकर अधिकारियों के द्वारा जवाब फाइल न होने से दोषियों को मिल रहा स्थगन का लाभ // हाईकोर्ट में दर्जनों ऐसे मामले जहां समय पर जवाब फाइल न किए जाने से प्रतिवादी को मिल रहा फायदा // हालिया मामला सेदहा ग्राम पंचायत की सीईओ द्वारा जारी 27 लाख रुपए की वसूली नोटिस का है जहां पर सचिव सरपंच ने सीईओ जिला पंचायत की नोटिस के विरुद्ध दायर की रिट याचिका//

*Breaking: न्यायालयीन प्रकरणों में जवाब फाइल नहीं करवा रहे CEO जिला पंचायत रीवा // हाई कोर्ट के दर्जनों प्रकरणों में जवाब नही किए जा रहे फाइल// जानबूझकर अधिकारियों के द्वारा जवाब फाइल न होने से दोषियों को मिल रहा स्थगन का लाभ // हाईकोर्ट में दर्जनों ऐसे मामले जहां समय पर जवाब फाइल न किए जाने से प्रतिवादी को मिल रहा फायदा // हालिया मामला सेदहा ग्राम पंचायत की सीईओ द्वारा जारी 27 लाख रुपए की वसूली नोटिस का है जहां पर सचिव सरपंच ने सीईओ जिला पंचायत की नोटिस के विरुद्ध दायर की रिट याचिका//*

दिनांक 10 दिसंबर 2023 रीवा मप्र।

  हाई कोर्ट में लंबित दर्जनों मामलों में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा संजय सौरभ सोनवडे समय पर जवाब प्रस्तुत नहीं करवा पा रहे हैं जिसकी वजह से भ्रष्टाचारियों को कोर्ट से स्थगन का लाभ मिल रहा है। ग्राम पंचायत सेदहा जनपद पंचायत गंगेव की चौरी, सेदहा और बांस सहित ऐसी दर्जनों पंचायतें हैं जहां ऐसे दर्जनों मामले हाई कोर्ट जबलपुर में पेंडिंग पड़े हुए हैं जहां जानबूझकर समय पर जवाब प्रस्तुत नहीं करवा पाने के कारण पंचायत के भ्रष्टाचार में दोषी पाए गए सरपंच सचिव और इंजीनियर को स्थगन का लाभ मिल रहा है।
 *सेदहा पंचायत में सरपंच सचिव द्वारा अब तक दायर की जा चुकी हैं 6 रिट याचिका*

  गौरतलब है की सेदहा पंचायत के तत्कालीन सरपंच पवन कुमार पटेल एवं सचिव दिलीप कुमार गुप्ता के द्वारा हाई कोर्ट जबलपुर में अब तक कुल 6 रिट याचिका दायर की जा चुकी है जिसमे मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा के द्वारा या की कोई जवाब ही प्रस्तुत नहीं किए गए अथवा आधे अधूरे जवाब प्रस्तुत किए गए हैं जिसकी वजह से हाई कोर्ट के स्थगन आदेश को निरस्त नहीं किया जा सका है।
    इस प्रकार के मामलों में स्थगन देते समय हाईकोर्ट के द्वारा चार सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जाते हैं लेकिन मामला सालों साल चलता रहता है जिससे भ्रष्टाचारियों के मनोबल बढ़े हुए हैं।
  *सरपंच पवन कुमार पटेल और सचिव दिलीप कुमार गुप्ता की छठवीं रिट याचिका 28852/2023*

  अभी हाल ही में अक्टूबर नंबर 2023 के दौरान सेदहा पंचायत के तत्कालीन सरपंच पवन कुमार पटेल एवं सचिव दिलीप कुमार गुप्ता को सीईओ जिला पंचायत की 27 लाख रुपए के वसूली मामले में दोषी पाया गया था उसी को लेकर इनके द्वारा हाईकोर्ट जबलपुर में रिट याचिका क्रमांक 28852 वर्ष 2023 दायर की गई है जिस पर सुनवाई जस्टिस श्री संजय कुमार द्विवेदी की सिंगल बेंच में चल रही है जिसमें अगली सुनवाई की तारीख 12 दिसंबर 2023 लगाई गई है।
     सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के द्वारा बताया गया कि उन्होंने इस बाबत मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा संजय सौरभ सोनवडे से व्यक्तिगत मिलकर और संदेशों के माध्यम से कई बार मामले पर कैविएट लगाने अथवा जवाब प्रस्तुत करने के लिए आग्रह किया गया लेकिन अब तक सीईओ जिला पंचायत के द्वारा किसी भी प्रकार से मामले में रुचि नहीं दिखाई गई है। जिससे साफ जाहिर है की अधिकारी स्वयं चाहते हैं की दोषी व्यक्ति को आसानी से स्थगन का लाभ मिल जाए और बाद में मामले में उल्टा सीधा जवाब लगाकर रफा दफा करवा दिया जाय।
  *वसूली नोटिस के बाद दोषी पाते हैं हाईकोर्ट में पनाहगाह*

  सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने ऐसे कई मामलों को हाईकोर्ट स्तर पर डिफेंड किया है जिसमें उनके द्वारा बताया गया कि कई मामलों में तो वह स्वयं भी अपने वकीलों के माध्यम से जवाब लगवाते हैं और कैविएट भी दायर करते हैं लेकिन वास्तव में होता यह है की ऐसे कार्य शासन स्तर के हैं जहां हाईकोर्ट के ऐसे मामलों पर शासन को समयबद्ध तरीके से या की कैविएट लगानी होती है या कि समय पर जल्द ही जवाब फाइल करना होता है लेकिन जिस प्रकार से पंचायत विभाग के मामलों में देखा जा रहा है की मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत एवं जनपद पंचायत सहित ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन यांत्रियों के द्वारा जवाब लगाने में कोई रुचि नहीं ली जा रही है इससे वसूली और कार्यवाही के दोषी पाए गए सरपंच सचिव और इंजीनियरों के मनोबल बढ़े हुए हैं और हाईकोर्ट उनके लिए पनाहगाह बन चुका है जहां किसी भी प्रकार के अपराधिक मामलों पर वह जाकर आसानी से स्थगन प्राप्त कर रहे देखे जा रहे हैं।
  *यदि कैविएट लगाई जाए और समय पर जवाब प्रस्तुत किया जाए तो न मिले स्थगन का लाभ*

   मामलों पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने बताया कि अमूमन प्रशासनिक स्तर से कार्यवाही से छटपटाए हुए दोषी कर्मचारी अधिकारी हाईकोर्ट में स्थगन के लिए चले जाते हैं और वहां उन्हें आसानी से स्थगन मिल जाता है। स्थगन मिलने के बाद शासन स्तर से समय पर जवाब प्रस्तुत नहीं किया जाता इसलिए ऐसे मामले सालों साल चलते रहते हैं। रीवा जिले के बर्खास्त सहायक यंत्री अमूल्य खरे और उपयंत्री आरिफ मुस्तफा जैसे कई उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि इनके मामले एक दशक से हाईकोर्ट जबलपुर में पेंडिंग पड़े हुए हैं जहां पर स्थगन को वेकेट करने के लिए शासन स्तर से कोई प्रयास नहीं किए गए और न ही समय पर जवाब ही प्रस्तुत किया गया जिसकी वजह से बर्खास्त सहायक और उपयंत्री भी और अधिक भ्रष्टाचार बढ़ाते हुए पंचायतों में डटे हुए हैं।
  अब यदि ऐसे में शासन स्तर से या की कैविएट लगा दी जाए या की समय पर जवाब प्रस्तुत कर दिया जाए और स्थगन वैकेट करने के लिए हाईकोर्ट से आग्रह किया जाए तो ऐसे मामलों को डिफेंड किया जा कर जल्दी कार्यवाही करवाई जा सकती है। लेकिन बड़ा सवाल यह है बड़े प्रशासनिक अधिकारियों के ही संरक्षण में पल बढ़ रहे भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए ही प्रशासन स्वयं रुचि नहीं लेता जिसकी वजह से चाहे वह हाईकोर्ट हो अथवा किसी भी प्रकार का अन्य न्यायालय ऐसे दोषियों के लिए पनाहगाह साबित हो रहा है।

*संलग्न* - जनपद पंचायत गंगेव ग्राम पंचायत सेदहा के तत्कालीन सरपंच पवन कुमार पटेल एवं सचिव दिलीप कुमार गुप्ता के द्वारा हाईकोर्ट जबलपुर में जिला रीवा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संजय सौरव सोनवडे के 27 लाख रुपए के वसूली आदेश के विरुद्ध लगाए गए याचिका और उससे संबंधित अन्य दस्तावेज एवं अन्य फोटो वीडियो आदि संलग्न।

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*