Wednesday, November 8, 2023

Breaking: भाजपा विधायक दिव्यराज सिंह की पैरवी भी भ्रष्टाचारियों को नहीं बचा पाई वसूली और कार्यवाही से // सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी की शिकायत पर 6 पंचायत जिम्मेदारों पर गिरी गाज // गंगेव की सेदहा पंचायत के तत्कालीन सरपंच सचिव सहित 6 जिम्मेदारों के विरुद्ध बनाई गई 27 लाख से अधिक की वसूली // अब जल्द ही दर्ज होगी एफ आई आर // सिरमौर के भाजपा विधायक दिव्यराज सिंह ने भ्रष्टाचारियों के पक्ष में जमकर की थी पैरवी // दिव्यराज सिंह ने अपने विधायक के लेटर हेड पर पत्र जारी कर किया था कई बार जांच प्रभावित // मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा संजय सौरव सोनवणे ने धारा 89 की सुनवाई के बाद वसूली और सिविल जेल के लिए जारी किया आदेश //

*Breaking: भाजपा विधायक दिव्यराज सिंह की पैरवी भी भ्रष्टाचारियों को नहीं बचा पाई वसूली और कार्यवाही से // सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी की शिकायत पर 6 पंचायत जिम्मेदारों पर गिरी गाज // गंगेव की सेदहा पंचायत के तत्कालीन सरपंच सचिव सहित 6 जिम्मेदारों के विरुद्ध बनाई गई 27 लाख से अधिक की वसूली // अब जल्द ही दर्ज होगी एफ आई आर // सिरमौर के भाजपा विधायक दिव्यराज सिंह ने भ्रष्टाचारियों के पक्ष में जमकर की थी पैरवी // दिव्यराज सिंह ने अपने विधायक के लेटर हेड पर पत्र जारी कर किया था कई बार जांच प्रभावित // मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा संजय सौरव सोनवणे ने धारा 89 की सुनवाई के बाद वसूली और सिविल जेल के लिए जारी किया आदेश //*
दिनांक 19 अक्टूबर 2023 रीवा मध्य प्रदेश।

   भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह द्वारा ग्राम पंचायत सेदहा के तत्कालीन सरपंच पवन कुमार पटेल और प्रभारी सचिव एवं ग्राम रोजगार सहायक दिलीप कुमार गुप्ता के पक्ष में जमकर पैरवी करने के बावजूद भी 27 लाख रुपए से अधिक की भ्रष्टाचार की वसूली बनाई गई है। वर्तमान मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा संजय सौरभ सोनवणे द्वारा धारा 89 की सुनवाई के बाद यह वसूली बनाई गई है। हाल ही में जिला पंचायत के इतिहास में अब तक की सबसे लंबी चली सुनवाई और दिनांक 11 अक्टूबर 2023 को जारी किए गए धारा 89 के सुनवाई आदेश में 27 लाख 25 हजार 129 रुपए का वसूली आदेश जारी किया गया है जिसे लेकर अब सिरमौर भाजपा विधायक की भ्रष्टाचारियों को सह देने के चर्चे भी गरम हैं। 

  गौरतलब है कि सेदहा पंचायत जनपद पंचायत गंगेव के अंतर्गत आती है जो की मनगवां विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है परंतु सिरमौर तहसील होने के कारण और तत्कालीन सरपंच और उसके दलालों का संपर्क भारतीय जनता पार्टी के विधायक दिव्यराज सिंह से होने के कारण तत्कालीन विधायक ने भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए खुलकर पैरवी की। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भाजपा के विधायक दिव्यराज सिंह ने तत्कालीन सेदहा सरपंच को भ्रष्टाचार से बचाने के लिए अपने लेटर हेड में दिनांक 19 जनवरी 2021 को कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्रमांक 01 रीवा को पत्र लिखकर ग्राम पंचायत सेदहा के भ्रष्टाचार और अनियमितता की जांच के लिए गठित किए गए जांच दल को ही बदलने के लिए लेख कर दिया था। सूत्रों की मानें तो मौखिक और अन्य माध्यमों से तो कई बार वसूली और जांच को प्रभावित किया गया पर हद तो तब हो गई जब विधायक ने भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए अपने लेटर हेड तक का दुरुपयोग कर डाला।
  *विधायक दिव्यराज सिंह ने अपने पद और विधायकी का किया नाजायज उपयोग*

  गौरतलब है कि भाजपा के विधायक दिव्यराज सिंह ने अपने विधायकी और पंचायत लेखा समिति के सदस्य पद का नाजायज तरीके से दुरुपयोग किया जिसके चलते तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत स्वप्निल वानखेड़े एवं तत्कालीन कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्रमांक 1 आर एस धुर्वे पर दबाव बनाते हुए तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी आर डी पांडेय को ग्राम पंचायत चौरी से एवं सहायक यंत्री निखिल मिश्रा को ग्राम पंचायत सेदहा की जांच से हटाने के लिए पत्र जारी किया था जबकि उक्त अधिकारियों को जांच टीम से क्यों हटाया जाए इसका कोई भी तथ्यात्मक और वैध कारण उपलब्ध नहीं था और मात्र जांच में लीपापोती करने और जांच को प्रभावित करने एवं अपने मनमुताबिक भ्रष्टाचारी जांच अधिकारी को जांच टीम में बैठाने के लिए भाजपा विधायक दिव्यराज सिंह के द्वारा ऐसा कृत्य किया गया था। इसके बाद तो बकायदे एसडीओ आर डी पांडेय ने इन्ही सब नेतागिरी से तंग आकर वीआरएस तक ले लिया और रिटायरमेंट के लगभग 02 वर्ष पूर्व ही अपनी नौकरी छोड़ दी।

   *विधायक ने पंचायत राज लेखा समिति के सदस्य होने और अपने विधायकी का किया दुरुपयोग*

   गौरतलब है की दिव्यराज सिंह स्थानीय निकाय एवं पंचायत राज लेखा समिति के सदस्य होने के नाते रीवा के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कार्यों पर दखल रखते थे जिसके कारण सभी पंचायत विभाग के अधिकारी दबाव के कारण न केवल जांच टीम बदल दिए बल्कि जांच रिपोर्ट आने के बाद भी वर्तमान 2023 के विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने तक जांच और आदेश को दबाकर रखे और विभिन्न प्रकार से वसूली को कम करने के लिए और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए बार-बार जांच पर जांच करवाते गए। लेकिन एक कहावत है कि झूठ को कितना भी छुपाओ वह छुप नहीं सकता और सच्चाई को कितना भी दबाओ वह दब नहीं सकती तो ठीक वैसे ही हुआ और सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी की लगातार पैरवी और कड़ी मेहनत का नतीजा सामने आया और आचार संहिता लगते ही मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा संजय सौरभ सोनवणे ने दिनांक 11 अक्टूबर 2023 को धारा 89 का अंतिम वसूली आदेश जारी करते हुए तत्कालीन सेदहा सरपंच पवन कुमार पटेल, ग्राम रोजगार सहायक एवं प्रभारी सचिव रहे दिलीप कुमार गुप्ता, तत्कालीन सचिव शशिकांत मिश्रा, तत्कालीन उपयंत्री डोमिनीक कुजूर, तत्कालीन और बर्खास्त उपयंत्री अजय तिवारी एवं तत्कालीन सहायक यंत्री स्व0 अनिल सिंह सहित कुल 6 जिम्मेदारों के ऊपर कुल 27 लाख 25 हजार 129 रुपए की अब तक की वसूली निर्धारित की है जिसे जमा करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है और यदि राशि जमा नहीं की गई तो आगे की कानूनी कार्यवाही और भू राजस्व की भांति बकाया वसूलने एवं सिविल जेल भेजने के लिए निर्देशित किया गया है।

  *बड़ा सवाल: क्या गबन और भ्रष्टाचार में मात्र वसूली कर लेना पर्याप्त है?*

  यदि जानकारों की माने तो किसी भी गबन और भ्रष्टाचार के मामले में वसूली मात्र कर देने से कार्यवाही पूर्ण नहीं होती है। जाहिर है जो शासन की राशि भ्रष्टाचार करते हुए गबन की गई है उसे तो हर हाल में ही वसूलना है क्योंकि वह शासन की राशि होती है अतः वसूली किया जाना कोई दंड नहीं है जबकि यदि दंड की बात करें तो जब तक सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज नहीं होती है और कानूनी कार्यवाही नहीं की जाती है तब तक गबन और भ्रष्टाचार के मामलों में कार्यवाही पूर्ण नहीं मानी जाती है। तो फिर अब यहां देखना पड़ेगा की मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा संजय सौरभ सोनवणे द्वारा सेदहा पंचायत में हुए व्यापक भ्रष्टाचार संबंधी दिनांक 11 अक्टूबर 2023 को लेकर जारी किए गए वसूली आदेश के बाद अब एफआईआर और अन्य कानूनी कार्यवाही कब की जाती है?

