Sunday, May 14, 2023

Breaking: देखिए कैसे रिटायर्ड चीफ इंजीनियर ने हांथ में नक्शा बनाकर जल संसाधन विभाग के काले कारनामों का कैसे खोला काला चिट्ठा // मामला है मऊगंज तहसील के बहुचर्चित बेलहा बांध का जहां कमीशनखोर अधिकारी, भ्रष्ट ठेकेदार और नेताओं ने मिलकर राशि का किया बड़ा बंदरबांट // बांध में नहीं बनाई लोंगिट्यूडनल और क्रॉस ड्रेन भी // चौंकिए नहीं क्योंकि जल संसाधन विभाग के कारनामों का अभी तो यह ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है//

*Breaking: देखिए कैसे रिटायर्ड चीफ इंजीनियर ने हांथ में नक्शा बनाकर जल संसाधन विभाग के काले कारनामों का कैसे खोला काला चिट्ठा // मामला है मऊगंज तहसील के बहुचर्चित बेलहा बांध का जहां कमीशनखोर अधिकारी, भ्रष्ट ठेकेदार और नेताओं ने मिलकर राशि का किया बड़ा बंदरबांट // बांध में नहीं बनाई लोंगिट्यूडनल और क्रॉस ड्रेन भी // चौंकिए नहीं क्योंकि जल संसाधन विभाग के कारनामों का अभी तो यह ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है//*
दिनांक 14 मई 2023 रीवा मध्य प्रदेश।

  किसानों की सिंचाई के लिए बनाए गए बांध और नहरों में किस कदर जम कर भ्रष्टाचार किया गया और कैसे कागजों पर बांधों से नहरों में पानी सप्लाई दिखाया जाकर सरकारी खजाने में चूना लगाया गया यह सब आप पिछले कुछ समय से चलाए जा रहे इस एपिसोड में देखते आ रहे हैं। हमने आपको मऊगंज तहसील में बेलहा डैम में किए गए भ्रष्टाचार को लेकर विस्तार से बताया है। आज हम इस कड़ी में आपको आगे जल संसाधन विभाग के भ्रष्ट इंजीनियरों और कमीशनखोर अधिकारियों के कुछ और भी कारनामे दिखाने जा रहे हैं। यहां पर आप इस वीडियो में स्पष्ट तौर पर देख सकते हैं कि किस प्रकार से जल संसाधन विभाग के रिटायर्ड चीफ इंजीनियर शेर बहादुर सिंह परिहार ने बेलहा बांध में सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के साथ पहुंचकर मौके पर स्थिति का कैसे जायजा लिया और फिर पूरी गड़बड़ी को बिना कागज के ही अपने हाथ में पेन से कैसे नक्शा बनाकर समझा दिया जिससे न केवल विभाग का पूरा काला चिट्ठा भी खुल गया बल्कि आम जनता को भी पूरी सचाई दिख गई। यहां पर आप इन वीडियो में अभी देख सकते हैं कि चीफ इंजीनियर बांध के नीचे घूम कर कैसे स्पष्ट तौर पर बता रहे हैं कि पानी की निकासी के लिए बनाए जाने वाले लोंगिट्यूडनल ड्रेन एवं क्रॉस ड्रेन नहीं बनाए गए और यदि कहीं बनाए भी गए थे तो रखरखाव की कमी की वजह से नष्ट हो चुके हैं और कैसे पूरे बांध के भीटे का क्षरण हो रहा है और किस प्रकार से बांध को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। कंपेक्सन न होना भी बांध टूटने का एक बड़ा कारण बनाकर सामने आ चुका है। 
 *चीफ इंजीनियर ने जब हांथ पर ही बना डाली ड्राइंग और खोल दिया विभाग का काला चिट्ठा*

  चीफ इंजीनियर श्री परिहार ने हांथ पर ही ड्राइंग बनाते हुए दिखाया कि किस प्रकार कॉलर ज्वाइंट में जूट की बोरी भरी जा रही हैं पाइप के ज्वाइंट में भी जूट की बोरी भरी जा रही हैं और साथ में टूटे हुए बांध पर बिना बेंचिंग किए हुए एक साथ कैसे पूरे कटाव के बीच में ही स्लूस सौर पाइप बैठाकर मिट्टी डाल दी जाएगी जिसकी वजह से कॉम्पेक्शन न होने और मिट्टी न बैठने की वजह से वापस कटाव होने के बाद बांध की दीवारों को नुकसान पहुंचेगा। रिटायर्ड चीफ इंजीनियर परिहार ने इस पूरे मामले को बहुत ही बढ़िया ढंग से अपने हाथ में डायग्राम बनाकर समझाया….
  अभी तो आप ताज्जुब कर रहे होंगे कि जब एक रिटायर्ड चीफ इंजीनियर भीषण गर्मी और इस कड़ी धूप में जाकर इतनी मेहनत से बांध निर्माण से संबंधित बारीकियों को बता सकता है तो फिर जनता के टैक्स पर पलने वाले एयर कंडीशनर में बैठे हुए यह इंजीनियर और अधिकारी आखिर मौके पर जाकर महत्वपूर्ण कार्यों का जायजा क्यों नहीं लेते और निगरानी क्यों नहीं करते? 
     जाहिर है यह सब कमीशन के पैसे का कमाल है। कमीशन के पैसे से भ्रष्ट अधिकारियों की आंखों में इस प्रकार पट्टी और कान में रुई भर जाती है जिसकी वजह से इन्हें न कुछ सुनाई देता और न भ्रष्टाचार दिखाई देता है और उसी का परिणाम है कि आज भ्रष्टाचार प्रशासन के नस नस में फलता फूलता दिख रहा है और जिम्मेदार गांधारी और धृतराष्ट्र बने बैठे हैं। 
  आइए अब आगे देखते हैं रिटायर्ड चीफ इंजीनियर ने शिवानंद द्विवेदी से इसके विषय में और आगे क्या क्या कहा…
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Friday, May 12, 2023

