Wednesday, June 21, 2023

Breaking: भ्रष्टाचार की शिकायत पर सीईओ ने फरियादी को धमकाया, सीईओ सौरभ संजय सोनवणे ने कहा FIR दर्ज करवा देंगे// रीवा सीईओ जिला पंचायत का कारनामा भ्रष्टाचारियों पर कार्यवाही के स्थान पर उल्टा फरियादी पर बना रहे दवाब // भ्रष्टाचारियों को संरक्षण का अनोखा मामला // चौरी और सेदहा पंचायत के भ्रष्टाचारियों को सीईओ जिला पंचायत से मिल रहा संरक्षण// जिले की अधिकतर पंचायतों के यही हाल // भ्रष्टाचार की शिकायत करना आम नागरिकों को पड़ रहा भारी// वसूली को विलुप्त अथवा कम करने का खेला जा रहा खेल //

*Breaking: भ्रष्टाचार की शिकायत पर सीईओ ने फरियादी को धमकाया, सीईओ सौरभ संजय सोनवणे ने कहा FIR दर्ज करवा देंगे// रीवा सीईओ जिला पंचायत का कारनामा भ्रष्टाचारियों पर कार्यवाही के स्थान पर उल्टा फरियादी पर बना रहे दवाब // भ्रष्टाचारियों को संरक्षण का अनोखा मामला // चौरी और सेदहा पंचायत के भ्रष्टाचारियों को सीईओ जिला पंचायत से मिल रहा संरक्षण// जिले की अधिकतर पंचायतों के यही हाल // भ्रष्टाचार की शिकायत करना आम नागरिकों को पड़ रहा भारी// वसूली को विलुप्त अथवा कम करने का खेला जा रहा खेल //*

दिनांक 22 जून 2023 रीवा मध्य प्रदेश।

  मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा संजय सौरव सोनवणे द्वारा भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का मामला प्रकाश में आया है। एक वायरल हुई वीडियो के माध्यम से पता चला है कि रीवा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संजय सौरव सोनवणे ग्राम पंचायत चौरी और ग्राम पंचायत सेदहा जनपद पंचायत गंगेव में भ्रष्टाचार की शिकायत की जांच करने के लिए मौके पर आए थे। दोनों ही ग्राम पंचायतों में व्यापक स्तर का भ्रष्टाचार हुआ है जिसमें कई जांचों के बाद कई लाखों की वसूली बनाई गई है। जहां ग्राम पंचायत चौरी में अब तक 50 लाख से अधिक की वसूली बनाई जा चुकी है वहीं ग्राम पंचायत सेदहा में लगभग 26 लाख रुपए की वसूली बनाई गई है। ग्राम पंचायत सेदहा शांतिधाम, पुलिया-रपटा निर्माण और 14 वें वित्त आयोग की परफारमेंस ग्रांट में गड़बड़ी की शिकायत की जांच पर वसूली बनाई गई। वहीं ग्राम पंचायत चौरी में भी पुलिया, रपटा, पीसीसी सड़क, पानी की टंकी निर्माण, कार्यालयीन व्यय एवं पूर्व सरपंच सविता जायसवाल के द्वारा अपने बेटे के नाम पर फर्जी वेंडर्स बनाकर राशि आहरण किए जाने जैसे कई मामलों में लगभग 50 लाख रुपए के आसपास की वसूली बनाई गई थी।
*वायरल वीडियो में चौरी ग्राम पंचायत कि शिकायतकर्ता पर एफआईआर दर्ज करवाए जाने के लिए सीईओ जिला पंचायत बना रहे दबाव*

  अभी हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमे सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने अपने फेसबुक और ट्विटर में लगभग 40 सेकंड का वीडियो अपलोड करते हुए लिखा है कि कैसे सीईओ जिला पंचायत अब फरियादी पर ही एफआईआर दर्ज करवाने का प्रयास कर रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि जिला पंचायत संजय सौरव सोनवणे अपने कार्य में असफल हुए हैं और भ्रष्टाचारियों को खुलेआम समर्थन दे रहे हैं। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है की चौरी ग्राम पंचायत की ग्राम रोजगार सहायक आरती त्रिपाठी के द्वारा कहा जा रहा है कि शिकायतकर्ता आर डी मिश्रा के द्वारा काम नहीं किया जाने दे रहा है लेकिन वास्तविकता यह है जिस सामुदायिक भवन में पेवर ब्लॉक निर्माण की बात की जा रही है उसकी राशि एक वर्ष पहले ही बिना कार्य कराए ही निकाली गई थी और अभी तक काम नहीं हुआ। 
   *सीईओ संजय सौरव सोनवणे पंचायत राज अधिनियम के विरुद्ध कर रहे आचरण*

  सवाल यह है कि जिस पंचायती कार्य के लिए राशि की निकासी एक वर्ष पहले की जा चुकी है और काम मौके पर नहीं हुआ क्या वह कार्य नए पंचायती कार्यकाल में नया सरपंच करा सकता है? चौरी के नए सरपंच लल्ला कोल ने सीईओ की कार्यप्रणाली पर आपत्ति जाहिर की है और कहा है कि जो कार्य अभी अप्रारंभ हैं और जिनका राशि आहरण उनके कार्यकाल में होगा मात्र वही काम कराए जाने के लिए वह बाध्य हैं। यदि वरिष्ठ अधिकारी उनके ऊपर दबाव लगाकर पुराने गवन किए हुए कार्य करवाते हैं तो इसमें न तो उन्हें बिल बाउचर की जानकारी है कि कौन सा पैसा कब निकला और साथ ही जिन फर्जी मस्टररोल में राशि निकासी कर ली गई उनकी वर्तमान में नए सिरे से काम करवाने के दौरान इनकी वैधानिकता भी निर्धारित नहीं की जा सकती। इस प्रकार स्पष्ट है की कागजी तौर पर पूरे फर्जीवाड़ा को नए सरपंच अपने कार्यकाल में कैसे वैलिडेट कर सकते हैं इसका न तो मध्य प्रदेश पंचायत राज अधिनियम में ही कोई उल्लेख है और न ही लीगल तौर पर यह उचित ही है। 
   गौरतलब है कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा संजय सौरव सोनवणे अवैधानिक तरीके से गबन की गई राशि के स्थान पर पुराने कार्यों को नए पंचायती कार्यकाल में करवाने का प्रयास कर रहे हैं जिसको लेकर जिले के कई ग्राम पंचायतों के चुने हुए वर्तमान सरपंचों ने आपत्ति जाहिर की है।
 देखिए इस वायरल वीडियो में किस प्रकार गंगेव जनपद की चौरी ग्राम पंचायत में जांच के लिए आए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा संजय सौरव सोनवणे के द्वारा शिकायतकर्ताओं और सरपंच को धमकाया जा रहा है और पुराने कार्य किए जाने के दबाव बनाए जा रहे हैं साथ ही FIR किए जाने की धमकी दी जा रही है।।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Thursday, June 15, 2023