  *जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों और विधायकों का काला चेहरा हुआ उजागर*

  गौरतलब है कि जिस प्रकार सत्ताधारी पार्टी के सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह द्वारा जनता के पक्ष में पैरवी न करते हुए भ्रष्टाचार की जांच करवाने के स्थान पर उल्टा दोषियों और भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए और जांच को प्रभावित करने के लिए जांच टीम बदलने बाबत और अपने पद का गलत उपयोग करते हुए कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा पर दबाव बनाने के उद्देश्य से अपने लेटर हेड पर पत्र जारी किया गया था इससे साफ जाहिर है की जनता जिन्हें वोट देती है और चुनकर अपनी रक्षा और विकास के लिए भेजती है वह उल्टे भ्रष्टाचारियों की पैरवी करने लगते हैं।
   अब सेदहा पंचायत में हुए व्यापक भ्रष्टाचार को ही देखें तब वर्ष 2016-17 से लेकर अब तक जिस प्रकार पिछले 6 साल में ग्राम पंचायत के भ्रष्टाचारियों की पैरवी इन जनप्रतिनिधियों द्वारा की गई है इससे इन कथित जनप्रतिनिधियों का वह काला चेहरा भी उजागर हो रहा है जहां जनता जनप्रतिनिधियों को तो चुनकर शासकीय संपत्ति की रक्षा और विकास के लिए भेजती है लेकिन किस प्रकार अपने पदों का दुरुपयोग करते हुए यह जनप्रतिनिधि नए-नए कारनामे करते हैं यह भी विचारणीय है। अब शायद जनता को ऐसे जनप्रतिनिधियों को चुनने से पहले सौ बार सोचना चाहिए।

  *संलग्न*  -  कृपया इस न्यूज़ के साथ संलग्न भाजपा के पूर्व विधायक दिव्यराज सिंह द्वारा अपने लेटर हेड में जारी किया गया वह पत्र देखे जिसमें ग्राम पंचायत सेदहा की जांच प्रभावित करने और जांच टीम बदलने के लिए कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्रमांक 01 को लेख किया गया था एवं साथ में अभी हाल ही में 11 अक्टूबर 2023 को मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा द्वारा धारा 89 की सुनवाई के उपरांत जारी किए गए 27 लाख रुपए से अधिक के वसूली आदेश आदि की प्रति एवं साथ में सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी का वीडियो बयान आदि देखें।

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

*National Breaking: 855 करोड़ की नईगढ़ी माइक्रो इरिगेशन परियोजना पर चुनाव आयोग ने लिया संज्ञान // जेपी एसोसिएट्स को टर्मिनेट करने कार्यवाही की प्रक्रिया पर किया जवाब तलब // ईएनसी जल संसाधन शिसिर कुशवाहा की संविदा को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने खड़ा किया था सवाल // रिटायर्ड अधीक्षण अभियंता कुशवाहा को चीफ इंजीनियर के साथ नियम विरुद्ध दिया गया ईएनसी का अतिरिक्त प्रभार // चुनाव के पूर्व अपने चहेतों को बिना वरीयता और योग्यता निर्धारण किए बड़े पदों की उड़ाई गई धज्जियां // सरकार के कारनामों पर खड़ा हुआ बड़ा सवाल // गरीब किसानों की महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजना बाणसागर और नर्मदा बेसिन में लगा ग्रहण //*

*National Breaking: 855 करोड़ की नईगढ़ी माइक्रो इरिगेशन परियोजना पर चुनाव आयोग ने लिया संज्ञान // जेपी एसोसिएट्स को टर्मिनेट करने कार्यवाही की प्रक्रिया पर किया जवाब तलब // ईएनसी जल संसाधन शिसिर कुशवाहा की संविदा को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने खड़ा किया था सवाल // रिटायर्ड अधीक्षण अभियंता कुशवाहा को चीफ इंजीनियर के साथ नियम विरुद्ध दिया गया ईएनसी का अतिरिक्त प्रभार // चुनाव के पूर्व अपने चहेतों को बिना वरीयता और योग्यता निर्धारण किए बड़े पदों की उड़ाई गई धज्जियां // सरकार के कारनामों पर खड़ा हुआ बड़ा सवाल // गरीब किसानों की महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजना बाणसागर और नर्मदा बेसिन में लगा ग्रहण //*
दिनांक 09 नवंबर 2023 रीवा मध्य प्रदेश।

  बाणसागर डैम और नहर मंडल से संबंधित नईगढ़ी माइक्रो इरिगेशन परियोजना से संबंधित सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी की शिकायत पर भारत निर्वाचन आयोग ने तत्काल संज्ञान ले लिया है। आपको बता दें कि मामला रीवा और सीधी संभाग से जुड़े हुए बहुचर्चित बाणसागर बांध और बाणसागर नहर मंडल से जुड़ी हुई सिंचाई परियोजनाओं से संबंधित है जिसे एक लंबे अरसे से उठाया जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले कुछ महीने पूर्व गर्मी के दिनों में रीवा और मऊगंज क्षेत्र के जल संसाधन विभाग के बांधों ननहरों और नईगढ़ी माइक्रो इरिगेशन परियोजना फेज 1 और 2 को लेकर बड़े सवाल खड़े किए गए थे। शिवानंद द्विवेदी ने पहले भी नईगढ़ी माइक्रो इरिगेशन परियोजना में हो रहे व्यापक भ्रष्टाचार, कार्य में हीलाहवाली और लेटलतीफी को लेकर सवाल खड़े किए थे और प्रधानमंत्री कार्यालय, जल संसाधन विभाग मध्य प्रदेश शासन से लेकर चीफ सेक्रेटरी एवं मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश शासन सहित दर्जनों जिम्मेदारों को ईमेल के माध्यम से कई बार पत्र लिखा था और शिकायत दर्ज कराई थी। मामले पर कार्यवाही भी हुई और जिस नईगढ़ी माइक्रो इरिगेशन परियोजना को वर्ष 2019 में पूरा कर लिया जाना था उसे 2023 तक भी पूरा न किए जाने के बाद सितंबर 2023 तक का एक्सटेंशन भी दिया गया। और इस प्रकार 3 वर्ष के कार्य को साढ़े छः वर्ष बाद भी पूरा नहीं किया जा सका है। साथ में जिस संविदाकार जेपी एसोसिएट्स कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया गया उसी से नियम विरुद्ध तरीके नईगढ़ी माइक्रो इरिगेशन का कार्य ब्लैक लिस्ट होने के बाद भी लिया गया। जिस मामले को लेकर कड़ी आपत्तियां व्यक्त की गई थी और एक ब्लैक लिस्टेड कंपनी से कार्य क्यों करवाया जा रहा है इस पर भी सवाल खड़े किए गए थे। गौरतलब है कि सितंबर 2023 की मियाद भी अब पूरी हो चुकी है लेकिन नईगढ़ी माइक्रो इरिगेशन फेज 1 एवं 2 का कार्य 50 प्रतिशत तक भी पूरा नहीं हो सका है जिसे लेकर हालांकि विभाग के अधिकारी 70 कार्य पूरा होना बता रहे हैं और जिसका कि भुगतान भी कर दिया गया है लेकिन यदि सही तरीके से जांच हो जाए तो सच्चाई सामने आ जाएगी और कार्य से अधिक भुगतान पाया जाएगा। कार्य से अधिक भुगतान किए जाने के बाद अब जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी संविदाकार जेपी एसोसिएट्स को बचाने में लगे हुए हैं और उसे अब टर्मिनेट करने के स्थान पर उसी ब्लैकलिस्टेड से काम ले रहे हैं। अब जिसे लेकर सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने एक बार पुनः आचार संहिता लगने के बाद भारत निर्वाचन आयोग नई दिल्ली को शिकायत दर्ज कराई है जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ने तत्काल संज्ञान लेते हुए कार्यवाही करते हुए जवाब तलब किया है।
  *ईएनसी जल संसाधन शिशिर कुशवाहा की नियुक्ति को लेकर खड़े किए गए सवाल*
  