Breaking: जल संसाधन विभाग ने बेलहा बांध को बनाया कूड़ादान// भ्रष्टों ने डैम खुदाई का गार्बेज डाल दिया बांध के अंदर// इंजीनियरिंग का इतना घटिया नमूना देख सभी हैरान// मरे जमीर के इंजीनियरों ने रीवा के किसानों की डुबो दी लोटिया// आय दुगुनी तो दूर किसान मामा और मोदी से पूंजी लौटाने की लगा रहा गुहार//

*Breaking: जल संसाधन विभाग ने बेलहा बांध को बनाया कूड़ादान// भ्रष्टों ने डैम खुदाई का गार्बेज डाल दिया बांध के अंदर// इंजीनियरिंग का इतना घटिया नमूना देख सभी हैरान// मरे जमीर के इंजीनियरों ने रीवा के किसानों की डुबो दी लोटिया// आय दुगुनी तो दूर किसान मामा और मोदी से पूंजी लौटाने की लगा रहा गुहार//*
दिनांक 13 मई 2023 रीवा मप्र।

  पिछले कुछ एपिसोड में आपको रीवा जिले के मऊगंज तहसील में जल संसाधन विभाग के भ्रष्ट इंजीनियरों की मिलीभगत से बनवाए जा रहे बांधों के विषय में लाइव वीडियो दिखाए जा रहे हैं। उसी सिलसिले में इस बार आपको हम बेलहा डैम के अंदर एक हैरतअंगेज कारनामे के विषय में भी आज अवगत कराएंगे।  

 *मऊगंज के बेलहा डैम को बना दिया कूड़ादान, डैम खुदाई का पूरा गार्बेज मटेरियल डाल रहे बेलहा डैम में*

  जल संसाधन विभाग के रिटायर्ड चीफ इंजीनियर शेर बहादुर सिंह परिहार और एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी बेलहा डैम की फ्लॉप स्टोरी और बर्बादी की दास्तान पर जब रिसर्च किए तो उसमें जल संसाधन विभाग के कमीशनखोर अधिकारियों भ्रष्ट ठेकेदारों और नेताओं की जुगलबंदी की एक-एक कर परत खुलने लगी। आप आज इस एपिसोड में कुछ ऐसे वीडियो देख रहे होंगे जिसमें डैम के अंदर खुदाई का पूरा गार्बेज मटेरियल डैम के अंदर ही भर दिया गया है। अब आप सोचिए कि यह कहां की इंजीनियरिंग है कि जिस बांध की खुदाई हो रही है उसके गार्बेज मटेरियल को उसी बांध के भीतर भर दिया जाए। जाहिर है पानी निकासी के लिए बनाए जा रहे पाइप सिस्टम में जब यह गार्बेज मटेरियल पानी के दबाव में सप्लाई लाइन से टकराएगा तो यह पूरे वाटर सप्लाई सिस्टम को बंद कर देगा जिसकी वजह से पूरा कंस्ट्रक्शन वर्क बर्बाद हो जाएगा। सवाल यह है इस कार्य की मॉनिटरिंग करने के लिए जल संसाधन विभाग के उपयंत्री और एसडीओ निगरानी करते हैं और इनकी देखरेख में काम किया जाता है लेकिन जैसा कि यहां पर यह बहुत अच्छी तरह से देखा जा सकता है कि मौके पर न तो कोई जल संसाधन विभाग का इंजीनियर मौजूद था और न ही कोई ऐसे अधिकारी जो यह बताएं कि काम किस प्रकार से किया जाना है। काम के दौरान ठेकेदार के व्यक्ति भी मौजूद नहीं थे और मात्र कुछ लेवर थे जिनके हवाले सिंचाई परियोजना से संबंधित इतने महत्वपूर्ण काम को छोड़ दिया गया था। चीफ इंजीनियर शेर बहादुर सिंह परिहार ने मौके पर पानी सप्लाई के पाइप लाइन की साइड वॉल को लेकर भी प्रश्न खड़े किए और जिस प्रकार उसकी विंग वाल नहीं बनाई गई है इससे पानी के दबाव में क्षतिग्रस्त होने की संभावना है। मौके पर कुछ ऐसा भी मटेरियल देखने को मिला जो पूरी तरह से गुणवत्ताविहीन था जिसको लेकर सवाल खड़े किए गए। मटेरियल को हाथ में उठाते हुए चीफ इंजीनियर ने कहा कि ऐसे ही मटेरियल लगाने का परिणाम है कि आज बांध टूट गए हैं और उनसे बूंदों में सिंचाई का पानी किसानों को नहीं मिल रहा है।
   इस प्रकार आप इस एपिसोड में दिखाए गए वीडियो के माध्यम से समझ सकते हैं कि सिंचाई परियोजना से संबंधित नहरों और बांधों के इतने महत्वपूर्ण काम को किस प्रकार भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से पलीता लगाया जा रहा हैं और कैसे बाणसागर परियोजना, त्यौंथर बहाव और 1600 करोड़ की नईगढ़ी माइक्रो इरिगेशन कि अरबों खरबों की सिंचाई परियोजनाओं के बावजूद भी किसानों को क्यों बूंदों में पानी नहीं मिल पा रहा है?
   