Breaking: सुनो सरकार! बिना पानी कैसे करोगे किसानों की आय दुगुनी? // जब पतनारी बांध से जुड़ी नहर की बदहाल टूटी स्थिति को ग्रामीणों ने नहर में घुसकर दिखाया // मऊगंज हनुमना क्षेत्र के बांधों और उससे जुड़ी नहरों को लेकर उठ रहे सवाल // निरीक्षण में ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए नहरों और बांधों की स्थिति दयनीय // किसानों की आय दुगुनी करने की सरकार की मंशा पर प्रश्नचिन्ह // किसानों ने कहा सरकार सिर्फ लालीपोप पकड़ने में माहिर, किसानों की किसको चिंता //

*Breaking: सुनो सरकार! बिना पानी कैसे करोगे किसानों की आय दुगुनी? // जब पतनारी बांध से जुड़ी नहर की बदहाल टूटी स्थिति को ग्रामीणों ने नहर में घुसकर दिखाया // मऊगंज हनुमना क्षेत्र के बांधों और उससे जुड़ी नहरों को लेकर उठ रहे सवाल // निरीक्षण में ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए नहरों और बांधों की स्थिति दयनीय // किसानों की आय दुगुनी करने की सरकार की मंशा पर प्रश्नचिन्ह // किसानों ने कहा सरकार सिर्फ लालीपोप पकड़ने में माहिर, किसानों की किसको चिंता //*


  दिनांक 16 जून 2023 रीवा मध्य प्रदेश।


   पिछले कई एपिसोड से आप जल संसाधन विभाग में व्याप्त व्यापक भ्रष्टाचार के नमूने देख रहे हैं। मध्य प्रदेश के इतिहास में शायद ही इसके पहले जल संसाधन विभाग और उनके द्वारा बनाए गए बांधों नहरों और वाटर स्ट्रक्चर के विषय में कभी भी इतना व्यापक स्तर का कवरेज किया गया हो। मेन स्ट्रीम मीडिया में आज बॉलीवुड स्टार और सेलिब्रिटीज कौन से कपड़े पहन रहे हैं, क्या खाए हैं, और कहां जा रहे हैं यह दिखाने और अपनी टीआरपी बढ़ाने से फुर्सत नहीं है तो भला गांव क्षेत्र में सुदूर स्थित बांधों और नहरों और गरीब किसानों के विषय में इतना बृहद और व्यापक कवरेज दिखाने की भला किसके पास टाइम है और फिर इससे टीआरपी भी तो बढ़ने वाला नहीं है। 

   खैर कोई दिखाए या न दिखाए लेकिन हम सदैव ही ग्राउंड जीरो से सच्चाई आपके सामने लाते रहे हैं। और इसी श्रृंखला में आज एक बार पुनः हम आपको मऊगंज हनुमना क्षेत्र के पतनारी माइनर टैंक के विषय में अवगत कराएंगे। पतनारी बांध की स्थिति भी अब तक दर्जनों निरीक्षण किए गए बांधों से अलग नहीं है। इस बांध में भी वही सब समस्याएं देखने को मिली हैं जो पहले के कई बांधों में देखने को मिली थीं। मसलन बांध और उससे जुड़ी हुई नगरों के श्लुस एरिया, स्केप चैनल और मेन नहर की हालत खस्ताहाल मिली। बांध से प्रारंभ होकर कुछ ही दूर में नहर टूटी हुई पाई गई जहां जगह-जगह किसानों के खेतों में यत्र तत्र पानी बहता हुआ मिला। कई स्थानों पर तो पथरीले हिस्से में नहर की खुदाई भी पूर्ण नहीं हो पाई है। जल संसाधन विभाग बाणसागर डैम के रिटायर्ड अधीक्षण अभियंता नागेंद्र प्रसाद मिश्रा ने बताया कि पतनारी बांध उनके गांव कोल्हा के नजदीक ही है और काफी समय से वह इस पर अपनी नजर बैठे हुए हैं। 


   अधीक्षण अभियंता ने बताया की अंडर कैनाल पानी निकासी के लिए बनाई गई पुलिया चोक कर गई है और साथ में यह जगह जगह टूट गई है जिसकी वजह से न तो इस बांध और इन नहरों का किसानों के लिए कोई उपयोग हो पाया है। वहां के किसान वंशमणि प्रसाद पांडे और राजेंद्र दुबे ने बताया कि जब से नहर बनी है तब से उनके खेतों में पानी नहीं पहुंचा। बताया गया कि ठेकेदार जब काम छोड़ कर गया तो उसने कहा कि गांव वाले अपने से नहर खोद लेंगे विभाग ने बांध तो बना दिया गया है अब नहर की बात रह गई है तो नहर खोदना गांव वालों का काम है। वहीं गांव के ही भोलई साकेत ने बताया कि बांध और नहर का उनके लिए कोई उपयोग नहीं है क्योंकि खेतों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने गांव के अन्य लोगों से बात की जिसमें सभी ने लगभग एक ही तरह की समस्याएं बताई हैं और कहा कि बांध निर्माण से लेकर अब तक उनके खेतों में पानी नहीं पहुंचा है और सरकार जो उनकी आय दोगुनी करने के दावे कर रही है वह सब झूठ और फरेब है। गांव वालों ने बताया कि अपने खेतों में वह बोवाई तक नहीं कर पा रहे हैं आय क्या खाक दुगुनी होगी।


  आइए देखते हैं बाणसागर डैम के रिटायर्ड अधीक्षण अभियंता नागेंद्र प्रसाद मिश्रा और उपस्थित गांव वालों ने क्या कुछ कहा।


*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश....