   शिवानंद द्विवेदी ने अपनी शिकायत में जल संसाधन विभाग मध्य प्रदेश शासन के इंजीनियर इन चीफ शिसिर कुशवाहा की नियुक्ति को लेकर प्रश्न खड़े किए हैं जिसमें उन्होंने कहा है कि शिसिर कुशवाहा एक रिटायर्ड अधीक्षण अभियंता है जिन्हें बिना वरीयता और वरिष्ठता के आधार पर सरकार द्वारा नियम विरुद्ध संविदा पद्धति से चीफ इंजीनियर का प्रभार दिया गया और उन्हें बाद में इएनसी पद से श्री डाबर को हटाए जाने के बाद ईएनसी का भी प्रभार दे दिया गया है जो की पूरी तरह से नियम के विरुद्ध है। 
  *आरटीआई एक्टिविस्ट ने मनमानी ढंग से संविदा के नाम पर वरिष्ठ पदों पर नियुक्तियों को लेकर खड़े किए सवाल*

   आरटीआई एक्टिविस्ट ने आरोप लगाया है कि वर्तमान संविदा ईएनसी शिशिर कुशवाहा से भी वरिष्ठ और योग्य सेवानिवृत्ति अधीक्षण अभियंता एवं चीफ इंजीनियर मौजूद थे तो फिर स्पष्ट और पारदर्शी प्रक्रिया का पालन करते हुए विज्ञप्ति निकालकर योग्य एवं वरिष्ठ ईएनसी को नियुक्त क्यों नहीं किया गया। हालांकि यदि जानकारों की मानें तो मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने जाते-जबाते अपने चहेतों को मलाईदार और बड़े पदों में बैठाकर न केवल किसानों की नहर परियोजनाओं पर पलीता लगाया है बल्कि भ्रष्टाचार को और बढ़ावा देने का कार्य किया है। सामाजिक कार्यकर्ता ने ईएनसी शिशिर कुशवाहा सहित ऐसे कई संविदा नियुक्तियों को लेकर प्रश्न खड़े किए हैं और कहा है कि जब तक उच्च पदों पर पूर्णकालिक जिम्मेदार सक्षम और परमानेंट अधिकारियों को नहीं बैठाया जाता तब तक गरीब किसानों के नाम पर कागजों पर बनाई जाने वाली नहर परियोजनाओं का मिल बाटकर बंदरबांट और बंटाधार होता रहेगा और इसकी समस्त जवाबदेही स्वयं उसी शासन सत्ता की है जिससे आमजन को अब सचेत भी होना चाहिए और मिलकर आवाज उठाना चाहिए।
*संलग्न* - कृपया संलग्न मुख्य चुनाव आयुक्त भारत निर्वाचन आयोग नई दिल्ली एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों जल संसाधन विभाग, सेंट्रल वाटर कमीशन, चीफ सेक्रेटरी मध्य प्रदेश शासन, प्रधानमंत्री कार्यालय नई दिल्ली एवं कार्मिक एवं पेंशन विभाग सहित कई वरिष्ठ कार्यालय को भेजे गए ईमेल और उनके प्रतिउत्तर की प्रति प्राप्त करें।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Breaking: सत्ताधारी पार्टी के विधायक ने भ्रष्टाचारियों का किया बचाव // कहानी एकबार फिर सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह के कारनामे की // चौरी पंचायत के तत्कालीन सरपंच सचिव के विरुद्ध बैठाई गयी जांच में करवाई गयी लीपापोती // चौरी की भ्रष्टाचार जांच को किया प्रभावित, बावजूद इसके बनी 43 लाख से अधिक की वसूली // सीईओ जिला पंचायत संजय सौरभ सोनवणे ने रोकी आदेश की फाइल // सुनवाई पूरी होने के कई माह बाद भी आदेश रोंके जाने से संदेह की बनी स्थिति // राजनीतिक दबाब के चलते वसूली और FIR की कार्यवाही पर लगाईं गयी रोंक //

*Breaking:  सत्ताधारी पार्टी के विधायक ने भ्रष्टाचारियों का किया बचाव // कहानी एकबार फिर सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह के कारनामे की // चौरी पंचायत के तत्कालीन सरपंच सचिव के विरुद्ध बैठाई गयी जांच में करवाई गयी लीपापोती // चौरी की भ्रष्टाचार जांच को किया प्रभावित, बावजूद इसके बनी 43 लाख से अधिक की वसूली // सीईओ जिला पंचायत संजय सौरभ सोनवणे ने रोकी आदेश की फाइल // सुनवाई पूरी होने के कई माह बाद भी आदेश रोंके जाने से संदेह की बनी स्थिति // राजनीतिक दबाब के चलते वसूली और FIR की कार्यवाही पर लगाईं गयी रोंक //*


दिनांक: 09/11/2023 रीवा मप्र.

 

   सत्ताधारी पार्टी के विधायकों और नेताओं का घमंड इस कदर हावी है की जिस जनता ने उन्हें चुनकर विकास और सेवा के लिए भेजा है उसी जनता को बर्बाद करने में तुले हुए हैं. ताजा उदाहरण गंगेव जनपद और सिरमौर विधानसभा क्षेत्र की चौरी पंचायत का है जहाँ निवर्तमान भाजपा विधायक और प्रत्यासी दिव्यराज सिंह ने भ्रष्टाचार में डूबे सरपंच सचिव को बचाने का पुरजोर प्रयास किया लेकिन सब हथकंडों के बाद भी सच्चाई को दबा नहीं पाए और सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी की शिकायत और पैरवी के बाद 43 लाख रूपये से अधिक की वसूली की नोटिस जारी की गयी है. गौरतलब है की अभी भी कई बिन्दुओं की जांचे बांकी है जहाँ और भी लाखों की रिकवरी बनाई जा सकती है.

 


  *चौरी में अब तक कुल 17 बिन्दुओं पर 43 लाख से अधिक की होगी वसूली*

 

  कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्रमांक 01 रीवा के पत्र क्रमांक 405/शिका./ग्रा.यां.से./2023 रीवा दिनांक 14/08/2023 के अनुसार कार्यपालन यंत्री टीपी गुर्दवान द्वारा 17 बिन्दुओं की जाँच उपरांत अपना जो अंतिम प्रतिवेदन पंचायत राज अधिनियम की धारा 89 की सुनवाई में सीईओ जिला पंचायत रीवा संजय सौरभ सोनवणे के समक्ष प्रस्तुत किया गया है उसमें कुल 43 लाख 5 हजार 6 रुपये की अंतिम वसूली प्रस्तावित की गयी है. लेकिन जहाँ 14 अगस्त को अंतिम वसूली प्रतिवेदन भेजा जा चुका है है वहीँ लगभग 3 माह का समय पूरा होने वाला है और सीईओ जिला पंचायत द्वारा धारा 89 का आदेश जारी न किया जाना भ्रष्टाचार के मामलों पर अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्न भी खड़ा करता है.  