    आप बने रहिए हमारे इस विशेष नहरों और बांधों से संबंधित सीरीज में क्योंकि हम आपको रोज लाते रहेंगे जल संसाधन विभाग के नए कारनामे जो आपको विशेषज्ञों की तकनीकी राय के साथ अब तक किसी ने नहीं दिखाया होगा….

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Thursday, May 11, 2023

Breaking: रिटायर्ड चीफ इंजीनियर ने देखिए कैसे बताई बांध निर्माण में कमियां // बेलहा बांध कैसे बना दलाली का अड्डा// कैसे दलालों ने किसानों की सिंचाई के लिए बनाए गए बांध को मिल बांटकर खाया // स्लुश के काम में अमानक मैटेरियल का हुआ उपयोग// तकनीकी दृष्टि से कॉलर ज्वाइंट वाटर क्यूरिंग पैकेट डेवलप होना जैसे बताएं कारण//

*Breaking: रिटायर्ड चीफ इंजीनियर ने देखिए कैसे बताई बांध निर्माण में कमियां // बेलहा बांध कैसे बना दलाली का अड्डा// कैसे दलालों ने किसानों की सिंचाई के लिए बनाए गए बांध को मिल बांटकर खाया // स्लुश के काम में अमानक मैटेरियल का हुआ उपयोग// तकनीकी दृष्टि से कॉलर ज्वाइंट वाटर क्यूरिंग पैकेट डेवलप होना जैसे बताएं कारण //*
दिनांक 12 मई 2023 रीवा मध्य प्रदेश।

  पिछले कुछ दिनों से हम आपको मऊगंज तहसील में बनाए गए सिंचाई के बड़े बांधों को लेकर उसकी घटिया इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन के विषय में विस्तार से बता रहे हैं। इस बात को लेकर एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी जल संसाधन विभाग के रिटायर्ड चीफ इंजीनियर शेर बहादुर सिंह परिहार एवं अन्य तकनीकी अधिकारियों के साथ मौका मुआयना किया एवं ढेर सारी कमियां सामने आईं। अमूमन सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में जल संसाधन विभाग द्वारा कराए जा रहे कार्यों का जायजा लेने न तो मीडिया पहुंच पाता है और न ही गांव वाले उतना ध्यान दे पाते हैं जिसकी वजह से कमीशनखोर अधिकारियों भ्रष्ट नेताओं और ठेकेदारों की मिलीभगत से बंदरबांट चलता रहता है।

  लेकिन इन कार्यों को ध्यान से देखा जाए वो स्पष्ट तौर पर कमियां नजर आती हैं। और यदि कोई तकनीकी वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचकर इनका जायजा लेता है तो कमियों को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है। आज इस कड़ी में हम आपको रिटायर्ड  चीफ इंजीनियर बाणसागर परियोजना एवं जल संसाधन विभाग शेर बहादुर सिंह परिहार के द्वारा वाटर सप्लाई के लिए डाली गई पाइप और उसके कंस्ट्रक्शन के विषय में बताएंगे। आप देख सकते हैं कि किस प्रकार रिटायर्ड चीफ इंजीनियर ने स्लूश कंस्ट्रक्शन एवं वाटर सप्लाई के लिए टूटे हुए बांध के हिस्से में किए जा रहे कंस्ट्रक्शन की कमियों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि मटेरियल क्वालिटी सही नहीं है और कॉलर जॉइंट सही नहीं किया गया है। जिसकी वजह से वाटर सीपेज की वजह से पानी बाहर निकल जाएगा। उन्होंने बताया की पाइप ज्वाइंट में जूट की बोरी का जो इस्तेमाल किया गया है वह तकनीकी दृष्टि से उचित नहीं है और पानी लीकेज होकर बांध को पुनः तोड़ देगा। चीफ इंजीनियर ने बताया की जो बेल का कंस्ट्रक्शन हो रहा है उसमें डेट नहीं डाली हुई है जिसकी वजह से किस लेयर की क्यूरिंग कितने समय तक की जानी है यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि सामान्य तौर पर क्यूरिंग अर्थात कंक्रीट को गीला रखने का कार्य कम से कम 21 दिन तक किया जाना चाहिए ताकि कंक्रीट के कार्य में मजबूती आए लेकिन यहां पर ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला। विशेषज्ञों की माने तो टूटे हुए बांध की दोनों दीवारों में जो गड्ढे अर्थात पॉकेट बने हुए हैं वह क्यूरिंग न होने से और सीपेज की वजह से हुए हैं। मिट्टी डालते समय और बांध की दीवाल बनाते समय पर्याप्त कॉम्पेक्शन न होने सिंचाई कर रोलर से न बैठाए जाने की वजह से भी ऐसी स्थिति निर्मित हुई है जिसमें अंदर होल और गड्ढे हो गए। इस प्रकार आप देख सकते हैं की किस प्रकार रिटायर्ड चीफ इंजीनियर ने अपने ही विभाग के काले कारनामों की एक-एक करके बखिया उधेड़ दी और बैठे बिठाए बताया कि कैसे जल संसाधन विभाग मात्र कमीशनखोर और भ्रष्टाचारी अधिकारियों ठेकेदारों और भ्रष्ट नेताओं की जुगलबंदी का अड्डा बन चुका है। 
  आप नजर बैठा कर रखें क्योंकि यह तो ट्रेलर है अभी पिक्चर बाक़ी है। जल्द ही हम आपके सामने और पिक्चर लेकर आएंगे।

  देखिए मामले को लेकर चीफ इंजीनियर ने मौके पर उपस्थित होकर कैसे टूटे हुए बांध के एक-एक भाग को विस्तार से बताया….