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Breaking: यह तस्वीरें आपको आश्चर्य में डाल देंगी// क्या हुआ जब जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ चीफ इंजीनियर बांध में बने बड़े गड्ढे में घुस गए? // जल संसाधन विभाग का भ्रष्टाचार देख कहीं आपके होश न उड़ जाएं// देखिए कैसे रिटायर्ड चीफ इंजीनियर एसबीएस परिहार ने गोवर्दहा बांध के भीट में बने गड्ढे में उतरकर विभाग के भ्रष्टाचार की खोली पोल//

*Breaking: यह तस्वीरें आपको आश्चर्य में डाल देंगी// क्या हुआ जब जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ चीफ इंजीनियर बांध में बने बड़े गड्ढे में घुस गए? // जल संसाधन विभाग का भ्रष्टाचार देख कहीं आपके होश न उड़ जाएं// देखिए कैसे रिटायर्ड चीफ इंजीनियर एसबीएस परिहार ने गोवर्दहा बांध के भीट में बने गड्ढे में उतरकर विभाग के भ्रष्टाचार की खोली पोल//*
दिनांक 15 जून 2023 रीवा मध्य प्रदेश।


  मध्यप्रदेश में किसानों की आय दोगुनी किए जाने के दावों की पोल एक-एक करके खुलती जा रही है। जाहिर है जब नहर और पानी ही नहीं होगा तो किसानों की फसल उत्पादन कैसे होगा। और ऐसे में फिर किसानों की आय दुगनी तो दूर उनकी मूल पूंजी वापस हो जाए यह बड़ी बात होगी।  
   कागजों पर स्वतंत्रता प्राप्ति से लेकर आज तक हजारों योजनाएं संचालित हो रही हैं। किसानों को कागजों पर पानी मिल रहा है, कागजों पर सिंचाई हो रही है, कागजों पर उत्पादन बढ़ रहा है और कागजों पर ही आय दोगुनी से लेकर 10 गुनी तक बढ़ रही है लेकिन हकीकत क्या है वह हम आपको दिखा रहे हैं जो लगातार विंध्य क्षेत्र के रीवा जिले में बनाए गए बांधों और खस्ताहाल नहरों की स्थिति देखी जा सकती है जिससे आप आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं। जल संसाधन विभाग द्वारा बनाए गए बांधों की हकीकत यह है कि रिटायर्ड चीफ इंजीनियर ही बांधों में बने हुए गड्ढों बांधों के बीच में बने हुए गड्ढों में घुसकर बता रहे हैं कि कितना व्यापक स्तर का भ्रष्टाचार किया गया है। यहां पर इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे बाणसागर नहर मंडल के रिटायर्ड चीफ इंजीनियर एसबीएस परिहार जब हनुमना मऊगंज क्षेत्र के गोवर्दहा बांध पर पहुंचे और उन्होंने देखा कि भीड़ में सैकड़ों ऐसे गड्ढे बने हुए हैं जिससे बांध टूटने की कगार पर है। उन्होंने बताया कि तकनीकी तौर पर इसे पाइपिंग कहते हैं और जब पाइपिंग आगे बढ़ कर बांध के भीतरी दीवाल जहां पर पिचिंग का कार्य होता है उससे जुड़ जाता है तो पानी प्रेशर के कारण बांध टूट जाता है और जिस प्रकार से गोवर्दहा बांध की स्थिति आज बनी हुई है इसमें कोई संदेह नहीं है कि आने वाले कुछ महीनों अथवा वर्षों में यह बांध टूट जाएगा और फिर उन्हें इसके मेंटेनेंस के नाम पर लाखों करोड़ों की राशि जनता की गाढ़ी कमाई और टैक्स के पैसे से रिपेयरिंग में लगा दिया जाएगा और फिर एक बार रिपेयरिंग के नाम पर भी भ्रष्टाचार हो जाएगा। बता दें कि इस बीच बाणसागर बांध के रिटायर्ड अधीक्षण अभियंता नागेंद्र प्रसाद मिश्रा भी मौजूद थे जिन्होंने इस पूरे मामले को देखकर अपने सर पर हाथ पटकते हुए कहा कि इतना व्यापक भ्रष्टाचार तो कभी उनके कार्यकाल में भी नहीं था जितना आज देखने को मिल रहा है।
  आप भी देखिए कि कैसे बाणसागर नहर मंडल के रिटायर्ड चीफ इंजीनियर एसबीएस परिहार जब मऊगंज हनुमना क्षेत्र के गोबर्दहा बांध को देखने गए तो बांध के ऊपर बने सैकड़ों गड्ढों में घुसकर कैसे उन्होंने दिखाया कि जल संसाधन विभाग का भ्रष्टाचार किस हद तक बढ़ गया है।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Wednesday, June 14, 2023

Breaking: हनुमना मऊगंज का पोतनारी माइनर टैंक बता रहा अपनी बदहाली की दास्तान// करोड़ों की लागत से बनाए गए जल संसाधन विभाग के बांधों की स्थिति दयनीय// बेलहा जूड़ा छुहिया पाड़र आदि के बाद अब पोतनारी बांध की भी हालत जर्जर // बांध से जुड़ी नहर की स्थिति भी दयनीय// जगह जगह टूटी नहर से किसानों की आय दुगुनी होने पर खड़े हुए बड़े सवाल // सामाजिक कार्यकर्ता एवं जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जिले के माइनर टैंकों का किया जा रहा भौतिक सत्यापन//