 

*कुल 8 जिमेदारों से होगी वसूली की कार्यवाही, दर्ज होगी एफआईआर*

 

  धारा 89 की सुनवाई के दौरान ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्रमांक 01 रीवा के कार्यपालन यंत्री टीपी गुर्द्वान द्वारा दिए गए अपने अंतिम जाँच प्रतिवेदन में कुल 08 जिम्मेदारों के विरुद्ध 43 लाख से अधिक वसूली और अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रस्तावित की गयी है. जिन जिम्मेदारों पर गाज गिरेगी उनमें से तत्कालीन चौरी सरपंच सविता जैसवाल से 17 लाख 29 हजार 859 रूपये, तत्कालीन सचिव बुद्धसेन कोल से से 5 लाख 60 हजार 852 रूपये, ग्राम रोजगार सहायक एवं तत्कालीन प्रभारी सचिव श्रीमती आरती त्रिपाठी से 8 लाख 45 हजार 550 रूपये, तत्कालीन सचिव सुनील गुप्ता से 3 लाख 23 हजार 457 रूपये, तत्कालीन सहायक यंत्री अनिल सिंह से 2 लाख 73 हजार 457 रूपये, तत्कालीन और बर्खास्त उपयंत्री अजय तिवारी से 2 लाख 73 हजार 457 रूपये, तत्कालीन सहायक लेखाधिकारी बसंत पटेल से 1 लाख 49 हजार 207 रूपये एवं तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत गंगेव प्रमोद कुमार ओझा 1 लाख 49 हजार 207 रुपये की अंतिम वसूली प्रस्तावित की गयी है. इस प्रकार चौरी पंचायत को मिलजुलकर ख़त्म करने और बंटाढार करने और सुनवाई में दोषी पाए गए 08 जिम्मेदारों के विरुद्ध 43 लाख रूपये से अधिक की वसूली और कार्यवाही प्रस्तावित की गयी है.


 *ये कैसे जनसेवक – विधायक दिव्यराज सिंह का आखिर भ्रष्टाचार दबाने में क्यों है इतनी दिलचस्पी?*

 

  अब बड़ा सवाल यह है की आखिर सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह की इतनी अधिक दिलचस्पी ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार की जांच रुकवाने और उसे बढ़ावा देने में क्यों है? यह सवाल आज 2023 के विधानसभा चुनाव के पूर्व न केवल सिरमौर विधानसभा क्षेत्र की जनता पूँछ रही है बल्कि पूरे मप्र का मतदाता जानना चाहता है की आखिर सत्ताधारी पार्टी के विधायक और नेता क्यों जनता की गाढ़ी कमाई और उनके टैक्स के पैसे से ग्रामीण क्षेत्र में विकास के लिए आने वाली राशि पर भ्रष्टाचार करवा रहे हैं और जब कोई आम नागरिक जांच और कार्यवाही की माग करता है तब उसे भी बाकायदा अपने लैटर हेड पर पत्र जारी करते हुए दबा दिया जाता है.

 

  *इन्ही विधायक ने सीईओ स्वप्निल वानखेड़े और ईई आर एस धुर्वे को पत्र लिखकर जाँच टीम बदलने बनाया दबाब*

 

   गौरतलब है कि गंगेव जनपद और मनगवां विधानसभा की सेदहा पंचायत और गंगेव जनपद और सिरमौर विधानसभा की चौरी पंचायत दोनों की भ्रष्टाचार की जांचों को बदलने और उन्हें प्रभावित करने के उद्येश्य से निवर्तमान भाजपा विधायक दिव्यराज सिंह द्वारा तत्कालीन कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा आर एस धुर्वे को पत्र लिखते हुए दिनांक 19/01/2021 को पत्र क्रमांक 16/कार्या.वि./सिरमौर रीवा द्वारा विधायक ने भरपूर दबाब बनाया और अपने पत्र में लिखा की जो जाँच अधिकारी सहायक यंत्री निखिल मिश्रा और आरडी पाण्डेय को नियुक्त किया गया है वह शिकायतकर्ताओं के नजदीकी सम्बन्धी हैं. हालाँकि विधायक दिव्यराज के पत्र के बाद सीईओ स्वप्निल वानखेड़े और कार्यपालन यंत्री आरएस धुर्वे ने जाँच टीम भी बदल दिया लेकिन आज तक इस बात के कोई दूर-दूर तक भी प्रमाण नहीं मिले की पूर्व जाँच अधिकारियों निखिल मिश्रा और आरडी पाण्डेय के शिकायतकर्ताओं के क्या सम्बन्ध रहे हैं? अब बड़ा सवाल है की जब पुनः ऐसे विधायक चुनाव मैदान में हैं तो न केवल चौरी और सेदहा पंचायत की जनता को बल्कि पूरे देश की जनता को यह पूँछना चाहिए की आखिर जिन पंचायतों के जाँच अधिकारियों को बदलकर विधायक द्वारा अपने पॉवर और सत्ता का गलत दुरूपयोग किया गया आखिर बार-बार हुई जाँच के बाद भी कैसे 43 लाख रूपये से अधिक की भ्रष्टाचार की वसूली बनाई गयी और आखिर इन 08 दोषियों से अब विधायक के क्या सम्बन्ध थे जिन्हें विधायक ने बचाने का प्रयास किया था? यह भी बताना आवश्यक है की यह मात्र उन कुछ बिन्दुओं का जाँच प्रतिवेदन है जिन्हें अभी तक जाँच में सम्मिलित किया गया है, अब यदि देखा जाय तो अभी भी दर्जन भर अन्य बिन्दुओं की जांच होना तो शेष है जहाँ यह वसूली बढ़कर करोड़ों में भी हो सकती है. लेकिन अभी भी संभागायुक्त रीवा, जिला कलेक्टर रीवा और जिला पंचायत सीईओ रीवा में ऐसी कई जांचें धूल फांक रही हैं जहाँ शायद ऐसे ही नेताओं और अधिकारियों की सांठगांठ से जांचों को दबा दिया गया है.

 

  *देश में लोकतंत्र नाम मात्र का, जनता वोट देकर बन जाती है असहाय*

 

   पंचायती भ्रष्टाचार के मामलों को लगातार उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्त्ता शिवानंद द्विवेदी ने कहा है की देश में लोकतंत्र नाम मात्र का है जहाँ जनता वोट डालने के बाद असहाय होकर दर-दर भटक रही है. जिन जन-प्रतिनिधियों और विधायकों को जनता चुनकर उनकी रक्षा करने के लिए, विकास करने और भ्रष्टाचार के विरुद्ध खड़े होने के लिए भेजती है वही विधायक और सांसद आज खुलेआम मंचों से भ्रष्टाचारियों की पैरवी करते देखे जाते हैं. वह वाकया भी तो आपको याद ही होगा जब रीवा के सांसद जनार्दन मिश्रा ने कहा था की सरपंच पद के लिए प्रत्यासी 15 से 20 लाख खर्च करते हैं इसलिए जनार्दन मिश्रा की कथित अदालत सरपंचों को 15 लाख तक के भ्रष्टाचार करने की छूट दे रखी है. अब यदि जनता के चुने हुए जनप्रतिनिधि बेशर्म होकर खुले तौर पर ऐसी बोली लगायेंगे तो फिर देश का बंटाढार होना तय है.

 

 *संलग्न* – कृपया इस सन्देश के साथ संलग्न आवश्यक दस्तावेज जाँच रिपोर्ट, सुनवाई प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज और विडियो बाइट फोटो आदि प्राप्त करें.