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Breaking: पानी के बड़े बांधों को खा गए जल संसाधन के भ्रष्ट कमीशनखोर अधिकारी // शिवानंद द्विवेदी का बड़ा सवाल मामा और मोदी कैसे करेंगे किसानों की आय दुगुनी // टूटी फूटी और गुणवत्ताविहीन नहरों में बूंदों में नहीं पहुंच रहा पानी // चीफ इंजीनियर और पेंशन समाज के अध्यक्ष ने बताया बांध निर्माण में व्यापक भ्रष्ट्राचार // जल संसाधन विभाग के इंजीनियर और ठेकेदारों ने मिलकर मऊगंज के बांधों को किया तबाह // सत्ताधारी पार्टी के नेता विधायकों की निगरानी में परवान चढ़ रहा भ्रष्टाचार//

*Breaking: पानी के बड़े बांधों को खा गए जल संसाधन के भ्रष्ट कमीशनखोर अधिकारी // शिवानंद द्विवेदी का बड़ा सवाल मामा और मोदी कैसे करेंगे किसानों की आय दुगुनी // टूटी फूटी और गुणवत्ताविहीन नहरों में बूंदों में नहीं पहुंच रहा पानी // चीफ इंजीनियर और पेंशन समाज के अध्यक्ष ने बताया बांध निर्माण में व्यापक भ्रष्ट्राचार // जल संसाधन विभाग के इंजीनियर और ठेकेदारों ने मिलकर मऊगंज के बांधों को किया तबाह // सत्ताधारी पार्टी के नेता विधायकों की निगरानी में परवान चढ़ रहा भ्रष्टाचार//*
दिनांक 11 मई 2023 रीवा मध्य प्रदेश।

  जल संसाधन विभाग के कमीशन खोर और भ्रष्ट अधिकारियों की मेहरबानी से ठेकेदार मिलकर किसानों की सिंचाई के लिए बनाए जा रहे बांधों को भ्रष्टाचार की बलि दे रहे हैं। ताजा मामला है मऊगंज का जहां बेलहा बांध में पिछले 4 वर्ष से किसानों की कितनी दुर्दशा हुई है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब मौके पर एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी जल संसाधन विभाग बाणसागर परियोजना के सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर शेर बहादुर सिंह परिहार एवं भारतीय पेंशनर समाज के अध्यक्ष डॉ मंगलेश्वर सिंह के साथ जायजा लेने पहुंचे तो उपस्थित लोगों ने बताया कि 4 वर्ष से पानी की बूंद किसानों के खेत में नहीं पहुंची है। 4 वर्षों से टूटा हुआ बेलहा बांध तो एक बड़ा कारण है ही साथ में टूटी-फूटी और गुणवत्ताविहीन नहरें भी एक बड़ा कारण बताया गया। एक तरफ जहां मामा शिवराज सिंह चौहान और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी किसानों की आय दुगनी/चौगुनी करने की बातें करते हैं और रीवा की धरती पर आकर किसानों की उपज कई गुना बढ़ने के दावे करते हैं वहीं दूसरी तरफ इन सारे दावों की हकीकत की पोल तब खुल जाती है जब बेलहा जैसे बांधों में वर्षों से बूंदों में पानी नहीं है और टूटे बांध को सुधार कार्य के टेंडर भी बनाए गए और टेंडर में विधायक नेताओं के कमीशन के चक्कर में नेता भ्रष्ट अधिकारी और ठेकेदार मिलकर अब चूना लगा रहे। 
  *जल संसाधन विभाग गंगा कछार रीवा में नहीं है कोई परमानेंट चीफ इंजीनियर*