*Breaking: हनुमना मऊगंज का पोतनारी माइनर टैंक बता रहा अपनी बदहाली की दास्तान// करोड़ों की लागत से बनाए गए जल संसाधन विभाग के बांधों की स्थिति दयनीय// बेलहा जूड़ा छुहिया पाड़र आदि के बाद अब पोतनारी बांध की भी हालत जर्जर // बांध से जुड़ी नहर की स्थिति भी दयनीय// जगह जगह टूटी नहर से किसानों की आय दुगुनी होने पर खड़े हुए बड़े सवाल // सामाजिक कार्यकर्ता एवं जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जिले के माइनर टैंकों का किया जा रहा भौतिक सत्यापन//*
दिनांक 14 जून 2023 रीवा मप्र।

   जिले के प्रमुख माइनर टैंकों का वरिष्ठ अधिकारियों और रिटायर्ड चीफ इंजिनियरों की उपस्थिति में भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। जल संसाधन विभाग के द्वारा बनवाए गए इन बांधों की स्थिति दिन प्रतिदिन दयनीय होती जा रही है। अब तक किए गए लगभग एक दर्जन माइनर बैंकों के निरीक्षण में यह बात सामने आ चुकी है जल संसाधन विभाग की उदासीनता भ्रष्ट कमीशनखोर अधिकारियों की मिलीभगत और जल उपभोक्ता और निगरानी समिति की संलिप्तता के चलते निर्माण से लेकर अब तक बांधों का कोई रखरखाव ही नहीं किया गया जिसकी वजह से जगह-जगह कटाव, सॉइल सेटलमेंट, सॉइल इरोजन, सॉइल कॉम्पेक्शन, पिचिंग के पत्थरों का उखड़ जाना,  लोंगिट्यूडनल और क्रॉस ड्रेन का विलुप्त हो जाना, वेस्ट बियर की खराब हालात, श्लूस एरिया में गड़बड़ी, बांधों के कैचमेंट एरिया में वेजा अतिक्रमण, रखरखाव के अभाव की वजह से सीपेज के कारण पानी का बांधों से जुड़ी हुई नहरों में जगह-जगह टूटने के कारण किसानों की फसल को नष्ट करना अथवा सिंचाई न हो पाना जैसे कई ऐसे कारण सामने आ चुके हैं जिससे बहुत स्पष्ट तौर पर यह पता चलता है सरकार की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। एक तरफ जहां भारत के प्रधानमंत्री और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रीवा जिले में आकर देश प्रदेश के किसानों की आय और फसल उत्पादन चौगुनी और 10 गुनी किए जाने के कसीदे पढ़ते हैं वहीं यदि देखा जाए तो किसानों के लिए उनकी मूल पूंजी वापस कर पाना मुश्किल पड़ रहा है।
  *बेलहा जूड़ा छुहिया और पाडर आदि के बाद अब पोतनारी बांध की स्थिति भी दयनीय*

  मऊगंज हनुमना क्षेत्र के पोतनारी बांध में भी एक बार मौका मुआयना किया गया और भीषण गर्मी और दोपहर की कड़ी धूप में एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी जल संसाधन विभाग के रिटायर्ड वरिष्ठ चीफ इंजीनियर एसडीएस परिहार एवं अधीक्षण अभियंता नागेंद्र प्रसाद मिश्रा और अन्य ग्रामीण जनों की उपस्थिति में जब पहुंच कर देखा गया तो पोतनारी माइनर टैंक में भी रखरखाव का अभाव और व्यापक भ्रष्टाचार दिखा और उससे लगी हुई नहर जगह-जगह टूटी नजर आई। इसके विषय में ग्राम क्षेत्र के लोगों ने नहर में घुसकर इशारे से उन टूटे भागों को दिखाया और बताया कि किस प्रकार जब से यह बांध और नहर बनी है उन्हें किसी भी तरह की सिंचाई का लाभ प्राप्त नहीं हुआ।
आइए देखते हैं इस विशेषांक में कि कैसे मऊगंज हनुमना क्षेत्र के पोतनारी बांध में और उससे जुड़ी हुई नहर में भ्रष्टाचार की नई इबारत लिखी गई और किसानों को किस प्रकार से शोषण किया गया।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Monday, June 12, 2023

Breaking: 855 करोड़ के नईगढ़ी माइक्रो इरीगेशन प्रोजेक्ट में किसानों की क्षतिपूर्ति को लेकर सीई और एसई ने कह दी बड़ी बात // जल संसाधन विभाग के भ्रष्ट कमीशनखोर अधिकारियों ने जेपी कम्पनी को बचाने नही किया किसानों की नुकसानी का दावा // एचईएस मेंटेना ब्लैकलिस्टिंग प्रकरण में 1715 करोड़ की क्षतिपूर्ति किए जाने का किया गया था दावा // चीफ इंजीनियर गंगा बेसिन ने बताया था राष्ट्रद्रोह का मामला // 239 करोड़ की त्यौंथर बहाव परियोजना में देरी की वजह से 1715 करोड़ रुपए की राष्ट्रीय अनाज उत्पादन में क्षति का किया गया था दावा //

*Breaking: 855 करोड़ के नईगढ़ी माइक्रो इरीगेशन प्रोजेक्ट में किसानों की क्षतिपूर्ति को लेकर सीई और एसई ने कह दी बड़ी बात // जल संसाधन विभाग के भ्रष्ट कमीशनखोर अधिकारियों ने जेपी कम्पनी को बचाने नही किया किसानों की नुकसानी का दावा // एचईएस मेंटेना ब्लैकलिस्टिंग प्रकरण में 1715 करोड़ की क्षतिपूर्ति किए जाने का किया गया था दावा // चीफ इंजीनियर गंगा बेसिन ने बताया था राष्ट्रद्रोह का मामला // 239 करोड़ की त्यौंथर बहाव परियोजना में देरी की वजह से 1715 करोड़ रुपए की राष्ट्रीय अनाज उत्पादन में क्षति का किया गया था दावा //*
दिनांक 13 जून 2023 रीवा मध्य प्रदेश।