 

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Sunday, August 27, 2023

Breaking: गढ़ ठेकेदार की अवैध पैकारी एक बार फिर आई सामने, पुलिस की नाक के नीचे से पैकारी करते पकड़े गए शराब तस्कर// कैथा ग्राम में ग्रामीणजनों ने बिना नंबर प्लेट की बाइक के साथ पकड़ा तीन पेटी शराब//

*Breaking: गढ़ ठेकेदार की अवैध पैकारी एक बार फिर आई सामने, पुलिस की नाक के नीचे से पैकारी करते पकड़े गए शराब तस्कर// कैथा ग्राम में ग्रामीणजनों ने बिना नंबर प्लेट की बाइक के साथ पकड़ा तीन पेटी शराब//*


दिनांक 26 अगस्त 2023 रीवा मध्य प्रदेश।

  रीवा जिले में शराब ठेकेदारों के द्वारा गांव-गांव घर-घर अवैध पैकारी का सिलसिला जारी है। आए दिन शराब ठेकेदार अपने ठेकेदारी की आड़ में बिना नंबर प्लेट की अवैध गाड़ियों में गांव-गांव पैकारी करवा रहे हैं और यह सब पुलिस प्रशासन की नाक के ठीक नीचे हो रहा है। ताजा मामला रीवा जिले के थाना गढ़ क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कैथा का है जहां हनुमान मंदिर कैथा के पास बिना नंबर प्लेट की हीरो एचएफ डीलक्स काली कलर की बाइक में दो युवक तीन पेटी शराब जिसमें से दो पेटी देसी मदिरा एवं एक पेटी बियर की पैकारी करते हुए गांव के ही स्थानीय निवासियों के द्वारा पकड़े गए जिसके बाद गढ़ पुलिस प्रशासन के सब इंस्पेक्टर शोभनाथ वर्मा एवं सहायक उप निरीक्षक सुखेंद्र सिंह को जानकारी देने के बाद मौके से गिरफ्तार कर थाना गढ़ ले जाया गया। 


  गौरतलब है की अवैध पैकारी करने वाले युवक विजय जायसवाल और आरिफ खान निवासी गढ़ के द्वारा बताया गया कि वह यह काम गांव-गांव करते हैं और ठेकेदार ने उन्हें ऐसा करने के लिए रखा हुआ है। ग्रामीणों द्वारा बनाए गए वीडियो में स्पष्ट तौर पर इन पैकारी करने वाले दोनों युवकों के द्वारा बताया जा रहा है कि गांव से जैसे ही डिमांड आती है वह सप्लाई कर देते हैं। अवैध पैकारी करने वाले इन ठेकेदारों की हिम्मत तो देखिए कि यह अवैध काम को ही वैध बता रहे थे और कह रहे थे कि पुलिस को सब जानकारी है। कैथा गांव के मिथिलेश चतुर्वेदी और शैलेंद्र पटेल सहित उपस्थिति लगभग दर्जन भर ग्रामीणजनों ने पैकारी करने वाले युवकों को गांव में रोका गया और पूछा कि वह बॉक्स में क्या लिए हैं जिसको खोलने के बाद पता चला कि उसमें दो पेटी देशी मदिरा थी जबकि तीसरी में 12 बोतल बियर थी जिसकी जानकारी तत्काल गढ़ पुलिस प्रशासन को देने के बाद मौके पर पुलिस ने आकर गवाहों के हस्ताक्षर बयान दर्ज किया और माल की जब्ती बनाकर थाना गढ़ की ओर आगे की कार्यवाही के लिए ले गए। मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी भी उपस्थित रहे और पुलिस को पूरे मामले की जानकारी दी गई।

गौरतलब है कि न केवल कैथा ग्राम बल्कि आसपास के हिनौती बड़ोखर मिसिरा इटहा अकलसी डाढ़ सेदहा बड़ियोर लोटनी भदोहा बांस भटवा सहित कई दर्जन ग्रामों में इस प्रकार देसी मदिरा महुआ शराब सहित सरकारी ठेकेदारों के द्वारा नियम विरुद्ध घर-घर अवैध पैकारी करवाई जा रही है।


संलग्न - कैथा में पकड़े गए अवैध पैकारी करते हुए युवकों की फोटो/वीडियो के साथ उपलब्ध शराब की बोतले।

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Monday, August 7, 2023

Breaking: निजी आराजी में बनाया 14 लाख की 700 मीटर सड़क और 14.49 लाख का रपटा // प्रस्तावित वसूली के बाद अब सीईओ जिला पंचायत संजय सौरभ सोनवणे गढ़वा रहे कूट रचित अभिलेख // भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने का गजब मामला आया सामने// सीईओ जिला पंचायत की कार्यप्रणाली पर लगातार उठ रहे सवाल // वसूली और एफ आई आर दर्ज करवाने के स्थान पर घोटालेबाजों को बचाने का किया जा रहा प्रयास // गंगेव जनपद की चौरी ग्राम पंचायत के बाद सेदहा ग्राम पंचायत का है यह दूसरा मामला // स्वयं सीईओ जिला पंचायत मौके पर आकर किए थे जांच फिर भी सांठ गांठ कर चल रहा लीपापोती का खेल//

Breaking: निजी आराजी में बनाया 14 लाख की 700 मीटर सड़क और 14.49 लाख का रपटा // प्रस्तावित वसूली के बाद अब सीईओ जिला पंचायत संजय सौरभ सोनवणे गढ़वा रहे कूट रचित अभिलेख // भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने का गजब मामला आया सामने// सीईओ जिला पंचायत की कार्यप्रणाली पर लगातार उठ रहे सवाल // वसूली और एफ आई आर दर्ज करवाने के स्थान पर घोटालेबाजों को बचाने का किया जा रहा प्रयास // गंगेव जनपद की चौरी ग्राम पंचायत के बाद सेदहा ग्राम पंचायत का है यह दूसरा मामला // स्वयं सीईओ जिला पंचायत मौके पर आकर किए थे जांच फिर भी सांठ गांठ कर चल रहा लीपापोती का खेल//

दिनांक 7 अगस्त 2023 रीवा मध्य प्रदेश।

   रीवा जिला पंचायत भ्रष्टाचारियों का पनाहगाह बन कर उभर रहा है। यहां एक से बढ़कर एक कारनामे सामने आ रहे हैं जहां अब वसूली और अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रस्तावित होने के बाद भी दोषियों को सरेआम बचाने का खेल खेला जा रहा है और कूट रचित अभिलेख भी गढ़े जा रहे हैं। इस पूरे मामले में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा संजय सौरव सोनवणे की कार्यप्रणाली लगातार संदेह के दायरे में बनी हुई है। कई पंचायतों में हुए व्यापक भ्रष्टाचार और उसकी जांच कर वसूली प्रस्तावित होने के बाद अब सीईओ जिला पंचायत भ्रष्टाचारियों को बचाने की जुगत में लगे हैं। 
*चौरी के बाद अब सेदहा पंचायत में भी दोषियों को बचाने गढ़ी जा रही कहानियां*

  पिछले दिनों देखा गया कि किस प्रकार गंगेव जनपद की चौरी ग्राम पंचायत में लगभग डेढ़ करोड़ के भ्रष्टाचार की शिकायत पर जांच अधिकारियों ने 60 से 70 लाख रुपए की वसूली प्रस्तावित की थी जबकि देखा जाए तो अभी भी दर्जनों कार्यों की जांच चल रही थी और इस प्रकार लगभग एक करोड़ से ऊपर वसूली बन सकती थी लेकिन जिला पंचायत सीईओ संजय सौरभ सोनवणे द्वारा मात्र वसूली कम और विलोपित करने और दोषियों को बचाने के उद्देश्य से जांच पर जांच करवाई गई और अब दोषियों को बिना किसी दस्तावेजी साक्ष्य के ही वसूली से भी मुक्त किया जा रहा है। 
*सेदहा ग्राम पंचायत की 700 मीटर सुदूर सड़क निजी हित और निजी आराजी में*

  वर्ष 2014-15 के दरमियान सेदहा ग्राम पंचायत में ग्राम जीरौही टोला मैं दुर्जन कोल से अरुण सिंह के खेत की तरफ बनाई गई सुदूर सड़क को कागजों पर तो शासकीय आराजी नंबर 39 एवं 43 में बनाया बताया गया लेकिन जब मौके पर जांच की गई तो पता चला कि यह सड़क आराजी नंबर 43 के मात्र 60 मीटर हिस्से पर ही बनी है जबकि शेष 640 मीटर अरुण प्रताप सिंह की प्राइवेट आराजी नंबर 50 एल, 51 और 52 में बनाई गई है। इस प्रकार जनता के टैक्स के पैसे और शासकीय धन का दुरुपयोग करते हुए निजी हितलाभ के लिए सड़क निजी आराजी में बना दी गई। मामले की जांच भी हुई लेकिन सीईओ जिला पंचायत संजय सौरव सोनवड़े अब दोषियों को बचाने में लगे हुए हैं। 
 *निजी बांध की मेढ़ पर बना दिया 14.49 लाख का रपटा, कराधान घोटाले से भी जुड़े तार*