  गौरतलब है कि रीवा जिले में कोई भी चीफ इंजीनियर परमानेंट पोस्ट पर उपलब्ध नहीं है। रिटायर्ड अधीक्षण अभियंता गंगा कछार सीएम त्रिपाठी एक अक्षम अधिकारी होते हुए भी संविदा में नेताओं से जुगाड़ कर 1 वर्ष से अधिक संविदा चीफ इंजीनियर के पद पर पदस्थ रहे और उनके कार्यकाल में रीवा जिले में नहर परियोजनाओं में जमकर भ्रष्टाचार हुआ। सामान्य तौर पर निचले स्तर की संविदा भर्ती को तो स्वीकार किया जा सकता है लेकिन जब चीफ इंजीनियर और अधीक्षण अभियंता जैसे महत्वपूर्ण और बड़े पदों पर रिटायर्ड और भ्रष्ट इंजीनियरों को संविदा पर भर्ती किया जाएगा तब देश का सत्यानाश होना लगभग तय है।  आज देश के ज्यादातर सरकारी विभागों में अराजकता का माहौल है। अब चाहे त्यौंथर बहाव परियोजना की असफल कहानी हो अथवा नईगढ़ी माइक्रो इरिगेशन की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। इन्हीं अक्षम अधिकारियों सीएम त्रिपाठी जैसे लोगों के कार्यकाल में ही हुई है। यदि मध्य प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान रीवा और विंध्य क्षेत्र के किसानों के इतने ही हितैषी हैं तो उन्हें रीवा जिले के लिए जल संसाधन विभाग में एक परमानेंट चीफ इंजीनियर को पदस्थ कर देना चाहिए। जल संसाधन विभाग की आज यह दुर्दशा है कि भोपाल के चीफ इंजीनियर को रीवा जिले का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है जो महीने में एक दिन भी जिले में नहीं रहते तब कैसे इतनी बड़ी परियोजनाओं की मॉनिटरिंग की जा सकती है और कैसे भ्रष्टाचार को रोका जा सकता है? जाहिर है यह सब सरकार की मिलीभगत, सत्ताधारी नेताओं की कमीशनखोरी, अधिकारियों के भ्रष्टाचार और ठेकेदारों की करतूतों का ही परिणाम है कि मऊगंज के सैकड़ों बांधों में बूंदों में पानी नहीं है और कागजों में किसानों की नहरों में पानी सप्लाई बताया जा रहा है। अब मऊगंज का जो बेलहा बांध 4 वर्षों से टूटा पड़ा है उसी का परिणाम है। शिवानंद द्विवेदी ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मांग की है कि वह जल्द रीवा जिले के जल संसाधन गंगा  कछार के लिए एक परमानेंट चीफ इंजीनियर नियुक्त करें और अरबों खरबों की नहर परियोजनाओं की गुणवत्तापूर्ण और समयसीमा में पूरी हो सकें इसके लिए नियमित मॉनिटरिंग करवाएं।
….देखिए मऊगंज दौरे के दौरान शिवानंद द्विवेदी के साथ उपस्थित रिटायर्ड चीफ इंजीनियर शेर बहादुर सिंह परिहार एवं पेंशन समाज के अध्यक्ष डॉ मंगलेश्वर सिंह सहित उपस्थित किसानों और अन्य लोगों ने क्या बातें कहीं…
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Tuesday, May 9, 2023

Breaking: रिटायर्ड चीफ इंजीनियर ने एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी के साथ बेलहा बांध का किया दौरा // मऊगंज के बेलहा उमरी ग्राम के पास स्थित है बेलहा बांध// बेलहा बांध के रखरखाव को लेकर चीफ इंजीनियर शेर बहादुर सिंह परिहार ने जताई आपत्ति, कहा यह जल संसाधन विभाग और ठेकेदारों की मिली भगत का है परिणाम// 4 साल से टूटे बेलहा बांध से किसानों की सिंचाई हो रही प्रभावित //

*Breaking: रिटायर्ड चीफ इंजीनियर ने एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी के साथ बेलहा बांध का किया दौरा // मऊगंज के बेलहा उमरी ग्राम के पास स्थित है बेलहा बांध// बेलहा बांध के रखरखाव को लेकर चीफ इंजीनियर शेर बहादुर सिंह परिहार ने जताई आपत्ति, कहा यह जल संसाधन विभाग और ठेकेदारों की मिली भगत का है परिणाम// 4 साल से टूटे बेलहा बांध से किसानों की सिंचाई हो रही प्रभावित //*
दिनांक 09 मई 2023 रीवा मप्र।

  किसानों की नहर सिंचाई के नाम पर जल संसाधन विभाग में अच्छा खासा घालमेल चल रहा है। बांधों के माध्यम से नहरों को सप्लाई किए जाने वाले पानी का जायजा लेने के लिए जब मऊगंज और हनुमना क्षेत्र की तरफ का रुख किया गया तो पता चला कि  मऊगंज हनुमना तहसील में बनाए गए दर्जनों बांध मात्र दिखावे के लिए बनाए गए हैं जबकि नहरों से लोगों को पानी नहीं मिल रहे हैं। गांव के किसान गरीब की आवाज दबी हुई है जिसका परिणाम है कि उनका निरंतर शोषण किया जा रहा है। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की समस्या को उठाने वाला कोई नहीं है। जानकारी लेने पर पता चला की मऊगंज के बेलहा नामक बांध में वर्षों से पानी नहीं भरा क्योंकि घटिया इंजीनियरिंग की वजह से दरार आने से बांध का एक सिरा टूट गया था जिसे अब नए ढंग से बनाए जाने का कार्य किया जा रहा है। 
   
  *रिटायर्ड चीफ इंजीनियर ने बेलहा बांध का किया निरीक्षण, बताया घटिया इंजीनियरिंग का नमूना*

  इस बीच पिछले दिनों जल संसाधन विभाग के सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता शेर बहादुर सिंह परिहार और एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने मऊगंज क्षेत्र की नहरों और बांधों का निरीक्षण किया। इस बीच पहले निरीक्षण के दौरान बेल्हा बांध की स्थिति खराब पाई गई जिसके विषय में उपस्थित रिटायर्ड चीफ इंजीनियर ने विस्तार से खामियों के बारे में भी बताया। सामान्य तौर पर बांध के चारों तरफ बनाई जाने वाले भीट में साफ सफाई का कार्य किया जाता है जिससे अनावश्यक घास फूस और पेड़ पौधे नहीं उगते लेकिन यहां पर उल्टा देखने को मिला। पता चला कि जब से बांध का निर्माण किया गया है तब से कभी भी बांध का रखरखाव नहीं किया गया। जिसका परिणाम यह था कि बांध में दरार आ गई और किसानों को पिछले 4 वर्षों से सिंचाई के लिए कोई पानी नहीं मिला जिसकी वजह से किसानों की फसलें भी नष्ट हुई और बांध टूटने के चारो तरफ पानी भर जाने से फसलें भी नष्ट हुई। इस बीच नहरें भी जगह-जगह टूटी हुई मिली।
  देखिए मामले को लेकर रेड चीफ इंजीनियर शेर बहादुर सिंह परिहार ने क्या कहा…