   मध्यप्रदेश में बाणसागर से जुड़ी हुई सिंचाई परियोजनाओं का अंबार लगा हुआ है। अभी पिछले दिनों 9 जून को मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन शिवराज सिंह चौहान त्यौंथर रीवा आकर एक नई माइक्रो इरिगेशन परियोजना का शिलान्यास किए। कागजों में पिछले 2 दशक में इतनी योजनाएं आईं और गई जिनका कि यदि धरातल पर प्क्रियान्वयन हो गया होता तो सही मायने में किसान खुशहाल हो गया होता। लेकिन दुर्भाग्य है इस देश का कि यहां योजनाएं तो कागजों पर संचालित हो जाती हैं लेकिन वास्तविक धरातल पर उनका लाभ आम जनता को कभी मिल नहीं पाता। रीवा जिले की 239 करोड़ रुपए की त्यौंथर बहाव परियोजना के भी यही हाल थे जहां एच ई एस मेंटेना कम्पनी को कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था लेकिन कई वर्षों बाद भी जब योजना पूरी नहीं हो पाई तो मेंटेना को आदेश क्रमांक 8339 दिनांक 21 अक्टूबर 2022 को ब्लैक लिस्ट किए जाने का आदेश जारी किया गया। अनुबंध के अनुरूप कार्य न होने पर इस आदेश में इसका भी उल्लेख किया गया कि क्योंकि लगभग 1715 करोड़ रुपए की राष्ट्रीय कृषि उत्पादन में प्रोजेक्ट डिले की वजह से कमी आई है इसलिए यह अपराध राष्ट्रद्रोह की श्रेणी में बताया गया। लेकिन इन सबके बावजूद भी दिनांक 19/12/2022 के एक आदेश में एचईएस मेंटेना कंपनी को काली सूची से बाहर कर इंजीनियर इन चीफ जल संसाधन विभाग भोपाल द्वारा कंपनी को बहाल कर दिया गया। लेकिन बड़ा सवाल यह था की इस बहाली में इस बात का उल्लेख कहीं कोई उल्लेख नहीं किया गया कि आखिर राष्ट्रीय अनाज उत्पादन में 1715 करोड़ रुपए की जो कमी बताई गई थी और जो एचईएस मेंटेना कंपनी के कारण हुई है उसकी भरपाई कौन करेगा? बिना 1715 करोड़ रुपए की भरपाई किए हुए आखिर मेंटेना कंपनी को कैसे ईएनसी ने काली सूची से बाहर कर दिया इस बात का जवाब न तो इंजीनियर इन चीफ जल संसाधन विभाग के पास है और न ही मध्य प्रदेश सरकार के पास। 
  *जेपी एसोसिएट्स को काली सूची में डाले जाने पर आखिर क्षतिपूर्ति का जिक्र क्यों नहीं?*

    बहरहाल एक ऐसा ही खेल एक बार पुनः किया जा रहा है जब लगभग 855 करोड रुपए की फेज वन और फेस टू नईगढ़ी माइक्रो इरिगेशन प्रोजेक्ट का काम देख रही जयप्रकाश एसोसिएट्स नोएडा को भी ब्लैक लिस्ट किए जाने का आदेश क्रमांक 4624, 4652 दिनांक 29/05/2023 जारी किया गया है लेकिन जहां अपने पूर्व के आदेश में मेंटेना कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने के लिए चीफ इंजीनियर गंगा कछार द्वारा प्रोजेक्ट के काम में देरी होने और 3 वर्ष की समय सीमा के स्थान पर 5 वर्ष 8 माह में भी कार्य पूरा न होने के लिए तथा त्यौंथर बहाव परियोजना के लिए मेंटेना कंपनी को 1715 करोड़ की नुकसानी बता जाकर राष्ट्रद्रोह की संज्ञा दिया गया था वहीं 855 करोड़ के नईगढ़ी माइक्रो इरिगेशन प्रोजेक्ट में जेपी एसोसिएट्स के विषय में ऐसा कोई भी उल्लेख काली सूची में परिवर्तित किए जाने वाले आदेश में नहीं किया गया है।
  
   अब इस विषय में जानकार कहते हैं की क्योंकि 239 करोड़ के त्यौंथर बहाव परियोजना मामले में मेंटेना कंपनी को 1715 करोड़ की फसल नुकसानी और राष्ट्रद्रोह के अपराध किया जाना बताए जाने के बावजूद भी उसे कालीसूची से बाहर कर दिया गया था तो उसके मुकाबले यदि देखा जाए तो 855 करोड़ की नईगढ़ी माइक्रो इरिगेशन में जेपी एसोसिएट्स के विषय में इस प्रकार के किसी भी क्षतिपूर्ति का उल्लेख ब्लैकलिस्टिंग के आदेश में नहीं किया गया है जिसका तात्पर्य है कि शायद इस कंपनी को भी जल संसाधन विभाग के भ्रष्ट कमीशनखोर अधिकारियों द्वारा लेनदेन करके काली सूची से बाहर निकाल दिया जाए। 
*वरिष्ठ रिटायर्ड अधिकारियों ने ब्लैकलिस्टिंग आदेश पर खड़े किए सवाल*