  दूसरा बड़ा मामला उसी 700 मीटर की सड़क पर बनाए गए एक रपटे को लेकर भी है जिसकी लागत 14.49 लाख रुपए बताई गई है। कराधान मद से बना हुआ दर्शाया गया यह रपटा भी पूरी तरह से गुणवत्ताविहीन तो है ही साथ में भूमिस्वामी अरुण प्रताप सिंह की निजी आराजी नंबर 52 मौजा सेदहा हल्का सेदहा में बनाया गया है। मामले की शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के द्वारा की गई थी जिसकी जांच हुई और तीन सदस्यीय जांच दल जिसमें कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा आर एस धुर्वे और दो एसडीओ एस आर प्रजापति और जीतेंद्र अहिरवार की टीम ने संयुक्त रूप से जांच की थी और जांच में स्पष्ट तौर पर प्रतिवेदन देते हुए बताया था कि निजी हितलाभ के लिए रपटे का निर्माण किया गया है और रपटे की गुणवत्ता भी अमानक स्तर की है। इसलिए पूरी राशि वसूली योग्य है और अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रस्तावित की गई थी। लेकिन जब सीईओ जिला पंचायत संजय सौरभ सोनवणे आए तो दोषियों को बचाने के उद्देश्य से नई-नई जांच करवा दी और फर्जी कूट रचित दस्तावेज तैयार कर कहानियां गढ़ी जा रही हैं। 
  *निर्माण उपरांत निजी जमीन को शासकीय किए जाने का खेल*

  सीईओ जिला पंचायत रीवा द्वारा जांच पर जांच के नाम पर तहसीलदार और एसडीएम सिरमोर को पत्र लिखकर रपटा निर्माण वाले स्थान के नक्शा तरमीन किए जाने और शासकीय अत्यजन किए जाने के लिए लेख किया गया जिसके बाद तहसीलदार ने मौके पर आकर गुणा भाग करते हुए रपटा निर्माण वाले स्थल की जमीन का अत्यजन करते हुए शासकीय खसरे के रूप में दर्ज कर दिया और बता दिया कि पहले जो रपटा निजी भूमि पर बनाया हुआ था अब वह शासकीय हो गया है। 
  *भूमि बंधक दर्ज बैंक से कर्ज फिर भी खसरे में कैसे हुआ बदलाव*

  गौरतलब है की भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 173 के तहत उसी निजी भूमि का अत्यजन अथवा शासकीय घोषित किया जा सकता है जो किसी भी प्रकार से बंधक न हो और कोई शासकीय धन राशि बकाया न हो लेकिन जैसा कि भूमिस्वानी अरुण प्रताप सिंह की आराजी नंबर 52 मौजा सेदहा वाले प्रकरण में देखा जा सकता है कि इस आराजी पर वर्ष 2019 से लेकर 2021 के बीच में तीन बार कर्ज लिया गया और खसरे में स्पष्ट तौर पर भूमि बंधक दर्ज है। 
   अब बड़ा सवाल यह है कि बंधक दर्ज भूमि और शासकीय धन राशि बकाया होने पर किस आधार पर कूट रचित दस्तावेज तैयार कर किस नियम के आधार पर अरुण प्रताप सिंह की उक्त भूमि को अत्यजन करते हुए शासकीय दर्ज किया गया?
  *भूमि को शासकीय तो दर्ज किया लेकिन रपटा की गुणवत्ता का क्या?*

  मामला यहीं पर आकर नहीं रुकता बल्कि सीईओ जिला पंचायत संजय सौरव सोनवड़े द्वारा रात 9 और 10 बजे सुनवाई के दौरान कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा टीपी गुर्दवान को दबाव देकर बोला जाता है कि रपटा में सुधार करवा दो और वसूली विलोपित कर दो। अब सवाल यह है की भूमि को अवैधानिक तरीके से शासकीय तो दर्ज करवा दिया लेकिन जिस रपटे नीव और नीचे की जमीन ही खिसक गई है और जो पूरी तरह से गुणवत्ताविहीन बनाया गया है भला उसमें सुधार कैसे संभव है? प्राप्त जानकारी अनुसार कार्यपालन यंत्री टीपी गुर्दवान ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि जिस कार्य का बेस और कोई आधार ही नहीं है उसमें सुधार की गुंजाइश नहीं रहती इसलिए रपटे का सुधार नहीं किया जा सकता अतः राशि वसूली योग्य है। 
  *सीईओ जिला पंचायत संजय सौरभ सोनवणे की स्पष्ट संलिप्तता*

  गंगेव जनपद की चौरी और सेदहा ग्राम पंचायत के इन किस्सों से भलीभांति समझा जा सकता है कि कैसे सर से पांव तक डूबे हुए भ्रष्टाचारियों को बचाने और उन्हें संरक्षण देने के लिए सीईओ जिला पंचायत संजय सौरव सोनवणे अपने पद और शक्ति का गलत उपयोग कर रहे हैं। आखिर चाहे चौरी ग्राम पंचायत में कुसियारी घाट स्टॉप डैम स्थल परिवर्तन का मामला रहा हो या सेदहा ग्राम पंचायत के जिरोही प्लाट में अरुण प्रताप सिंह के निजी भूमि पर रपटा निर्माण का, दोनों ही मामलों में स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है कि जहां एक में कोई स्टॉप डैम ही नही बना तो दूसरे में नियम विरुद्ध गुणवत्ताविहीन घटिया निर्माण कार्य किया गया और निजी हितलाभ के उद्देश्य से जनता के टैक्स के पैसे और शासकीय धनराशि का दुरुपयोग किया गया और बाद में सीईओ जिला पंचायत की मदद से कूटरचित और फर्जी दस्तावेज बनाया जाकर वर्तमान दिनांक में अभिलेखों में सुधार का कार्य किया जा रहा है जिससे स्पष्ट तौर पर पता चलता है कि पूरे मामले में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा संजय सौरभ सोनवड़े की भूमिका है और यह पूरी तरह से पंचायतों में भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रहे हैं।।
  *सैकड़ों पंचायतों की लंबित पड़ी शिकायतों पर कोई कार्यवाही नहीं पर जिनमें पहले से वसूली बनी उनमें लीपापोती का खेल जारी*

  गौरतलब है की अभी भी जिले भर में सैकड़ो ऐसी ग्राम पंचायतें हैं जहां व्यापक स्तर का भ्रष्टाचार हुआ और शिकायतकर्ताओं ने वर्षों पहले से शिकायत की हुई है लेकिन उन पर जांच और कार्यवाही के स्थान पर मात्र उन पंचायतों की जांच और शिकायतों में लीपापोती की जा रही है जिन पंचायत में बड़ी मशक्कत के बाद जांच हुई और जांच के बाद अब वसूली की कार्यवाही प्रस्तावित हुई है जिस पर अब सीईओ जिला पंचायत रीवा संजय सौरभ सोनवड़े के द्वारा लीपापोती करते हुए भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। 
संलग्न - कृपया मामले से संबंधित संलग्न दस्तावेज अभिलेख तहसीलदार की जांच प्रतिवेदन सीईओ जिला पंचायत के पत्र आदि प्राप्त करें।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश।*

Sunday, August 6, 2023

Big Breaking: प्रधानमंत्री सुरक्षा संबंधी CCTV फुटेज की जानकारी उपलब्ध नहीं ऐसा भयंकर मिला RTI का जवाब // क्या 24 अप्रैल 2023 रीवा में आयोजित राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस में कार्यक्रम में नहीं लगाए गए सीसीटीवी कैमरे? आखिर कार्यक्रम स्थल के सीसीटीवी फुटेज की जानकारी किसके पास? जिला पंचायत रीवा में सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी द्वारा लगाए गए आरटीआई में क्यों नहीं दिया गया सीसीटीवी फुटेज और परिवहन आदि की जानकारी?