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Saturday, May 6, 2023

Breaking: भ्रष्ट सचिवों की मनमानी से परेशान नए सरपंच, पिछले कार्यकाल की गबन राशि पर कराए जा रहे नए कार्य // मामला जवा जनपद की भनिगवा और कोनी कला ग्राम पंचायत का // भनिगवां पंचायत के सरपंच पति गंगा मिश्रा ने सचिव विवेकानंद पांडे पर भ्रष्टाचार के लगाए आरोप // कोनी कला निवासी लालमन साहू ने तत्कालीन सचिव विवेकानंद पांडे पर गौशाला और अन्य घोटाले के लगाए आरोप // सचिव विवेकानंद पांडे अपने निजी रिश्तेदारों के नाम वेंडर बनाकर पंचायती राशि का कर रहा बंदरबांट // ग्रामीण शिकायत लेकर कई वर्षों से जिला जनपद और कलेक्टर कार्यालय के लगा रहे चक्कर // शिकायतों की जांच के नाम पर हो रही लीपापोती // आला पदों पर बैठे कमीशनखोर अधिकारी शिकायत के नाम पर कर रहे वसूली // गिद्ध की तरह आंख बैठाए आला अधिकारी शिकायतों को मानते हैं मृतप्राय पशु जिसमें कमीशन खाने के लिए टूट पड़ते हैं गिद्ध की तरह //

*Breaking: भ्रष्ट सचिवों की मनमानी से परेशान नए सरपंच, पिछले कार्यकाल की गबन राशि पर कराए जा रहे नए कार्य // मामला जवा जनपद की भनिगवा और कोनी कला ग्राम पंचायत का // भनिगवां पंचायत के सरपंच पति गंगा मिश्रा ने सचिव विवेकानंद पांडे पर भ्रष्टाचार के लगाए आरोप // कोनी कला निवासी लालमन साहू ने तत्कालीन सचिव विवेकानंद पांडे पर गौशाला और अन्य घोटाले के लगाए आरोप // सचिव विवेकानंद पांडे अपने निजी रिश्तेदारों के नाम वेंडर बनाकर पंचायती राशि का कर रहा बंदरबांट // ग्रामीण शिकायत लेकर कई वर्षों से जिला जनपद और कलेक्टर कार्यालय के लगा रहे चक्कर // शिकायतों की जांच के नाम पर हो रही लीपापोती // आला पदों पर बैठे कमीशनखोर अधिकारी शिकायत के नाम पर कर रहे वसूली // गिद्ध की तरह आंख बैठाए आला अधिकारी शिकायतों को मानते हैं मृतप्राय पशु जिसमें कमीशन खाने के लिए टूट पड़ते हैं गिद्ध की तरह //*
 दिनांक 4 मई 2023 रीवा मध्य प्रदेश।

  रीवा जिले की 827 ग्राम पंचायतों में किस कदर ग़दर मची हुई है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है पिछले कार्यकाल में ग्राम पंचायतों में कार्य के नाम पर किए गए फर्जी आहरण पर वर्तमान कार्यकाल में पूर्व के सरपंच और सचिवों द्वारा कार्य कराए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं जिसका वर्तमान सरपंच जगह-जगह विरोध कर रहे हैं। बड़ा सवाल यह है कि क्या पिछले कार्यकाल में जिन कार्यों के लिए पैसे निकाल लिए गए वह वर्तमान सरपंच के कार्यकाल में कार्य कराए जा सकते हैं? क्या इस प्रकार की अवैधानिक और बिना कार्य कराए किए गए राशि का आहरण गबन और दुर्वियोजन की श्रेणी में नहीं आता? यदि विशेषज्ञों की माने तो प्रत्येक कार्य के लिए ग्राम पंचायतों में वित्त आयोग एवं मनरेगा की राशि का आहरण क्रमवार किया जाता है जिसमें कार्य करने के पूर्व लेआउट किया जाता है जिसके बाद नीव का काम होने के बाद कार्य का इंजीनियर द्वारा मूल्यांकन होता है और मूल्यांकन पश्चात ही पैसे निकाले जाते हैं। अंतिम राशि की निकासी कार्य के अंतिम मूल्यांकन और पूर्णता प्रमाण पत्र जारी होने के बाद ही निकाली जाती है। लेकिन ग्राम पंचायतों में मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम का बिल्कुल ही पालन नहीं किया जा रहा है और न ही उन नियम-कायदों का पालन किया जा रहा है जो समय समय पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सर्कुलर और नोटिफिकेशंस के जरिए ग्राम पंचायत, जनपद और जिला पंचायतों को जारी करते रहते हैं। ताज्जुब की बात तो यह है कि मध्यप्रदेश में भी पंचायती कार्य करने के लिए मध्यप्रदेश पंचायत भंडार क्रय अधिनियम बनाया गया है जिसके तहत 5000 से अधिक और 50,000 रुपए के बीच की सामग्री क्रय करने के लिए ग्राम सभा से अनुमोदन लिया जाता है इसके बाद ही राशि निकाली जाती है जबकि ₹50000 से अधिक कीमत वाले सामग्री क्रय हेतु बड़े स्तर पर निविदा जारी की जाती है और उसका इस्तिहार और नोटिफिकेशन पेपर पत्रिकाओं के जरिए निकाला जाता है। इस निविदा में आमंत्रित किए गए उन वेंडरों का भी चयन होता है जिन्होंने सबसे कम राशि में कार्य करवाने हेतु निविदा में हिस्सा लिया है। लेकिन ऐसे किसी भी अधिनियम का पालन ग्राम पंचायतों में नहीं किया जा रहा है और मन मुताबिक कमीशन को आला अधिकारियों और इंजीनियरों की मदद से सरपंच/सचिव राशि हजम कर लेते हैं और जब शिकायत होती है तो सीईओ जिला पंचायत और अन्य आला अधिकारियों के सहयोग से कार्य पूरा करवाने का प्रयास करते हैं। कई बार तो जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने मौखिक तौर पर भ्रष्टाचारी कई सचिव और जीआरएस को गबन की एफआईआर करवाने की बजाय पिछले राशि हजम किए हुए कार्यों को भी कराने के निर्देश दे दिए गए हैं।