  वहीं बाणसागर नहर मंडल के पूर्व चीफ इंजीनियर एसबीएस परिहार एवं बाणसागर डैम के पूर्व अधीक्षण अभियंता नागेंद्र प्रसाद मिश्रा ने अभी हाल ही में 855 करोड़ की नईगढ़ी माइक्रो इरिगेशन परियोजना के विषय में जेपी एसोसिएट्स को काली सूची में परीबद्ध करने के लिए जारी किए गए आदेश पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करते हुए कहा कि इसमें जल संसाधन विभाग की मिलीभगत की बू आ रही है। एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी और रिटायर्ड अधिकारियों ने कहा है कि क्योंकि इसके पहले एच ई एस मेंटेना कंपनी को 1715 करोड़ रुपए क्षतिपूर्ति कराए बिना ही यदि कालीसूची से बाहर कर दिया गया है तो निश्चित तौर पर यहां भी जेपी एसोसिएट्स को भी 90 दिवस के भीतर इंजीनियर इन चीफ जल संसाधन विभाग द्वारा षड्यंत्र किया जाकर मामले में अंडर टेबल सेटलमेंट किया जाकर जेपी एसोसिएट्स को भी कालीसूची से बाहर कर दिया जाएगा। इस पर कड़ी आपत्ति व्यक्त करते हुए शिवानंद द्विवेदी ने कहा है यदि ऐसा किया जाता है तो वह हाई कोर्ट जाएंगे और किसी भी हाल में काली सूची में डाले जाने के बाद जेपी एसोसिएट्स को बिना सबस्टेंशियल प्रोग्रेस के बहाल न किया जाए क्योंकि जिस 855 करोड़ की माइक्रो इरीगेशन परियोजना का कार्य जेपी एसोसिएट के द्वारा किया जा रहा है उसकी स्थिति बेहद चिंताजनक है और मात्र कुछ स्थानों पर पाइप खोदकर ही डाली गई है और कार्य का कोई अता पता नहीं है। 
देखिए मामले को लेकर विशेषज्ञों ने अपनी क्या राय दी है 
*बाइट 1 - रिटायर्ड चीफ इंजीनियर बाणसागर नगर मंडल श्री एसबीएस परिहार।*

*बाइट 2- रिटायर्ड अधीक्षण अभियंता श्री नागेंद्र प्रसाद मिश्रा सागर बांध देवलोंद।*

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Breaking: चीफ इंजीनियर ने बता दिया कैसे बढ़ेगी बड़े बांधों की जल संग्रहण क्षमता // बांधों के वेस्ट बियर की ऊंचाई बढ़ाकर कैसे बढ़ेगी बांधों की जल क्षमता बताया चीफ इंजीनियर ने // बांधों के रखरखाव और उनकी क्षमता को लेकर किया जा रहा भौतिक सर्वेक्षण // जिले के दर्जनों माइनर टैंक की स्थिति चिंताजनक // जल संसाधन विभाग की लापरवाही का नतीजा है की खत्म हो रहे जिले के कई महत्वपूर्ण बांध // किसानों की आय दुगुनी होने पर उठ रहे सवाल//

*Breaking: चीफ इंजीनियर ने बता दिया कैसे बढ़ेगी बड़े बांधों की जल संग्रहण क्षमता // बांधों के वेस्ट बियर की ऊंचाई बढ़ाकर कैसे बढ़ेगी बांधों की जल क्षमता बताया चीफ इंजीनियर ने // बांधों के रखरखाव और उनकी क्षमता को लेकर किया जा रहा भौतिक सर्वेक्षण // जिले के दर्जनों माइनर टैंक की स्थिति चिंताजनक // जल संसाधन विभाग की लापरवाही का नतीजा है की खत्म हो रहे जिले के कई महत्वपूर्ण बांध // किसानों की आय दुगुनी होने पर उठ रहे सवाल//*
दिनांक 12 जून 2023 रीवा मध्य प्रदेश।

   मऊगंज हनुमना क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण माइनर टैंक का सर्वेक्षण किया गया जिसमें जानकारी प्राप्त हुई कि बांधों का रखरखाव सही ढंग से नहीं किया जा रहा है और उनके मेंटिनेंस के लिए आने वाली राशि का बंदरबांट जल संसाधन विभाग के कमीशनखोर और भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से कर लिया जा रहा है। आमतौर पर नहरों और बांधों से संबंधित एक जल उपभोक्ता समिति भी होती है जो बांधों और नहरों की निगरानी करती है और उसका रखरखाव देखती है लेकिन मौके पर सर्वेक्षण के दौरान जिस प्रकार नहरों और बांधों की दयनीय स्थिति देखने को मिली उससे स्पष्ट है कि इन सबकी मिलीभगत का ही परिणाम है कि आज बांध नष्ट होने की कगार पर हैं और उनमें बूंदों में पानी नहीं है, जगह जगह बांध टूट रहे हैं, भीटो में गड्ढे हो गए हैं और माइनर टैंक भी नष्ट हो रहे हैं।
  *कैसे बढ़ाई जा सकती है बांधों की जल संग्रहण क्षमता*

  जल संसाधन विभाग के रिटायर्ड चीफ इंजीनियर एसबीएस परिहार ने बताया कि जिले के माइनर टैंकों की जल संग्रहण क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आधा दर्जन से अधिक बांधों का निरीक्षण करने के बाद यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि इन बांधों का रखरखाव सही ढंग से नहीं किया गया है और इनकी क्षमता के अनुरूप जल संग्रहण भी नहीं किया जा रहा है जिसका नतीजा यह है कि निर्धारित भूमि की सिंचाई नहीं हो पा रही है और मात्र कुछ अंश भाग में ही बड़ी मुश्किल से लोग अपने खेतों की सिंचाई कर पा रहे हैं। किसान भी अपनी जोर जुगत लगाकर काम चला रहे हैं जबकि नहरों के टूटने के कारण उनके खेतों में सीधे नहरों से सिंचाई नहीं हो पा रही है।
  *वेस्ट बियर की ऊंचाई बढ़ाकर बांधों की जल संग्रहण क्षमता बढ़ाया जाए*

  एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी से वार्तालाप के दौरान रिटायर्ड चीफ इंजीनियर श्री परिहार ने बताया कि अमूमन बेस्ट बीयर की ऊंचाई बांध की जल संग्रहण क्षमता के अनुरूप रखी जानी चाहिए लेकिन कई बांधों में देखा गया है की बांधों में वेस्ट बियर की ऊंचाई बहुत निचले स्तर पर रखी गई है जिसकी वजह से बड़े-बड़े बांध भी आधे से कम क्षमता तक ही भर पा रहे हैं। यदि वेस्ट वियर की ऊंचाई बढ़ा दी जाए तो बांधों की जल संग्रहण क्षमता बढ़ जाएगी और ज्यादा क्षेत्र को सिंचाई क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। इन बांधों में जो क्षमता निर्धारित की गई है उसके अनुरूप ही पानी का भराव नहीं हो पा रहा है जिसकी वजह से किसानों की आय तो दुगनी होना दूर उन्हें लागत राशि भी हासिल नहीं हो पा रही है जिससे सरकार की योजनाओं की कलई खुल रही है। 
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Saturday, June 10, 2023

Breaking: चीफ इंजीनियर ने बांधों को लेकर कह दी यह बड़ी बात, जानकर रह जायेंगे हैरान // सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन अनुसार कम से कम 10 प्रतिशत भाग रहना चाहिए जलमग्न// तालाबों को पूरी तरह खाली रखना सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन और संविधान का खुला उल्लंघन// भारत का संविधान देता है सभी जीव जंतुओं को जीवन जीने का अधिकार// सिंचाई और जल संग्रहण के लिए बनाए गए बांधों से पानी खींचकर कर दिया जाता है खाली// मानव के साथ जीव जंतुओं पशु पक्षियों पर भी डैम के पानी पर नैसर्गिक अधिकार//

*Breaking: चीफ इंजीनियर ने बांधों को लेकर कह दी यह बड़ी बात, जानकर रह जायेंगे हैरान // सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन अनुसार कम से कम 10 प्रतिशत भाग रहना चाहिए जलमग्न// तालाबों को पूरी तरह खाली रखना सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन और संविधान का खुला उल्लंघन// भारत का संविधान देता है सभी जीव जंतुओं को जीवन जीने का अधिकार// सिंचाई और जल संग्रहण के लिए बनाए गए बांधों से पानी खींचकर कर दिया जाता है खाली// मानव के साथ जीव जंतुओं पशु पक्षियों पर भी डैम के पानी पर नैसर्गिक अधिकार//*
दिनांक 11 जून 2023 रीवा मध्य प्रदेश।

   सरकार द्वारा बनवाए गए जिले के बड़े बांधों की स्थिति का जायजा लिया जा रहा है जिसकी ग्राउंड जीरो से रिपोर्टिंग पहुंचाई जा रही है। मीडिया के इतिहास में बांधों, बड़े जलाशयों और तालाबों के विषय में शायद ही अब तक इतनी डिटेल्ड विस्तृत और व्यापक जानकारी पहले कभी भी पहुंचाई गई हो। अब तक का फोकस रहा है रीवा संभाग का वह क्षेत्र जिसे आजादी के बाद से जल अभाव ग्रस्त घोषित किया गया था। जिसके लिए सरकार ने पुनर्जीवित करने के बड़े प्रयास किए। मऊगंज और हनुमना क्षेत्र पहाड़ी पथरीले होने के साथ लगभग बंजर और जल अभावग्रस्त क्षेत्र थे जिनमे आजादी के बाद इन्हे बेहतर बनाने के कुछ प्रयास किए गए जहां बड़े बड़े बांध और सरकारी जलाशय बनवाए गए। अभी भी यदि कोई जल संग्रहण अथवा सिंचाई परियोजना की बात होती है तो मऊगंज और हनुमना के किसान प्राथमिकता में होते हैं। 
    इसी सिलसिले में मऊगंज तहसील के अटरिया शिवप्रसाद ग्राम पंचायत के पास स्थित वन पाड़र ग्राम में बनाए गए पाड़र बांध की स्थिति का जायजा लिया गया। इस बीच मौके पर शिवानंद द्विवेदी के साथ जल संसाधन विभाग के रिटायर्ड चीफ इंजीनियर एसबीएस परिहार और आसपास की ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। 
   *जिले के बड़े बांध चढ़ गए व्यापक भ्रष्टाचार की बलि, मेंटिनेंस का पैसा तक डकार गए भ्रष्ट कमीशनखोर अधिकारी*

  जहां तक सवाल बांध में पानी, बांध की कंडीशन, इसके रखरखाव और मेंटेनेंस आदि के लिए आने वाली राशि के बंदरबांट को लेकर था उसके विषय में तो यह स्पष्ट हो चुका है कि बांधों का रखरखाव बिल्कुल नहीं किया गया है और उनके मेंटिनेंस के लिए शासन के द्वारा दी जाने वाली राशि का बेजा दुरुपयोग जल संसाधन विभाग के भ्रष्ट और कमीशनखोर अधिकारियों के द्वारा किया गया। इसके विषय में पिछले महीने भर से चलाए जा रहे जल जीवन जागरण यात्रा के दौरान एक-एक बांध में सरकार की कथनी और करनी की कलई खुलती जा रही है। जल संसाधन विभाग के मुलाजिम अपना मुंह छिपाए घूम रहे हैं। हकीकत और लाइव वीडियो आने के बाद जल संसाधन विभाग के भ्रष्ट और कमीशनखोर अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं बचा है। अब तो बस सब इस चक्कर में रहते हैं कि कब उनका नंबर लगे और कब उनकी कलई खुल जाए। ग्राउंड जीरो पर ड्यूटी में लगाए गए उपयंत्री और एसडीओ अपने कार्य से नदारद रहते हैं और मात्र कागजी घोड़ा दौड़ाकर सब कुछ ओके है इस प्रकार बताकर कागजी खानापूर्ति कर देते हैं। लेकिन सब कुछ ठीक है ऐसे बताए जाने वाले बांधों की स्थिति इन वीडियो के माध्यम से स्पष्ट हो ही चुकी है कि उनकी कितनी दुर्दशा हो गई है और सभी बांध क्षतिग्रस्त होकर लगभग टूटने की कगार पर हैं जिनमें मेंटिनेंस की सख्त आवश्यकता है। ऐसा नहीं है कि बांधों के मेंटिनेंस के लिए राशि नहीं आई है बल्कि उस राशि को किस प्रकार जल उपभोक्ता समितियों के साथ मिलकर हजम कर लिया गया है उसका जीता जागता उदाहरण इस जल जीवन जागरण यात्रा में एक-एक करके सामने आ चुका है। यहां पर यह उल्लेखनीय है कि भ्रष्टाचार अकेले मात्र जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के द्वारा ही नहीं किया गया बल्कि हर ग्राम पंचायत में नहरों और बांधों की सुरक्षा और रखरखाव के लिए बनाई गई जल उपभोक्ता समितियों और उनके जन प्रतिनिधियों के द्वारा मिलकर इसका बंदरबांट किया गया है।
*बड़ा सवाल: क्या प्राकृतिक जल पर मानव मात्र का ही अधिकार?*