*Big Breaking: प्रधानमंत्री सुरक्षा संबंधी CCTV फुटेज की जानकारी उपलब्ध नहीं ऐसा भयंकर मिला RTI का जवाब // क्या 24 अप्रैल 2023 रीवा में आयोजित राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस में कार्यक्रम में नहीं लगाए गए सीसीटीवी कैमरे? आखिर कार्यक्रम स्थल के सीसीटीवी फुटेज की जानकारी किसके पास? जिला पंचायत रीवा में सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी द्वारा लगाए गए आरटीआई में क्यों नहीं दिया गया सीसीटीवी फुटेज और परिवहन आदि की जानकारी?*
दिनांक 4 अगस्त 2030 रीवा मध्य प्रदेश।

  दिनांक 29 मई 2023 को मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कार्यालय रीवा में सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी द्वारा लगाई गई एक आरटीआई में बड़ा खुलासा सामने आया है। एक्टिविस्ट द्विवेदी द्वारा 06 बिंदुओं की जानकारी जिला पंचायत रीवा से चाही गई थी जिसमें मात्र पहले बिंदु की कुछ पन्ने की जानकारी ही उपलब्ध करवाई गई है। शेष बिंदु क्रमांक 02 से 06 तक के बीच की जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई गई है तो क्या इसका तात्पर्य यह माना जाए की जानकारी है ही नहीं अथवा किसी बड़े भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए ऐसा किया जा रहा है?
  *सीसीटीवी फुटेज और परिवहन से संबंधित बिंदु क्रमांक 4 और 5 की जानकारी परिवहन विभाग के पास भी नहीं*

  गौरतलब है कि सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6(1) में आवेदन करने के पश्चात यदि कोई जानकारी संबंधित कार्यालय में उपलब्ध नहीं रहती है तो धारा 6(3) के तहत आवेदन को उस कार्यालय की तरफ फॉरवर्ड कर दिया जाता है जहां पर उस जानकारी के पाए जाने की सर्वाधिक संभावना होती है। शिवानंद द्विवेदी द्वारा बिंदु क्रमांक 04 एवं 05 में कई जानकारी आरटीओ से संबंधित चाही गई थी जिसमें कितनी बसें अधिग्रहित की गई और कहां पर उनकी पार्किंग की गई और साथ में पार्किंग के दौरान सीसीटीवी फुटेज की जानकारी भी चाही गई थी।
    गौरतलब है कि सीसीटीवी फुटेज की जानकारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जितनी बसें अधिग्रहित की गई क्या उतनी बसों की पार्किंग की गई है और फिर यदि सुरक्षा से संबंधित कोई चूक हुई हो तो वह भी सीसीटीवी फुटेज में सामने आ जाती है। परिवहन विभाग के लोक सूचना अधिकारी के द्वारा जानकारी देने से सीधे मना कर दिया गया और बताया गया कि जानकारी कार्यालय में संधारित्र नहीं है।
*सीसीटीवी फुटेज की जानकारी उपलब्ध नहीं है तो क्या प्रधानमंत्री के कार्यक्रम सीसीटीवी कैमरे ही नहीं लगाए गए?*

  अब बड़ा सवाल यह है कि यदि सीसीटीवी फुटेज और वाहन पार्किंग की जानकारी न तो नगर निगम न परिवहन विभाग न मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा और न ही अन्य संबंधित विभागों में उपलब्ध नहीं है तो क्या यह मान लिया जाए कि कार्यक्रम स्थल पर सीसीटीवी कैमरे ही नहीं लगाए गए और क्या यह माना जाए कि 24 अप्रैल 2023 को रीवा में आयोजित राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस का कार्यक्रम जो इतने बड़े पैमाने पर हुआ जिसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं आकर कार्यक्रम को संबोधित किया तो इस कार्यक्रम में कोई सुरक्षा व्यवस्था ही नहीं की गई? क्योंकि जाहिर है यदि सीसीटीवी कैमरे लगाए गए होते तो निश्चित तौर पर आरटीआई के माध्यम से यह जानकारी अवश्य दी जाती लेकिन जिस प्रकार से जानकारी देने से मना किया गया और स्पष्ट तौर पर बताया गया कि सीसीटीवी फुटेज की जानकारी संधारित्र नहीं है तो क्या इसका तात्पर्य माना जाए किसी सीसीटीवी कैमरे ही नहीं लगाए गए? 

   जानकारों का मानना है कि आरटीआई से प्राप्त इस जवाब ने बड़े सवाल पैदा किए हैं जिसमें एक तरफ तो आवेदक को सूचना आयोग में अपील करने के लिए मजबूर किया है तो वहीं दूसरी तरफ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल पैदा किए हैं।

*संलग्न*  देखिए मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने क्या कहा और आरटीआई से प्राप्त जानकारी में उन्हें क्या जवाब मिला।

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Breaking: गोशाला निर्माण के 38 लाख में 14.50 लाख गए कमीशन में, पेटी कांट्रेक्टर का व्हाट्सएप चैट हुआ वायरल // गोशाला घोटाले में अब हो गए नए और बड़े खुलासे // पेटी ठेकेदार पीयूष पांडेय ने बताया कि कैसे बाहर के गिरोह ने आकर गौशाला का धन लूटा // इंदौर के दलाल आलोक शर्मा और राहुल रणदीप ने व्हाट्सएप चैट पर बताया कैसे होती थी सेटिंग //

*Breaking: गोशाला निर्माण के 38 लाख में 14.50 लाख गए कमीशन में, पेटी कांट्रेक्टर का व्हाट्सएप चैट हुआ वायरल // गोशाला घोटाले में अब हो गए नए और बड़े खुलासे // पेटी ठेकेदार पीयूष पांडेय ने बताया कि कैसे बाहर के गिरोह ने आकर गौशाला का धन लूटा // इंदौर के दलाल आलोक शर्मा और राहुल रणदीप ने व्हाट्सएप चैट पर बताया कैसे होती थी सेटिंग //*
दिनांक 6 अगस्त 2023 रीवा मध्य प्रदेश।

  रीवा जिले में हुए व्यापक स्तर के गौशाला घोटाले में कुछ नए खुलासे हुए हैं। रीवा जिले के संविदाकार और पेटी कांट्रेक्टर पियूष पांडेय से हुए व्हाट्सएप चैट में बाहर से आए लुटेरों और दलालों ने गौशाला से जुड़े हुए लेनदेन की विस्तार से चर्चा की जिसका व्हाट्सएप चैट पीयूष पांडेय ने रिलीज किया है। गौरतलब है कि मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा के द्वारा भी की जा रही है। 
  *38 लाख की गौशाला में 14.50 लाख जाएंगे मात्र कमीशन में फिर कैसे बनेगी गौशाला?*

  संविदाकार और पेटी कांट्रेक्टर पीयूष पांडेय ने अपने मोबाइल से जो व्हाट्सएप चैट रिलीज किया है उसमें इंदौर और छतरपुर के आए दलालों और लुटेरों ने गौशाला में कमीशन की विस्तार से चर्चा की है जिसमें बताया गया है की लगभग 7 लाख रूप मनरेगा विभाग को कमीशन में जायेंगे। व्हाट्सएप चैट में ही दलाल आलोक शर्मा और राहुल रणदीव द्वारा आगे बताया जाता है कि 6 लाख रुपए की राशि नीचे से लेकर ऊपर तक सरकारी अधिकारियों के लिए फिक्स होती हैं जो उन्हें हर हाल में देना होता है। चैट में आगे बताया जाता है कि डेढ़ लाख रुपए दलालों को टोकन अमाउंट में दिया जाना होता है जो पेटी कांट्रेक्टर उन्हें देंगे। जिसमें से 50 हजार रुपए कार्य प्रारंभ होने के पहले देना पड़ेगा और शेष 50 प्रतिशत राशि कार्य पूरा होने के बाद दिया जाना है। इस प्रकार देखा जाय तो प्रत्येक गौशाला में 14.50 लाख रुपए तो मात्र कमीशन में ही निकल जाते हैं शेष बची 23.50 लाख रुपए की राशि में स्थानीय स्तर पर सरपंच सचिव इंजीनियर की भी कमीशन फिक्स होती है तब जाकर बची खुची राशि में गोशाला निर्माण का काम सरकारी डकैत करवाते हैं जिसका नतीजा देखा जा सकता है की अधूरी पड़ी गोशाकाएं और चंपत हुए ठेकेदार यही हालत लगभग हर जगह देखने को मिल रहे हैं।
  