  *जवा जनपद की भनिगवां और कोनी कला में भी सरपंच सचिवों ने जमकर किया भ्रष्टाचार*

  रीवा जिले से सुदूर स्थित जवा जनपद में भ्रष्टाचार इस कदर व्याप्त है की ग्राम पंचायतों में पिछले कार्यकाल में लाखों करोड़ों रुपए आहरित कर लिए गए और कार्य आज तक नहीं हुए। भनिगवां ग्राम पंचायत के स्थानीय निवासी गंगा प्रसाद मिश्रा ने सीईओ जिला पंचायत संजय सौरव सोनवाने के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर वर्तमान पदस्थ सचिव विवेकानंद पांडे की कारगुजारी के बारे में अवगत कराया और पंचायत भवन आंगनवाड़ी केंद्र और अमृत सरोवर के नाम पर अंधाधुंध की गई निकासी की शिकायत की है। गंगा प्रसाद मिश्रा ने बताया कि वह सरपंच पति भी हैं और उनकी पत्नी को सचिव विवेकानंद पांडे द्वारा जबरन पिछले कार्य काल के निकाली गई राशि से कार्य कराया जा रहा है जिसका उन्होंने विरोध किया है और कार्य रुकवाने का भी प्रयास किया है लेकिन जवा जनपद के भ्रष्टाचारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी डीके मिश्रा के द्वारा सचिव विवेकानंद पांडे की मदद की जा रही है। उन्होंने बताया कि सचिव विवेकानंद पांडे ने सत्यम तिवारी नामक व्यक्ति को प्राइवेट तौर पर पंचायत का कार्य करने के लिए ठेके पर रखा है जो ग्राम पंचायत में उगाही का कार्य कर रहा है। लाडली लक्ष्मी योजना हो अथवा कोई भी सामान्य कार्य सभी के लिए सत्यम तिवारी वसूली कर रहा है और यह सब विवेकानंद पांडे के सहयोग से हो रहा है।

  *कोनी कला से लालमणि साहू ने भी विवेकानंद पांडे के भ्रष्टाचार की कई बार करी है शिकायत*

  जवा जनपद के कोनी कला ग्राम पंचायत में ही लालमणि साहू नामक व्यक्ति ने बताया कि उनके द्वारा पिछले 2 से अधिक वर्षों से लगातार जनपद जिला और संभाग में वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष शिकायत की जा रही है लेकिन कोई जांच और कार्यवाही नहीं हो रही है। उन्होंने बताया कि वह कई बार सैकड़ों लोगों को साथ में लेकर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा के समक्ष धरना प्रदर्शन करने के लिए भी आए हैं लेकिन मात्र आश्वासन दिया जा कर छोड़ दिया जाता है और कोई भी जांच और कार्यवाही नहीं करवाई जा रही है। जिसको लेकर शिकायतकर्ता लालमणि साहू सहित ग्राम पंचायत कोनी कला के लोगों के बीच आक्रोश व्याप्त हो गया है। लालमणि साहू ने बताया कि एक बार उन्होंने शिकायत की थी जिसकी जांच जनपद स्तर से की गई थी लेकिन उस जांच में भी लीपापोती कर दी गई और तत्कालीन सचिव विवेकानंद पांडे को स्थानांतरित कर मामले को शांत करवा दिया गया लेकिन करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार की कोई वसूली नहीं की गई। लालमणि साहू ने बताया कि तत्कालीन सचिव विवेकानंद पांडे के द्वारा अपने परिजनों निजी रिश्तेदारों के नाम पर पंचायती वेंडर बनाए गए हैं जिनके नाम पर पंचायत भंडारकर अधिनियम के विपरीत सामग्री सप्लाई और अन्य के लिए राशि निकाली जा रही है इसकी जांच करवाए जाने की अपील उन्होंने कई बार वरिष्ठ अधिकारियों से की है लेकिन कमीशनखोर अधिकारियों ने किसी भी प्रकार से संज्ञान नहीं लिया।
…… देखिए मामले पर भनिगवा ग्राम पंचायत के स्थानीय निवासी गंगा प्रसाद मिश्रा और कोनी कला के स्थानीय निवासी लालमणि साहू ने आगे क्या कहा…..