   ग्राउंड जीरो पर जब बांधों की स्थिति का जायजा लिया गया और यह देखा गया कि कई बांधों में बूंदों में पानी नहीं है और गर्मी के दिनों में इतने बड़े बड़े बांध सूख चुके हैं तो इस पर स्वाभाविक तौर पर सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने जल संसाधन विभाग के रिटायर्ड चीफ इंजीनियर एसबीएस परिहार से प्रश्न करना लाजमी समझा कि क्या बांधों और तालाबों के प्राकृतिक जल पर मानव मात्र का ही अधिकार है कि उसका दोहन कर लिया जाए और निचोड़ कर गर्मी के दिनों में बांधो  को सूखा छोड़ दिया जाए? क्य प्रकृति में उपलब्ध पंचमहाभूत में से सबसे महत्वपूर्ण पृथ्वी वायु और जल में मात्र मानव का ही अधिकार है कि उसे अपनी उपयोगिता और भौतिक सुख सुविधा के लिए वह प्रदूषित कर रहा है, उसका गलत तरीके से दोहन कर रहा है और निचोड़कर छोड़ दे रहा है। बड़ा सवाल यह था कि क्या किसी भी बड़े जलाशय बांध अथवा तालाब के पानी में लाखों-करोड़ों जीव जंतु पशु पक्षियों का अधिकार नहीं है कि इस भीषण गर्मी के दिनों में कुछ पानी इन सरकारी बांधों तालाबों में छोड़ दिया जाए जिससे प्राकृतिक जीव जंतु भी जीवित रहने के लिए इसका उपयोग कर पाएं? इस बात पर एसबीएस परिहार ने बताया कि नैतिक और नैसर्गिक तौर पर तो यह धार्मिक परंपराएं भी कहती हैं की मानवता तभी जीवित रहेगी जब उनमें परहित करने का भाव जागृत रहेगा और अपने ही समान सभी जीव जंतुओं को समझकर उनके जीवन यापन के लिए भी वह प्राकृतिक वातावरण अपने आसपास बनाए रखेंगे जिससे सभी जीव जंतु जीवित रहे। इकोसिस्टम का सिद्धांत भी यही कहता है कि अपने आसपास प्राकृतिक वातावरण बनाए रखने पर ही मानव का अस्तित्व बना रहेगा वरना इकोसिस्टम नष्ट होने के बाद मानव का अस्तित्व भी नष्ट हो जाएगा। 
*आखिर वरिष्ठ न्यायालयों के जजमेंट और भारत का संविधान जीवन जीने के अधिकार के विषय में क्या कहता है? यह भी जान लें*

  भारत का संविधान सभी की स्वतंत्रता और उनके जीवन जीने के अधिकार पर बड़े स्पष्ट तौर पर बात करता है। 
 यदि नियम कायदों के हिसाब से भी देखा जाए तो भारत के सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा कई ऐसे आदेश भी दिए गए हैं जिसमें यह बहुत स्पष्ट किया गया है की प्राकृतिक जल स्रोतों एवं किसी भी प्रकार के बड़े जल स्रोतों जैसे बांध तालाबों में मानव अपने उपयोग के अतिरिक्त कम से कम 10 प्रतिशत पानी उन जलाशयों में उपयोग के अतिरिक्त शेष बचाए रखेगा जिसका प्रयोग कर जीव जंतु पशु पक्षी ही जीवित रहेंगे क्योंकि प्रकृति में सभी को जीने का अधिकार है और हमारा संविधान भी यही कहता है। लेकिन कितनी बड़ी विडंबना है कि आज मानव इतना स्वार्थी हो गया है कि वह सिर्फ अपने उपयोग के अतिरिक्त किसी भी प्रकार से दूसरे जीव जंतु और पशु पक्षियों के विषय में विचार नहीं कर रहा है और यह सभी सरकारी बांध तालाब जिस प्रकार जलविहीन जीवनविहीन सूखे पड़े हुए हैं यह इस बात का उदाहरण है कि मानव ने प्रकृति को मात्र अपनी निजी स्वार्थों के लिए निचोड़ लिया है और जीव जंतु पशु पक्षियों को भीषण गर्मी में मरने के लिए छोड़ दिया गया है।
    इस प्रकार देखा गया कि कैसे भारत के संविधान में जीवन जीने के अधिकार और सर्वोच्च न्यायालय के  कम से कम 10 प्रतिशत जलाशय में पानी भरे जाने के निर्णय की धज्जियां उड़ाई गई हैं। और जहां मानव किसी तरह से अपना हाथ पैर मार कर पानी की व्यवस्था कर अपना जीवन यापन कर रहा है वहीं जगह जगह जल स्रोतों में पानी का दोहन कर लिए जाने के कारण जीव जंतु और पशु पक्षी बूंद बूंद पानी के लिए मर रहे हैं। 
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*