  *400 स्वच्छता शौचालय बनाए जाने में भी दलालों ने बता दिया कैसे रहेगा कमीशन का खेल*

  संविदाकार पियूष पांडेय के इसी व्हाट्सएप चैट में बाहर से आए गिरोह और दलालों राहुल रणदीव एवं आलोक शर्मा से हुई चैट में बताया जाता है कि उन्हें (गिरोहों को) 400 मनरेगा के तहत बनाए जाने वाले स्वच्छता शौचालय बनाए जाने का ठेका मिला है। जिसकी लागत 3 लाख 53 हजार रुपए है जिसमे मनरेगा की मजदूरी 50 हजार रुपए और सरकारी अधिकारियों की कमीशन 35 हजार और दलालों के लिए टोकन अमाउंट 7500 रुपए होगा इसमें कार्य प्रारंभ होने के पहले 5 हजार और शेष आधा कार्य होने के बाद 5 हजार देना होगा। जबकि अभी सरपंच सचिव इंजीनियर और पेटी कांट्रेक्टर की कमीशन शेष है। यदि उस कमीशन को भी जोड़ लिया जाए तो शौचालय निर्माण के लिए एक से डेढ़ लाख रुपए ही बचेंगे तब भला कैसे गुणवत्तापूर्ण शौचालय निर्माण किया जा सकता है?
  *दलालों ने 180 आंगनवाड़ी केंद्र बनाए जाने के ठेके में भी कमीशन का खेल बता दिया*

   बात यहीं तक नहीं रुकती है बल्कि इंदौर और छतरपुर से आए दलालों ने 180 की संख्या में आंगनवाड़ी केंद्र बनाए जाने के लिए भी कमीशन का विस्तार से लेखा-जोखा अपने वायरल चैट में दे दिया। मनरेगा योजना अंतर्गत बनाई जा रही एक आंगनवाड़ी में 7 लाख 82 हजार की लागत आएगी जिसमें डेढ़ लाख रुपए मनरेगा मजदूरी में जाएगा और 1 लाख 20 हजार रुपए सरकारी अधिकारियों की कमीशन रहेगी जबकि 20 हजार इन दलालों को टोकन अमाउंट देना पड़ेगा जिसमें 10 हजार रुपए कार्य प्रारंभ होने के पहले और शेष 10 हजार रुपए का कमीशन आधा कार्य होने के बाद पेटी ठेकेदार द्वारा इन गिरोह दलालों को दिया जाएगा। 
  *वर्तमान सरकार में भ्रष्टाचार मुक्त भारत की कल्पना नहीं बल्कि भ्रष्टाचारयुक्त भारत का नाम दिया जाना बेहतर*

  इस प्रकार उपरोक्त व्हाट्सएप चैट के माध्यम से भलीभांति समझा जा सकता है कि जहां भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काला धन वापस लाने भ्रष्टाचार ओसमाप्त करने और सुशासन लाने की बड़ी-बड़ी बातें हांकते हैं वहां अभी भी सरकार में बैठे नुमाइंदों, सरकारी अफसरानो की छत्रछाया में सैकड़ो किलोमीटर दूर से गिरोह और दलाल किस प्रकार बाज की तरह आंख बैठाए हुए सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों के हक और गौमाता के निवाला को हजम कर रहे हैं इस वाक्यात से भलीभांति समझा जा सकता है। फिर भी यदि पियूष पांडेय और उनके जैसे दर्जन भर अन्य फिशिंग के शिकार हुए इनके साथियों की कोई शिकायत आती है तो फिर भी शिकायतकर्ता को ही दोषी ठहराया जाता है और शिकायतों पर लीपापोती का खेल प्रारंभ हो जाता है। ताजा उदाहरण पेटी ठेकेदार पीयूष पांडेय और अन्य पेटी ठेकेदारों की शिकायत का है जिनका लगभग 15 लख रुपए के लगभग राशि यह बाहर से आए गिरोह और दलालों ने हजम कर लिया जिसकी जांच भोपाल स्तर, प्रधानमंत्री कार्यालय स्तर और लोकायुक्त स्तर से पहले ही होकर दोषियों को क्लीन चिट दिया जा चुका है। अब जबकि जांच आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ रीवा द्वारा की जा रही है इसमें गवाहों और बयानों में नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं। हालांकि पीयूष पांडेय ने बताया कि मामले को लेकर वह न्यायालय भी पहुंच चुके हैं जहां से जल्द ही उन्हें रिलीफ मिलने वाली है।
   *एसपी आईजी को भी की गई शिकायत, अब तक नही हुई जांच*

  मामले को लेकर संविदाकार पीयूष पांडेय और उनके साथियों ने बताया कि उन्होंने रीवा जिले के पुलिस अधीक्षक और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक को भी मामले की शिकायत सौंपी है। वर्ष 2022 में एसपी और आईजी को की गई शिकायत में पीयूष पांडेय और दर्जन भर उनके साथियों द्वारा कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन दिया गया था और वहां कार्यालय के बाहर ही वीडियो भी बनाए गए थे जिसमें वाह अपनी समस्याओं की बात कर रहे हैं। इसके बाद भी कई बार पियूष पांडेय और उनके साथी एसपी और आईजी से मिले और कार्यवाही की गुहार लगाई है लेकिन अब तक मामले पर किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गई है और न ही जांच की गई है जिसके बाद पीड़ित शिकायतकर्ता अब कोर्ट की शरण में गए हैं।
  
  *गौशाला घोटाले के तार जुड़े एक बड़े आईएएस ऑफिसर से*

  रीवा जिले में हुए व्यापक स्तर के गौशाला घोटाले, बाउंड्री वाल निर्माण, शौचालय निर्माण और बाहर से आए दलालों आलोक शर्मा राहुल रणदीव, आभास भारद्वाज, राजाराम कुशवाहा जैसे दलालों के तार रीवा जिले में पदस्थ रहे एक बड़े आईएएस अधिकारी से जुड़े हुए हैं। बतौर पेटी कांट्रेक्टर पीयूष पांडेय की माने तो इन दलालों ने पियूष पांडेय को गुमराह करते हुए मनरेगा के कार्य ठेकेदारी प्रथा और कमीशनखोरी में कराए जाने की लालच दी जिसके बाद पीयूष पांडेय ने कुछ ऐसे वीडियो उपलब्ध करवाए हैं जिसमें यह दलाल रीवा जिले में पदस्थ रहे एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी से पार्टी करते हुए कई जगह फोटो वीडियो में नजर आ रहे हैं। हालाकी यह मामला आगे के अंकों में विस्तार से सामने आएगा और फिलहाल के लिए तो बस यही पर्याप्त है कि कैसे संलग्न व्हाट्सएप चैट में बाहर के दलालों ने रीवा की गौशालाओं को लूटा और पुर्तगाली, डच, अंग्रेजों, चंगेज खान और महमूद गजनवी की तरह आए गोमताओं और मजदूरों के हक को लूट कर चले गए। 
*संलग्न* - पेटी कांट्रेक्टर पीयूष पांडेय और उपरोक्त दलाल गिरोह के बीच वे व्हाट्सएप चैट, स्क्रीनशॉट और वीडियो एवं साथ में मामले को लेकर पीड़ित पेटी कांट्रेक्टर पीयूष पांडेय का कथन बयान।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*