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Breaking: ग्राम पंचायतों को खुली छूट, सामग्री खरीद में अधिनियमों की अनदेखी // मध्य प्रदेश पंचायत सामग्री माल क्रय अधिनियम 1999 का नहीं हो रहा पालन // जिला जनपद में बैठे आला अधिकारियों की सांठगांठ से पंचायतों में अराजकता का दौर जारी // 50 हजार से अधिक सामग्री क्रय पर निविदा जारी करने का है प्रावधान // पंचायतें अपने चहेते वेंडरों के नाम पर जारी कर रही सामग्री खरीद की राशि // जिमेदारों ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध बंद कर रखी दसों इंद्रियां //

*Breaking: ग्राम पंचायतों को खुली छूट, सामग्री खरीद में अधिनियमों की अनदेखी // मध्य प्रदेश पंचायत सामग्री माल क्रय अधिनियम 1999 का नहीं हो रहा पालन // जिला जनपद में बैठे आला अधिकारियों की सांठगांठ से पंचायतों में अराजकता का दौर जारी // 50 हजार से अधिक सामग्री क्रय पर निविदा जारी करने का है प्रावधान // पंचायतें अपने चहेते वेंडरों के नाम पर जारी कर रही सामग्री खरीद की राशि // जिमेदारों ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध बंद कर रखी दसों इंद्रियां //*
दिनांक 05 मई 2023 रीवा मप्र

   प्रदेश में ग्राम पंचायतों में अराजकता का माहौल है। पंचायत प्रतिनिधि और सरपंच सचिव अपने चहेते मटेरियल सप्लायर के नाम पर फर्जी बिल वाउचर लगाकर विकास के लिए आने वाली राशि हजम कर रहे हैं। गौरतलब है की ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों में 5 हजार से लेकर 50 हजार तक के कार्यों के मटेरियल सप्लाई हेतु विधिवत ग्राम सभा से अनुमोदन लिया जाकर समिति की अनुशंसा के बाद ही राशि का आहरण किया जाता है और मटेरियल की खरीद की जाती है वहीं यदि 50 हजार से अधिक सामग्री क्रय की बात करें तो यहां पर यह बताना आवश्यक है कि  मध्य प्रदेश पंचायत सामग्री माल क्रय अधिनियम 1999 के तहत विधिवत निविदा जारी की जाती है और सबसे कम टेंडर वाले मटेरियल सप्लायर का चुनाव किया जाता है। बाद में इसी सबसे कम टेंडर वाले मटेरियल सप्लायर से ही सामग्री खरीद किए जाने का प्रावधान रखा गया है।
     लेकिन आज ग्राम पंचायतों में वित्त आयोग, पंचायत दर्पण एवं मनरेगा योजना की राशि एकमुश्त आहरित कर ली जाती है और फर्जी बिल वाउचर लगाकर फर्जी मटेरियल सप्लायर के नाम पर राशि हजम कर ली जाती है। हालांकि इसकी जानकारी ग्राम पंचायत से लेकर जनपद पंचायत और जिला स्तर और यहां तक की प्रदेश में बैठे हुए कमीशनखोर आला अधिकारियों के पास तक रहती है। क्योंकि प्रतिदिन और साप्ताहिक तौर पर पंचायती खातों की समीक्षा होती है और समस्त डाटा ऑनलाइन होते हुए यह जानकारी सार्वजनिक रहती है लेकिन इसके बावजूद भी जिला जनपद से लेकर प्रदेश स्तर तक बैठे हुए कुछ कमीशनखोर आला अधिकारी अपनी दसों इंद्रियां बंद करके रखते हैं और पंचायतों में क्या घोटाला चल रहा है इसके बारे में आंख में पट्टी और मुंह में ताला लगाए रहते हैं। कोई शिकायतकर्ता या ग्रामीण व्यक्ति अपने पंचायत में भ्रष्टाचार की जब शिकायत करता है इसके बाद जांच पर जांच होती हैं और जांचों में भी तरीके से कार्यवाही नहीं की जाती है। लगातार शिकायतों के बाद यदि कोई कार्यवाही होती भी है तो सुनवाई के नाम पर वर्षों लगा दिए जाते हैं जिसके बाद पुनः जांच किया जाकर मामलों को दबा दिया जाता है अथवा वसूली राशि को कम कर दिया जाता है। एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी का कहना है की यह एक गंभीर मामला है जिस पर वरिष्ठ अधिकारियों को संज्ञान लिए जाने की आवश्यकता है अन्यथा पंचायत का भ्रष्टाचार कभी नहीं रुकेगा। उन्होंने कहा की ग्राम पंचायतों के निर्माण कार्य में सामग्री खरीदी के लिए मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 एवं साथ मे मध्य प्रदेश पंचायत सामग्री माल क्रय अधिनियम 1999 का नियमानुसार पालन किया जाए और फर्जी मटेरियल सप्लायर के नाम पर की जा रही राशि निकासी और बिना कार्य किए जा रहे गबन के मामलों पर तत्काल एफआईआर दर्ज करवाई जाए।
*संलग्न* - कृपया संलग्न मध्य प्रदेश पंचायत भंडार क्रय अधिनियम की प्रतिलिपि एवं साथ में वीडियो वाइट प्राप्त करें।

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*